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24. त्रिनेत्र जागरण विश्व भर में हजारो लोगो ं को ं अचंभित कर रहा है

# त्रिनेत्र जागरण विश्व भर में हजारो लोगो ं को ं अचंभित कर रहा है

त्रिनेत्र जागरण के शक्तिशाली प्रभाव

बाह्य नेत्रों के स त्रों हायता के बिना पढ़ना

त्रिनेत्र जागरण की सबसे प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति, नेत्रों का प्रयोग त्रों किये बिना, आज्ञा चक्र की सहायता से पढ़ने की योग्यता है। विश्वभर में ऐसे हजारो सफल प्र ं दर्शन हुए हैं जिनसे पता चलता है कि पढ़ने, चित्रकला बनाने, रंग, आकार और वस्तुएं पहचानने आदि कार्यों को दोनो नेत्र बं ं द करके कर पाना सं भव है।

ये प्रदर्शन हमारी इस समझ में क्रांतिकारी बदलाव लाते हैं कि दोनो नेत्र ही हमारे शरीर में एकमात्र दृश्य संवेदी अंग हैं। यह प्रदर्शन तृतीय नेत्र से पढ़ने और शारीरिक नेत्रों से प त्रों ढ़ना, इन दोनो की सं ं ज्ञानात्मक प्रक्रियाओंमें भिन्नता के बारे में भी कई सवाल खड़े करते हैं।

नेत्र बंद करके पढ़ने के दौरान क्या होता है? साधारण पठन (भौतिक नेत्रों सेपढ़ना) एक त्रि- चरण प्रक्रिया है:

  • भौतिक नेत्र लिखेहुए शब्दों को देखतेहैं - शब्दों की सुचना दृश्य तंत्रिका केमाध्यम सेमस्तिष्क को भेजी जाती है - मस्तिष्क शब्द को समझता और बोध कराता है

त्रिनेत्र सेपठन (भौतिक नेत्रों को बंद करके) केदौरान केवल दो चरण होतेहैं: १- त्रिनेत्र शब्द को समझता और उनका बोध करता है २-यह बोध सीधेमस्तिष्क को भेजा जाता है

अतः मस्तिष्क, अंतर्ज्ञान से, बिना भौतिक नेत्रों की स त्रों हायता के , सीधे शब्दों को शब्दों देखता और पढ़ता है।

१३ मई २०१५, कपिटल हिल, वाशिं गटन डी.सी.,यू एस.ए.

कैपिटल हिल, वॉशिं गटन डीसी में 2015 व्यापार रक्षा शिखर सम्मेलन में जो त्रिनेत्र जागरण पर एक सक्षिप्त सूचना सत्र के जैसे शुरू हुआ था, वह 3 घं टे तक चला। एक अद्भुत प्रदर्शन में एक 9 साल की बच्ची ने सफलतापूर्वक मनुष्य में त्रिनेत्र के अस्तित्व का प्रमाण दिया, स्वयं अपने त्रिनेत्र से एक किताब पढ़ कर, वह भी अपनी आंखो पर पट् ं टी बाँधकर!

चकित दर्शको, ं डॉक्टरो, सर ं ्जन, मेडिकल शोधकर्ताओ, बैंकरो ं , उं द्योग जगत और सरकार के अधिकारियो के स ं मक्ष इस लड़की ने अच्छी गति से पुस्तको, ं समाचार पत्र, और अन्य पाठन सामग्री के पूरे अनुच्छेदो को प ं ढ़कर सुनाया। सभी पठनो की विश्वसनीयता ए ं वं प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए दो पट्टियाँ और आंख के पैड का उपयोग किया गया था।

विधान सभा सदस्य हैरी सिद्धू के निवास अनाहिम, कै लिफोर्निया, यू.एस.ए.में एक विशेष एवं व्यक्तिगत कार्यक्रम में लगभग १०० लोगो की उपस् ं थिति में त्रिनेत्र का प्रदर्शन किया गया। भारतीय राजदूत, अरुण के. सिहं के साथ यू.एस. कांग्रेस के सीनेटर एडवर्ड रानडाल 'एड' रोयसी एवं उनकी पत्नी एवं स्टे सीनेटर बॉब हफ, कांग्रेसी मिमी वाल्टर एवं एन.आर.आई. व्यापारी, डाक्टर एवं समुदाय के नेता उपस्थित थे।

कांग्रेसी एड रोयस ने बंद नेत्रों से प त्रों ढ़ने को समझने के लिए स्वयं भाग लिया। बहुत से लोग कौतुहल से भर गए और त्रिनेत्र जागरण के लिए और भी जानकारी ली।

प्राचीन वैदिक विज्ञान ने अमेरिका में खलबली मच दी

  • ®भोजन की चाह से मुक्ति , ये सिद्धि परमहंस नित्यानंद द्वारा दी जाने वाली कई सिद्धियो में से एक है, जो वे अपने इच्छुक भक्तो को प्रदान करते हैं। वैदिक परिपाटी ये बताती है कि एक अवतार पृथ्वी पर जन मानस में नयी सं भावनाओ को ं जागृत कर कई सिद्धियो को प्रदान करता है, उसका जीवन अलौकिक घटनाओ से पर ं िपूर्ण होता हैं। सैकड़ो वर्षो पहले , वैदिक सं स्कृति के मनुष्य इस तरह से भोजन के चंगुल में फं से नही हुए ं थे जिस तरह वे आज के युग में हैं। आज भोजन एक लत की तरह मनुष्य जीवन को बर्बाद कर रहा है, जिसके कु परिणामस्वरुप रोगी- काया, अवसाद ग्रस्त उदास व विकृ त मन त था आध्यात्मिक दरिद्रता चारो ओर फै ली हुयी ं है। निराहार सं यम जैसी सिद्धि मनुष्य को इस चक्र से मुक्त कराती है।
  • ®- श्री परमहंस नित्यानंदजी महाराज के लगभग २००० शिष्य क्षुधा क्षु मुक्त जीवन अपनी प्राण - शक्ति के बल पर जी रहे है, जिससे उनके स्वास्थ्य , ऊर्जा स्तर , सृजनशीलता , प्रांजलिता और शरीर सौष्ठव में कई गुना वद्धिृ हुयी है।
  • ®- श्री परमहंस नित्यानंदजी महाराज द्वारा निराहार सं यम में दीक्षा प्राप्त कई शिष्य अल्पाहार पर व कई केवल तरल पदार्थो पर अपना जीवन जी कर भोजन-मुक्ति प थ पर अग्रसर हैं।

निराहार सं यम भोजन के चंगुल से मुक्ति

"योगी सैकड़ो वर्षो तक आहार मुक्त जीवन जीकर स्वस्थ , दीर्धायु ,उच्च ऊर्जा युक्त , और पूर्ण जागरूक जीवन जीते रहे हैं ......अब तुम्हारी बारी है ! जब तुम्हें गुरु से निराहार सं यम की दीक्षा प्राप्त होगी तो वो तुम्हारे भीतर बसी जैव ऊर्जा की उस स्मृति को जाग्रत करेगा जिसे सूर्य की किरणो, आका ं श ,और वायु से ऊर्जा प्राप्त करने की विद्या ज्ञात है, उसे किसी ढोस खाद्य सामग्री की आवशयकता नही ।" ं -परमहंस नित्यानंद

"म भो ैं जन मुक्त क्यों ...?" मने अपने ैं लिए रोगमुक्त शरीर का निर्माण किया। मेरी रोगप्रतिरोधक शक्ति इतनी बढ़ गयी है कि झे अब छोटा सा सिरदर्द भी कभी नहीं होता! डॉक्टरों द्वारा गहन मेडिकल टेस्ट करवाने के बाद ही मैं ये कह रही हूँ। मेरे डॉक्टर अचंभित हैं कि बिना ठोस आहार के मेरे अंग कै से काम कर रहे हैं , जबकि सच ये है कि मेरे अंग दिन प्रतिदिन स्वस्थ हो रहे हैं। चिकित्सक इस बात पर भी आश्चर्यचकित है कि रक्त में मेरा आयरन व कैल्शियम स्तर श्रेष्ठ है जबकि अधिकतर लोगो को आयरन और कैल्शियम की गोली खानी पड़ती है। मु झे अपनी तु लना किसी और से करने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि मेरे गु रुदेव परमहंस नित्यानंदजी कहते हैं कि तु लना करना सभी रोगों की जड़ है, तु लना करने से मनुष्य स्वयं और शरीर में एक दरी उ ू त्पन्न कर लेता है

जिससे व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। निराहारी बनकर मने इस द ैं री को पाट ू दिया है , अब म बैं ड़े स्पष्ट रूप से जानती हूँ कि मने ैं ये शरीर स्वयं के लिए ही रचा है ,वैसा जैसा कि मेरे लिए सर्वोत्तम है !पिछले ६ महीनो से भोजन का विचार , मीठा खाने की इच्छा , सब लुप्त हो गए हैं , अब तो भोजन देखकर या सूंघकर लार भी नहीं बनती !

माँ महयोगानन्दा , BSBA, MBA

व्यवसायी , सिंगापुर

"मेरे भीतर का योगी उजागर हो रहा है। ..."

म हमे ैं शा सोचती थी कि एक योगी वो है जो सब कु छ छोड़कर हिमालय जाकर एक पाँव पे खड़ा होकर तपस्या करता है ,तब उसे बिना भोजन के के वल प्राणशक्ति पर जीने की तथा प्रगटीकरण की अलौकिक शक्ति प्राप्त होती हैं जो कि हम जैसे साधारण गहस्थ अभी हा ृ सिल नहीं कर सकते ......

म नहीं ैं जानती थी कि हम सभी के भीतर एक असाधारण योगी छुपा हु आ है जो इस गहस्थ ृ जीवन या इसी तरह के साधारण जीवन को जीते हु ए भी अनु भव किया जा सकता है, उजागर किया जा सकता है। सबसे उत्तम भाग तो ये है कि के वल एक अवतार की सहायता से , हमारी ओर से किसी भी तरह के कठोर तप किये बिना ही , इस सिद्धि को प्राप्त किया जा सकता है .... ये तो यू ह ँ ु आ न जैसे किसी और के व्यायाम करने से तुम्हारा मोटापा घट गया !

जब मने न ैं िराहार संयम शु रू किया तो मैं स्वयं ये देखकर अचंभित हो गयी कि मेरा शरीर सचमु च बिना ठोस खाद्य पदार्थ के जीवित रह सकता है। ये तो बस एक आरम ्भ है आगे आने वाली दीर्ध रोमांचक

"उच्च कोटि का स्वास्थ्य, रचनात्मकता और समद्धि " ृ बिना किसी दवा के मेरी चर्बी कम हो गयी ,मेरा ट्राई-ग्लिसराइड जो कि १३०० मिलीग्राम था वो जितना होना चाहिए उसके निम्न अंक तक पहु ंच गया। इ सी ज़ी और उदर स्कैन बताते हैं कि मेरे सभी आंतरिक अंग बहु त स्वस्थ हैं। श्रेष्ठ स्वास्थ के सभी पैमानों पर मेरा स्वास्थ खरा उतर रहा है। अल्प निद्रा , उच्च ऊर्जा....न पेट की बीमारी और न कोई आलस्य , न मोटापे की समस्या ! जीवन में असाधारण परिवर्तन और प्रगति हो रही है। आध्यात्मिक सत्य को अनु भव कर रहा हूँ। भोजन से सम्बंधित सभी बन्धनों से मुक्ति हो रही है। भू ख और प्यास से मुक्ति के सा थ ही भोजन जन्य सभी आदतों से मुक्ति , जीवन बहु त ही सत्य निष्ठ और कर्मठ बन गया है। रचनात्मक ऊर्जा नित्य बढ़ती जा रही है जिससे नए नए समाधान मिलते है व्यवसाय की समस्याओं के । सभी के सा थ मेरे सम्बन्ध अब मधु र होते जा रहे हैं। समाज श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखने लगा है। कई लोग जो इस निराहार संयम के बारे में अनभिज्ञ हैं, वे जब आपको निराहारी देखते हैं तो वे आपको ईश ्वरीय सम्मान देने लगते हैं।

श्री नित्य श्री प्रियं (डॉ टी गणे श )

प शु चिकित्सक , बिज़नेस चेयरमैन ,

निराहार सं यम में दीक्षित निरहारियो के ं अद्भुद अनुभव

नित्य आध्यात्मिक आरोग्य - मानवता और सम्पूर्ण पृथ्वी के आरोग्य के लिए अलौकिक ऊर्जा की निरन्तर वर्षा

शुद्ध-अद्वैत में स्थापित परमहंस नित्यानंदजी महाराज भौतिक, मानसिक व आध्यात्मिक स्तर पर आरोग्य प्रदान करते हैं। उनका इस प्रकार का आरोग्य प्रदान करना उपनिषद ऋषियो की ं वाणी को सत्य सिद्ध करता है कि "जो है सब एक ही ऊर्जाहै जो अत्यन्त मेधावी और करुणामय है "

Section 2

नित्य आध्यात्मिक आरोग्य क्वांटम विज्ञान पर आधारित चिकित्सा है जो कि कुंडलिनी शक्ति और हमारे अंतर में स्थित ब्रह्माण्ड केंद्र(जिसे आनंद गंधा भी कहते है) के जागरण से की जाती है

  • ® १० लाख से भी अधिक लोग जो जीर्ण और गम्भीर रोगो से पी ं ड़ित थे, श्री परमहंस नित्यानंद जी के द्वारा आरोग्य प्राप्त कर चुके हैं
  • ® -१०००० से भी अधिक लोग स्वामीजी द्वारा आरोग्य कर्त्ता बनने की दीक्षा ले चुके हैं और सं सार में पीड़ित जीवो को आरोग्य प्र ं दान कर सकारात्मक ऊर्जा के सं तुलन को बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं
  • ® दीक्षा प्राप्त आरोग्य कर्त्ता वैदिक नियमो का पालन करते हुए ं शुद्ध , सात्विक आहार ग्रहण करते हैं तथा समस्त जीवो के प्र ं ति करुणा व अहिसा ं