15. सिद्ध, आयुर्वेद , प्राकृ तिक चिकित्सा, वर्मा
# सिद्ध, आयुर्वेद , प्राकृ तिक चिकित्सा, वर्मा
- w आयुर्वेद जीने का एवं लं बी आयु का सबसे प्राचीन विज्ञान है।
- w सिद्ध में रहस्यमय यौगिक शक्तियो ं एवं ज्ञान के साथ बीमारियो ंका आसाधारण उपचार होता है। इसने विश्व में सबसे अधिक सं ख्या में आत्मज्ञानी चमत्कार-कर्ता ओक निर्माण किया है।
- w प्राकृतिक चिकित्सा (नैचुरोपथि) प्रकृति पर आधारित औषधि होती है।
- w वर्मामानव तंत्रिका तंत्र के समग्र उपचार से सं बंधित विज्ञान है, जहां मुख्य बिन् दु बैटरियो ं अथवा पारेषण यंत्रों (टत्रों ्रांसफार्मर) की तरह काम करते हैं।
सिद्ध और आयुर्वेद की औषधियां बीमारियो ं के समग्र उपचार के अतिरिक्त मस्तिष्क एवं शरीर को असाधारण शक्तियो ं से युक्त करने का साधन हैं। रहस्यवादी शक्तियाें जैसे शारीरिक रूप से उपस्थित एवं विलुप्त होना, पवित्र जड़ी-बूटियो ंका निर्माण एवं चिकित्सकीय पौधो ंके प्रयोग से किसी भी प्रकार की व्याधि के उपचार इत्यादि के लिये प्रयोग में आने योग्य एवं उपयोगी चिकित्सा विज्ञान का निर्माण किया गया। अद्वैत भाव से जड़ी-बूटियो ंएवं प्रकृति की मूल शक्तियो ंके साथ इन दिव्य चिकित्सको ंने प्रकृति को उसके चिकित्सकीय गुणो ं एवं शक्तियो ंका रहस्योद्घाटन कराया।


उपलब्धियां
वैद्य सरोवर पर आनंद लिगं म विलक्षण दैवी घटना में समस्त रहस्यमयी शक्तियो ं से सं पन्न परम सिद्ध परमहंस श्री नित्यानंद ने मानवता को आनंद लिगं म के माध्यम से सजीव दिव्य ऊर्जा प्रदान की है। 21 फु ट लंबा यह शिव लिगं म आरोग्य ऊर्जा और जीवन मुक्ति की वर्षा प्रदान करता रहता है और मस्तिष्क, शरीर एवं आत्मा के लिए महान दिव्य संजीवनी स्वरुप है।
9 चिकित्स कीय पदार्थों और 1008 जड़ी-बूटियो ं के गोपनीय सम्मिश्रण से निर्मित नवपाषाण। सिद्ध परम्परा में नवपाषाण एक दर्ल ु भ औषधि है जिसे दिव्य ऊर्जाओ ं से पुष्ट करके यौगिक क्रियाओ ं के माध्यम से के वल एक जीवित सिद्ध योगी द्वारा ही तैयार किया जाता है।
अति दर्ल ु भ अवसरो मे मानवता इस शक्तिशाली वैद्य विज्ञान मे पारंगत हुयी है - इसमें तीन घटनाओ की परस्पर होने की आवश्यकता होती है - स्थापति (वैदिक शिल्प) और औषधि यो ं में पारंगत एक सिद्ध योगी और आत्मज्ञानी पुरुष जो मूर्ति मे दैवी प्राणप्रतिष्ठा सम्पन्न कर सके । 2000 वर्ष पूर्व महान सिद्ध बोगर के साथ यह पलनि में हुआ था।


परमहंस नित्यानंद विश्व के महान चिकित्स को ं एवं चिकित्सा क्षेत्र के जनको ं जैसे महर्षि सूश्रुत, महान वैदिक शल्यचिकित्स क आचार्य चरक, सिद्ध चिकित्सा के जनक - महर्षि अगस्त्य द्वारा वैज्ञानिक रूप से प्रतिपादित चिकित्सकीय क्षेत्रों आयु क्षेत्रों र्वेद, सिद्ध, प्राकृ तिक चिकित्सा एवं वर्मा को सक्रिय तरीके से पुनर्स्थापि त करने में जुटे हुये हैं।
t फार्माकोलौजि (औषध विज्ञान)
विलुप्त हो चुके वैदिक औषधि सूत्रों को ताड़प त्रों त्रों से त्रों दु बारा प्राप्त करना,औषधीय मिश्रणो ं का निर्माण, उनका चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद मानवता की सेवा के लिये उपलब्ध कराना।
उपचारात्मक आयुर्वेद और सिद्ध औषधियां आनंद लि ंगम चारो ंओर उपचारात्मक शक्तियो ंके जल से युक्त 'वैद्य सरोवर' और वातावरण को उपरात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रखने वाली जड़ी-बूटियो ंसे धिरा हुआ है, इसके अदं र और आसपास आने वाले हर व्यक्ति को तुरंत उपचार मिलता है। - 106 - - 107 -
t अस्पताल, महाविद्यालय, अनुसं धान केंद्र रोगि यो ंके उपचार हेतु यौगिक एवं वैदिक अस्पतालो ंका निर्मा ण। आयर्ु वेद, सिद्ध, प्राकृ तिक चिकि त्सा और वर्माजैसी पारम्परिक चिकि त्सा पद्धतियो ं पर आधारित महाविद्यालयो ं एवं अनुसं धान सं स्थानो ं की स्थापना।
t वैदिक जीवन विज्ञान का पुनर्प्रचलन
भगवान शिव द्वारा 'कामिका आगम' जो कि अति स्पष्टता से अद्वैत जीवन जीने का ज्ञान पद, क्रिया पद आदि 'शिवोऽहं की जीवनशैली' बताता है तथा घरो,ं मं दिरो,ं समुदायो ं तथा यज्ञों से ज्ञों जडु ़े दैनिक नित्यकर्म से नैमितिक कर्म के अनुष्ठानो ंके बारे में बताता है।
ज्योतिष, वैदिक खगोलशास्त्र, वैदिक पं चांग के पूर्ण विज्ञान एवं ग्रहो ंकी स्थिति।
वास्तुशास्त्र, वास्तुशिल्प एवं निर्माण विज्ञान।
एवं प्राणमथोङ्कारं यस्मात्सर्वमनेकधा। युनक्ति युञ्जते वापि यस्माद्योग इति स्तः मृ ॥ एकत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथवै च। सर्वभावपरित्यागो योग इत्यभिधीयत् ॥
जब योगी अपनी श्वासो को ॐ मे मिलाते है या जब वे विविध प्रकारो से सं पूर्णता मे समाहित हो जाते है, उसे योग कहते है। इस श्वास, मन और इंद्रियो का एकत् ं वं और समस्त विचारो और भा ं वो के पर ं ित्याग को ही योग कहा जाता है।
~ मैत्री उपनिषद्६.२५ कृ ष्ण यजर्वेदु ्
योग आज विश्व में सबसे अधिक अभ्यास किया जाने वाला धर्मव जीवनशैली है। परमहंस नित्यानंद द्वारा स्थापित नित्य योगSM, योग के परमपिता व सं स्थापक आदियोगी महादेव, महानतम हठयोगी स्वात्माराम, योगतंत्र के जनक पतञ्जलि और महान नाथ योगियोंमच्छेंद्र नाथ एवं गोरखनाथ द्वारा प्रकट 'मूल' यौगिक शास्त्र के योगो का पुन ं र्गठन है।
वर्तमान योग प्रणाली तो वास्तवित योगिक क्रियाओ का भी प्र ं तिवाद करता है और योग को इसने मात्र आसनो और ं प्राणायाम (श्वसन तकनीक) तक सीमित रखा है। अधिकतर मानवता को योग के शुद्ध व मौलिक रूप से प्रथक रखा गाय हैं। वस्त्ताव
मे योग मन-मस्तिष्क व आत्मा का अद्वैत भाव मे एकाकार होना है ।
Now has come the urgent time for these yogic sciences to be systematically revealed to the world through an adept Living Yogi, ensuring a new age of Yogic traditions flowing from the oldest, purest yogic streams.

नित्य योगSM क्या है?
आदियोगी महादेव ने 'शिव आगम' में समस्त जगत के लिये आंतरिक ऊर्जापुंज के रूप में विद्यमान कुण्डलिनी शक्ति जागरण के उद्देश्य से योग विज्ञान का रहस्योद्घाटन किया। मूल रूप से योग कुण्डलिनी को जाग्रत करके और मनोरथ को यथार्थरूप में अभिव्यक्त करके अंततः वास्तविकता के उच्चतम एकाकार स्तर शिवोहम में विलीन कर देता है। "मैं ही शिव हूं, 'मैं ही दिव्य हूं की अनुभूति होने लगती है।"
~ परमहंस नित्यानंद



- ® 300+ यौगिक तकनीक का प्रकाशन प्रमाणिक योगिक ग्रंथो पर आधार ं ित ।
- ® 10,000 से अधिक व्यक्ति, 50+ देशोंमें नित्य योग में दीक्षित।
- ® 600 ध्यान तकनीक यौगिक ग्रंथो से अब तक प्रशि ं क्षित।
- ® 112 नित्य क्रियायें मानसिक, भावनात्मक एवं शारीरिक समस्याओ के स ं माधान हेतु निःशुल्क इंटरनेट पर उपलब्ध।
- ® परमहंस नित्यानंद द्वारा आधुनिक काल में सर्वप्रथम 108 क्रियाओंमें सामूहिक दीक्षा।
- ® 8 नियम पुस्तिका नित्य योगSM एवं नित्य क्रियाSM पर वयस्कों एस्कों वं बालको के ल ं िये प्रकाशित की गयी - अर्ध
शिरः पीड़ा, महत्तम प्रदर्शन, स्मृति समस्या एवं स्थायी विकारोंहेतु।
- ® 50 लाख लोगो का ं जीवन परमहंस नित्यानंद द्वारा पतंजलि योग सूत्र, शिव सूत्रों अत्रों न्य ध्यान क्रियाओ पर ं आधारित विश्व भ्रमण प्रवचनो एं वं सामूहिक सत्संगो द्ं वारा समृद्ध हुआ।
- ® योग, कुण्डलिनी, और ध्यांन के क्षेत्र मे आरोग्य अनुसं धान एवं उत्कृष्ट प्रयोग।
उपलब्धियां

As per the Yoga Pada in Agama scriptures, that are the direct words of Mahadeva, Yoga is experiencing union with Oneness itself.This understanding of Yoga is the basis for the real science of Yoga, and not the mind control or body control methods.
H.H.Paramahamsa Nithyananda, guided by powerful Yogis and Mystics, from childhood, has been a practitioner of all dimensions of Yogic sciences, retaining the pure form and body-language of Yoga, that till now have disappeared from the modern yoga texts.

प्रबुद्ध योगियो के ं वंशज
सं त पतञ्जलि
परम पूज्य श्री नित्यानंद गहरी योग प्रथाओंमें लीन
योगिराज योगानंद पुरी (रघुपति योगी)
जन्म से ही सिद्ध योगी परमहंस नित्यानंद को सं त पतञ्जलि की चेतना और भाव-भं गिमा से युक्त महान योगिराज योगानंद पुरी (रघुपति योगी) द्वारा योग के पथ पर प्रशिक्षित किया गया।
परम पूज्य स्वामी जी को विलुप्त हो चुकी योगिक शक्तियोंजैसे उत्तोलन , टेलीपोर्टेशन और पदार्थिकरण की शिक्षा दी| उनकी कुशल शिक्षा प्रणाली के तहत परमहंस श्री नित्यानंद जल्द ही योग के उच्च स्तर तक पहुंच गए|
स्वामी जी ने वैदिक शास्त्रों जैसेपुराण और उपनिषदो की शि ं क्षा विभिन्न गुरुओ से ं प्राप्त की|
पृथ्वी पर यौगिक शरीर वाले प्रबुद्ध योगियो की एक नयी प्र ं जाति का निर्माण हो रहा है, जिनके पास यौगिक शरीर क्रियाविज्ञान के पांच अवयव
- शारीरिक बनावट, शक्ति, सहनशक्ति, लोचशीलता और ऊर्जा विद्यमान हैं। मानवीय क्षमताओ की ं महत्तम अनुभूति के लिये मनुष्य में जागृत करने योग्य आंतरिक स्थिर ऊर्जा- कुण्डलिनी शक्ति व अन्य रहस्यात्मक यौगिक सिद्धियो को धारण ं हेतु यौगिक शरीर का होना अनिवार्यहै।