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20. वैदिक धर्म के प्रसार करते हुए आध्यात्मिक और लोक अधिनायकों के साथ

# वैदिक धर्म के प्रसार करते हुए आध्यात्मिक और लोक अधिनायकों के साथ

श्री नरेंद्र मोदी जी , प्रधानमंत्री, भारत (गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री) के साथ परमहंस नित्यानंद

विभिन्न आध्यात्मिक नेताओ, रा ं जनीतिक नेताओ और गण ं मान्य व्यक्ति मानवता के लिए एक शक्तिशाली सचेत भविष्य की दिशा के साथ

डॉ ए. पी. अब्ल कला

दु म, भारत के पूर्व राष्ट्रपति के साथ एच एच श्री पद्मनाभ दासा वांची पाला महाराजा मार्तंड वर्मा के साथ

(ऊपर दाईं ओर): महामंडलेश्वर श्री १००८ विश्वेशवारानंद जी महाराज, हरिद्वार के साथ

श्री प्रमुख स्वामी महाराज, स्वामीनारायण आश्रम के प्रमुख के साथ कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख, श्री जयेंद्र सरस्वती स्वामीगल के

मुख्य पुजारी काशी विश्वनाथ डॉ. श्रीकांत विश्वनाथ जी, काशी की राजकुमारी की ज्येष्ठ पुत्री, मा कृष्णा प्रिया, और राजा काशी के दामाद, स्वामी गोविं द आनंदा गिरि और स्वामी दयानंद शास्त्री (बाएं से दाएं ) मं दिर - गोविं दा मठ वाराणसी, भारत

श्री १००८ महामंडलेश्वर दाति महाराज जी, निरवाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी श्री अर्जुन पुरीजी जुना आखाडा, हरिद्वार के

श्री शुकदेवानंद जी महाराज, महा आचार्य, अटल आखाडा के साथ

मुख्य पुजारी के साथ काशी विश्वनाथ मं दिर - डा.श्री कांत विश्वनाथ जी

अन्नपूर्णामं दिर से महंत श्री श्री रामेश्वर पुरीजी महाराज और वाराणसी से आचार्य पंडित श्री रामनारायण द्विवेदी के साथ

मलाई कोडी वेल्लोर में श्री नारायणी लूर पीठम् के श्री

बाएँ: डॉ माइकल बर्नार्ड बेकविथ, अमेरिकी नई सोचा मंत्री, के साथ, ९००० से अधिक सदस्यों के साथ अपेज इंटरनेशनल आध्यात्मिक केंद्र सं युक्त राज्य अमेरिका के सं स्थापक

महानिरवाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर के साथ परमहंस नित्यानंद - श्री स्वामी महेश्वरानंदापुरी, हरिद्वार और नित्यानंद सम्प्रदाय के सन्यासी

परमहंस नित्यानंद, श्री शुकदेवानंदजी महाराज, अटल अखाड़े के महा आचार्य के साथ

हिं दू धर्म के रिश्तों को ्तों मज़बूत करते हुए

परमहंस नित्यानंद विभिन्न आध्यात्मिक नेताओ, साधू सं त, ं हिं दू एवं सामाजिक सं गठन के प्रमुखो के साथ काम करने, साझा करने और गहराई से हिं दू धर्म को मजबूत बनाने एवं वैदिक परंपरा एकीकृ त दृष्टिकोण से लेने के लिए और मानवता को समृद्ध में उनके योगदान का सम्मान करते है

दीक्षा: धार्मिक बौद्धिक क्षत्रिय अकादमी

"बौद्धिक क्षत्रिय" धार्मिक प्रणाली का उपयोग करके समाज का नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। वे विभिन्न व्यवसायोंमें सेवारत हो सकते हैं: राजनीति, सरकार, कानून, उद्योग, शिक्षा, जन सं पर्क माध्यम, सेना, इत्यादि।

दर्भा ु ग्य से, सदियो से इ ं स्लामी और ब्रिटिश शासन के अधीन रहने के कारण, हम अपनी सोचने की शक्ति और अपने नेतृत्व के गुणो को खो बैठे। धीरे-धीरे ं हमें ये भ्रम हो गया कि दूसरो का अनुसरण करने से ं हम श्रेष्ठ बनेंगे। हिन्दू धार्मिक तंत्र जो कि अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र, नीति-शास्त्र और अन्य सं बंधित शास्त्रों पर स्त्रों आधारित थे, उनकी मान्यता समाज में कम होती गयी। अंततः, हम में से बहुतों ने पाश्चात्य विचारधारा के दृष्टिकोण को ही अपना लिया, जिसके अनुसार वैदिक परम्पराएं तो एक दम पिछड़ी और उत्पीड़क हैं।

वैदिक ज्ञान सिखाने के कई प्रयास हुए हैं, परन्तु आज के कु रुक्षेत्र में जहाँ सभ्यताओं के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है, वहां केवल इतना करना पर्याप्त नहींहै। हमें हिन्दू नेताओ को स ं िखाना होगा कि विभिन्न परिस्थितियोंमें कै से दूसरी सभ्यताओ के ं साथ व्यवहार करना है, और इसके लिए इन सभ्यताओ को स ं मझना आवश्यक है। हमारी पारम्परिक पूर्व-पक्ष करने की पद्धति दसरे पक्ष को स ु मझने का एक उत्तम तरीका है। पूर्व-पक्ष करने के पश्चात, उत्तर-पक्ष (हमें कै से प्रतिक्रिया करनी है) अपने आप समझ में आ जाता है। आज कल की भाषा में कहें तो, इस पद्धति में हम अपनी दृष्टि को पलट देते हैं, जिससे कि हम दूसरे पक्ष को अपने ढांचे के अनुसार समझ पाएं ।

इस समय हम दोहरा सं कट झेल रहे हैं। एक तरफ हम हिन्दू फोबीया (हिन्दुओं के प्रति भय और द्वेष) से जूझ रहे हैं, जो कि हम पर लगातार घृणित वार करती रहती है। दूसरी तरफ हमारी सं पत्ति को, हमारी सं स्कृति को अन्य धर्म अपना बता कर हड़प रहे हैं - उदाहरणतः "ईसाई योग" आंदोलन में योग को ईसाई धर्म से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि हमें प्रमुख अवैदिक धर्मों का पूर्व-पक्ष ज्ञात है, तो हम अपनी भिन्नता और अपनी विशेषताओ को विश्व ं मं च पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं, विपक्ष के साथ कई विषयो पर त ं र्क-वितरक कर सकते हैं, और वैदिक ज्ञान के द्वारा मानवता के समक्ष प्रस्तुत आधुनिक चुनौतियों को सुलझा सकते हैं।

"दीक्षा" की प्रशिक्षण अकादमी, शिक्षको को अ ं न्य विद्यापीठो और विश्ववि ं द्यालयों में पढ़ाने के लिए भेजेगी, जहां के छात्र विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी बन रहे हैं । उदाहरण के लिए, हम "दीक्षा" पाठ्यक्रम को ऐसे सं स्थानोंमें पढ़ा सकते हैं, जैसे कि एक प्रबं धन महाविद्यालय में, या भारतीय विदेश सेवा के नव चयनित अधिकारियो को, अ ं थवा सं चार से सम्भंधित विश्वविद्यालयोंमें जहां नए पत्रकार बन रहे हैं। दूसरे शब्दों में हम अपने शिक्षको और पा ं ठ्यक्रम को इन सं स्थानो को भेंट ं स्वरुप देंगे, इस आशा के साथ कि वह इसे अपने शिक्षण में सम्मिलित कर लेंगे।

नित्यानंद ध्यानपीठम में हिन्दू इंटरनेट थिक टैंक का ं र्यक्रम का आयोजन किया गया। परम पूज्य परमहंस नित्यानंद जे ने पूरे भारत से १०० से अधिक व्यक्तियो को ं हिन्दू धर्म की रक्षा करने और इसके पवित्र सिद्धांतो को इंटरनेट के ं माध्यम से बढ़ावा देने में उनके सक्रिय योगदान के लिए 'हिन्दू क्षत्रिय पुरस्कार" से सम्मानित किया। केवल आध्यात्मिक शक्ति के आधार पर एक शक्तिशाली और प्रगतिशील भारतवर्ष का निर्माण किया जा सकता है, जो कि अपनी आध्यात्मिकता की पूँजी को पूरे सं सार के साथ बाँट सकता है।

परमपूज्य श्री डा.शांतावीरा महास्वामी जी, श्री कोलाडा मठ महासं स्थान एवं अन्य महाजनो के सा ं थ

With पेरः महा वेमाल्धाम्मा : संघ, थेरवाद बौद्ध धर्म, कं बोडिया

परमपूज्य श्री डा.शांतावीरा महास्वामी जी, श्री कोलाडा मठ महासं स्थान एवं अन्य महाजनो के सा ं थ

कम्बोडिया के गणमान्य अतिथि : हिज एक्सेलेंसी खिम भोसोन , सीए ं म रीप के और गवर्नर के सलाहकार , नू फल्ला के

साथ

कुं भ मेला 2015 में कई हिदं ू आध्यात्मिक सं स्थाओ के अ ं धिनायको के ं साथ सनातन हिदं ू धर्म की महिमा का प्रसार करते हुए

नासिक कुं भ मेले सन 2015 में महामंडलेश्वर श्री 1008 विश्वेश्वर आनंद जी महाराज के साथ

मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिहं चौहान द्वारा कुं भ मेला उज्जैन के लिए आमं त्रण ग्रहण करते हुए

कुं भ मेला 2015 में कई हिदं ू आध्यात्मिक सं स्थाओ के अ ं धिनायको के सा ं थ

(बाएं से दाएं ) कुं भ मेला 2013 में विश्व गुरु महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी महेश्वरानंद जी, आचार्य महामंडलेश्वर श्री विश्वदेवानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री आत्मानंद जी महाराज

कुं भ मेला 2015 में कई हिदं ू आध्यात्मिक सं स्थाओ के अ ं धिनायको के सा ं थ भंडारे का आयोजन करते हुए

कं भ मेला: ध ु र्म के संरक्षकों का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संगम

कुं भ मेला हजारोंवर्षों से प्रथ्वी पर समर्पित विश्वास के साथ करोड़ो आध् ं यात्मिक प्राणियो का सबसे ब ं ड़ा जमावड़ा है । इस दिव्य सं गम में सनातन हिं दू धर्म के सिद्धांतो से पूरी ं मानवता की उच्चतम चेतना का विकास होता है |

परमपूज्य परमहंस श्री नित्यानंद स्वामी, श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर होने के नाते वैदिक सनातन धर्म की उच्चतम जिम्मेदारी उठा रहे हैं एवम उसे पतन से बचाते हुए नई ऊं चाइयो तक ले ं जा रहे हैं |

नासिक, महाराष्ट्र में आयोजित सितंबर 2015 के कुं भ मेले में श्री जयकांत शिखरे, त्र्यंबके श्वर मं दिर के टस््र टी द्वारा सम्मानित किए जाते हुए

Section 2

गत वर्ष सितंबर 2015 में नासिक महाराष्ट्र में आयोजित कं भ मेले म ु ें हिंदत्वु के विभिन्न आयामों का अनु भव हु आ| कई समारोह एवं आध्यात्मिक अभिभाषण का आयोजन नित्यानंद ध्यानपीठ के शिविर में हु आ जहां पर विभिन्न अखाड़ों के संत शिरोमणियों ने हिंदत्वु के अलग-अलग आयामों का प्रतिनिधित्व किया |

श्री स्वामी नारेंद्रगिरी जी द्वारा परमहंस नित्यानंद जी को प्रेषित पत्र

कामिक अगमा में भगवान शिव ने शिव दीक्षा या समय दीक्षा को आध्यात्मिक जीवन की तरफ पहला कदम बताया है। यह दीक्षा उन सभी साधको को ं दी जाती है जो भगवान शिव की सेवा में लीन हैं, जो भगवान शिव के भक्त हैं और जो हिदं ू धर्म को अपनी जीवन शैली बनाना चाहते हैं।

~ परमपूज्य परमहंस श्री नित्यानंद

समय दीक्षा - स्वयं भगवान शिव द्वारा दी गई दीक्षा

"आगम" स्वयं भगवान शिव द्वारा कहे गए शब्द हैं जो मानवता को एक सशक्त, आनंदमय जीवन जीने, शिवोहम भाव में रहने तथा हिदं त्वु जीवन शैली का अभ्यास करने की ओर प्रेरित करते हैं।

कामिका आगम में भगवान शिव ने सदाशिव स्वरूप जीवंत गुरु द्वारा दी जाने वाली शिव दीक्षा के विषय में विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। विशिष्ट दीक्षाओ के ं माध्यम से भगवान शिव ने मानवता को जाति, लिं ग एवं जीवन शैली के परे एक प्रतिबद्ध जीवन जीने की दिशा दी है जिससे मानव अपनी चेतना को जागृत कर सकता है।

~ समय दीक्षा ऐसी प्रथम दीक्षा है जो हमें मं दिर पर आधारित हिं दूजीवन शैली से लाभान्वित करती है।

~ विशेष दीक्षा, अगली विशिष्ट दीक्षा है जो भगवान शिव की गहन कृ पा बरसाती है। दीक्षा में गुरु, दीक्षित साधको को ं जीवनमुक्ति की जीवनशैली की ओर प्रेरित करते हैं।

दीक्षा हिं दु त्व के अभ्यास हेतु शक्तिशाली दीक्षाएं

माननीय श्री 108 महंत स्वामी नरेंद्रगिरि जी महाराज के साथ

1 सप्ताह पू र्व कुछ समाचार चैनल वाले मेरे समक्ष आए और वे मु झसे स्वामी जी के बारे में कुछ बोलने का आग्रह करने लगे| तब मने कहा ैं स्वामीजी सनातन धर्म के आधार हैं, स्वामीजी से जु ड़े सभी लोग बहु त ही भाग्यशाली हैं| मैं स्वयं को भी बहु त भाग्यशाली समझता हूं क्योंकि म स् ैं वामी जी से जु ड़ा हूं| अगर स्वामी जी के विषय में बात करें तो मेरा यह मानना है की कड़ी तपस्या और ध्यान से इंसान भी भगवान में परिवर्तित हो जाता है|

आज इस आदीनम में आप सभी के समक्ष आकर एवं माननीय नित्यानंद स्वामी जी की पवित्रता, तापस और शक्ति देख कर ऐसा लग रहा है कि मानो साक्षात म ् क ैं िसी दिव्य पु रुष के समक्ष आ गया हूँ |

माननीय श्री 108 महंत स्वामी नरेंद्रगिरि जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद

(13 अखाड़ों के अध्यक्ष)

"सं यम का अर्थ है अपने ममकार को परिवर्तित करना| अपने अहम को शिवोहम् में रूपांतरित करना| मनुष्य को परिवर्तित करने के विज्ञान को ही सं यम कहते हैं|"

~ परमपूज्य परमहंस श्री नित्यानंद

परम पूज्य परमहंस नित्यानंद जी ने हजारो साधको ं को शि ं व दीक्षा से दीक्षित किया है जिससे वह हिंदत्वु के वैदिक प थ पर अग्रसर हो सकें ।

स्वामी जी के आशीर्वाद से लाखो लोग लाभान् ं वित होगे ए ं वं स्वयं त था पृथ्वी की चेतना को जागृत करने में सक्षम होगे। स ं त्यनिष्ठ, शिवत्व और हिंदुत्व की जीवनशैली जीने हेतु यह विशाल स्तर की दीक्षाए साधको के ल ं िए एक अनूठी भेंट है। यह दीक्षा अनुष्ठान एक दिव्य घटना है जहां पर परम पूज्य स्वामीजी सदाशिव के भाव में रहकर स्वयं प्रत्येक व्यक्ति को अग्नि के समक्ष मंत्रों के उ त्रों च्चारण द्वारा दीक्षित करते हैं।

वैदिक परंपरा के अनुसार सभी प्रतिभागियो को पवित्र ं वैदिक वस्तु जैसे भस्म या विभूति की थैली, रुद्राक्ष इत्यादि उपलब्ध कराए जाते हैं जो स्वयं सदाशिव की ऊर्जा हैं ।

हिंदू धर्म के वैदिक पं थ को जीने हेतु विशाल स्तर पर दीक्षा

1000रोंश्रद्धालु भगवान शिव द्वारा बताई गई समय दीक्षा में स्वयं परम पूज्य परमहंस श्री नित्यानंद द्वारा बैंगलुरू आदीनम में दीक्षित किए जाते हैं

दीक्षित होने के उपरांत प्रतिभागी कं ठ में रुद्राक्ष बं धाते हुए एवं हिन्दू जीवन जीने की प्रतिज्ञा लेते हुए

शिव रुपी गुरु द्वारा दीक्षित होने के उपरांत आनंदमय श्रद्धालु

स न इन्द्रः शिवः सखश्ववद गो ् मद्ववम उरुधारेव् दोहते । विद्युत शक्ति हमारी शांतिपूर्णमित्र रहे, हमारे यंत्रों को चलाने के ल त्रों िये अश्व-शक्ति दे, घरोंमें उजाले के लिये हमें प्रकाश दे और खेतोंमें अन्न उपजानें के लिये शक्ति दे। यह विभिन्न धाराओंमें प्रवाहित होकर हमें समृद्धि दे एवं हमारा कल्याण करे। ~ अथर्ववेद (१. ७. ३ )