25. नित्य आध्यात्मिक आरोग्य SM
# नित्य आध्यात्मिक आरोग्य SM
"उसने कहा कि नित्य आरोग्य लेने के एक माह बाद उसकी आँखों से एक प्लास्टिक का कड़ा निकला "
म सैं ्वमीजी से दीक्षा लिया ह ु आ एक नित्य आरोग्य कर्ता हूँ। एक वर पहले म ्ष ने हा ैं र्ट, माइंड एंड बॉडी फेस्टिवल पर एक बू थ लगाया था। एक अंग्रेज सज्जन हमारे बू थ पर ु ल्क आरोग्य लेने आये। मने उनसे ैं छा उन्हें क्या कष्ट है ? उन्होंने कहा कि उनके नेत्रो में कष्ट है। मने इन ैं ्हे उसी समय नित्य आध्यात्मिक आरोग्य प्रदान किया। क ुछ घंटो बाद मने उनसे प ैं ू छा कि अब उनके नेत्र कै से हैं ? उन्होंने कहा कि पिछले ६ माह से होने वाला कष्ट चला गया
एक माह पहले मु झे उनसे फिर मिलना हु आ, उसी पर्व पर. मने उनसे प ैं ू छा अब वे कै से हैं ? तब उन्होंने कहा कि आपसे नित्य आरोग्य प्राप्त करने के लगभग एक माह बाद उनके नेत्रो से एक प्लास्टिक का टु कड़ा अपने आप बहार आ निकला। उन्होंने बह ु त आभार व्यक्त किया।
दिनेश ग ु प्ता (श्री नित्य साधनानन्द )

"मेरी पु रानी घु टनो की पीड़ा चली गयी , अब म पैं ू री तरह पीड़ा म ु क्त हूँ. " घ ु टनो की सर्जरी की वजह से मेरे दोनों घु टनो में सदा पीड़ा बानी रहती थी। अक्सर सीढ़ियाँ चढ़ना कष्टदायी होता था और मु झे दर्द निवारक दवाइयां कहानी पड़ती थी। मने परमहंस न ैं ित्यानंद स्वामीजी के साथ अंतः जाग्रति कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में कई पीड़ा निवारक ध्यान करवाए गए , जिनसे मेरे घु टनो की पीड़ा सदा के लिए चली गयी !
इसके अलावा मु झे दध भी नहीं पचता ू था. म दैं ध म ू ें उपस्थित लैक्टोस पचा नहीं पाता था। जबसे मने स ैं ्वामीजी के ध्यान कार्यक्रमों में भाग लिया है, मेरी लैक्टोस की अपचन दर हो ग ू यी है। अब म दैं ध ू आसानी से पचा लेता हूँ.
मने कई डॉक ैं ्टरों से बात की और वे सं इस बात से अचंभित हैं कि ये चमत्कार कै से ह ु आ क्यूंकि उनके अन ु सार बिना दवा के लैक्टोस अपचन का कोई उपचार नहीं।
म ु क्तानंद सीएटल , अमेरिका

"डॉक्टरों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने देखा कि मेरे अंडशयो के चारो और अब एक भी गाँठ नहीं। .." २०१२ में जब मेरे शरीर की जांच की गयी तो डॉक्टरों ने बताया कि मेरे अंडाशयों के चारो ओर कई गांठे हैं, जिनका होना मेरे लिए ठीक नहीं। जब म २०१२ ैं दिसंबर के अंतः जाग्रति (इनर अवेकनिंग ) कार्यक्रम में गयी, मने स ैं ्वामीजी से अपनी व्याधि का वर्णन किया। उन्होंने म ु झे देखा , अपने हाथो को तलवार की तरह काटने जैसे घु माया और कहा, " इसकी चिंता तु म म ु झपे छोड़ दो। .."
उसके पश्चात मु झे कु छ विचित्र सा तेज दर्द होने लगा पेट में, तब मु झे ये अन ु भूति ह ु यी कि स्वामीजी म ु झे आरोग्य दे रहे हैं। फिर लगभग २० दिन पश्चात जब में मलेशिया लौटी तो मने ैं फिर से अपने डॉक्टरों से अपनी जांच करवाई और पेट का स्कैन भी करवाया। डॉक्टरों को ये जान कर बड़ा अचम्भा ह ु आ कि मेरे अंडाशय के आस पास अब एक भी गाँठ नहीं थी। अहा , कितना सु खद चमत्कार था
देवा प्रियानंद सेरेमबन , मलेशिया
नित्य आध्यात्मिक आरोग्य के अनुभव


परमहंस नित्यानंद स्वामीजी महाराज करुणावतार, आरोग्य ऊर्जा के प्रदाता , नित्य आध्यात्मिक आरोग्य प्रदान करते हुए, कल्पतरु कार्यक्रम के अन्तर्गत । नित्य आरोग्य बैंगलोर ध्यानपीठ एवं अन्य ध्यान कार्यक्रमोंमें स्वयं स्वामीजी के द्वारा प्रदान किया जाता है। - 160 - - 161 -

परमहंस नित्यानंद जी द्वारा दीक्षा प्राप्त नित्य आध्यात्मिक आरोग्य कर्त्ता , आरोग्य ऊर्जा प्रवाहित करते हुए

रमहंस नित्यानंद स्वामीजी महाराज नित्य आध्यात्मिक आरोग्य कि दीक्षा देते हुए, एक ऐसी दीक्षा जो केवल एक अवतार ही दे सकता है जिसमे ऊर्जा का प्रवाह सीधा स्वामीजी से आरोग्य कर्त्ता को जाता है !

तस्माच् छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्य-व्यवस्थितौ । ज्ञात्वा शास्त्र-विधानोक्तं कर्म कर्तुम ् इहार्हसि ॥
इसलिये जो कर्म करने है और जो कर्म नही करने है उनका निर्देश न शास्त्रों के स्त्रों शासन एवं शास्त्र प्रमाण को ही मानो, ं शास्त्र-विधान की घोषणाओ को ं जानने के बाद ही इस सं सार में आपको कार्य करना चाहिये। ~ श्रीमद भाग ् वत गीता, १६.२४
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एनरिचिन्ग मन्दिर
व्यक्तिनिष्ठ जीवन-समाधान एवं अध्यात्मिक परामर्श

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भावी योजनायें...
आश्रम मे ताड़पत्र की प्राप्ति, उपचार एवं छपाई
ग्रं थ समाधि वैदिक ज्ञानालय: हिंद ु त्व में सबसे बड़ा ज्ञान
संग्रह कें द्र

विद्या नाम नरस्य रूपमधिकम् प्रच्छन्नगुप्तम् धनम् विद्या भोगकरी यशस्खकरी वि सु द्या गुरूणाम् गुरूः। विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्याम् परम् दैवतम्।
पवित्र विद्या नर का परम सौदर्गं और गुप्त निधि ह।ै विद्या से विभिन्न सुखो ंएवं सफलताओ ं का आनंद लिया जा सकता है और यह सभी गुरुओ की ं स्वामी है। विदेश यात्राओ से ं समय, विद्या हमारी बन्धुहै। विद्या परम देवता है। ~ नीति शतकम, २०

"सभी ज्ञानालयो को 'ग्रन्थ समाधि' से सं भोदित किया जाना चाहिये, जिसका अर्थ है आध्यात्मिक पुस्तको का ऊर ं ्जाक्षेत्र। ग्रन्थ सजीव देवता स्वरुप हैं।" ~ परमहंस नित्यानन्द




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