34. रहस्पू णा ्ौ्गक वव्ािं का रहस्ाभेदि
# **रहस्पू णा ्ौ्गक वव्ािं का रहस्ाभेदि**
्ौ्गक वव्ाि गोपिी् ववद्ाओं और पवव् कलाओं का रहस्ाभेदि करते हं जैसे की पदा््ाकरण, उततोलि, पाररकटि, कुणडशलिी जागरण, ्ौ्गक ्ि्ा, राण्तकत पर जीिा और आध्ाततमक उपचारण आदद का। आतम्ािी गुु, परमहंस नित्ािंदजी िे पवव् वव्ािं के गुह्ं रहस्ं व गोपिी् ववद्ाओं का रकटि ्क्ा है और उनहं मािवता हेतु सुलभ बिा्ा है। आिुनिक संदभा मं, ्ौ्गक वव्ािं का अब वै्ानिक परीषण ्क्ा जा सकता है एवं उिका मािव ्रीर व मि पर पररणाम पूणातः िातनतकारी है।