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27. जीवन रूपांतरित करते ध्यान कार्यक्रम

# जीवन रूपांतरित करते ध्यान कार्यक्रम

ऊपर: श्री चक्र मंडल क्रिया- एक ऐसी ध्यान प्रक्रिया है जहां प्रतिभागी पवित्र आकारोंमें बैठते हैं जिसके माध्यम से परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी शिवोहम ऊर्जा का सं चार करते हैं। यह ब्रम््हांड की ध्वनि एवं प्रकाश को उपयोग करने का एक वैज्ञानिक तरीका है ।

साक्षात्गुरु सेअपनेप्रश्न के उत्तर प्राप्त कर प्रतिभागी अपने जीवन में

त्रिनेत्र जाग्रति की प्रक्रिया उहित दिशा प्राप्त करते हैं शिव तत्व केजागरण सेप्रतिभागियोंद्वारा अप्रतिम अनंदा का अनुभव

इन्नर अवेकनिं ग परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा आयोजित 21 दिवसीय ध्यान शिविर है जो मनुष्य में ईश्वरीय तत्व को शरीर, मस्तिष्क एवं चेतना के स्तर पर जागृत करता है।

कोई भी दो इन्नर अवेकनिं ग कार्यक्रम एक से नहींहोते| हर कार्यक्रम प्रतिभागियोंमें नई चेतना एवं आध्यात्मिक शक्तियो का सं चार करता ं है। यह सिर्फ कार्यक्रम मात्र नहींहै अपितु यह कई जमि्मों के बा ्मों द पूर्णत्व के विज्ञान और अद्वैत को अनुभव करने का एक मौका है ।

इस कार्यक्रम में उपनिषद, शिव आगम, पतंजलि योगसूत्र, हठयोग, घेरंड संहिता इत्यादि से कुंडलिनी शक्ति जागृत करने वाली, एवं जीव- उर्जा का सं चार करने वाली कई क्रियाएं एवं ध्यान प्रक्रियाएं सिखाई जाती हैं ।

37 बार आयोजित किए जा चुके इस कार्यक्रम की विशेषताएं हैं :

w जीवन मुक्त जीने हेतु परमहंस नित्यानंद द्वारा प्रत्यक्ष 21 शक्तिशाली

दीक्षाये।

  • w सामूहिक कुंडलिनी जागरण, ऊर्जा चक्र-शोधन और कर्मो से निवृत्ति जो डीएनए स्तर पर बायो मेमोरी मसल मेमोरी में प्रवृद्धि लाता है।
  • w वयस्कों एस्कों वं बच्चों में रहस्मय तीसरे नेत्र के जागरण की क्रिया।
  • w आंतरिक दिव्यता की अनुभूति के लिये शक्तिशाली 'शिवोहम' क्रिया।
  • w पूर्व जन्म से पूर्णत्व प्राप्ति हेतु पूर्व जन्म प्रतिगमन।
  • w जीवन की घटनाओ से पू ं र्णत्व प्राप्ति एवं भविष्य का पुनर्लेखन।
  • w अभूतपूर्व स्वास्थ्य लाभ शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर ।

इन्नर अवेकनिं ग®

एक अद्वितीय योग और अध्यात्म शिविर

21 शक्तिशाली दीक्षायें जो हमारी जैव-उर्जा और जैव-स्मृति को सुनियोजित करती हैं।

वैदिक सं प्रदाय में गुरु के समक्ष बैठने को सं पूर्ण ब्रह्मांड में सर्वाधिक अद्भुत घटना बताया गया है। इसे सं स्कृत में उपनिषद भी कहा गया है। इस धरती पर एक आत्मज्ञानी गुरु की महत्ता को कभी कम नहींकिया जा सकता। इन्नर अवेकनिं ग एक ऐसी अद्भुत घटना है जहां गुरुरुपी ब्रह्मांडीय उर्जादीक्षा के माध्यम से शक्ति का अद्वितीय खेल खेलती है।

परम पूज्य परमहंस नित्यानंद जी ब्रह्मांडीय उर्जा का एक ऐसा सविस्फोट करते हैं जिसके माध्यम से प्रतिभागियो की ं जैव-उर्जा और जैव-स्मृति विकार मुक्त होकर शुद्ध हो जाती है। फलस्वरुप स्वास्थ्य, आनंद, उच्च चैतन्य, और सिद्धियो की ं जागृति जैसे लाभ व्यक्त होते हैं।

इनर अवेकनिगं कार्यक्रम के दौरान वैदिक अनुष्ठान

बाली*,* इंडोनेशिया मेंप्रतिभागियोंकेसाथ कं बोडिया मेंप्रतिभागियोंकेसाथ

बनारस के पास सारनाथ मेंमेंप्रतिभागियोंकेसाथ ऋषिकेश मेंप्रतिभागियोंकेसाथ

नित्य ध्यान योग और नित्य क्रिया योग वैदिक शास्त्रों पर स्त्रों निर्धारित ध्यान शिविर

ध्यान शिविर के माध्यम से परमपूज्य परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी लाखोंश्रद्धालुओ के हृ ं दय में आत्मज्ञान का बीज बो रहे हैं जिससे प्रतिभागी अपनी उच्चतम क्षमता तक पहुंच सके और जीवन में स्वास्थ्य, उन्नति एवं आनंद का अनुभव कर सकें ।

गत 16 वर्षों में हजारो ऐसे ध् ं यान कार्यक्रम २-वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के ं माध्यम से भारत एवं विदेशों में आयोजित किए गए हैं। यह चेतना जागृत करने वाले कार्यक्रम प्रत्येक व्यक्ति की स्वयं के प्रति, जीवन के प्रति, अपने रिश्तो के प्रति, एवं जगत के प्रति धारणा को परिवर्तित करने में सक्षम है। इन कार्यक्रमोंमें बताए जाने वाले सत्य वैदिक शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है। यह कार्यक्रम स्वयं एक अवतार द्वारा दीक्षा की भेंट प्रदान करते हैं। दूर करता है। इसके अतिरिक्त आगमो पर आधार ं ित, विभिन्न विषयो पर कई ं दूसरे ध्यान शिविर जैसे - धन की चेतना, परिपूर्ण रिश्ते, समय पर विजय प्राप्त करना इत्यादि आयोजित किए जाते हैं।

नित्य ध्यान योग कार्यक्रम उपनिषद, शिव सूत्र

आदि वैदिक शास्त्रों द्स्त्रों वारा प्रमाणित पूर्णत्व प्रक्रिया तथा चक्र जागृत करने के विज्ञान को ध्यान क्रियाओ के ं माध्यम से सिखाता है।

नित्य क्रिया योग पं चकोश का शुद्धिकरण कर सूक्ष्म शरीर से गहरे शारीरिक एवं भावनात्मक दखो ु को ं

पहले दस दिनों मे हमें भावनात्मक उपचार का अनुभव हुआ । स्वयं से, दूसरो से, अपने ं स्वास्थ्य से एवं अपने पूर्वजन्म की असम्पूर्तियो को ं मिटाने पर कार्य किया । परमहंस श्री नित्यानंद जी ने हमें एक ल क्ष्य के अनुसार इन प्रक्रियाओ का अनुसरण करने के ल ं िए कहा। वह अवस्था खोजना जहाँ शक्तिहीनता और आत्मशं का उत्पन्न न हो, और यदि उत्पन्न हो भी तो हममें इतनी क्षमता होनी चाहिए की हम उसे तुरंत जान पाएँ ।

अब सोचती हूँ कै से मैंने इस तरह से मेरे सारे जीवन को नही जं िया? मैं स्पष्ट रूप से वे सं स्कार देख सकती हूँ, जिसने मुझे हताशा और पीड़ा ने जकड़ लिया था और किस तरह इन सं स्कारो के कारण स्वयं को ं मैं बहुत छोटा अनुभव करती थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैं अपने जीवन में सर्वोत्तम चीजो की ं स्वामी नही हं ूँ। अवश्य मैं स्वयं के लिए यह चाहती थी, लेकिन मैं अपने सं स्कारो से इतनी धू ं मिल थी की मेरे लिए आगे बढ़ पाना कठिन था । यह एक सशक्तिकरण की प्रक्रिया है। और मैं अविश्वसनीय रूप से स्वादिष्ट भोजन के सा थ शांतिपूर्ण योग, आयुर्वेद, वैदिक अनुष्ठानो का उल् ं लेख करना तो भूल गयी ।

इनर अवेकनिग अं दभुत है । मैं वास्तविक रूप से चाहूंगी की सभी इस क्रिया का अनुभव करें, और स्वामीजी का भी । स्वामीजी केवल यह चाहते हैं की सम्पूर्ण विश्व अपनी उच्चतम सं भावना, जागरूकता और ईश्वरत्व चेतना मे वद्धिृ कर सके ।

  • सिं थिया नार्सिसी

योग शिक्षक, स्वास्थ्य प्रशिक्षक, लेखक लेखक - शिकागो, यु एस ए

इनर अवेकनिग ं ® प्रतिभागी

ह मेरा दूसरा इनर अवेकनिगं कार्यक्रम है और जैसा कि स्वामीजी कहते हैं कोई दो इनर अवेकनिग एक सा ं मान नहीं होती । मेरा पहले इनर अवेकनिग का अनुभ ं व बहुत ही प्रभावशाली था और मैंने कु छ अच्छे परिवर्तन भी अनुभव किये । परन्तु दसरे आई ु . ए . मैं मानो अंतरात्मा में एक परमाणु विस्फोट सा हो गया हो ।

यहाँ आने से पहले जीवन के प्रति मेरा प्रबल प्रतिरोध था। जीवन में उत्तरदायित्व लेने के प्रति मेरी असम रता ्थ कोमैं समझ नही पा र ं हा था। मैं अपने आपको एक ही सी परिस्थितियों में जकड़ा हुआ पाता था । मैं विक्षमता अनुभव कर रहा था और मेरा पूर्णत्व के प्रति कड़ा प्रतिरोध था। मैं यहाँ सब कु छ बदलने के उद्देश्य से आया था, और स्वामीजी के सानिध्य में यह बहुतसरल साबित हुआ । जब हम आत्मघाती सं स्कारो के सा ं थ पूर्णत्व क्रिया कर रहे थे, मुझे वह घटना याद आयी जिससे मुझे मेरे अस्तित्व का ज्ञान हुआ । मैं स्पष्ट रूप से देख सकता हूँ की कै से इसने मेरे पूरे जीवन को प्रभावित किया। और जब मैं अपने सं स्कारो को ं ज्ञात कर पाया, मैं उन्हें पूरी तरह छोड़ने के लिए सक्षम था, ऐसा महसूस हुआ कई वर्षों के प्रतिरोध, संदेह, आत्मोत्सर्ग और आत्म घृणा पिघ ल गई है । यह मेरे लिए एक बड़ी सं तोष की बात है ।

जब मैंने अपने परिवार के सा थ पूर्णत्व किया, तब उन्होंने न्हों बहुत सराहा, और वे अत्यन्त ग्रहणशील व खुश थे। पहली बार मुझे ऐसा अनुभव हुआ कि एक सुन्दर सम्बन्ध के आरम्भ के लिए सारे द्वार खुल गए हैं । यह वास्तव में अद्भुत द्भु है !

  • नित्यसत्यस्वरूपन,

Sharing Par ā vidy ā, the highest knowledge of Self

In the Upanishads are fo und two kinds of knowledge: Par ā vidy ā, the higher, spirit ual knowledge of o ur Self and o ur p urpose of Existence; and Apar ā vidy ā, the lower, intellect ual knowledge .

H . H . Paramahamsa Nithyananda shares Par ā vidy ā e xperientially, gi fting the highest knowledge in his programs, knowing which people learn to grasp all kinds of knowledge, practically apply and live them .

I work as an IT Director for a Fortune 500 company. What I learnt in my past years and in my company is negligible compared to what I learnt in the 21 days Inner Awakening Program. I am attending this program with my teenage daughter and son. Life completely changed, its irreversible in a good way. I wish everybody who have youth as their children should send them to this IA program, and enjoy their life, and give life to life. Swamiji has blown away my mind's chatter box.

बिल्डर - लॉस एं जिल्स, यु एस ए - 176 - - 177 -

Section 2

First time, I felt that I am LISTENING. In my age more than 50 years, "I never listened." My wife used to tell me, "You are not listening to me." Now I know what she meant. Now I know how to listen to authentically listen myself as well as to others. By listening what is happening – bringing fulfillment to myself and others; and getting what I want to do and what others want to do. So, there's no 'you' and 'me', and it becomes one. Its such an energy and I want to treasure this. This authentic listening is a new, better way of communication. The health recovery that I have seen in myself! 23 years of my diabetes is completely gone. No medicines, nothing.

Thaigarajan,

IT Director, H o uston, USA

सभी जीव जं तु जन्म, मरण, प्रजनन, परिपक्वता एवंमृत्यु के अनुभवो से ं निकलते हैं। किसी भी व्यक्ति की आयु कई कारको से ं निर्धारित होती है। एक समय पर बुढ़ापा एक अटल अवस्था माना जाता था और उसे पूर्वनिर्धारित एवं अपरिवर्तनीय कहा गया है।

हाल ही में कई जं तुओ पर ं किये

गए वैज्ञानिक प्रयोगोंमें पता चला

है कि बूढ़ेहोने की प्रक्रिया को

मद्धम किया जा सकता है, साथ

ही साथ स्वाथ्य एवं जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा

सकता है।

२०१० और २०१४ के बीच २१

दिन के इनर अवेकनिं

ग (आई.ए.)

कार्यक्रम के प्रतिभागियो पर चार ं

विभिन्न परन्तु आपस में जुड़े हुए प्रयोग किये गए ।

माइटोकॉन्ड्रियल अध्ययन

पहला प्रयोग ५० वर्ष से अधिक आयु के २० आई.ए. प्रतिभागियो एं वं २० बिना आई.ए. किये हुए प्रतिभागियो पर ं किया गया। माइटोकॉन्ड्रियल गतिविधि के मात्रात्मक परख को

मापने के लिए एम.टी.टी. परख तकनीक का उपयोग किया गया था। सभी स्वयं सेवको के ं रक्त के नमूने पहले दिन और २०वें दिन पर लिए गए।

परिणामो के अ ं ध्ययन समूह में सांख्यिकीय महत्वपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिय गतिविधि और कोशिकाओ की ं व्यवहारिकता में 1000 से अधिक प्रतिशत वृद्धि का प्रदर्शन किया।

माइटोकॉन्ड्रिया व्यक्ति की कोशिकाओ के ल ं िए बैटरी या ऊर्जा उत्पादको की तर ं ह हैं।

वे सब कोशिकाओ की ं जीवित गतिविधियो को ं बनाए रखने के लिए एवं ऊर्जा के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं।

व्यायाम और एलोपैथिक दवाएं मानक तरीको से ं लगभग 30% तक माइटोकॉन्ड्रियल गतिविधि में सुधार कर सकते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया क्षति के लिए अतिसंवेदनशील है, और एक क्षतिग्रस्त

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओ के नुकसान, उ ं म्र बढ़ने एवं अंततः मृत्यु का कारण बनता है। माइटोकॉन्ड्रिया को सीधे मनुष्य की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

जीन अभिव्यक्ति अध्ययन

मनुष्य में 25,000 जीन हैं, जिनमें से लगभग 10,000 किसी भी एक समय में व्यक्त होते हैं। जीन कोशिकाओंमें प्रोटीन के उत्पादन से लेकर प्रजनन तक लगभग सभी कार्यक्रमो को ं नियंत्रित करते हैं। जीन का व्यक्त या अव्यक्त होना पर्यावरण या एपिजेनेटिक कारको पर ं निर्भर करता है।

चिकित्सा की भाषा में इसे "अप-रेगुलेशन" और "डाउन-रेगुलेशन" कहा जाता है । वर्तमान में, प्रत्येक जीन की भूमिका एवं गतिविधि क्रियाओ के तरीके ( ं जो उनके द्वारा बढ़ाये या अवरोधित किये जा सकते हैं) के बारे में बहुत कु छ जाना गया है । वे इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्त कर रहे जीन उस समय किस समूह पर आधारित हैं ।

इस अध्ययन में, 40 नमूने परिधीय रक्त से लिए गए और चार समूहोंमें जमा किये गए। इनर अवेकनिं ग प्रोग्राम के समय, 0 दिन और 21 दिन पर उनके जीन की अभिव्यक्ति का "अफ़िमेट्रिक्स माइक्रोचिप", परिधीय "ल्यूकोसाइट" द्वारा अध्ययन किया गया ।

परिणाम से पता चला की अध्ययन के अंत में 420 जीन उप - रेगुलेटेड और 165 जीन डाउन -रेगुलेटेड थे । जीन आंटलजी अध्ययन, वर्तमान में उपलब्ध डेटाबेस का उपयोग करके बताता है कि न्यूरोट्रांसमीटर, कैं सर और स्टेम कोशि काओंमें स्वरोग क्षमता के सं बं ध में महत्वपूर्णदो गुना परिवर्तन हुआ है ।

इनर अवेकनिगं ® से आयुवद्धिृ - वैज्ञानिक प्रमाण का रहस्योद्घाटन डा.कृ ष्ण द्वारा लेखन

मात्रात्मक स्टेम सेल विश्लेषण

मूल कोशिकाएँ विशिष्ट कोशिकाएँ हैं,जो सैद्धांतिक रूप से अमर हैं। हालांकि विभाजित होने के बाद उनका एक सीमित जीवनकाल होता है जो कि उन कोशिकाओ के विभा ं जन

की सं ख्या पर निर्भर करता है।

एक भ्रूण के रूप में, हमारे पास स्टेम सेल का एक बड़ा बैंक है जो कि प्रभाविक रूप से बहुशक्तिशाली स्टेमकोशिकाओं में वयस्कता की सं ख्या को कम करती है। आइ.ए. प्रतिभागियो से ल ं िए गए 100 रक्त के नमूनो कापर ं िधीय रक्त में स्टेम कोशिकाओ के ं मात्रात्मक उपस्थिति के लिए परिवर्तित किया गया । प्रथम दिन और २१वे दिन के सैम्पल-डाटा की तुलना की गयी।

सांख्यिकीय रूप से इनर अवेकनिं ग के बाद कोशिकाओ की गणना ं में प्रभाविक रूप से वृद्धि हुई, पी मूल्य के साथ, पी 0.001 से कम । यह 21 दिनोंमें मूल कोशिकाओ की ं सं ख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। मूल कोशिकाओ की ं जनसं ख्या सीधे उम्र बढ़ने से जुड़ी हुई है, और साथ ही यह जनवरी 2014 क्लीनिकल मेडिसिन के जर्नल में प्रकाशित किया गया था।

टेलोमोरेज अध्ययन

टेलेमोरेस एलोमेर्स, डी.एन.ए. युक्त क्रोमोसोम के लिए सुरक्षा कवच की तरह है। उम्र

के साथ व्यक्ति में टेलोमेरेस की कमी और उनकी अंततः उनकी अनुपस्थिति बुढ़ापे और म्रत्यु का कारण बनती है। जीन की लंबाई को बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार एंजाइम को टेलोमिरेज कहा जाता है। सामान्य वयस्कों में नगण्य टेलोमिरेज गतिविधि होती है, और इसलिए उनका जीवन काल बहुत ही सीमित होता है।

प्रथम ०वे से २१वे दिन १०० इनर अवेकनिं ग® प्रतिभागियो की पर ं िधीय रक्त कोशिकाओंमें,

TDA परीक्षण किया गया। कार्यक्रम के अंत में अत्यधिक परिवर्तन पाया गया । सभी प्रतिभागियोंमें कम से कम 0.5 गुना परिवर्तन देखा गया, इनमे से 47 प्रतिभागियो ने 0 ं.5 से 2 गुना परिवर्तन देखा गया (3 से 4 गुना परिवर्तन)। पूरे समूह का औसत परिवर्तन 0.68-1.3 था। वर्तमान चिकित्सा साक्ष्य सलाह देता है, एक टेलोमिरेज गतिविधि या टेलोमेर की लंबाई में महत्वपूर्ण परिवर्तन का पता लगाने के लिए में कम से कम 4-5 महीने की जरूरत होती है। बोस्टन अनुसं धान समूह की एक अध्ययन के अनुसार जो PLoS में प्रकाशित की गयी थी, चिं ता, भय और अन्य इसी तरह की भावनाएँ (अपूर्णता) जीवनकाल को छोटा करती है। इनर अवेकनिं ग कार्यक्रम® से स्वास्थ्य सुधार पर सं चित प्रश्नावली आधारित सर्वेक्षण ।

सारांश

वर्तमान चिकित्सा प्रमाण से यह साबित होता है कि माइटोकॉन्ड्रिया, स्टेम कोशिकाएं , भावनाएं , और टेलोमिरेज गतिविधि सीधे उम्र बढ़ाने की प्रक्रिया से जुड़ी कोशिकायें हैं। वर्तमान चिकित्सा उपचार का उद्देश्य उसी का औषधीय सुधार है। इस 21 दिवसीय कार्यक्रम में माइटोकॉन्ड्रिया, स्टेमसेल एवं जीन अभिव्यक्ति के रास्ते बदलकर, गैर-औषधीय वृद्धि का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण, 4 साल से अधिक सं रचित अध्ययन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। पूर्णत्व की प्रक्रिया के माध्यम से अपूर्णता के प्रतिकू ल प्रभाव को सही कर इस प्रमाण को प्राप्त किया गया।

निष्कर्ष

शरीर का अमरत्व ब्रह्मांड की योजना में नहींहै। हालांकि हमारे प्राचीन शास्त्रों के स्त्रों आधार पर, उचित प्रक्रियाओ के ं माध्यम से, अच्छेस्वास्थ्य और योगिक शरीर के साथ एक व्यक्ति के जीवन में वृद्धि करना अवश्य ही सं भव है ।

एक दिवसीय कार्यक्रम, कल्पतरु प्रतिभागियो को अपनी ं किसी भी सच्ची मनोकामना को पूर्ण करने के प्रति सशक्त करता है| वैदिक सं प्रदाय में आत्मज्ञानी गुरु कल्पतरु वृक्ष की भांति सीभी मनुश्यों की स श्यों च्ची महत्वकांक्षा को सत्य में फलीभूत कर सकते हैं |

एक जीवं त गुरु के साथ कल्पतरु दर्शन प्रतिभागियो को ं अपने भविष्य को नए रुप में लिखने के लिए सशक्त करता है |परमहंस नित्यानंद न सिर्फ लोगो की इ ं च्छाओ को पूरा करने ं का आशीर्वाद देते हैं अपितु उन्हें सही महत्वाकांक्षाओ की ं समझ भी प्रदान करते हैं|

कल्पतरु कार्यक्रम महत्वाकांक्षाओ को स ं त्य में बदलने का विज्ञान