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16. महादेव से यथार्थ योग एवं यौगिक सिद्धियां

# महादेव से यथार्थ योग एवं यौगिक सिद्धियां

नित्य योग प्रशिक्षण कार्यक्रम परमपूज्य परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी द्वारा योग के प्रशिक्षको के ल ं िए एक अद्भुत तोहफा है| इस कार्यक्रम में योग के सत्य को बिना परिवर्तित किए शास्त्रों के सू स्त्रों त्रों और त्रों क्रियाओ के ं माध्यम

से किस प्रकार योग का अभ्यास एवं प्रचार प्रसार किया जा सके , इसकी शिक्षा दी जाती है|

नित्य योग शिक्षक प्रशिक्षण

"योग हमारी विरासत है । योग सारी दनिु या की अमानत है| हमारे पास योग का कोई कॉपीराइट तो नहींहै परंतु मैं योग को सं रक्षित करने और मिश्रित होने से बचाने के पक्ष में हूं| योग के अनुकू लन से योग मिश्रित नहींहोना चाहिए| एक सच्चा योगाचार्य योग का अनुकू लन तो करता है पर उसे मिश्रित नही करता| ं जन्मजात योगी होने के नाते मैं न सिर्फ योग पद्धति के साथ प्रबलता से खड़ा हूं अपितु उसके शुद्ध तत्व को सं रक्षित करना मेरी जिम्मेदारी है|"

~ परमपूज्य परमहंस श्री नित्यानंद

नित्य योग के द्वारा परम पूज्य श्री नित्यानंद जी ने मेरे जीवन में मानो एक बहुमूल्य कोष को खोल दिया है - मुझे एक ऐसी अद्भुत द्भु शक्ति दे दी है जो अब तक मेरे भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में मेरे लिए उपलब्ध नहींथी। नित्य योग द्वारा मैंने यह सीखा है कि कै से मैं अपने शरीर और मन को अपनी मनचाही वास्तविकता की रचना करने के लिए सं रेखित कर सकती हूँ। और यह सब मैं बहुत ही आनन्दमयी एवं सरल तरीके से कर सकती हूँ। इससे मेरे हर प्रयास का आरम्भ अब सफलता एवं सुख से ही होता है। मैं अपनी इच्छा को अपने शरीर का एक अंग बन लेती हूँ, जिससे वह स्वतः पूर्णहो जाती है। मैं स्वामीजी का आभार व्यक्त करना चाहती हूँ की उन्होंने न्हों मुझे जीवन रुपी आसनं में स्थिरं और सुखं का अनुभव कराया।

अनु देशपांडे, सिगापूर ं

माइक्रोसॉफ्ट, भारत की पूर्व विपणन (मार्केटिं ग) निदेशक

नित्य योग केद्वारा परम पूज्य श्री नित्यानंद जी नेमझु ेयह अनुभव कराया कि यह प्रशिक्षण केवल आसन, ध्यान, अच्छेशारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं है। यह तो शरीर, मन और आत्मा के माध्यम सेचेतना केउच्च स्तर अनुभव करनेकेलिए ह, ै अपनी जागरूकता बढ़नेकेलिए हैऔर पुरेअस्तित्व केसाथ अद्वैत अनुभव करनेकेलिए है। यह एक नैतिक ज्ञान सेकहींअधिक ह, ै यह तो पुराचीन शास्त्रों केउस परम विज्ञान को पुनर्जीवित कर रहा हैजो हमारी चेतना का विकास करता है और हमें आत्मबोध कराता है। यह सीधे ज्ञान के परम स्रोत से ह!ै

यिग रो ं ज़ ली (माँ नित्य गंगानन्दा) जनपदीय अभियंता, कै लिफ़ोर्निया, अमेरिका

नित्य योग आचार्य प्रशिक्षण मेरे लिए एक बहुआयामी भीतरी आध्यात्मिक यात्रा के समान रही है - एक अत्यन्त ही प्रबल, लाभप्रद आत्म बोध कराने वाली यात्रा। इससे मेरे अंदर की असाधारण सिद्धियां व्यक्त हुईं, और मुझे पता चला कि एक सच्चे योगी का जीवन कै सा होता है। मेरे गुरु और महा योगी, परम पूज्य परमहंस नित्यानंद जी कहते हैं कि "योग एक निरन्तर अभ्यास है - जिसका कभी अंत नहींहोता"। इससे मुझे प्रेरणा मिली कि मैं अपनी सर्वोच्च क्षमता तक पहुँचूँ , और योग के पांच पथ का प्रसार करूँ: कर्म योग - कर्म का मार्ग, भक्ति योग - भक्ति का मार्ग, ज्ञान योग - ज्ञान का मार्ग, राज योग- साधना का मार्ग और हठ योग - शरीर, मन एवं प्राण कोष के शुद्धिकरण का मार्ग। इस अभ्यास से मैं आनंद और करुणा से भर गयी हूँ।

  • -अराबेल्ला कार्बोन (माँ नित्य समर्पिणी) आध्यात्मिक जीवन की प्रशिक्षक न्यू यॉर्क, अमेरिका नित्य योग आचार्य प्रशिक्षण मेरे लिए एक बहुत ही अद्भुत अनुभ द्भु व रहा है। इससे हमारे लिए स्वामीजी के मार्गदर्शन से वैदिक सं स्कृति और योग को अपने विशुद्ध मूल रूप में पुनर्जीवित कर पाना सं भव हुआ है। मैं स्वामीजी का धन्यवाद व्यक्त करना चाहती हूँकि उन्होंने न्हों हमें यह अवसर दिया।

अभिषिणी सिवानेसर्जह, टोरंटो, कनाडा छात्रा

शास्त्रों द्स्त्रों वारा प्रमाणित 84 योग आसन

नित्य क्रियाSM यौगिक चिकित्सा समाधानो की उत्त ं म श्रंखला है जिसका परमहंस श्री नित्यानंद जी ने रहस्योद्घाटन किया है। इन क्रियाओ द्वारा भावनात्मक और शारीरिक समस्याओ के ल ं िए सामाधान प्राप्त होता है अन्द यें इन्टरनेट पर निशुल्क उपलब्ध हैं ।

ये अद्वितीय हैं कयोकिं इनका ज्ञान और तकनीक भारत के यौगिक शास्त्रों से ल स्त्रों िया गया है और साथ ही इनका विशिष्ट सं योजन परमहंस नित्यानंद जी के व्यक्तिगत अनुभवो, अनुस ं न्धान से व्यक्त किया गया है, इस उद्देश्य के साथ जससे विभिन्न शारीरिक रोगो की च ं िकित्सा की जा सके और विभिन्न बीमारियो को रोका ं जा सके ।

नित्य क्रियाSM ने यौगिक क्रियाओ की ं मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए उन्हेंजगत को प्रदान किया है। इनका जन्म ऐसे सिद्ध योगिओ के ं हजारो वर्षो के योगदान के बाद हुआ जिन्होंने अपना सं पू िन्हों र्णजीवन ही यौगिक विज्ञान को समर्पित कर दिया था।

नित्य क्रियाSM निम्नलिखित घटको का सं चय ं है :

  • w आसन
  • w कुम्भक, प्राणायाम (श्वांसो कि क्रियाएं )
  • w कल्पनाविज्ञान
  • w मं त्र (आतंरिक मंत्रोच्चारण) आन्तरिक रूप से सुनना अथवा किसी ध्वनि को दोहराना
  • w बाहरी मंत्रोच्चारण बाहर किसी ध्वनि का उच्चारण करना
  • w शिव तांडव करण भगवान् शिव की अलौकिक नृत्य मुद्राएँ

नित्य क्रियाओ से स्ं थाई उपचार होता है क्योंकि यह कोशिकीय जैव स्मृति और मानव के मन- शारीर तंत्र के स्तर पर कार्य करती है और इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहींहै |

नित्य क्रियायेंSM- 112 मौलिक यौगिक चिकित्सा समाधान

स्वयं महादेव के द्वारा दिए गए पाराम्परिक योग आसन, जिनका उल्लेख विभिन्न यौगिक शास्त्रों में मिलता है, इससे पहले कभी भी इतने स्पष्ट और सूक्ष्म रूप में प्रस्तुत नहींकिये गए। अब ये परमहंस नित्यानंद जी के द्वारा पुनर्जीवित कर लोगो तक ं पहुंचाए जा रहे हैं।

नित्य क्रियाएंSM धार्मिक शास्त्रों जैसे आगमो के योग पा ं द, यौगिक ग्रंथ जो योग का आधार माने जाते हैं जैसे कि – घेरंड संहिता, हठ योग प्रदीपिका, हठ रत्नावली, जोग प्रदीपिका, कुम्भक पद्धति, मत्सेंद्रिय संहिता, पतंजली योग सूत्र इत्यादि पर, पूर्ण रूप से निरधारित हैं।

नित्य क्रियाएं शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हैं जिससे असाधारण सिद्धीयों व आध्यात्मिक अनुभवो को ं जागृत किया जा सके । गुरु कृ पा से एक बार जागृत हुई कुंडलिनी शक्ति, साधक पर आशीर्वादो की ं वर्षा कर देती है जिससे उन्हें ऊर्जा स्तर में भरपूर उन्न्ति, शारीरिक स्वास्थ्य, सम्पूर्ण आंतरिक पूर्णता और परम ईश्वर का दिव्य सम्बन्ध प्राप्त होता है ।

नित्य क्रियाSM के आधारभूत यौगिक शास्त्र

"मैंने कभी किसी भी विधि के द्वारा इतना शीघ्र चीनी के स्तर को नीचे गिरते नहीं देखा है । यह अभूतपूर्व है !" - हयूस्टन, टेक्सस (USA) से रिकार्डो बोरेइकी

63 वर्षीय यह व्यक्ति जो कि पिछले 33 वर्षों से मधुमहे रोग से पीड़ित थे, नित्यक्रिया के अभ्यास के उपरांत इन्होने चमत्कारी उपचार का अनुभव किया | रिकार्डो बोरेइकी कहते हें कि उनका ब्लड शूगर का स्तर 300 व 400 के भीतर था और उनको प्रत्दीन 45 यूनिट इन्सुलिन लेनी पड़ती थी और अब उनका शूगर का स्तर 85 पर स्तिथ हो गया है और 5 यूनिट इन्सुलिन ही लेनी पड़ती है जब से नित्य क्रिया का अभ्यास शुरू किया है।

नित्य क्रियाSM से उपचारो का अनुभ ं व

"मझु े पिछले 16 वर्षों से मधुमहे की बीमारी है और पिछले 3 वर्षों बहु में यह बद गयी थी - साधारण से 3 गुना अधिक। मैंने टोरंटो नित्यानंदेश्वर हिन्दू मं दिर में मधुमेह क्लिनिक का एक सप्ताह के कोर्स में भाग लिया था। मैं आशचर्यचकित रह गया और मेरी शुगर का स्तर साधारण स्तर पर आ गया और मेरे डाक्टर ने मेरी दवाई आधी कर दी। मेरे शरीर और मन की स्तिथि दोनोंमें सुधार हुआ है। - परिमल पर्मनाथन, टोरंटो, कनाडा

t मूल हिं दू परम्परा पर आधारित योग हेतु प्रमाणीकरण सं गठन के रूप में स्थापित होना। वैदिक ग्रंथों पर आधारित प्रमाणिक योग शिक्षण के लिये विश्व स्तर पर योग शिक्षको, योग ं शालाओ एं वं योग सं स्थानो प्रं माणपत्र दिये जायेंगे।

t यौगिक ग्रंथो द्ं वारा प्रत्यक्ष प्रमाणित यौगिक तकनीक की विश्व के सबसे विशाल पुस्तकालय की स्थापना।

t विश्व को योग के प्रमाणिक विज्ञान से परिचित कराने के लिये 1000 से अधिक नित्य योग आचार्यों की नियुक्ति करना।

t योग को वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली विज्ञान के रूप में स्थापित करना जिससे मानव शरीर, मन एवं चेतना का निर्माण हो और मानवता स्वस्थ, सुखद व बोधमय जीवन जिये।

भावी योजनायें ...

INR 50 करोड़

वैसे तो मैं कई वर्षों से योग सिखा रही हूँ परन्तु सिखाने का सम्पूर्ण केंद्र ध्यानपीठं आश्रम बिड़दी से सन २००७ में नित्य योग टीचर ट्रेनिग के को ं र्स के बाद नाटकीयढंग से बदल गया जहाँ स्वामीजी ने मुझे विधिवत योग प्रशिक्षक बनाया।

Section 2

बहुत वर्षों तक शरीर व मन पर काम करने के बाद मैं योग के मूल अध्यात्मिक तत्व को अपने अन्दर स्तिथ कर पाई । मैंने अपने और विद्यार्थियोंमें तीव्र परिवर्तन का अनुभव किया ।

  • माँ नित्यानंद बोधना, ओहाइयो , यू.एस.ऐ

नित्य योग सीखने से पहले मैं 2001 से एक प्रमाणित योग प्रशिक्षक के रूप कार्य कर रहा था पर मैं आसन के केवल शारीरिक पहलुओ को ध् ं यान में रख कर, अहंकार भाव से, आसन और प्राणायाम सिखा रहा था। योग की गहरी समझ और अनुभव तब प्राप्त हुआ जब स्वामी नित्यानंद ने नित्य योग को मेरे जीवन में उतारा जिसने मेरे मूल यौगिक अभ्यास को पूरी तरह से बदल दिया।

नित्य योग ने न केवल मेरे जीवन की रिक्त्तताओ को पू ं र्णकिया परन्तु योग के ऐसे रहस्यों को खोला हस्यों है जिसेस हम उस निराकार से समागम बना सकते हैं ।

  • माँ नित्य दर्गा ु नंदा, सिगापुर ं

आतंरिक जाग्रति कार्यक्रम के दोरान मैंने अपने शरीर में सिर्फ प्रबलता ही नही बं ल्कि हल्केपन का भी अनुभव किया । मुझे अपने अभ्यास की सं भावनाए दिखने लगी जो कि मुझे पहले नही दिख र ं ही थी । आसन खेल के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी हैं जो कि आरम्भको से ले कर प्रग ं तिशील सहभागियो के ल ं िए सभी स्तर पर उपलब्ध है । पूर्णत्व और विशुद्ध रूप से सुनने के विज्ञान का प्रयोग करने के कारण योग की मुद्राओ से ं मुझे योग का अबतक का सबसे उत्क्रष्ट अनुभव प्राप्त हुआ है ।

  • सिन्त्ब्या, नर्सिसी, इल, यू.एस.ऐ

नित्य योग मेरे लिए जीवन परिवर्तन से कही अधिक है जिससे मैंने अपनी वास्तविकता को समझा । कुण्डलिनी जाग्रति से मेरी चेतना और अपने आपको और दूसरो को सुनने कि क्षमता में महत्वपूर्णवद्धिृ हुई है। हालाँकि यहाँ आने से पहले मैं योग के क्षेत्र में काम कर रही थी, किन्तुमेरे लिए ये किसी आश्चर्य से कम नहींथा किस प्रकार मेरा शरीर निरंतर रूपांतरित हो रहा था। हर दिन मैं अपने अभ्यास में गहराई तक जा रही थी और पूर्णत्व अनुभव कर रही थी, क्योंकि मेरा शरीर हल्का ,लचीला और अनुकू ल बन गया था।

मैंउन आसनो को करने ं में भी सक्षम हो गई जिनको में पहले आसानी से और जागरूकता के साथ नही कर पा र ं ही थी ।नित्य

योग से न सिर्फ मेरे मानसिक साँचे.. बल्कि मेरे शारीरिकसाँचे भी समाप्त हो गए। दर्द की मांसल स्मृति समाप्त होने से अब मैं जान पा रही हूँकि जीवन सं भावनाओ से भरा हुआ है ।

  • ऐना बेलें, मेक्सिको सिटी, अभिनेत्री

नित्य योग से मैंने पूर्णत्व की अनुभूति की है। पहले मैं नित्य योग सीखने में प्रतिरोध कर रही थी क्योंकि मैं पहले से ही एक अलग योग का अभ्यास कर रही थी । प्रतिरोध के होते हुए भी पतंजलि ध्यान के प्रथम सत्र में मुझे मुक्ति का ऐसा अनुभव हुआ, कि मेरे आंसूं बहने लगे। ये मेरी मांसल स्मृति में लम् सबे मय से सं गृहीत थे जो कि बाहर निकल गए ।

ये मेरे रूपांतरण का प्रमुख भाग था। नित्य योग मुझे जीवन की प्रत्येक कठिन परिस्थिति, को सुलझाने के लिए विश्वास देता है, जिसका सामना मैं कर रही हूँ ।

  • मैरी मब्री, कै लिफोर्निया, यू.एस.ऐ

यदि योन्यां प्रमुञ्चामि साङ्ख्यं योगं समाश्रये असुभक्षयकर्तारं फलमुक्तिप्रदायकम् यदि योन्यां प्रमुञ्चामि तं प्रपद्येमहेश्वरं असुभक्षयकर्तारं फलमुक्तिप्रदायकम् ।।

जब मैं इस गर्भ से बाहर आऊं तो मैं सांख्य योग की शरण में रहूं, जो कष्टों को ष्टों नष्ट करता है और मुक्ति प्रदान करता है। जब मै इस गर्भ से बाहर आऊं तो मैं महेश्वर (शिव) की शरण में रहूं, जो कष्टों को न ष्टों ष्ट करके फल स्वरुप मुक्ति प्रदान करते हैं।

~ गर्भोपनिषद, ४

वैदिक काल में, गर्भाधान एवं गर्भ एक सचेतन प्रक्रिया थी, उसके द्वारा इस पृथ्वी पर अनेक उच्च चेतनापूर्ण बालको ने ं जन्म लिया।

एन प्रेग्नेन्सी SM इसी वैदिक विज्ञान का पुनरोत्थान है जिससे कि प्रबुद्ध मनुष्यों की ्यों नयी पीढ़ी का निर्माण किया जा सके । यह गर्भ को एक 'घटना' नही, बं ल्कि सचेतन विकल्प के रूप में ग्रहण करके अभिभावको को अपनी भा ं वी सं तान की अनुवांशिक अभियांत्रिकी (एन पेरेनटिन्ग कार्यक्रम) की शक्ति प्रदान करता है।

एन प्रेग्नेन्सी SM क्या है?

''एन प्रेग्नेन्सी SM एक 'दिव्य हवाई पट्टी' है। यह धरती को समृद्ध करने के लिये आवश्यक आत्माओ के अ ं वतरण हेतु आरोग्य एवं प्रबोधन ऊर्जा से युक्त एक 'दिव्य स्वागत केंद्र' है।'' ~ परमहंस श्री नित्यानंद

eN Pregnancy Care online sessions

उपलब्धियां

  • ® 100% शिशु सर्वोत्तम स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा, स्वस्थ, विकसित और उत्तम भार वाले उत्पन्न होते हैं और उच्च बौद्धिक, भावनात्क एवं अध्यात्मिक स्तर पर पूर्ण विकास होता है।
  • ® पीडा रहित प्राकृतिक प्रसव। अचेत करके प्रसव कराने के ' शून्य प्रकरण'। मां एवं नवजात के लिये प्रसव का सचेत व सुखद अनुभव ।
  • ® शल्यक्रिया से प्रसव की दर में महत्वपूर्ण गिरावट।
  • ® अपेक्षाकृ त कम प्रसव काल।
  • ® अब तक प्रसव-पश्चात अवसाद की ' शून्य घटनायें'।
  • ® 90 % नवजात में यौगिक मुद्रा ओ (ं जैसे चिन मुद्रा में उं गलियो अं थवा सम्पूर्ण शरीर में अध्यात्मिक लक्षण) से युक्त होते हैं।
  • ® गर्भाधान के समय उपयुक्त अनुवांशिक लक्षणो के चयन के ल ं िये ''एपीजेनेसिस'' की शक्ति के दोहन हेतु तकनीक की स्थापना। यह सं तति में रोगो एं वं अन्य व्यावहारिक अवगुणो के स्ं थानांतरण को समाप्त कर देता है।

Research findings based on information polled from program participants.Findings are subjective in nature .

इस खंड में वर्णित गतिविधियो को स ं र्वज्ञपीठ की गम्भीरता एवं विस्तार को स्पष्ट करने हेतु बताया गया है। किंतु, कृ पया ध्यान में रखें कि इस खंड में वर्णित गतिविधियो का सं चालन लाभ ं हेतु निजी लिमिटेड कं पनी द्वारा सं चालित किया जाता है, जो दान ग्रहण नही करते ं है।

  • ® नित्य योग S M, नित्य क्रिया S M पूर्णत्व का विज्ञान, ध्यान, कल्पना को दृश्यांकन, मं त्र-जप, एवं गर्भ संवाद (अजन्मे शिशु से संवाद) जैसी तकनीक का समावेश। प्रसव काल में शिशु के पिण्ड को सकारात्मक जैव स्मृतियो (bio-memory) के ल ं िये तैयार करना जिससे कि उच्च विकसित एवं प्रबुद्ध आत्मा आकर्षित हो सके ।
  • ® नित्य योग S M, नित्य क्रिया S M पूर्णत्व का विज्ञान, ध्यान, कल्पना को दृश्यांकन, मं त्र-जप, एवं गर्भ संवाद (अजन्मे शिशु से संवाद) जैसी तकनीक का समावेश। प्रसव काल में शिशु के पिण्ड को सकारात्मक जैव स्मृतियो (bio-memory) के ल ं िये तैयार करना जिससे कि उच्च विकसित एवं प्रबुद्ध आत्मा आकर्षित हो सके ।
  • ® 100 से अधिक विश्व भर के दंपतियो ने कार्यक्रम किये।
  • ® डॉक्टरो का ं मार्गदर्शन व आसान एंटिनेटल के यर द्वारा प्रसव तकनीक दी जाती है।

eN Pregnancy Care classes held reg ularly in comm unities

डॉ श्रीलेखा कार्तिक ऍम डी, डी एन बी (Pediatrics) परामर्शक बाल चिकिस्तक और नियोनेटोलौजिस्ट, बं गलुरू , भारत

एन प्रेग्नेन्सी कै यर (एन गर्भ धारण सं रक्षण), प्राचीन वैदिक परंपरा और आधुनिक वज्ञानि ै क प्रमाणीकरण का ऐसा मिश्रण है जिसमे स्वस्थ बाल जन्म का परिणाम सुनिश्चित रूप से सम्मिलित

है।

एक बाल चिकित्सक होने के नाते मैं पुष्टि कर सकती हूँ कि यह एक बार में उपलब्ध, सम्पूर्ण समाधान है, जो नवजात शिशु की देख भाल सम्बंधित रोग जैसे समयपूर्व जन्म, अंतर्गर्भाशयी विकास, मानसिक मंदता, जन्म श्वासावरोध, रक्तविशणता आदि में सहायक और समस्याओ का स ं माधान है।

ध्यान अभ्यास, योग एवं शक्तिशाली तकनीक जैसे पूर्णत्व, एक तनाव मुक्त गर्भाधान अवधि सुनिश्चित करते है, जिसके परिणाम स्वरुप अधिकांश माँएं ४० सप्ताह की पूर्ण अवधि तक गर्भ धारण करती हैं, तथा अच्छे ३-४ किलो के वजन वाली सं तान को जन्म देती हैं।

हम यहाँ आत्मप्रशं सा करना चाहेंगे, कि हमने जो प्राथमिक अभ्यास किया, उसमें आज तक जन्म समय पर दम घुटना, या रक्तविषणता का एक भी प्रकरण नही हुआ ं है। माताएं , जन्म के तुरंत बाद अपनी सं तान से सम्बन्ध जोड लेती है व स्तन पान कराना आरम्भ कर देती हैं और सं तान को केवल स्तनपान ही कराने के हेतु प्रेरित की जाती हैं। स्तनपान की दर सामान्य जनता से उल्लेखनीय रूप में ऊपर है जिससे नवजात शिशु को उत्तम परिणाम मिलते हैं।

माता पिता के सूचनाओ के आधार पर ब ं च्चे, शांत, उत्तेजनहीन, सतर्क और अपने आसपास सबसे एकत्व में रहते है।वे अच्छी रोग प्रतिरोधक शक्ति के होते हुए , स्वास्थ्य में विकास तथा वद्धिृ के चरण प्रदर्शित करते हैं । वे उदर पीड़ा से मक्तु , सं गीत प्रिय और अच्छी नीदं सोने वाले होते हैं। अधिकांश बच्चे, चिन मुद्रा में ध्यान मग्न दिखते हैं , जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।

वे अद्भुत विशि द्भु ष्टताएं जैसे प्रेम, दया, दूसरो का ध् ं यान रखना, उनके साथ बाँटना और अहिसा प्र ं दर्शित करते हैं । मेरी भूमिका अब अस्वस्थ नवजात शिशुओ के च ं िकित्सक की नहींकिन्तु इन आनंदमय शिशुओ के पालन ं में साझदेार बनने की हो गई है। स्वामी परमहँस नित्यानन्द को मेरा हार्दिक आभार है कि वैदिक विज्ञानं को उन्होंने इतने सरल और उपयो न्हों क्ता मैत्रीपूर्ण ढंगसे सम्पूर्णमानवता कल्याण हेतु उपलब्ध किया है।

Section 3

यह निस्संदेह प्रथम चरण है एक स्वस्थ, बुद्धिमान, प्रेममय सभ्यता का निर्माण करने के लिए, जो पृथ्वी लोक की सामहूिक चेतना का उत्थान करेगी।

eN Pregnancy Care, the ancient Vedic science validated by modern medical science

डॉक्टर्स ने हमारे बच्चे को जांचा और कहा था कि शिशु का ह्रदय का बनयान भाग "हयपोप्लास्टिक" रोग ग्रस्त है । उन्होंने सु न्हों झाव दिए कि हम गर्भपात करवा दें, क्योंकि उसके बचने की सम्भावना और आगामी शल्यचिकित्सा की आवश्यकता एक कड़ा संघर्ष हो सकते है। स्वामीजी ने हमें आशीर्वाद दिया था और कहा था सब ठीक होगा वो सब सम्हाल लेंगे ।

महीनो पं हले श्री कालभैरव दर्शन के समय भगवान कालभैरव ने मुझे आशीर्वाद दिया और कहा था, "तुम दिव्य सं तान को जन्म दोगी , कालभैरव शिव तुम्हारे गर्भ से जन्म लेंगे।"

कितना उत्तम आशीर्वाद! हमारी सं तान अजय जन्म के बाद उष्मा नियांत्रक मशीन (इनक्यूबेटर) में रखा गया, तथा नसों द्वारा दवाई चढ़ाई गई, रह सके , जिससे ह्रदय कक्षों के बीच का क्षों छेद खुला रह सके । पिता जगप्रीत अजय के साथ थे और मंद स्वर में गुरु मं त्र उसको सुना रहे थे। ह्रदय निसं कु चन के सुधार के लिए शल्य चिकित्सा की गयी और वह सफल रही । चिकित्सक आश्चर्यमें थे, ह्रदय पूर्व जाँच के निरूपण द्वारा प्राप्त निष्कर्ष की अपेक्षा बहुत अच्छा लग रहा था।

अगले परिक्षण में जिस चिकित्सक ने कहा था की वाम पक्ष कभी दक्षिण पक्ष के बराबर वद्धिृ प्राप्त नही करेगा, एक अ ं द्भुत सद्भु माचार लेकर आया कि न केवल वह हर स्तर पर आश्चर्यजनक रूप से स्वस्थ हो रहा था, अपितु वाम पक्ष अब दक्षिण पक्ष के बराबर आकार में आ गया था।

ईश्वर और प्रिय गुरु की कृ पा से हमने यह चमत्कार अनुभव किया ।अब हम एक अद्भुत रूप से सुन्दर, द्भु शांत एवं सक्रिय बच्चे के चमत्कार के साक्षी हैं । यदि हमें जीवन में विश्वास ने होता, "एन गर्भ धारण सं रक्षण " का सहयोग प्राप्त न होता, और परमहंस श्री नित्यानंद स्वामीजी की कृ पा न होती, तो परिणाम कु छ और ही होता।

  • सैम, जगप्रीति
  • (अजय शिव के माता पिता), सिडनी ऑस्रेलट्िया

गुरु के आशीर्वाद से चमत्कारी ह्रदय वाला शिशु

  • ® एन प्रेग्नेन्सी SM कार्यक्रम द्वारा सं चालित कु ल ४९ सचेत प्रसूतियों में से २१ प्रतिभागियो ने प ं हले प्रयत्न में शिशु जन्म दिया, जिसे 'प्रिमि' कहते है।
  • ® एक असामान्य महत्वपूर्ण खोज प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण से सम्बंधित है जो ली प्रसूति पीड़ा और शिशु जन्म का महत्वपूर्ण अंग है।
  • ® प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण की माध्यमिक अवधि 38.62 मिनट थी जिसका अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानदंड 50 मिनट से 2 घं टे तक का है।
  • ® वस्तुतः प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण की अवधि में अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानदंड की अपेक्षा 24 प्रतिशत कम था।

यह सांख्यकीय रूप से बहुत महत्वपूर्णहै और सिद्ध करता है कि एन प्रेग्नेन्सी SM (एन गर्भ धारण) की प्रक्रिया, सं तान के हित के अतिरिक्त माँ के लिए और माता -पिता के सम्बन्धों के ल म्बन्धों िए अद्भुत लाभ दयाक है।

एन प्रेग्नेन्सीSM पर वैज्ञानिक परीक्षण

Research findings based on information polled from program participants.Findings are subjective in nature.

भावी योजनायें…

t पृथ्वी पर प्रत्येक गर्भवती महिला तक कार्यक्रम को पहुंचाना।

t एन प्रेग्नेन्सी SM देखभाल एवं एन अभिभावकीय मार्गदर्शन हेतु एक सर्व सुविधायुक्त चिकित्सालय की स्थापना।

t सरकारी अस्पतालोंमें कार्यक्रमो का का ं र्यान्वयन करना।

t कार्यक्रम को वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिये वैज्ञानिको के सा ं थ मिलकर कार्य करना जिससे कि चिकित्सा, वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक समुदाय में स्वीकार्य हो।

अपने बच्चे को आत्मज्ञानी बनाना चाहती थी। मैं चाहती थी की वह स्वयं को अभिव्यक्त कर सके , वह स्वयं प्रकाशित हो और हमारी असं गतियो भय ए ं वं अपूर्णताओ के प्रभा ं व के बिना सारे कार्य कर सके 'एन प्रेग्नेन्सी कै यर' पाठ्यक्रम एक यात्रा जैसा है जो आप कौन है इस बात की पुष्टि करता है । आपको अपने कार्यो के लिए उत्तरदायी बनाने में, सच्चाई और प्रमाणिकता से कार्य करने में सहायता करता है और गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही अपने बच्चे को यह शिक्षा देने योग्य बनाता है।

"एन गर्भ धारण सं रक्षण" पाठ्यक्रम अपने आप में सम्पूर्णहै। आपको अपना ह्रदय खोलने की आवश्यकता है और आप देखेंगे किस प्रकार छोटे बच्चे गर्भ के अंदर से ही प्रतिक्रिया देते हैं। अब 11 महीने बीत चुके हैं और मेरे बेटी 2 महीने की है । वह सुंदर परी समान है, चतुर एवं सतर्क ।वह नेत्रों से बोलती त्रों है और इतना प्यार और आनंद प्रसारित करती है कि उसके साथ रहना पूर्णप्रेम की अवस्था में रहना है । मैं प्रत्क ग ये र्भवती महिला को प्रोत्साहित करती हूँ कि यह अनमोल जीवन उपहार अपनी सं तान को अवश्य दें।

प्रेमपूर्ण और जीवन मुक्त नई पीढ़ी के लये हम अपना योगदान करें।

  • मैनुएला, वॉयलेटा मैयामी फ्लोरिडा यू ऐस ए