50. हमं आवश्कता है दस लाख संन्ासी्ं की!
# **हमं आवश्कता है दस लाख संन्ासी्ं की!**


98
एक दशक के अलप काल मं, सा्णितनक िी्न मं अपने आगमन सचचा सामाजिक उततरदातयत्।
के बाद, परमहंस तनतयानंदिी आि रखयात है अखणड सनातन दहनदधमण की एक सपषट, धमणसंगत ू ् अरािनीततक ्ाणी के ूप मं। महातन्ाणणी पीि (दहंदत् के सबसे ु राचीन अङग की संसथा चोटी) के महामंडलेश्र, आधयाजतमक रमुख के ूप मं तथा मदरै आददनम ु (व्श् की सबसे राचीन िी्क दहनद धाममणक संसथा) के २९३्े ू गुु महासजननधानम के ूप मं, ्ह ती्गतत से भव्त हो रहे हं भारतीय दाशणतनक व्चार को रभाव्त करती शज्तशाली ्ाणीयं मं से एक। परमहंस तनतयानंदिी का भारत के मलये ्ैददक दहनदू पुनःिागरण के ददवयृषटी मं सजमममलत है भारत्षण की संनयास रणाली का पुनिी्न। स्यं एक संनयासी, ्े सफल हुए है यु्ाओं को इस असाधारण पथ पर मोिने मं, िो साथ लाता है गततशील आतम्ान और ्धापूणण
तनतयानंदिी द्ारा तनममणत संनयास (्ैरागी) समरदाय, व्श् के सभी भागं से यु्ाओं को आकवषणत कर रही है। रमश्ित पुुष ् मदहला यु्क जिनका कॉपोरेट िगत मं उजि्ल भव्षय तनजशचत है, ्े सब कुछ तयाग कर इस काल-सममातनत आतम्ान के पथ पर अ्सर हो रहं हं। उनकी िपमाला ए्ं उनके लैपटॉप दोनं से साथ समान ूप से आरामपूणण, यह अ्त य ु ु्ाओं की िातत एक ऐसे िी्न का सपषट ृषटांत दे रही है िो दोनं दतनया की उततमताओं ु को अखंड ूप से सजमम्ण करता है। तनतयानंदिी के रयासं को नमन है, जिससे ्ैददक संनयास की अ्धारणा अब पुनः एक वय्हायण व्कलप बनता िा रहा है उन आधुतनक मश्ित यु्ाओं के मलए, िो स्यं के आधयाजतमक व्कास को आगे ब़ाने की इचछा रखते हुए साथ ही िगत उननतत

के परर्तणन लाने मं ततपर भी है।
एक ऐसे सथान का तनमाणण करना, उन लोगं हेतु िो आधयातम मं बिने के इचछुक है और साथ मं परर्ारी कतणवयं को पूणण भी करं, तनतयानंदिी ने आ्म मं 'ऋवष संरदाय' सथावपत की है, िहां परर्ार िी्न तन्ाणह के साथ आ्म भूमम पर से्ा भी कर सकते हं। ्ैदक भारत्षण के ऋवष व््ादहत थे, िहां पतत ् पतनी आधयाजतमक पथ पर एक दसरे के सहायक थे, अपनी ू संतानं को सही आधयातम मशिाण ् चेतनापूणण िीने के साधन रदान करते हुए। 'ऋवष संरदाय' एक स्ागत परर्तणन है पारंपररक आ्मं की रथाओं से, िहां व््ादहत िोिं को आधयातम िी्न र्ेश पू्ण िब तक रतीिा करनी पिती थी तब तक कक ्ं अपनी पारर्ाररक कतणवयं से व्मुज्त न हो िाये।
समपूणण भारत्षण का तनमाणण संनयामसयं द्ारा हुआ है। ्ैददक परंपरा को सबसी उततम ्सतुएं संनयामसयं ने ही योगदान की हं, या ्ह हमारा सथापतयशास् हो, कला हो, संसकृतत या भाषा हो; सभी, सभी, सभी। हमारे पास सभी उततम ्सतुय हम ं ं संनयामसयं से ही रापत हं। कृपया समझे, दस लाख़ साधु शास् धारी संनयासी होते थे, अथाणत ्े आधयाजतमक ्ान, आतम्ान के
व््ान - 'िी्नमुज्त व््ान' मं मसध होते थे तथा इस व््ान का व्श्भर मं मशिण रदान करते थे।
हाल ही के रातः सतसंगं मं, परमहंस तनतयानंदिी ने संनयास के मलए उनकी दरृषटी को अभीवय्त ककया ू और यु्कं को आ्ाहन ददया कक ्ं िागूक हो िाएं और इस असाधारण ् परम िी्नशैली को ्हण करं।
"आदद शंकर, दहंद दाशणतनक के ू बाद, कभी भी नहीं था एक खुला, सा्णितनक ्ाद-व््ाद या तनमं्ण दहंद परंपरा म ू ं एक सनयासी बनने के मलए। अब, २५०० ्षं मं रथम बार, म योिनाबध ूप से व्सतार ं करने िा रहा हूँ संनयास के सभी व्मभनन पहलुओं और आयामं पर। सुतनए, म आप सभी के मलए ं संनयास के द्ार खोल रहा हूँ।
हमं आ्शयकता है शास् धारीयं, ्ैददक मशिकं और रचारकं की, िो पूणणत् के व््ान की मशिा देनं व्श् भर मं िायगे, िो ं िी्नमुज्त के व््ान की मशिा दंगं। के ्ेल म ककतना योगदान कर ं सकता हूँ, दतनया के एक कोने म ु ं बैिे हुए? हमं कम से कम दस लाख संनयामसयं की आ्शयकता है।
संनयास है पूणणत् मं िीने की िी्नशैली। संनयास है एक पूणणत्
के आकाश (अंतर मनो जसथतत) मं िीने की िी्नशैली तथा सभी को इस पूणणत् के आकाश मं िीने हेतु लाभाजन्त करना। संनयास एक पथ है जिससे एक वयज्त के िी्न मं आधयाजतमक ्ान का आतमानुभ् होता है। िब म संनयास के व्षय ं पर बात करता हूँ, लोग तुरंत रशन करते है, 'िगत का ्या होगा िब सभी संनयासी बन िायगे?' ं
कृपया सपषट समझे, सबसे पहली बात, सभी इस िगत म इतने ं बुवधमान नहीं! दसरी बात, ईश्र ू ने आपको यह उततरदातयत् नहीं ददया हं। ्े िानते हं की कै से िगत को व्सताररत करना। मान् िी्न का उ्ेशय (रार्ध) है संपूणण पररपूणणता या 'पूणणत्' का अनुभ् करना। ्ही पूणणत् के आकाश (भीतर की मनोजसथतत) के साथ कमण करना, उसे व्कीणणणत करना और उसे दसरं पर ्षाण ू करना। यह िी्न का रथम और स्ोपरी उ्ेशय है। पूणणत् के आकाश मं सथावपत हो िाएं, और आपके आसपास हर ककसी की सहायता करे की ्ं भी इस पूणणत् के आकाश को रापत करं। और कोई अनय िी्नशैली मं आप न तो पूणणत् मं िी सकते है और न तो दसरं को ू पूणणत् मं िीने की रेरणा दे सकते हं।
्या आपका जीवन के वल उततरजीववता के ललए है ?
देणखय, एक साधारण मधयम-्गण ं के पुुष अपन लगभग ९०% िी्न को खचण करता है, मसफण रोटी, कपिे और घर पर। लगभग एक ततहाई बचा हुआ उसका िी्न सोने मं चला िाता है, शेष दो ततहाई िी्न रोटी, कपिे और घर को रापत करने हेतु मशिा मं वयततत हो िाता है। िब तक आप यह सब अजिणत करने लगते है , आप पचास ्षण के हो िाते है और मतयं के मलए ततपर ृ रहते है! तो, आपके िी्न का एक
99

शज्तयं को िागत करना। संनयास ृ है आपमं अंतरतनदहत सभी व्व्ध शज्तयं को िागत करना, आपम ृ ं व्दयमान सभी व्व्ध शज्तयं को िागत करना, आपकी सभी व्व्ध ृ बुवधमतताओं को िागत करना, ृ आपके समसत व्व्ध आतमबोधं को िागत करना, आपके सभी व्व्ध ृ उ्ेशं को िागत करना। क ृ ृपया समझे, आपके स्यं को स्यं मं िागत करना संनयास है। स्यं को ृ स्यं मं िागत करना संनयास है! ृ
बिा भाग के ्ल रयतन मं गायब हो िाता है, रोटी, कपिे और घर को रापत करने मं! अब चलं! चलना शुू करं अगले सतर की ओर! आधारभूत अजसतत् की आ्शयकताओं की झंझट से बाहर आतयय। ं चमलय हम मान्-िी् को ं चेतानापू्णक अगले सतर पर उजततषि कराये। मान्-िी् को उनकी अगली संभ्ता के बारे मं बताना अतत आ्शयक हं!
समय आ िाया है कक मान्- िी् पूणणत् के व््ान की मशिा रापत करं। समय आ िाया है कक मान्-िी् िी्नमुज्त के व््ान को ्हण करं। संनयास है आपकी व्चार-शज्त को आपकी परम संभा्ना मं संरेणखत करना, आपकी व्चार-शज्त को आपकी परम ्ासतव्कता मं संरेणखत करना।
संनयास है आपकी सभी व्व्ध 100


सनयास के गु णं का ्णणप् ! ्ी तनतय भ्तानंद स्ामी
मने संनयास ्यं मलया ? ं िब म स्ामीिी से साल २००४ म ं ं ममला था। उनहंने मुझे एकदम से ही व्मुज्तकरण और िी्न -पूती , और मुझे आंतररक और सांसाररक दतनयाँ ु मं सपषट व्सतार का समेककत ूप से अनुभ् ददया। इन लाभं को अपने आसपास सभी लोगं को पहुँचाने की मेरी ती् भा्ना ने मुझे संनयास के मागण के मलए रेररत ककया। स्ामीिी के आशी्ाणद से मेरा संनयास का अनुभ् बेहद आनंददायक रहा हं।
यह मेरे मलय ्यं िुरी हं ? एक सनयासी के मलए अलग अलग भूममकाओं को तनभाना ही आतमा की भूममका को तनभाना हं। िब म अपने सनयासी होने के स्धमण ं को तनभाता हूँ तो मं संसार के िी्न
के सभी अजसतत् और सामंिसय के मलए योगदान करता हूँ िो मेरे मलए महत्पूणण हं। इसीमलए संनयास कमण योग के सभी ूपं मं से सबसे व्मुज्तकरण मागण हं। आतमा अनेकं
शरीरं मं लगभग एक िैसे िी्न का अनुभ् करती हं लेककन मने सनयासी ं मशषय बनके अनेक िनम एक ही शरीर मं अनुभ् ककय ह ं ं। हर पल ऐसे महान आधयाजतमक अनुभ्ं से, िो पहले मेरे मलए अकलपनीय थे, मुझे पता हं की यह मेरे मलए परमातमा तक पहुचने के मलए सबसे तेज़ मागण हं।
्ी तेिोमयानंद स्ामी
मेरे संनयास के साथ वयज्तगत अनुभ् कया हं ?
म एक महीने पहले टोरंटो मंददर गया ं था। ्हाँ के िनसंपकण अधधकारी, जिनहंने मुझे ्हां आमंब्त ककया था और पूरा मंददर ददखाया, के साथ मेरा सामानय ्ाताणलाप हो रहा था। उनहंने पूछा की मने संनयास की दीिा कबसे ं ली हं। मने उनह ं ं ि्ाब ददया - तीन महीने, िैसे ही मने यह बोला म ं ुझे झटका लगा। तीन महीने ! मने तो ं पूरी जिंदगी ही यही अनतराकाश जिया हं। तब मने िाना यह दीिा की ं शज्त थी।
्ह पव्् िी्न, परमातमा का अंश अपने अंदर और बाहर लेकर चलना, स्णकामलक हं। इसके मलए समय नहीं
होता।
संनयास मेरे मलए ्या हं? संनयास पव्् हं। संनयास सुनदर हं। संनयास अथक होकर दसरो की उिाना ु हं। संनयास िागूकता हं। संनयास के मलए सारे ररशतं सा्णलौककक हं। संनयास संभा्ना हं। संनयास यह अहसास हं की दसरे भी त ू ुम ही हो। संनयास इस समभा्ना को िानना हं की तुम मे कोई भी हो सकता हं। संनयास पूणणत् हं। संनयास अपने आप मं ही शुआत और अंत हं। संनयास ख़ुशी हं। संनयास मुज्त हं। संनयास इस तरह से िी्न को िीना हं िैसे की उसे िीना चादहए।
संनयास की िुरत ्यं हं?
संनयास पूणण इंसानी िी्न को यथाथण करने के मलए एक सही आंतररक माहौल देता हं। संनयास का छोटा सा अनुभ् एक वयज्त को अपने िी्न के ल्य से िोि सकता हं। यह समेककत तरीकं से अपने बारे मं और िी्न के बारे मं सही बोध करता हं। संनयास का पालन हमको सांसाररक अ्ानता के बंधनं से मु्त होने मं मदद करता हं।
मध ुकरी मभिा - आधयाजतमक समवध की पराकाषिा ृ

Section 2
मभिानंद महादे् ने धरती पर आकर मभिाटन के द्ारा लोगो को कमो के बंधन से मु्त करने और उनहं अद्ैत का ्ान देने का तनशचय ककया ,्ह लोगो को अद्ैत ए्ं पूणणत् का व््ानं मसखाने ,सामानय दोषो से मु्त करने के मलए अ्तररत हुए, यह एक स्ोततम मागो मं से एक था । जिसको स्यं भग्ांन महादे् ने संसार को पररपूणण करने के मलए रयोग ककया । इस रकार मभिानंद के ूप मं ्ह के ्ल मभिा ्हण करके ही कमो के बंधन को नषट कर देते है।
मभिा के मलए िाना कोई सामानय ्सतु नहीं है यह आपके मलए बहुत कुछ करता है। स्णरथम आप लोगो के रेम को समझ पायेगे और िब लोग मना करंगे ,आपका आतमामभमान बहुत बिी मा् मं नषट हो िायेगा। िब आप मभिा के मलए िाते है तब आप एक तनजशचत सतय को तनूवपत करते है। लोग आप से पूछंगे की तुम कौन हो और आप नैसधगणक ूप से उततर दंगे। और यह एक सुनदर अ्सर होगा उनको पूणणत् के व््ानं द्ारा समध ृ करने का।
पुरे व्श् मं तनतयानंद संघ के ्ी महंत ,महंत ,कोिारी और थानेदार और भ्त इस सश्त समवधकारक व्दया ृ के अभयासरत है। यह मभिा माँगना नहीं है मभिा के मलए िाना कोई साधारण कायण नहीं है यह एक सश्त आधयाजतमक रकरया है जिसमे हम आधयाजतमक आरोगयता ,पव्् भसम ,योग पुजसतकाए और अपनी अनय आधयाजतमक करयाओ गततव्धधयं के व्षय मं मागणदशणन रदान करते है।
सभी लोग सुखी हो, आशी्ाणद ।
्ैददक िी्न शैली के मलए आि कदम

परमहंस तनतयाननद िी दहंद धमण के ू सभी मुखय पहलुओं और ्ैददक परंपरा को तनतयाननद संघ को उपल्ध करा रहे हं और उनहं दतनया के ु साथ साझा कर रहे हं ।तनतयानंद संघा अपने सभी आयाम मं ्ैददक परंपरा का पालन करता है।दतनया को सम ु ध ृ और आनंददत करने ्ाली सभी ्ेषि
चीिे उपल्ध हं । तनतय -करया तनतय-योग तनतय-पुिा तनतय-कीतणन तनतय-सतसंग तनतय-होम तनतय-पूणणत् करया तनतय-समाधध
तनतय-पु िा
्ैददक परंपरा मं, गुू पूिा सबसे पुरानी अनुषिान है।
पा्णती, आदद शज्त, पहले मशषय है जिनहंने मश् का असाधारण अनुभ् ककया ,पहले गुु ,जिनका असाधारण आभार मं उनके पैरं पर धगर कर िो भी उनके पास है अपणण कर सकती हं ।
िब हमं अपने गुु से उनका ्ान, अनुभ्, पयार और आशी्ाणद बहुत रापत होता है तो हम आभार के साथ िो कुछ भी हमारे पास है हम ्ो सारी चीिं के ्ल हम गुु के चरणं मं अवपणत करना चाहते हं ।
कोई भी भा्ना िो आपके ृदय मं ममिास पैदा करता है ,्ो पव्् भा्ना
कारण नहीं है,्यं लोगं को गुु के पैर छूते हं ; यह एक भा्नातमक 'भा्ना कने्शन' है।
म हमेशा लोगं को बताता ह ं ुँ कक ,भज्त या मासटर से िुिा् महसुस करना एक बहुत ही पा्न परम बात है। अगर कभी यह आपको ममल गया है तो इसे कभी भी अपने िी्न मं
नहीं खोएं ,ककसी भी चीि से से िुिा् महसुस करना िो की आप की तुलना मं अधधक है , आप अपने शरीर और मन के माधयम से िो भी उतपीिन महसुस करते हं उसे तनषरभा्ी कर देता है ।िुिा् महसुस करना एक अ्त तकनीक है ु । आपको ककसी भी समसया से बाहर तनकलने के मलए ककसी अनय हल या व्धध की िूरत नहीं है।
समपणण है ।िब अधधक से अधधक लोग पव्् भा्ना मं गोता लगाते हं , अधधक िी्न पथ्ी ्ह पर रहने ृ योगय हो िाता है। ऐसा ही एक पव््
भा्ना गुु पूिा है।'्यं गुु पूिा ककया िाता है' के मलए कोई ताककण क
~ परमहंस तनतयाननद
तनतय-कीतणन
कीतणन - भज्त संगीत - कं डमलनी ु िागरण के मलए महत्पूणण आधयाजतमक रथाओं मं से एक है। िब हम आधयाजतमक सतय गाते हं, तब हमारे ्ा्य (हमारी कथनी) कीतणन के उधरण के साथ शुध होता है,कीतणन गीत का अथण हमारे कं डमलनी ऊिाण ु को िगाने के मलए अंतर-व्शलेवषत होता है ।िब कीतणन गायक अपने श्दं मं ,हा्-भा् ए्ं संपूणण वयज्तत् मं पूणणत् ए्ं आनंद रसाररत करते हं तो समपूणण िगह िहां पर कीतणन गाया िाता है अद्ैततक एकाकार ए्ं कुणडमलनी िागरण अनुभ् करता है !इसीमलए कीतणन हमारे राचीन िी्न-शैली तथा रथा का एक महत्पूणण अंग था ।
तनतय-सतसंग (पषि 66 देख ृ ं)
तनतय -सतसंग लोगो का सकारातमक और लयबध कं पन के उ्ेशय से आधयाजतमक एक्ीकरण है । इसके बारे मं व्सतत ूप से प ृ षि रमांक ६६ म ृ ं प़ं
तनतय-होम (पषि रमांक ३५ देख ृ ं)
होम एक शज्तशाली आधयाजतमक अनुषिान हं जिसके द्ारा कक धचककतसा के मलए , ्रदान देने ,राथणना स्ीकार करने और और एक व्शेष दे्ता के साथ समबनध सथावपत करने के मलए ददवय ऊिाण का आह्ान ककया िाता है ।इस ूपांतरण करने ्ाले व््ान के बारे मं और अधधक िानकारी रापत करने के मलए पषि रमांक ३५ देख ृ ं।
तनतय-पूणणत् करया
स्पूणणत् करया - लगातार पूणणत् की तकनीक "रतयेक राब् सोने िाने से पहले अपने आप के साथ बैिो, आईना मं देखो और सारे कषट देने ्ाले यादं को कफर से याद करो जिसे तुम अपने अंतमणन मं रखे हुए हो ,जिसके कारण तुमहे लगता है की िी्न कदिन और असंभ् है -इन सारे अपूणणत् को कफर से जियो कफर कफर उससे अपने आपको मु्त कर दो । दबारा उनको याद करना ु उनसे मु्त होना ही है । "
-परमहंस तनतयाननद
१) आईने के सामने आराम से बैि िाओ । २) आईना इतना बिा होना चादहए की आप अपना रततबबमब अचछे से देख सकं । ३) अपने रततबबमब के आँखं मं अपनी आँखं से देणखये । ४) िैसे ही आँखं से आँखं का गहरा सजममलन होगा िो सबसे पहली चीि आप महसूस करंगे ्ो होगा आपकी आँखं मं आँशु ।
५) इसे आने दं ।
६) आईने के सामने बैिं और अपने आप से बातं करं ,िो भी आप अपने आप को बोलना चाहते हं साथ ही साथ अपने आपकी बातं सुने भी । हम सारा ददन दसरो की ु बातं सुनने मं लगा देते हं पर अपनी । यह आपका समय है आपके खुद के साथ मलए है ,अपने आपको सचचाई के साथ सुनं ।
७) अपने साथ समय बबताये सुनं और सुनाय । ं ८) अब अपने पहले की ककसी याद को याद करने की कोमशश करं जिसकी ्िह से आपने अपूणण समझ व्कमसत ककया और अपने पीिा के मूल स्ुप का तनमाणण ककया । ९ )िब आप अपने िी्न मं पहली बार की कुछ जसथततयं मं ्ापस िाओ िब आपने पहली बार संघषण अनुभ् ककया । आम तौर पर यह जसथतत आपके िी्न के तीसरे और पांच्ं साल के बीच हुआ होता है। उस जसथतत को दबारा जिय ु । ं
१०) अगर आँसु या गुससा आये तो आने दं।
११)अपने अतीत के साथ आमने सामने खिे होने पर , ददण गायब हो िाता है, रोध गायब हो िाता है! िब रोध गायब हो िाता है, िब ्ह पयार मं बदल िाता है। कृपया समझं िब ऊिाण रोध के ूप मं वय्त होता है िब रोध ऊिाण से हटा ददया िाता है, तो यह पूरी तरह से पयार मं बदल िाता है।
१२) पूणणत् पूरी तरीके से नहीं होगा यदद आप के ्ल मूल पैटनण पर ही काम करंगे,हर उस घटना को भी पूरा ककया िाना चादहए िो मूल पैटनण की ्िह से उपिी है। कृपया समझं,आपको अपने बचपन की सबसे पहले की समतत म ृ ं िाना है और इस समतत से प ृ ूणणत् करने की िुरत है । और इसके बाद अपनी आि तक के रतयेक पैटनण से पूणणत् करने की िुरत है ।
तनतय-समाधध
"तनतयाननदोहम -म् शास्त आनंद ह ं ुँ", इस अ्सथा मं

डूब िाएँ !
नित्ािंद ्ाम सेवा ्ोजिा और नित्ािंद ल्मी

१२ अ्टोबर २०१४ – तनतयानंद ्ाम सभा योिना का उदघोषण: कोलाडे मि के ्ी ्ी शंतत्ेराण महासमीिी, ्ी मंिुनाथ, बिरंग दल, सदगुु ्ी ियरकशेनि सरस्ती िी| इ६९ गुु महासंतनधानाम ऑफ़ ्ी चर ्ी व्दयापीि , आ्म महा संसथान , मलेमशया और ्ी कृषणा (BGP डडजस््ट िनरल सेरे टरी)
परमपूजय परमहंस तनतयानंद िी ने तनतयानंद ्ाम से्ा योिना रारमभ की िो की एक बहुउ्ेशीय ्ामीण सशज्तकरण योिना है जिसका उ्ेशय कणाणटक के तीन सौ से अधधक गां्ो को सामाजिक ए्ं आधथणक व्कास द्ारा समध ए्ं सश्त बनाना है िो की ्ामीण आधथणक ृ पुनतनणमाणण मं एक महत्पूणण भूममका का तन्ाणह करता है। रथम चरण मं तनतयानंद ्ाम से्ा योिना का मुखय उ्ेशय ३३ गा्ो मं कपास ए्ं ्ामीण उदयोगो की सथापना होगा िो की ्ामीण आधथणक पुनतनणमाणण मं महत्पूणण भूममका तनभाते है। तनतयानंद ्ाम से्ा योिना, तनतयानंद ल्मी के समान राूप है िो की ्ामीण मदहला उ्ममयो ए्ं गहणणयं के मलए आधथणक सहयोग रदान ृ करती है। यह योिना व्गत पांच ्षो से सफलता पू्णक संचामलत हो रही है और ्तणमान समय मं इसमे सथानीय मदहला स्यं सहायता समूहं के १४०० से अधधक संतुषट सदसय है।
