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30. गौ माँता, प्रेम व दया रुपी माँता

# गौ माँता, प्रेम व दया रुपी माँता

गौशाला से दिव्य सुगंध एक शुद्ध वैदिक अनुभव है और वैदिक पुनर्जागरण को पुनर्पुष्ट करती है। गाय को कु छ भी दिया जाय सदैव सर्वोच्च ऐश्वर्य प्रदान करता है। दिव्य गायों के उपहार और प्रेमाभाव के साथ उसकी सेवा से बढ़कर कोई दूूसरा बड़ा उपहार हो नही सकता ं है। हम प्रतिबद्ध हैं किः

t 1000 गायो की एक वि ं शाल गौशाला का निर्माण। विशसं रचना का निर्माण करके 'कामिका' आगम में वर्णित वैदिक निर्देशो के अनुसार गायो ं को आनन्द ं मय वातावरण उपलब्ध कराना।

t अमानवीय वध से गायो को सुर ं क्षित करना। गायो की ं सुरक्षा परम धर्महै, क्योंकि गाय सनातन धर्म का शाश्वत मूल हैं।

t दग्धु , गौतीर्थ, गोमय, घी और दही से पं चगव्य उत्पादों का प्रचार-प्रसार करना। इनमें अनंत सात्विक लाभ होते हैं। वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि गायो के उ ं त्पाद अन्य औषधियों से ठीक न होने वाले अनेक मानसिक-शारीरिक विकारो को ं ठीक करते हैं।

t मानवता के बीच गौशालाओ के ं निर्माण हेतु जागरुकता का प्रसार करना।

भावी योजनायें...