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29. नित्यानंद अन्नालय प्रसाद की निःशुल्क भोजन सेवा

# नित्यानंद अन्नालय प्रसाद की निःशुल्क भोजन सेवा

महेश्वर पूजा दिवंगत आत्माओ को नै ं वेद्य अर्पण

अन्नं बहु कुर्वीत ।अन्नं न निन्द्यात् । तद्व्रतम् || हम भोजन का सृजन एवं वितरण करें, सभी व्यक्तियो की भूख ं का निवारण हो , हम कभी अन्न व्यर ना ग ्थ वाएं , जहां अन्न की आवश्यकता न हो वहां हम कदापि अन्य बर्बाद ना करें यह अन्य के प्रति सच्ची श्रद्धा है|

~ तैत्तरीय उपनिषद

ईश्वर की उपस्थिति के साथ जीना, जब आपके जीवन का भाग हो, ईश्वर को नैवेद्यम के रूप में प्रतिदिन एवं त्योहारों के दिन, भोजन अर्पण करना एक पूजा की पवित्र विधि है । एक बार ईश्वर को अर्पण करने के बाद, यह शुद्ध, अमृत आहार भक्तों द्क्तों वारा, महाप्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण कर विश्व भर के मं दिरो द्ं वारा सबमें बांटा जाता है ।

हज़ारो लोगो ं ंमें निशल्क ु पौष्टिक आहार का वितरण

® हिन्दू त्योहारो के स ं मय हज़ारो लोगो ं को ं नियमित रूप से, शुद्ध, सात्विक, पौष्टिक शाकाहारी भोजन भगवान् को अर्पण जाता है | कु छ महत्वपूर्णमहोत्सवोंमें प्रतिदिन ५०,००० से भी अधिक लोगोंमें प्रसाद बाँटा जाता है |

आपातकालीन सहायता : उपचार द्वारा लाभान्वित करना

  • ® प्राकृतिक आपदाओंजैसे सुनामी, भूचाल व बाढ़ आदि की स्तिथि में मदद पहुंचाई जाती है |
  • ® निशुल्क भोजन, कपड़े व अन्न दान द्वारा राहत व मनोवैज्ञानिक व मानसिक आघात से बाहर निकलने के बारे में परामर्श प्रदान किया जाता है |

वैदिक परम्परा में 'गौ' अथवा 'धेनु' सबकी प्रीय माँता है। गाय को भूदेवी अर्थात धरती मां का अवतार माना गया है। हिं दूूग्रंथो ने सभी ं मनोरथ पूर्ण करने वाली 'कामधेनु' गाय का गुणगान किया है और धरती पर समस्त गायो को ं इसी कामधेनु का भौतिक अवतार माना जाता है। एक गाय के श्रीर में सभी 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं और वे समस्त मङ्गल, शुद्धताओ, शक्तियो का आ ं श्रय-स्थल रही हैं।

वे सभी प्रकार की शुभता, पोषण, समृद्धि प्रदान करती हैं और सदैव पूजित है।

वैदिक काल में प्रत्येक घर, आश्रम और कुटिया में गौ माँता की प्रेममय उपस्थिति रहाती थी और ब्राह्मणो, ं द्विजों को धन के महादान के रूप में गौ दान में दी जाती थी, जिससे दानदाता को विशाल पुण्य लाभ मिलता था।

धेनवः धनः ऊर्जम अस् विमे श्वः दहु ना ततु।। गायें सदैव अपने पोषणयुक्त एवं ऊर्जा प्रदान करने वाले स्राव से आप पर समृद्धि प्रदान करती रहें। ~ अथर्व वेद (१८.४.३४)

  • ® नित्यानंद पीठम के आदिनमो की गौ ं शालाओ में 121 श्वेत, भूरी और काली गायो की से ं वा की जाती है।
  • ® गायो को दिन ं में दो बार दु हा जाता है। मं दिर और गुरुकु ल को अमृत तुल्य दूध मिलता है और गोमय का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने में किया जाता है।

उपलब्धियां