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11. ुर्शभषेकम् एिं ुर िोमम्

# ुर्शभषेकम् एिं ुर िोमम्

ू्ामभ्ेख: उपचार एिं आयु िाव् रोकने ृ िेतु

ुिामभषेकम एक शज्तशाली ्ैददक करयापधतत है जिसमे भग्ान मश् की उिाण ए्ं आशी्ाणद का आ्ाहन ककया िाता है, स्ासथ ए्ं उपचार लाभ हेतु। ुिामभषेकम अतयधधक उपचारक शज्त का ्हन करता है ्योकक यह दो रबल तकनीको को िोिता है - अमभषेकम या पव्् सनान ए्ं मं्ो का उचचारण। हमारे मजसतषक की रचना व्मभनन श्दं की मभनन रततकरया वय्त के मलया की गयी है। िो भी श्द हम अपने अंतराकाश मं िाप करते है, हमारे मजसतषक ए्ं िै्समतत ृ मं ररकॉडण हो िाता है ए्ं मजसतषक के मसगनल के पररपथ का भी तनणणय करता है। आपके अंतराकाश मं 'नमः' श्द का िाप करने से मन का अचेत भाग खंडडत होता है िहाँ सभी स्ासथ समसयाओं का मूल कारण जसथत है। के ्ल िागूकता पू्णक ्ी ुिम के मं्ोचचारण से ही सभी मानमसक

री ु्म का वि्ान

ए्ं शारीररक स्ासथय समसयाए सीधे नषट हो सकती है।

ुिमभषेकम अनुषिान करते समय, 'चमकम' का भी मं्ोचारण होता है 'नामकम' के बाद। 'चमकम' एक ्ैददक सतो् है जिसका मं्ोचारण स्ासथ ए्ं समधी ृ हेतु ककया िाता है। चमकम एक अतत मंगलकारी मं्ोचारण माना िाता है और अ्सर शुभ अ्सर िैसे कक व््ाह, गहर्ेश समारोह आदद म ृ ं ककया िाता है।

आ्म मं ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम ् ् के अन ुषिान करने का महत्

कोई भी राथणना या अनुषिान को एक परमचेतना के ऊिाण िे् मं करने से उसके लाभफल मं हज़ारं गुणा ्वध ृ होती है। बबिदी िे् आतम्ानी गुु की उपजसथतत से ए्ं

है। यिुर्ेद मं पाया गया, ्ी ुिम अपने उपचारातमक सपंदन के मलए व्खयात है। ्ी ुिम का मं् उचचारण भग्ान मश् की ऊिाण, बुवध ् आशी्ाणद का आ्ाहन हेतु ककया िाता है। ्ी ुिम मं मश्िी का रहमाणडीय ूप का ्णणन है। ुि, आयु्णधध को रोकने या कायाकलप ृ की मूती है। ूि, मश् की पुनिाणगरण की ऊिाण का स्ूप हं िो हमे ददन-रततददन यौ्न बनाती है। ्ी ुिम को नामकम भी कहा िाता है। उसमं 'नमः' श्द का तीन सौ बार मं्ोिाप है। संसकृत मं 'नमः' का अथण 'नमन करना' है। उसका एक और सपषटीकरण है, 'नहीं म, ं न अहम'। बारंबार इस मं् 'नहीं म - नमः' के उचचारण ं से - 'नमः' - अहंकार की िि को सीधे मारता है, िो की हमारी सभी समसयाओ का एकमा् अपराधी उततरदायी है। 34

्ी ुिम भग्न मश् का एक शज्तशाली ्ैददक सतो्

का भेदन कर सकती है, नाडियो को ऊिाण रदान कर सकती है ए्ं नकारातमक संसकारं को (मूल्ासनाओ की समततया) बाहर तनषकावषत कर सकती है, िो हमारे ृ स्ासथय ् मानमसक जसथततयं को रभाव्त करते है।

सबसे महत्पूणण, उचच चेतना िो इस उिाण िे् के ्ायुमंडल मं वयापक है, हमं स्त: धयान जसथतत मं ले िाती है। धयान सीधे शरीर के स्-उपचार को सरीय बनाता है ए्ं रोग का दोनं, उपचारातमक ए्ं तन्ारक उपचार का कायण करता है।

अपने नाम पर ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम का अन ् ुषिान

िब आप ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम का अन ् ुषिान करते हं, एक व्शेष संकलप मं् का िाप आपकी व्शेष राथणना के साथ आपके नाम पर ककया िाता है। यह संकलप मं् आपके ए्ं ऊिाण ् मंगलत् के बीच मं सेतु का कायण करता है जिसका तनमाणण ुिामभषेकम से आपके मलए होता है। संकलप मं् से, ुिामभषेकम या ुि होमम का रभा् ए्ं ् लाभ सीधे आप तक अंतररत हो िाता है। ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम आप म ् ं उपचार होने देता है, साथ मं आपको ए्ं आपके परर्ार को आनंद ् शांतत ए्ं अचछा स्सथ देता है।

आधयाजतमक अभयासं ् उपासनाओं द्ारा तनरंतर ऊिाणपूणण हो रहा है, िो तनयममत ूप से यहाँ ककये िा रहे है।

आ्म मं ुिामभषेकम मं व्सतारपू्णक अमभषेकम का अनुषिान सजमममलत है, ्ी ुिम के साथ एक राचीन स्यंभू मलङगम (स्ाभाव्क ूप से रकट), िो सददयं से बबिदी के सथानीय तन्ामसयं द्ारा पूिा िा रहा है। आ्म के पव्् ्ट ्ि की ििो के क ृ ुहुर मं पाया गया यह मलङगम स्यं परमहंस तनतयानंदिी द्ारा तनतयानंदेश्र मंददर के परमपा्न गभणगह म ृ ं राणरततमशषट ककया गया है। सददयं से यह अ्त मलङगम ने एक इचछाप ु ूततण मलङग बने रहने की रधथषिा रापत की है िो राथणनाओ का सीधे उततर देता है। उससे भी महत्पूणण, यह पूिन करने ्ाले को िी्न मं सही चयन करने कक बुवध रदान करता है।

स्यंभू मलङगम का ुिामभषेकम हमारे िी्न ए्ं स्ासथ मं ्ासतव्क परर्तणन ए्ं असीम बदला् ला सकता है। ्ैददक परंपरा के अनुसार अमभषेकम के मलए उपयोधगत के ्ल व्श्सनीय राकृततक साम्ी का रयोग ककया िाता है, जिसमे दध, दही, चनदन लेप, ग ू ुलाब िल, नाररयल पानी, शहद, गुड ए्ं घी सजमममलत है।

िब यह ्धा ए्ं िागूकता के साथ ककया िाता है, ूि होमम की ऊिाण सीधे हमारे सबसे गहरी ऊिाण कोशं ्

ुिामभषेकम अपने नाम से अवपणत करं अब, आप भी आ्म मं ुिामभषेकम का अपणण कर सकतं है ए्ं अपने स्ासथय मं व्शाल उननतत का अनुभ् करं दान शुलक: २५००० ु /-

अनुषिान का ददन: आपकी स्ेछा का कोई भी ददन भुगतान: पूरी रामश (्ापस अयोगय) कम से कम ुिामभषेकम ततधथ के दो ददन पू्ण हमं पहुँचाय संपकण : +91 80 27279999

महेशवर पू जा

दद्ंगत आतमाओं से पूणणत्

बबिदी आ्म मं आयोजित महेश्र पूिा मं स्ामीिी, िो रहमाणडीय ऊिाण या पराशज्त के अ्तार हं, स्यं मभिा ्हण करते है ् भोिन करते हं और दद्ंगत आतमाओं को मु्त करते हं। चाहे ककतने ही िनम उस वयज्त ने शरीर छोिने के उपरांत ले मलए हं, और चाहं उस वयज्त ने िी्न मं स्ामीिी से ममला हो या नहीं, गुु हसतिेप कर सकते हं और अपनी उपजसथतत दद्ंगत आतमा के िी्न मं लाकर उसे िी्न मुज्त की ओर अ्सर कर सकते हं।

स्ामीिी कहते हं कक यदद एक वयज्त आतमहतया करता है, उसकी मुज्त हेतु महेश्र पूिा के अला्ा और कोई मागण नहीं। स्ामीिी और कहते हं कक ्े दद्ंगत आतमा की सहायता तभी कर सकते हं, िब उस वयज्त का फोटो्ाफ ददया िाये (खासकर तब, िब दद्ंगत आतमा स्ामीिी से दी्ित मशषय न हो)। ्यंकक उनहं उस आतमा को पूरे रहमाणड मं खोिना पिता है, के ्ल एक छोटी फोटो्ाफ की िानकारी के साथ। और परंपरा यह भी कहती हं कक चा्ल का एक दाना यदद एक आतम्ानी गुु को अपणण ककया िाये, तो महेश्र पूिा के रततभागी की ऊपर और नीचे की सात पीद़यं को मुज्त रापत होती है। जितने अधधक चा्ल के दाने णखलाएंगे, उतने ही अधधक कलपं तक (४.३२ करोि मनुषय िी्न ्षण) रततभागी को कै लाश (एक अततम्ानी गुु के सातनधय मं) मं िी्न राजपत होगी।

महेश्र पूिा ्ह रकरया है, िो ्ैददक दहनद परंपरा के ू अनुसार दद्ंगत आतमाओं से पूणणत् हेतु की िाती है। महेश्र पूिा ्ह पूिा है, िो संनयामसयं को ् संनयास पथ पर रहमचाररयं को अवपणत की िाती है। इस पूिा मं संनयामसयं को स्यं भग्ान मश् का रततूप मानकर उनहं मभिा ् भोिन से्ा का तन्ेदन ककया िाता है। महेश्र पूिा ्ैददक परंपरा की सबसे राचीन अमभमलणखत शास्व्धध है, िो आि भी रचमलत है। महेश्र पूिा मं महेश्र स्ूपी स्ामीिी स्यं पूिा ्हण करतं हं और नै्ेदय मभिा - भोिन से्ा को स्ीकार करते हं।

महेश्र पूिा उस वयज्त कक समतत म ृ ं अवपणत की िाती है, िो अब शरीर मं नहीं है। आतमा को शांतत रापत होने हेतु यह अपणण ककया िाता है। ्ासतव्क शांतत िो एक आतमा अनुभ् कर सकती है, ्ह िी्नमुज्त की जसथतत है। महेश्र पूिा सब दद्ंगत आतमाओं के साथ पूणणत् रदान करती है, और इस रकार रततभागी मुज्त रापत करता है सब अपूणणत्ं ए्ं संसकारं से िो दद्ंगत आतमा से िुिे ् उनसे रापत हं।

संनयामसयं की और कोई इचछा या रयोिन नहीं होता िी्न मुज्त के मस्ाय, और अपनी पहचान को रहमाणड मं व्लीन करने के मस्ाय। ्े रहमाणड का एक शुध र्ाह बन िाते हं। इसमलए उनहं णखलाने ए्ं पूिा अपणण करने से ्ही पररणाम दद्ंगत आतमा मं भी लाया िाता है, िो उन आतमाओं को िी्न मुज्त रापत करने मं और रहमाणड मं व्लीन होने मं सहायक होता है।