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22. अत्याधुनिक वैदिक तकनीकों का पुनःआविष्कार

# अत्याधुनिक वैदिक तकनीकों का पुनःआविष्कार

धातु विज्ञान (लौहतं त्र), वैदिक विमानो ं का निर्माण, बैटरी भं डारगृह, पनडुब्बी आदि

प्राचीन मनीषी एवं ऋषि गण सर्वाधि क अग्रणी एवं विलक्षण लोग थे। अपने प्रबुद्ध मस्तिष्कों एतिष्कों वं करुणामय हृदय से उन्होंने उत्त न्हों म, अत्याधुनि क वैदिक तकनीक और आविष्का रो ं से असामान्य जीवन सुविधाओ ं को सामान्य जीवन पद्धति के रूप में बना दिया। उदाहरण के लिये, वैदिक काल में ये सभी सामान्य जीवनचर्यामें सम्मिलित थे:

विमानो,ं कई तल्लों वाले उड़न यंत्रों एत्रों वं रथो ं में उड़ना, वायुगामी रथ, मं त्र, वायु, विद्युत एवं प्रकाश शक्ति चालित रथ। अन्य परिवहन यं त्र पनडुब्बी की तरह गहरे जल के भीतर और धरती पर अति तीव्र गति से चलाये जाते थे।

प्रकृति की शक्ति के दोहन से ऊर्जा एवं प्रकाश उत्पन्न करने के विज्ञान और अत्याधनिु क विद्युत बैटरियो ं के विकास में दक्ष।

'हमारे गुरुओ ं ने आतं रिक शक्तियो ं एवं बाह्य तकनीको ंका प्रयोग किया और मानवता के लिये प्रचुर आराम एवं सुख साधन प्राप्त किया। मैं एक प्रयोगशाला का निर्माण करना चाहता हूं, जहां हम हजारोंवर्ष पूर्व अगस्त्य ऋषि द्वारा निर्मित उड़न यंत्रों एत्रों वं आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियो से बनी बैटर ं ियो के वि ं ज्ञान को वापस लायेंगे। हम एक विशाल प्रयोगशाला का निर्माण करेंगे जहां ज्ञान का प्रयोग एवं निर्माण करके विश्व के समक्ष वैदिक तकनीक का प्रदर्शन किया जा सके गा।''

~ परमहंस नित्यानंद

वैदिक शास्त्र घोषणा करते हैं कि सभी उपस्थि त वस्तुओ ं के सा थ ब्रह्माण्ड एकाकार में मूलबद्ध बुद्धिमत्ता, प्रचुरता एवं परमानंद के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब इन शक्तियो ं का पुर्नआविष्कार होता है तब अनंत प्राकृ तिक सं साधनो ं जैसे ध्वनि, वायु, अग्नि एवं प्रकाश इत्यादि शक्तियो ंका उपयोग दैनिक जीवन में किया जाता है।

भूदेवी अर्थात धरती माता के प्राकृ तिक सं साधनो ं जैसे जल, इंधन, वन, धातुओ ंऔर जीवो ंको नष्ट करके अत्यधिक क्षति पहुंचाई गयी है। वैदिक तकनीक इस समस्या का पूर्ण समाधान कर देगी। पृथ्वी, प्रकृ ति और जीवो ंके सा थ ब्रह्माण्ड के संवेदनशील दैवी सं तुलन को फिर से उसी तरह स्थापित किया जायेगा, जैसा कि यह समृद्ध, प्रबुद्ध एवं शांतिपूर्ण वैदिक युग में था।