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4. का पुनर्जागरण नव-प्रबुद्ध सभ्यता के अवतार व सिष्टिकर्ता

# का पुनर्जागरण नव-प्रबुद्ध सभ्यता के अवतार व सिष्टिकर्ता

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हिं दूत्व का उत्तरदायित्व लेना

महामंडलेश्वर, श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी के प्रमुख के रूप में

परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी का वर्श 2013 में प्रख्यात श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी (महानिर्वाणी पीठ), सर्वप्राचीन वैदिक सनातन भारतीय सांस्कृतिक सं स्थान के महामंडलेश्वर के रूप में पट्टाभिषेक किया गया ।

अखाड़ा सनातन धर्म के शक्तिशाली धर्मके सरी के रूप में मान्य, परमहंस श्री नित्यानंद जी अपनी महामंडलेश्वर की भूमिका में अखाड़े की असंख्य शाखाओ के सा ं मूहिक विश्वरूप एवं ठोस आध्यात्मिक परंपरा की शक्ति को आत्मसात करते हुए उसे एक नवीन प्रबलता एवं जीवन शक्ति प्रदान कर रहे हैं ।

श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी के १००८ महामंडलेश्वर के रूप में परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी का 'महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह' आयोजित किया गया था, अखाड़े के आध्यात्मिक प्रमुख श्री आचार्यों और साधुओ के दि ं व्य सानिध्य में, महानिर्वाणी अखाड़ा छावनी, कुम्भ मेला शिविर, प्रयागराज में । दिनांक १२ फरवरी २०१३ को ।

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श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी सबसे पहला सं स्थापित अखाड़ा हैं । अखाड़े सनातन धर्म की सभी हिदं ू सम्प्रदायो का सं पू ं र्णता से समन्वय करके , जैसे की – शैव, वैष्णव, ब्रह्मा, शाक्त, सिख, जैन और बौद्ध धर्म समेत का प्रतिनिधित्व करते है । अखाड़ा महानिर्वाणी की क्रमागत परंपरा १० हजार वर्ष पुरानी है और इस सांस्कृतिक सं स्थान का औपचारिक रूपसे नामकरण ७४८ ईसवी में हुआ, एक अतिशुभ घटना के उपरांत ।

७४८ ईसवी में श्री अटल अखाड़े के सात साधुओ ने गंगासागर पर तपस्या की, जिसके फलस्वरुप उन्हेंश्री कपिल महामुनि जी के दिव्य दर्शन प्राप्त हुये । उनके आशीर्वाद से उन्होंने न्हों हरिद्वार के पास नीलधारा में, 'श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी' के विधिवत नाम से नागा परंपरा को पुनःजागरण किया । आज भी अखाड़ा महानिर्वाणी के मुख्य उपास्य देवता श्री कपिल महामुनि जी हैं, जो पौराणिक काल से प्रख्यात हैं ।

श्री कपिल महामुनि जी की जीवंत मूर्ति, श्री नित्यानंदेश्वर देवस्थानम, नित्यानंद पीठम, बैंगलुरू आदिनम

(ऊपर) : श्री कपिल महामुनि जी देव, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी का नियुक्ति-पत्र और 'महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह' का आमं त्रण पत्र, दिनांक १२ फरवरी २०१३, जो घोषणा करता है – परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी को 'महामंडलेश्वर' के सम्मानित पद पर ।

(दायी ओर): नियुक्ति-पत्र का अंग्रेजी में अनुवाद

२७ अप्रैल २०१२ को परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी का विश्व की सबसे प्राचीन जिवंत हिदं ू धार्मिक सं स्थान, मदरै आदिन ु म के प्रमुख - गुरु महासंनिधानम के पद पर अभिषेक हुआ। मदरै आदिन ु म के २९३ गुरु महा संनिधानम के पद का उत्तरदायित्व लेते हुए परमहंस श्री नित्यानंद जी जी ने मदरै आदिन ु म और उनके साथ जुड़े हुए ४ मं दिरो को महान प्रसिद्धि लाने की शपथ ली ।

प्रसिद्द मदरै आदिन ु म अति प्राचीन काल से अस्तित्व में है । किन्तु, दक्षिण भारतीय शैव सिद्धांत तत्वज्ञान के चार दूरदर्शी सं तो मे से एक, आत्मज्ञानी युवा सं त, तिरुज्ञान सम्बदर जी ने १५०० वर्ष पूर्व उसको पुनर्जीवित किया | आदिनम मदरै ु में स्थापित है, जो भारत के सबसे प्राचीन नगरोंमे एक है, जिसका इतिहास तीसरी शताब्दी ई.पू के तमिल सं गम काल तक जाता है ।

मदरै के पीठासीन ु देवता श्री सुन्दरेश्वर और मीनाक्षी अवतार में भगवन शिव और देवी हैं, जो जग प्रसिद्द मदरई ु श्री मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मं दिर मे प्रतिष्ठापित है ।

मदरै आदिन ु म के प्रमुख, गुरु महा संनिधानम के नाम से ज्ञात होते है, जो तिरुज्ञान सम्बंदर जी की परंपरा को आगे ले जाने के उत्तरदायित्व के पवित्र कर्य को विरासत में पाते है । इस पद का कोई निश्चित कार्यकाल नहींहोता है, और यह एक आजीवन सम्मान है ।

मदु रै आदिनम के प्रमुख का पट्टाभिषेक, मदु रै, दक्षिण भारत

हिं दू मं दिरो की स् ं थापना

तिरुज्ञान सं बन्दर जी, बाल सं त अवतार

प्राणप्रतिष्ठा की रहस्यमय विधि

मूर्तियोंमें प्राण शक्ति को श्वाषित करके उन्हेंजीवित देवता में प्रतिष्ठित करना, जो स्वयं मे स्वतंत्र चेतना व बुद्धि बन जाते है।

केवल जीवित अवतार ही इस दर्ल

ु भ रहस्यमय क्रिया को सं पूर्ण

कर सकते हैं। सामान्य मं दिरो में पुजारी मं त्र प्रतिष्ठा द्वारा देवता

की ऊर्जा का आह्वान करते हैं।

श्री सदाशिव उवाच यो यद्देवप्रतिक्रतिम् प्रतिष्ठापयति प्रिये। सा तल्लोकमवाप्नोति भोगानपी तदद्भु वान् ।। इष्टकाग्रहदाने तु तस्माच्छतगुणम् फलम्। ततोऽयुतगुणम् पुण्यम शिलग्रहप्रदानतः ।। 25।।

भगवान श्री सदाशिव ने कहाः हे प्रिय देवि। वह व्यक्ति जो प्रतिष्ठा करता है, जो कि पदार्थमें श्वासमय जीवन प्रतिष्ठित करके विशेष देवता के रूप में निर्माण करने का विज्ञान है, वह उसी देवता के लोक को प्राप्त कर उस लोक के आनंद का अनुभव करता है। ईंटो से बने ं मं दिर का दान करके , व्यक्ति उसका फल सौ गुणा पाता है। पत्थर के मं दिर का दान करके व्यक्ति ऐसा पुण्य प्राप्त करता है जो दस-हजार गुणा अधिक होता है।

~ महानिर्वाणतंत्रम, त्रयोदश उल्लास

वैचारिक रूप से मं दिर को भगवान् का भौतिक स्वरुप माना जाता है | गर्भ गृह को शीर्षव गोपुर को भगवान के चरणो प्रतीक ं माना जाता है| सुकनासी या अर्धमंड़प (गर्भ गृह के आगे का छोटा घेराव) नाक को; अन्तराल गर्दन को; विभिन्न मंडप शरीर को ; पराकारस हाथ को दर्शाता है | लम्बरूप में गर्भ गृह गर्दन को दर्शाता है, शिखर (गर्भ गृह की उपरी अधिरचना) शीर्ष को और कलश शिखा को दर्शाता है |

At Sri Nithyanandeshwar Devasthanam are seated (center) the presiding deities of Sri Nithyanandeshwara and Nithyanandeshwari (Lord Shiva and Devi) blessing the world, along with the deities

हिन्दू मं दिर क्या है?

वैदिक परंपरा और हिन्दू जीवन के हृदय मे पवित्र मं दिरो की परंपरा विद्य ं मान है। मन्दिर या देवालय देवताओ के निवास का ऊर्जा केंद्र है। वैदिक सभ्यता में कोई भी मानव सभ्यता मं दिरो के चारो ं ओर पु ं ष्पित-पल्लवित हुयी है। इस कारण हिन्दुत्व मं दिर पर आधारित सभ्यता के रूप में स्थापित किया गया, जो नित्य उत्सवो की परंपरा ं है।

प्रत्येक मं दिर एक प्रबुद्ध गुरू या अवतार द्वारा उत्पन्न की गयी ऊर्जा परिपथ होता है

और हजारो वर्ष तक यह ऊर्जा को धारण करता है। मं दिर से जुडे अनुष्ठान व विधियां विभिन्न ऊर्जाओ का आ ं वाहन व प्रकीर्णन करने की प्रक्रिया होती हैं। अवतार ब्रह्माणडिय ऊर्जा का वहन कर उसे मं दिरोंमे स्थापित करके , उसे सारे विश्व मे प्रसारित करते हैं, जिससे मानवता को आत्मज्ञान का अनुभव हो और दिव्य शक्तियां, उपचार और इच्छापूर्ति भी प्राप्त हो।

हिं दू धर्ममें देवमूर्ति पूजा नहींहोती है । पूजा देव मूर्तियो के 'द् ं वारा' की जाती है। शिक्षण, शिल्पकला, जीवनशैली व उत्सव, सभी जीवन व कार्य प्रणालीयां मं दिर परम्पराओं पर ही आधारित होते हैं। यह देव मूर्तियां, जो शुद्ध चेतना के 'अर्चावतार' रुप मे जीवित है, इनके प्रति भक्ति के प्रबल भाव से ही हमें दिव्यता से अद्वैत भाव या एकत्व की परम अनुभूति होती है ।

हिं दूमं दिरो को स ं दा राजाओ और ं व्यक्तिगत दानदाताओ द्वारा पोषित किया गया है, जिससे उन्हेंमहापुण्य प्राप्त होते है । मं दिरो को ं मुद्रा, स्वर्ण, चांदी, पशु और धरती दान किये जाते थे। ऐसे दानो ने आं ज तक वैदिक परंपरा को जीवित रखने और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण काम किये हैं।

अद्वैत भक्ति, जागृत देव मूर्तीयो द्ं वारा एकत्व की पूजा

हिदं ूमं दिर, मानवता व विश्व के परम कल्याण हेतु ब्रह्माण्डीय ऊर्जा केंद्र

श्री नित्यानं देश्वर देवस्थानम नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम, भारत

नित्यानंद पीठम बेंगलुरु आदिनम के पवित्र गर्भमं दिर में परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा पीठासीन देवता श्री नित्यानंदेश्वर एवं नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) की पवित्र पूजा-अर्चना ।

बेंगलुरु आदिनम् में कल्पवृक्ष - पवित्र वटवृक्ष की पूजा ।

परमहंस श्री नित्यानंद जी ने समस्त विश्व में आगम शास्त्रों और स्त्रों पद्धतियो पर आधार ं ित हिं दूमं दिरो की स् ं थापना की है, जिनसे लाखों लोगो को सं ं मृद्ध और परिपूर्णवैदिक परंपरा को जीना, शिक्षित होना व लाभान्वित होने की प्रेरणा मिल रही है। आज धरती पर परम आवश्यकता है अधिक मं दिरो की, ज ं िससे मानव को दिव्यता से सीधे जुड़ने और समावेश होने का साधन मिलें एवं सकारात्मक और शांतिपूर्ण ब्रह्माण्डीय ऊर्जा केंद्रों की स् द्रों थापना हो ।

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''मं दिर ऐसे उपग्रह प्रसारण केंद्र की भाति होते हैं जहां पर अति तीव्र अध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करके समस्त विश्व में भेजा जाता है - जिससे कि मानवता को भौतिक, मानसिक, भावनात्मक और सबसे ऊपर अध्यात्मिक उपचार में सहायता मिले। दैवमूर्ति की पूजा द्वारा हमने मूर्तियोंमें दिव्यता को प्रवेश कराने का विज्ञान और पाषाण का ईश्वर मे परिवर्तन को साध्य लिया है।"

~ परमहंस श्री नित्यानंद जी

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यह वटवृक्ष एक कल्पवृक्ष, अर्थात वरदयी दिव्य वृक्ष हैं, जिसने अनगिनत श्रद्धापूर्णप्रार्थनाओ को ं फलीभूत किया है। वटवृक्ष के आधार में एक गुहा जैसा कन्दरा है जहाँ पर एक दिव्य स्वयम्भू लिङ्गम (प्राकृतिक रूप से प्रकट शिवलिङ्गम) प्राप्त हुई थी, जिसे श्री नित्यानंदेश्वर मं दिर में विधिवत प्राणप्रतिष्ठित किया गया है।

सहस्त्र वर्षों से यह वटवृक्ष ने अपनी पत्तियां यहाँ बिखेरी हैं । स्वास्थ्यप्रद ऊर्जा से भरपूर इस दिव्य क्षेत्र में शारीरिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर रोगमुक्ति मिलती है। परमहंस श्री नित्यानंद जी को यही वटवृक्ष का दृष्टिगोचर हुआ था, जिसके उपरांत उन्होंने य न्हों हाँ आश्रम की स्थापना की । इसका दैविक सं बन्ध 'शं भाला क्षेत्र' से है जो जागृत गुरुओ का अलौल ं िक क्षेत्र है।

यहाँ तीन दिव्य वृक्ष पाए जाते हैं: अथी (पवित्र अंजीर), अला (वटवृक्ष) और आरसा (पीपल), जो बिना फू ल के ही फल धारण करते हैं। वैदिक धर्ममें इन पवित्र वृक्षौं को क्षौं श्री वनस्पति या 'वन के देवता' के नाम से जाना जाता है। जहाँ यह तीन वृक्ष एक साथ स्थापित होते हैं, वहां साक्षात भगवान शिव जी का निवास होता है।

(बांए) स्वयम्भू लिङ्गम, स्वयं प्रकट हुआ शिवलिङ्गम, जो नित्यानंदेश्वर मं दिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित है, और पूर्व मे वटवृक्ष की गुहा में पाया गया (दाएं )।

पवित्र वटवृक्ष, नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम में अपनी विशाल दैविक शाखाएं फै लाए हुए । नीचे विराजमान हैं श्री दक्षिणामूर्ति भगवान शिव जी के आदिगुरु (प्रथम गुरु) के रूप में ।

श्री दक्षिणामूर्ति जी (दक्षिणाभिमुख देवता) भगवान शिव जी कें 'आदिगुरु' - धरति के अनादि एवं प्रथम गुरु के रूप में विराजमान हैं। वें चिर-यौवन अवस्था में परम मौन में दिव्य ज्ञान का स्पन्दन करते हैं और व्रिद्ध सं तो से परिक्षेपित हैं।

आदिगुरु श्री दक्षिणामूर्ति जी, श्री नित्यानंदेश्वर देवस्थानम, बेंगलुरु आदिनम में स्थित दिव्य वटवृक्ष की छावनि के तले ।

श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर, भगवान श्री नारायण या श्री विष्णु का 11 फु ट का जीवंत 'अर्चावतार' स्वरुप हैं। वें जीवो पर आ ं शीर्वाद और वरों की कृ पावर्षा करते हैं। अति विराट रुप में देवमूर्तियो की ं प्राण-प्रतिष्ठा करने की वैदिक परंपरा, हिंदू मं दिरो या ं देवालयो का गौर ं व है, जहां हम सर्वव्यापी परमात्मा से समीपता से जुड़कर उनके साक्षातकर रुप के दर्शन प्राप्तकर उत्सव मनाते हैं ।

विराट रुप में सजीव देवमूर्तियां

भगवान श्री कालभैरव जी - काल और आकाश मंडल के महादेवता हैं, जो भगवान शिव जी महादेव कें एक अति शक्तिशाली स्वरूप हैं। क्षेत्रपालक या ऊर्जाक्षेत्र के रक्षक के रूप में वें सभी मं दिरो के ं द्वार पर सदैव उपस्थित हैं। वें महाँ-सिद्धियों व शक्तियो के ं देवता हैं, और वें विपत्तियो और ं शक्तिहीनता का नाश करके पूर्णत्व एवं मुक्ति प्रदान करते हैं।

भगवान श्री कालभैरव जी, नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम के प्रवेशद्वार पर विद्यमान ।

हिदं ू उत्सवो और प ं र्वो में पवित्र नाम-कीर्तन के सा थ मं दिर में उत्सवयात्रा ओ का आयो ं जन, नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम में ।

श्री आनन्दलिङ्गम, दर्ल ु भ व दिव्य 21-फु ट शिवलिङ्ग जो नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम मे स्थपित है। श्री आनन्दलिङ्गम घिरा हुआ है – रोगमुक्त करने वाले स्वास्थ्यप्रद जल 'तीर' से और 1008 ्थ शिवलिङ्ग से, जो विश्व में चिकित्सा ऊर्जा और शांति के दिव्य प्रकाश को फै लाते है ।

(बांए): थेप्पोत्सवम - तहरती नौका का उत्सव, जिसमे देवता या गुरु पवित्र तीर्थ जल मे दिव्य दर्शन और आशीर्वाद देते हैं ।

वैदिक परंपरा का ध्वज स्तम्भ ऊँ ची उड़ान भरे और सबको आशीर्वाद मिले

'ध्वज' जो मं दिरो के उच्च स्त ं म्भों पर ल म्भों हराता है, यह सनातन हिदं ू धर्म या हिदं त्वु की प्रभुता की अनन्त्ता का प्रतिचिह्न हैं । हर नेत्र जो आशापूर्वक सत्य, शान्ति, धर्म आदि की खोज करते है, उन नेत्रो को मीलोंदूर से यह ध्वज स्तम्भ एक आश्वस्त दर्शन और पुकार है, जिसे देखकर वें दिव्यता से सं बन्ध बनाने का मार्ग पतें हैं।

हिदं ू पर्वों पर 'ध्वजारोहण' समारोह नित्य उत्सव अथवा अनन्त उत्सव के प्रारम्भ की घोषणा करते हैं ।

परमहंस श्री नित्यानंद जी पवित्र 'ध्वजारोहण' करके उत्सवो के ं प्रारम्भ का सं के त देते हुए । विश्व पर आशीर्वाद की कृ पावर्षाहेतु अग्नि देवता को समर्पित पवित्र यज्ञ सं स्कार।

'रथोत्सव' मं दिरो और पीठासीन ं देवताओ की भ ं व्यता के उत्सव का एक अभिन्न अंग हैं। उत्सवों व पर्वों के समय प्रमुख देवताओ को वि ं शाल रथोंमें आसीन कर यत्रा करायी जती है, जिससे हर ह्रदय को ईश्वर के दिव्यदर्शन मिलें ।

दिव्य रथोत्सव, नित्त्यानन्द पीठम, बेंगलुरु आदिनम में आयोजित।

महा होम और यज्ञ, यह अग्नि देव को आहुति के विशाल अनुष्ठान होते है, जिन्हे विधि नियमित क्रियाओ से ं विश्व शांति व मानव कल्याण और आशीर्वाद हेतु आयोजित किया जाता हैं।

अतिरुद्र महायज्ञ 2015 - कई दिनो तक ं किया जाने वाला अनुष्ठान, यह अति शक्तिशाली अग्नि होम, जिसमे 'श्री रुद्रम' के निरंतर मन्त्रोच्चारण द्वारा भगवान शिव जी की कृ पा का आवाहन किया जाता है, विश्व शांति हेतु।

जहाँ देवता स्व्यं दर्शन देने हेतु यत्रा करते हैं

2007 में परमहंस श्री नित्यानंद जी ने 25,000 वर्ग फु ट से अधिक नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, लॉस एंजेलिस आदिनम क्षेत्र को ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से प्राणयुत और सं चारित करते हुये पश्चिमी जगत को आशीर्वाद स्वरुप इस वैदिक परंपरा के शिखर को स्थापित किया।

इस मं दिर में विभिन्न हिं दू विचारधाराओ को स ं माविष्ट करते हुए 80 से अधिक देवमूर्तीयां स्थापित हैं। आज तक उत्तर अमरीका में यह नित्यानंदेश्वर हिं दू मं दिर, लॉस एंजेलिस आदिनम सबसे विशाल शिवलिङ्ग और श्री राजराजेश्वरी देवी को निवास स्थल है।

पश्चिमी जगत में हिं दू धर्म का शिखर

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर लॉस एं जेलिस आदिनम, यु एस ए

भगवान परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी, श्री नित्यानंदेश्वर,

श्री श्री नित्यानंदेश्वरी की देवमूर्ति। नित्यानंद गणेश और नित्यानंद लक्षमी की जीवमूर्तियां ।

बांए: श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर की देवमूर्तीयां ।

परमहंस श्री नित्यानंद जी ने स्वयं अपने दिव्य हस्तों से हस्तों भगवान श्री वेंकटेश्वर की महनीय देवमूर्ति को शिल्पकला से पूर्ण और प्राण-शक्ती से सजीव किया है। परम पूज्य स्वामीजी द्वारा प्राणप्रतिष्ठा (अर्थात ब्रह्माण्डिय ऊर्जा का प्राण सं चार) किए जाने के पश्चात, यह देवमूर्ति श्री नित्यानंद

वेंकटेश्वर के रूप मे शोभायमान हैं और यह देवमूर्ति दक्षिण कै लिफ़ोर्निया में श्री विष्णु का सबसे विशाल और आनंदमय अर्चावतार हैं । भावी सं कल्प है कि श्री तिरुमला तिरुपति के भगवान श्री वेंकटेश्वर के गर्भगृह की सटीक प्रतिकृति रूप के स्वर्णमं दिर का निर्माण करना।

दायी: प्रसिद्ध अभिनेत्री सूसन सुरैनडन और परिवर को त्रिनेत्र प्रदर्शन

बांए : प्रत्यक्ष पाद पूजा हेतु भक्त ततपर है ।

इस मं दिर में स्थापित हिदं ूधर्म की प्राचीन धरोहर, सुन्दर वैदिक सं स्कृति और आध्यात्मिक संघ, एक उत्तम जीवित उदहारण है – समग्र पश्चिमी जगत मे हिं दू परम्पराओ का अनुसरण और ं अभ्यास करने वाले हिं दूओ का। ं

लॉस एंजेलिस आदिनम नाम से अभिशब्दित, यह हिं दूमं दिर पश्चिमी जगत के सबसे विशाल 8 फ़ीट ऊँ चे 'शिवलिङ्ग' का निवास क्षेत्र हैं। यह देवालय दक्षिण भारत में तिरुवन्नामलई स्थित श्री अरुणाचलेश्वर मं दिर की शक्ति और ऊर्जा धारण किए हुए है।

श्री अरुणाचलेश्वर पं चभूत शिवलिङ्ग (पञ्चतत्त्व की परम ऊर्जा) में से अग्नि लिङ्ग, भगवान् शिव के अग्नि तत्त्व के ब्रह्माण्डीय शाश्वत स्वरूप है ।

पश्चिम में श्री अरुणाचल शिव की ब्रह्माण्डीय ऊर्जा केंद्र

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आत्मा और परमात्मा (जीव और शिव) के समागम के अद्वैतिक सत्य का उत्सव मनाने हेतु नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर में वैदिक अनुष्ठानो, ना ं म-कीर्तन एवं ध्यान के कार्यक्रमो का पुनरु ं थान।

पृष्ठ भूमि: अरुणाचल पर्वत, स्वयं भगवान शिव का स्वरुप व तलहटी में श्री अरुणाचलेश्वर मं दिर तिरुवन्नामलई, दक्षिण भारत

नित्यानंद संघ, लॉस एंजेलिस आदिनम मे

(बांए) : भगवान परमहंस श्री नित्यानंद जी की देवमूर्ति ।

(दाए): भगवान श्री कपिल महामुनि जी की भारत के बाहर स्थित सबसे विशल देवमूर्ति है। श्री कपिल मुनि जी हज़ारोंवर्ष पूर्व प्रथिवी के पश्चिमी भाग में निवस करते थे और यह मन्यता है की 'के लिफोर्निया' प्रदेश का नामकरण 'कपिलारण्य' नामक श्री कपिल महामुनि जी के तपोक्षेत्र निवस से प्रेरित होकर किया गया था ।

(बांए): नित्यानंद संघ, लॉस एंजेलिस आदिनम मे (दाए): श्री नित्यानंदेश्वर को अभिषेक

"क्यूंकि आकाश सदैव उत्सवमय होते हैं, यह मं दिर सदैव आकाश तत्त्व की ऊर्जा प्रसारित करते रहे ।"

~ परमहंस श्री नित्यानंद जी

बांए: नित्यानंद गणेश एक अद्वितीय, दर्ल ु भ दर्शन पाये जाने वाले - आनन्दमय नर्तन रूप में। दाए: परमहंस श्री नित्यानंद जी प्रमुख देवताओ की ं देवमूर्तीयो के सा ं थ आशीर्वाद देते हुए।

बांए: ग्रेनाइट शिला से बने 8-फ़ीट के श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर की देवमूर्ति, जो भगवान श्री नारायण के जागृत अर्चावतार है।

नित्यानंद संघ, सीएटल आदिनम मे

परमहंस श्री नित्यानंद जी ने 24 फरवरी 2008 को सीएटल, यु एस ए में नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर का उद्घाटन किया, जो पश्चिम जगत के चिदम्बरम क्षेत्र के नाम से अभिशब्दित है । यहाँ के पवित्र धार्मिक अनुष्ठान, भारत में स्थित चिदंबरम मं दिर की वैदिक परंपराओ एवं पं चांगानुसार किये जाते हैं।

चिदंबरम 'आकाश तत्त्व' का प्रतीक हैं, जो पञ्चभूत स्थल (पञ्च तत्त्वओ की ऊर्जा) में से एक है, जहाँ भगवान शिव 'श्री नित्यानंद नटराज' के निराकार रूप में निवास करते हैं। 'श्री नित्यानंद नटराज' सारे ब्रह्माण्ड में आनंद ताण्डव लीला करते हैं ।

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर सीएटल आदिनम, यु एस ए

सीएटल आदिनम चिदम्बरम में नित्यानंद संघ चेतना जागरण हेतु नियमित ध्यान व योग कार्यक्रमो का आयो ं जन होता है । कीर्तन और भक्ति द्वारा दिव्यता के सानिध्य का उत्सव ।

सीएटल आदिनम का संघ हिदं ू उत्स्वों को प्र स्वों माणिक वैदिक पद्धतियों से मनाते है ।

विधिवत पूजा-अर्चना करते व संमृद्ध वैदिक जीवन का पालन करते हुए बालक रथ उत्सव, यात्रा पर देवता जो सबको दर्शन और आशीर्वाद प्रदान करते हुये ।

ऊपर: राधा-कृ ष्ण मूर्ति एवं राम परिवार

मिनाक्षी देवी जी की मूर्ति, जगनमाता, जो भगवान शिव रुपी श्री सुंदरेश्वर की पत्नि है - 8.5 फु ट मूर्ति जो परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा आशीर्वादित है और नित्यानंदेश्वर हिदं ू मं दिर, सीएटल को अनुग्रहित करेंगी ।

पृष्ठभूमि: पवित्र जल तीर, सुन ्थ हरा पाटन तथा मन्दिर गोपुरम, थिल्लई नटराज मं दिर का दर्शन, चिदंबरम, तमिलनाडु, भारत में - जहाँ भगवान नटराज पीठासीन हैं आकार एवं निराकार अवस्था में।

पवित्र चिदंबरम मं दिर का पुनर्निर्माण

नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, सीएटल आदिनम एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है, एक महान दूरदृष्टि और दैव ऊर्जा से परिपूर्ण, अमेरिका के पेसिफिक तथा उत्तरपश्चिम भाग में आध्यात्मिक चेतना का जागरण करने हेतु ।

  • ® देवालय एक मं दिर तेजस्वी जिवंत मूर्तियो का ं निवास एवं नित्य पूजाए ।
  • ® विद्यालय आत्मज्ञानी बालको का ं प्रादर्भाव ु प्राचीन वैदिक ज्ञान के साथ।
  • ® अन्नालय प्रसाद के रूप में रुचिकर सात्विक भोजन उपलब्धि में सेवारत।
  • ® ध्यानालय ध्यान व ज्ञान सं चय का केंद्र।
  • ® सेवालय एक पवित्र ऊर्जा केंद्र विश्व को लाभान्वित करने हेतु प्रतिबद्ध।

युवा भक्त भरतनाट्यम नृत्य प्रदर्शन करते हुए, सीएटल आदिनम में

परमहंस श्री नित्यानंद जी श्री नित्यानंदेश्वर और श्री नित्यानंदेश्वरी के साथ आशीर्वाद देते हुये ।

नित्यनन्देशवर हिन्दू मं दिर, ओहायो आदीनम में स्वयं सेवको की प्र ं शं सा दिवस

भक्त जन परमहंस श्री नित्यानंद जी के प्रवचन को श्रवन करने मन्दिर मे । नीचे: श्री नित्यानंद गणेश और नित्यानंद महालक्ष्मी ।

नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, कोलं बस, ओहायो, युएसए का उद्घाटन परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा 14 अप्रैल 2007 को हुआ । यह मं दिर परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा भारत के बाहर स्थापित प्रथम मं दिर है। यह मं दिर भौतिक रूप से केवल नौ महीनोंमें अस्तित्व में आया था, जब परमहंस श्री नित्यानंद जी ने घोषणा की थी कि ओहायो में एक शिव जी मं दिर स्थापित होगा ।

मं दिर की मुख्य अधिकृ त मूर्तियां हैं, श्री नित्यानंदेश्वर और श्री नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) 7 फु ट लम्बी और 6 टन की ग्रेनाइट की मूर्तियां हैं, जिनके मुख स्वयं परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा शिल्पित किये गए हैं।

मूर्तियां दक्षिण भारत के अरुणाचल पर्वत की दिव्य ऊर्जाव शक्ति का प्रतीक हैं, जहां भगवान शिव जी स्वयं अनंत ज्योतिर स्थम्भ के 'लिङ्गोत्भव' रुप मे प्रकट हुये थे ।

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर कोलं बस आदिनम, यु एस ए

मं दिर उद्घाटन समारोह दो सप्ताह तक चले और परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा अधिकृ त मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा की प्राणप्रतिष्ठा, एक दर्ल ु भ दैवक प्रक्रिया द्वारा सं स्थापित हुई जिससे उनके आशीर्वाद सहित मूर्तियां जीवंत हो उठी। ं

कुम्भाभिषेकम, एक पवित्र विधि है, मं दिर को ब्रह्म ऊर्जा से ऊर्जान्वित करने के लिए, जो मूर्तियों में प्रतिष्ठित होती है, यह मानवता की बहुत बड़ी सेवा है, क्योंकि यह आसपास के क्षेत्रों की सकारात्मक क्षेत्रों ऊर्जा को बढाती है, और शुद्ध दिव्य ऊर्जा सबके लिए उपलब्ध करवाती है।

नित्यनानन्देश्वर हिदं ूमं दिर प्रवेश मार्ग, कोलंबस, ओहायो

ध्यान कार्यक्रम: समुदाय को कल्याण और पूर्णत्व देते हुए ।

रथोत्सव, देवताओ की यात्रा, समस्त समुदाय के साथ दिव्यता के सानिध्य का उत्सव ।

मं दिर सुंदर प्राकृतिक स्थल पर है, जहाँ दो नदियां बह रही है, ओलेंतंञ नदी, और एक छोटी नदी जो इसमें मिलती है। परमहंस श्री नित्यानंद जी ने इन दो नदियो के सं ग ं म को "पश्चिम का प्रयाग" घोषित किया है, तथा इस मं दिर को आध्यात्मिक नाम "ओहायो प्रयाग" दिया है । अमरीकी कुम्भ मेला के समय, अप्रैल १५, २००७ में, स्वामीजी ने कहा था कि – इन दोनो नदियां का सं ग ं म भारत के प्रयाग की भांति है, तथा इस बहाव की दिशा तीन पवित्र नदियो से ं मिलती जुलती है (त्रिवेणी सं गम) - गंगा, यमुना तथा सरस्वती । नदी की सुंदरता तथा शांत वातावरण के कारण, मं दिर भगवान शिव के निवास कै लाश एवं हिमालय की स्मृति दिलाता है ।

वैदिक सं स्कृति के मूल आदर्शों के सं रक्षण हेतु तथा उसके प्रति समर्पित पूजा, हवन एवं वैदिक मं त्र उच्चारण क्रियाएं सं चालित कर तथा सब महान हिदं ू उत्सव मनाए जाते हैं ।

ओहायो प्रयाग - पश्चिम का प्रयाग

समर्पित है और पूजा, होम और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ साथ हिदं ू के लेंडर के अनुसार महत्त्वपूर्ण पर्वों और धार्मिक सं स्कृतियो, वि ं धियो को प्र ं दान करता है । यह मं दिर,भारत से दोनो तरफ की वि ं डिओ स्ट्रीम (two way video stream) से सत्संग, विशेष कार्यक्रम और परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा दिए जानी वाली दीक्षा को प्रसारित करने हेतु प्रौद्योगिक तरह से सज्ज है ।

दायी: श्री नित्यानंद गणेश नीचे: ओक्लाहोमा नित्यानंदेश्वर मं दिर की शोभा बढ़ाते हुए परमहंस श्री नित्यानंद

नंदी देव, भगवान शिव का दिव्य वाहन एवं परम भक्त

नीचे : श्री नित्यानंद सुब्रमन्य

सभी देवी देवताओ की उपस्थिति से शोभित मं दिर का एक दृश्य।

Section 4

नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, ओक्लाहोमा सिटी, यु एस ए का उद्घाटन 30 अक्तूबर 2007 में परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा हुआ था । यह मं दिर गुजरात, भारत के पश्चिम किनारे के प्रभास क्षेत्र मे स्थित 'श्री सोमनाथ मं दिर', जो भगवान शिव के १२ ज्योतीर्लिङ्गो में से प्रथम है - उस ऊर्जाक्षेत्र के प्रतीक के रूप में घोषित है ।

श्री मीनाक्षी देवी, जो सारे विश्व की जगनमाता है । ब्रह्मांडीय उपस्थिति को प्राकशित करती हुई श्री गुरु आत्ममूर्ति।

श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर

नीचे : भक्त जन देवी की नवरात्री उत्सव पर गर्भामनाते हऐ ।

पृष्ठ भूमि : मदराई ु मीनाक्षी मं दिर, मदरई, त ु मिल नाडू भारत और पवित्र जल तीर कु ्थ ण्ड ।

श्री मीनाक्षी देवी, जगनमाता जो मदरई ु व वोश्व की दिव्य महारानी है ।

वर्ष 2009 में उद्घाटित सैन होसे का नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, 'मदराई ु श्री मीनाक्षी मं दिर' की दिव्य ऊर्जा को प्रकाशित करता है, जो की भगवान सुन्दरेश्वर की पत्नी - जगनमता देवी मीनाक्षी, स्व्यं देवी पार्वती स्वरुपिनी का निवास क्षेत्र है । भगवान सुन्दरेश्वर स्वयं भगवान शिव के सबसे सुन्दर और आनंदमय स्वरुप है ।

मं दिर के मुख्य पीठासीन देवमूर्तीयां, देवी मीनाक्षी, शिव लिङ्ग और भगवान श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) है, जो परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा निर्मित, प्रस्थापित और ऊर्जित है।

पश्चिम जगत का मनोरमणीय मदराई ु

श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर की विशाल देवमूर्ती

मं दिर में बच्चों और च्चों वयस्कों के ल स्कों िए तीसरी नेत्र को जागरण की ध्यान प्रक्रिया ।

आदिगुरू श्री दक्षिणामूर्ति, जो विश्व के प्रथम व अदि गुरु है ।

मं दिर में सत्संग और ध्यान कार्यक्रमो का ं नित्य आयोजन होता है

श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (भगवान् शिव और देवी) प्रेमपूर्वक सबको आशीर्वाद देते हुए

विग्रह, जिवंत देवताओ के सा ं निध्य का उत्सव मानाने हेतु वैदिक आगमो अनुसार ं धार्मिक पूजा अनुष्ठानो का आयोजन होता है l

त्रीनेत्र जागरण की ध्यान क्रिया

नीचे : पवित्र स्नान या अभिषेकम विधी का अनुष्ठान ।

श्री नित्यानंद गणेश

दोनो तरफ से (two way) वि ं डिओ कोन्फरेंस द्वारा ध्यान कार्यक्रमो का आयोजन ।

परमहंस श्री नित्यानंद जी की आत्ममूर्ति और श्री गुरु पादका ु

दर्गा ु देवी माँ

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर फिनिक्स आदिनम, यु एस ए

परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा स्थापित, फिनिक्स आदिनम पिछले सात साल़ो से पूजा, ध्यान और उत्सवो का ऊर्जाक्षेत्र है । ब्रह्मांडीय उर्जा से जागृत फिनिक्स आदिनम का मन्दिर स्थल २५०० चौ. फु ट में सं रचित है । श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (शिव और देवी) शिवलिङ्ग के साथ पीठासीन देवता है । २१ से भी अधिक देवता मं दिर मे निवास करते है ।

फिनिक्स आदिनम पारंपरिक हिं दू आदिनम के जीवन सिद्धांतो का अनुसरण करता है। मं दिर में दक्षिण भारत के कांचीपुरम स्थित श्री कांची कामाक्षी मं दिर की ऊर्जा विद्यमान है।

14 फु ट विशाल श्री नित्यानंद वेन्कटेशवर

श्री कृ ष्ण जयन्ती का उत्सव श्री नित्यानंदेश्वर और

देवी नित्यानंदेश्वरी

श्री नित्यानंद वेन्कटेशवर त्रिनेत्र जागरण का प्रदर्शन

ध्यान व योग की पुस्तको को ं दान द्वारा समाज को समृद्ध करना

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर

सेंट लुइस आदिनम, यु एस ए सेंट लुइस आदिनम, दक्षिण भारत की श्री तिरुमला तिरुपति मन्दिर की ऊर्जा सं चारित करता है और पूर्वी अमेरिका के सबसे ऊँ चे वेंकटेश्वर की देवमूर्तियोंमे से एक है । श्री वेंकटेश्वर उनकी पत्नियां - श्रीदेवी और भूदेवी के साथ स्थापित है । सुन्दर शिवलिङ्ग और नित्यानंद गणेश, मं दिर में निवास करते हैं ।

सेंट लुइस आदिनम् प्राकृतिक दृश्य वाले मार्ग पर - नगर से केवल ३० मिनट की दूरी पर है । सुन्दर प्राकृतिक भू-दृश्य, सुहाने जं गल और मिसौरी की पहाड़ियों के बीच बसा , २० एकड़ स्थान में फै ला हुआ है । प्रवेश करते हुये, हम परमहंस उद्यान को देखते हैं, जो पुष्करणी झील के तट पर है। वैदिक समाज का निर्माण

श्री वेंकटेश्वर की विशाल देवमूर्ति का निवास लोक

पीठासीन देवता श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (शिव और देवी) और शिवलिङ्ग, इनके साथ देवी मिनाक्षी, श्री नित्यानंद गणेश, श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर, देवी महालक्ष्मी, तथा और कई मूर्तियां हैं ।

कै लास - भगवान शिव का लोक

टोरंटो आदिनम् को परमहंस श्री नित्यानंद जी ने जुलाई २०११ में उद्घाटित किया था। इस आदिनम को भगवान शिव के लोक, कै लास की समस्त परमचेतना की ऊर्जाओ को प्रसार ं ित करने के लिए आशीर्वाद प्राप्त है। मं दिर की देवमूर्तीयां उसी तरह से विराजमान हैं, जैसे वे महादेव के आस-पास कै लास में विद्यमान हैं ।महादेव के भक्त, तिरुनावुक्करसर, जो एक कवी सं त थे, उनहे एक समय साक्षात कै लास में महादेव

और देवी पारवती के दर्ल ु भ दर्शन प्राप्त हुये थे । वें इस कै लास दर्शन के वृतांत को चौथी तिरुमुरै में गाते हैं । टोरंटो आदिनम के नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर के गर्भगृह में कै लास के वही दर्शन होने की योजना है।

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श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर

बालको हेतु कार्यक्रम जिससे वे वैदिक धर्म का ज्ञान प्राप्त करे ।

अन्न दान - समुदाय में प्रसाद परोसना

सशक्त ध्यान के कार्यक्रम, मन व शरीर का रूपांतरण करने हेतु।

नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, टोरंटो आदिनम आयोजित करता है – नित्य ध्यान व योग कार्यक्रम, नित्य सत्संग और वैदिक अनुष्ठान जैसे पूजा और यज्ञ। यह समाज कल्याण हेतु मानव की आध्यात्मिक आवश्यकताओ की पूर् ं ति करने की हिं दू परंपरा में सेवारत है।

टोरंटो मं दिर द्वारा आयोजित रथ उत्सव नीचे: ध्यान कार्यक्रम और सत्संग

7-फु ट शिवलिङ्ग जो श्री कालहस्ती लिङ्गा की प्रतिमा हैं।

श्री दक्षिणामूर्ति जो परमहंस श्री नित्यानंद जी ने स्वयं अपने हाथो से ं शिल्पित किया है ।

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर ह्यू स्टन आदिनम, यु एस ए

श्री कालहस्ती शिव की ऊर्जाव अनुभव ह्यू स्टन में प्राप्य

आगामी ह्यू स्टन आदिनम के नित्यानंदेश्वर हिदं ूमं दिर का भव्य उद्घाटन होगा –19 देवमूर्ती, 13 ग्रेनाइट और 6 सं गमरमर की देवमूर्तीयां तथा नवग्रहो के सा ं थ । सारी देवमूर्तीयां जीवित परिमाण में होगी। इस ं मं दिर की दर्ल ु भता यह होगी की – भक्त जन उनके निकट जाकर प्रार्थना कर ईश्वर से सम्बन्ध जोड़ कर "निकटतम व व्यक्तिगत अनुभव" प्राप्त करेंगे। विशाल देवमूर्तीयां तथा परमहंस श्री नित्यानंद जी की तीव्र दैविक ऊर्जा भक्तों को क्तों शांति व आनंद के अनुभव कराएगी । ह्यू स्टन मं दिर पूर्ण रूप से आगम शास्त्र के अनुसार निर्माण होगा - जो महादेव द्वारा अनुशासित पवित्र शास्त्र हैं।

श्री दक्षिणामूर्ति जो परमहंस श्री नित्यानंद जी ने स्वयं अपने हाथों से शिल्पित किया है।

Section 5

मुख्य पीठासीन देवता ७-फु ट के श्री कालहस्ती लिङ्ग की सटीक प्रतिकृति है, जो दक्षिण भारत में भगवान शिव की 'वायु तत्त्व' की ऊर्जा को सं चारित करती हैं।

पृष्ठभूमि : श्री कालहस्ती मं दिर, आँध्रप्रदेश, भारत का मं दिर

भगवान श्री नित्यानंद स्वामी , श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी की मूर्तियां

परमहंस श्री नित्यानंद की परार्थमूर्ति और स्वर्ण पादकाएं ु Padukas

आचार्यों द्वारा आयोजित ध्यान शिविर

सप्ताहांत गुरुकु ल कक्षा

(बाएँ) भगवान श्री नित्यानंद स्वामी जी (ऊपर) मं दिर के सभी कार्यों एवं प्रचार कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली गाड़ी ( दाएं ) नैवेद्यम

नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर शार्लेट आदिनम, यु एस ए

दिसं बर 2010 में नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर को 'पादु का मं दिर' (श्री गुरु की पादकाए) के रूप ु में आशीर्वाद प्राप्त हुआ था ।

अक्टूबर 2013 में, विजय दशमी के मं गल पर्व पर स्वामीजी ने मं दिर का मूर्तियो के सा ं थ उद्घाटन किया तथा 'श्री रूद्र होम' तथा 'रुद्रभिषेकम' के पवित्र वैदिक अनुष्ठानो का आयोजन किया गया था । देवमूर्तियां मेरु और आम्बल की हैं, जिनहे परमहंस श्री नित्यानंद जी ने ऊर्जान्वित किया है । मं दिर को आध्यात्मिक नाम 'शार्लेट श्रीसैलम' का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है ।

ओ म ा न

आदीनम् एक ग्रह मं दिर है जिसका आध्यात्मिक नाम ओमान शिवगंगई है| यह मं दिर इस क्षेत्र में रहने वाले हिदं ओु की आध् ं यात्मिक आवश्यकता को पूर्ण करता है एवम कई शक्तिशाली मूर्तियो को ं क्षेत्र में सं रक्षित करता है| इस मं दिर में श्री नित्यानंद स्वामी जी, श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी समेत श्री गुरु की परार्थमूर्ति स्थापित है| इन मूर्तियो से य ं हां का समुदाय अत्यधिक लाभांवित हुआ है|

ओमान आदिनम वैदिक सभ्यता को बढ़ावा देने में एक शक्तिशाली स्तंभ का कार्य कर रहा है| यहां पर योग ध्यान एवं शांति को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यकिये जाते हैं यहां सारे हिं दू त्योहार मनाए जाते हैं एवं नित्यपूजा की जाती है | यहां पर कई चमत्कार जैसे पवित्र वस्तुओ का भौ ं तिकीकरण इत्यादि परम पूज्य स्वामी जी की कृ पा से घटित होते हैं| इस मं दिर में गुरु एवं काल भैरव की ज्वलंत शक्ति उपस्थित है |

ऑस्रेट्लिया का पहला नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर मेलबोर्न आदीनम् परमहंस श्री नित्यानंद द्वारा सन 2015 में घोषित किया गया| यहां की प्रमुख मूर्ति परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी की मूर्ति है जो सं पूर्णऑस्रेट्लिया को आशीर्वाद एवं चिकित्सा प्रदान करती है| मेलबोर्न आदीनम् बेंगलुरु आश्रम के बाहर सबसे बड़ा संघ है जहां पर कई भक्त एक साथ मिलकर नित्यानंद महल में रहते हैं|

सिं गापुर आदीनम् की स्थापना सन 2006 के अक्टूबर माह में हुई थी| यह मं दिर ध्यान एवं योग के लिए परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी द्वारा सशक्त किया गया प्रार्थना स्थल प्रदान करता है| यहां पर भक्ति योग एवं पवित्र वैदिक समारोह का आयोजन किया जाता है|

यहां पर मनुष्य को उसकी उच्चतम क्षमता तक पहुंचाने के लिए कुंडलिनी शक्ति जागरण हेतु कई अभ्यास किए जाते हैं| इसमें नित्य योग, नित्य चिकित्सा , नित्य ध्यान, क्रियाएं एवं सप्ताहांत गुरुकु ल शिक्षा सम्मिलित है|

सिं गापुर संघ द्वारा हजारो सं िं गापुर वासियो को लाभांवित ं किया गया है एवं एक सशक्त शांति और आनंद की समाज में स्थापना की गई है|

भगवान श्री नित्यानंद स्वामी, श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी की मूर्तियां

क्वालालंपुर आदीनम्, मलेशिया सन 2008 में परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था | मं दिर श्रद्धालुओ को योग ए ं वं ध्यान के कई लाभो से अ ं वगत कराता है एवं चैतन्य जीवन की ओर प्रेरित करता है| सप्ताहांत गुरुकु ल में बच्चों को भवि च्चों ष्य के प्रति नई सं भावनाओ की ओर ं वैदिक परंपरा के माध्यम से अवगत कराया जाता है | यहां का जीवंत एवम विविध समुदाय वैदिक त्योहारो के स ं मय आनंद का अनुभव करता है | यहां पर स्थापित मूर्तियां आत्मज्ञान की शक्ति का सं चार करती है|

Bhagavan Sri Nithyananda Swamiji, Sri Nithyanandeshwara

भगवान श्री नित्यानंद स्वामी जी की मूर्ति

(बाएँ): काल भैरव शिव की शक्ति and top: Sri Guru Paduka

नीचे: त्योहार पर अन्नदान और प्रसाद का वितरण

नित्यानंदेश्वरी देवस्थानम, यह हिदं ूमं दिर दक्षिण भारत के हैदराबाद शहर में सन् 2006 में परमहंस श्री नित्यानंद द्वारा घोषित किया गया था|

शांतिपूर्णवातावरण से परिपूर्ण इस पवित्र भूमि पर मं दिर का गोपुरम बहुत ही सुंदरता से खड़ा हुआ है| हरियाली के मध्य मं दिर के प्रांगण में देवी नित्यानंदेश्वरी विराजमान है| श्री गणेश, श्री वेंकटेश्वर, शिवलिं ग,सूर्य एवं नवग्रह इस मं दिर में स्थापित हैं| इस मं दिर में उपस्थित बरगद का वृक्ष परमहंस श्री नित्यानंद द्वारा स्वयं रोपित किया गया था जो ब्रह्मांडीय उर्जा का सं चार कर रहा है|

श्री नित्यानंदेश्वरी देवस्थानम, हैदराबाद

वाई, पुदु च्चेरी में स्थित नित्यानंदेश्वर हिं दू मं दिर की स्थापना सन् 2014 में परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद द्वारा द्वारा की गई|

यहां पर भगवान श्री नित्यानंद स्वामी, श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी की मूर्तियां है| यहां पर स्फटिक लिग और ं श्री चक्र भी मौजूद है|

यहां पर श्रीविद्या होम, गुरु होम, और गणेश होम जैसी पूजाएं यहां के समुदाय को नियमित रूप से लाभान्वित करती हैं| परम पूज्य परम हमसे नित्यानंद यहां पर नियमित रूप से कल्पतरू कार्यक्रम का आयोजन करते हैं जिसमें दक्षिण भारत से हजारो लोग स ं म्मिलित और लाभान्वित होते हैं|

समुद्र के किनारे ईस्ट कोस्ट रोड के पास, चेन्नई तिरुवन्मियूर आदिनम, दक्षिण भारत में, नित्यानंद संघ का एक प्रमुख आदिनम है। मं दिर में श्री नित्यानंदेश्वर, श्री नित्यानंदेश्वरी त था परमहंस श्री नित्यानंद जी की ऊर्जान्वित देवमूर्तियां विद्यमान हैं । यह गुरुमूर्ति विशेष रूप से परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा ऊर्जान्वित की गयी है, भक्तों को क्तों जीवन के हर आयाम में पूर्णत्व का आशीर्वाद प्रदान करने हेतु । ये देवमूर्तियां, शक्तिशाली जागृत विग्रह है, जो प्रा र्थनाओ का ं उत्तर और स्पष्टता देती हैं और वरदान देती हैं । इन देवमूर्तियो और ं गुरु पादकाओु पर कई बार विभू ं ति का प्रकटन हुआ है, जो मं गल सं के त है कि ईश्वर ने प्रा र्थना स्वीकार की है ।

आदिनम एक मनभावन स्वर्ग है, आतंरिक शांति हेतु और यात्री यहाँ आते हैं, चेन्नई के सुप्रसिद्ध व्यक्तियो से लेकर आसपास के गा ं वों से मछुआरो तक। ं मुख्य कार्यों में ध्यान कार्यक्रम सञ्चालन, जीवं त और "टू वे कॉन्फ़्रेंसिगं " द्वारा, घरों में पूजा व हवन, नित्य आध्यात्मिक उपचार, त था आध्यात्मिक परामर्श, अन्नदान एवं अन्य कई कार्य हैं ।

एक जैविक सब्ज़ियो का उ ं द्यान और एक गोशाला भी जल्द आने वाले हैं।

नित्यानंद पीठम चेन्नई, तिरुवान्मियूर, भारत

नित्यानंद पीठम तिरुवन्नामलई आदिनम, भारत

दक्षिण भारत की पवित्र मं दिर नगरी, तिरुवन्नामलई, जो परमहंस श्री नित्यानंद जी का जन्मस्थल है, यहाँ का आदिनम, एक सुन्दर मठ है, जो अरुणाचल पर्वत, भगवान शिव का भौतिक स्वरुप, उसके तले स्थित है।

Section 6

आदिनम मे पवित्र वटवृक्ष है और इस दिव्य शांति क्षेत्र में नियमानुसार पूजाएं की जाती है, जो भगवान शिव का ही ऊर्जाक्षेत्र है। परमहंस श्री नित्यानंद जी यहाँ पर कई हज़ारो लोगो ं के ल ं िये ध्यान कार्यक्रम का आयोजन करते हैं, त था उन्हें शांति, कल्याण एवं चेतना का आशीर्वाद प्रदान करते है।

हर माह की ' पौर्णमी' के दिन व रातों में त था विशेष उत्सवो के दिनों में यहाँ हज़ारो तीर ं ्थयात्री, भिक्षुक और भक्तों को क्तों महाप्रसाद के रुप मे अन्नदान दिया जाता है।

चिकित्सा शिबिर त था सप्ताहांत गुरुकु ल कक्षाएं सं चालित कर स्थानीय समाज को लाभान्वित किया जाता है।

"जो भी जीवन मुक्ति के विज्ञान को स्वीकार करता है और उसे अपने जीवन में प्रकाशित करता है और दूसरो को इस ं महान धम्मा से लाभान्वित करता है, मैं उन्हेंही नित्यानंद संघ कहता हूँ।"

  • परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद जी

नित्यानंद संघ, सैन डिएगो, यु एस ए

नित्यानंद संघ, न्यू यॉर्क, यु एस ए नित्यानंद संघ, शिकागो, यु एस ए

नित्यानंद संघ, वाशिं गटन डी सी, यु एस ए

नित्यानंद संघ, वेलिङ्गटन, न्यूज़ीलैंड

नित्यानंद संघ, दु बई आदिनम, यू ए ई

नित्यानंद संघ, मेक्सिको

नित्यानंद सत्सङ्ग केद्र, कस्तव, क्रोएशिया

नित्यानंद संघ, लंदन आदिनम

नित्यानंद संघ, कै लगरी, कै नडा

नित्यानंद संघ, मिनेसोटा, यु एस ए

नित्यानंद संघ, दिल्ली, भारत

नित्यानंद संघ, मुं बई, महाराष्ट्र, भारत

नित्यानंद संघ, वदोदरा, गुजरात, भारत

नित्यानंद संघ, बेंगलुरु, कर्णाटक, भारत

नित्यानंद पीठम, इरोड आदिनम्, तमिल नाड

नित्यानंद पीठम, होसुर आदिनम, तमिल नाड

नित्यानंद पीठम, सेलम आदिनम, तमिल नाड ु

नित्यानंद वैश्विक संघ ऐसे लोगो का आध् ं यात्मिक संघ है, जिन्होंने अपना िन्हों जीवन धर्म और गुरु, परमहंस श्री नित्यानंद जी द्वारा सिखाए सत्य के पथ पर समर्पित किया है ।

सत्संग केंद्र, घर तथा समुदाय मं दिर पूरे विश्व के ४७ देशो तं था ३४७ नगरोंमें वृद्धि प्राप्त कर रहे हैं । प्रतिबद्ध स्वयं सेवक आध्यात्मिक ज्ञान को मं दिर सेवाओ, ध्ं यान कार्यक्रमो, आध् ं यात्मिक उपचार, समाज विस्तार, सकारात्मक चेतना वृद्धि द्वारा प्रसारित कर, सब जीवो तं था पृथ्वी को आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं।

गुरु का सत्यनिष्ठ वैश्विक संघ

नित्यानंद पीठम, तिरुपथुर आदिनम्, तमिल नाड ु

नित्यानंद पीठम, कोयम्बटूर आदिनम्, तमिल नाड ु

नित्यानंद पीठम, तारामं गलम आदिनम्, तमिल नाडु

नित्यानंद पीठम, सीरगापाटी आदिनम्, तमिल नाड ु

नित्यानंद पीठम, सिरकाली आदिनम्, तमिल नाड ु

नित्यानंद पीठम, रासिपुरम आदिनम्, तमिल नाडु

नित्यानंद पीठम, पट्टनम आदिनम्, तमिल नाड ु

नित्यानंद पीठम, मदु रै आदिनम्, तमिल नाडु

सं पूर्ण दिव्यता को समेटे यह भव्य वैभवशाली मं दिर पृथ्वी के अरबोंमनुष्यों की दैवी आस्था और भौतिक मनोरथ को पूर्ण करने का 'धाम' व महातीर्थस्थल बनेगा। इसका पवित्र ऊर्जाक्षेत्र मानव को पूजा, समर्पण, ध्यान और आगम विधियो से ं जुड़े उत्सवो द्ं वारा दिव्यता से जुड़ने व अनुभूति करवा कर वैदिक युग के आगमन की घोषणा करेगा।

स्वयंभू नित्यानंदेश्वर स्वर्णमं दिर नित्यानं द पीठम, बेंगलुरु आदिनम, भारत

वर्ष2014 में परमहंस श्री नित्यानंद जी के पवित्र निर्देशन में विश्व के सबसे बड़े शिवमं दिर के निर्माण के लिये नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम में नित्यानंदेश्वर मं दिर का निर्माण आरंभ हुआ, जो आधुनिक युग में भगवान शिव के लिये पहला स्वर्णमं दिर है। मं दिर का निर्माण भगवान शिव के शासन अनुसार 'आगम शास्त्र' के आधार पर किया जा रहा है।

'' यह महादेव, शिव के लिये पहला स्वर्णमं दिर है। महादेव के पहले भी सोने से निर्मित मं दिर थे। तंजौर में (बृहदीश्वर मं दिर) सोने का मं दिर था। दु र्भाग्यवश, आक्रमण के समय इसका सोना निकाल लिया गया। आधुनिक युग में महादेव के लिये यह पहला स्वर्णमं दिर होगा।

मं दिर का मुख्य भाग स्वर्ण की परत से ढंका हुआ होगा – गर्भगृह, मुख मंडप (गर्भमं दिर के सामने स्थम्भ की सभा), अर्द्धमंडप, महामंडप, बसं त मंडप और आदि ..."

~ परमहंस श्री नित्यानंद जी

पत्थर के स्तम्भ और द्वारें जो आगामी मं दिर के लिए हैं ।

नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम के दिव्य सुवर्णमं दिर के निर्माण कार्य प्रगती पर है । पत्थर और मिटटी कार्य, तथा नीव की स्थापना ।

अध्यात्मिक प्रेरणा के रूप में परम पूज्य परमहंस नित्यानंद जी ने निम्नवत् मं दिरो की स् ं थापना की :

  • ® 15 हिंदू मं दिर, भारत में – बेंगलुर, सलेम, होसुर, राजपालयम, तिरुवन्नामलई, पोडंिचेरी, चेन्नई, इरोड, मदु रै, कांचीपुरम, हैदराबाद, वाराणसी, सीरगापडी, रासीपुरम त था सिरक़ाज़ी में।
  • ® 17 मं दिर विश्व भर में - अमेरिका में लॉस एंजेलिस, सियेटल, ओहायो, ओकलाहोमा, सैन होसे, न्यूार्क, सेंट लुई, फीनिक्स, ह्यूस्टन, शैरलट, वौशिङ्गटन डी सी। कै नडा में टोरंटो, न्यूजीलैंड, सिगापुर, गुआ ं डेलुप, ओमान। आस्रेट्लिया में मेलबोर्न, मलेशिया में क्वाला लम्पुर।
  • ® भारत में 8 और मं दिरो की स् ं थापना हेतु कार्य चल रहा है।

ये मं दिर दिव्य ऊर्जा केंद्र व अ ध्ययन केंद्र के रूप में लोगों को उनके स्थानो तक ं वैदिक जीवन पद्धति को पहुंचाने के रूप में सेवा प्रदान कर रहे हैं ।