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19. मधुकरी भीक्षा

# मधुकरी भीक्षा

लाभांवित करने का एक अनूठा तरीका

वैदिक सं प्रदाय में सन्यासी घर-घर जाकर लोगो से सं प ं र्क बनाते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं| दीक्षा के लिए जाना कोई साधारण घटना या भीख मांगना नहींहै | यह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुष्ठान है जिसमें आध्यात्मिक चिकित्सा, पवित्र विभूति का वितरण, ध्यान पर पुस्तिकाएं और आध्यात्मिक समाधान लोगो के सा ं थ बांटे जाते हैं।

यह परंपरा स्वयं महादेव के समय से चली आ रही है जब महादेव भिक्षाटन के रूप में भिक्षा मांगने के लिए जाया करते थे और मनुष्यों को पर ्यों म ज्ञान प्रदान कर उनके कर्म से मुक्ति दिलाया करते थे |

सं युक्त राज्य अमेरिका में सरकारी अधिकारियो के सा ं थ नित्यानंद सं प्रदाय के सन्यासी

ऋषि परम्परा

दीक्षित गृहस्थ

परमहंस नित्यानंद जी साधको को ऋ ं षि परंपरा में भी दीक्षित करते हैं। ये ऐसे साधक हैं जो पारिवारिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हुए आत्मज्ञान की प्राप्ति के मार्ग का अनुसरण करते हैं, पति एवं पत्नी आध्यात्मिक पथ पर एक दूसरे का समर्थन करते हुए, अपने बच्चों को च्चों आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करते हैं।

किसी भी विवाहित युगल के लिए एक प्रबुद्ध गुरु के साथ निवास करना सर्वोत्तम सं योग है। हमें जो स्पष्टता प्राप्त होती है वो हमें जीवन को समग्रता में समझते हुए, अपूर्णताओ से पी ं ड़ित हुए बिना सरलता से अग्रसर होने में सहायता प्रदान करती है। असहमतियो की पुनरा ं वृत्ति काफी कम हो गई है, हम पर उनके प्रभाव की तीव्रता भी काफी कम हो गई है और हम शीघ्रता से सं भल जाते हैं। ऐसा स्वामीजी द्वारा वैदिक जीवन शैली से हमारे साथ साझा की गई अद्भुत तकनीको एं वं समाधानो के कारण ं है। स्वामीजी के मार्गदर्शन में हमारे दोनो बं च्चे, तत्त्व एवं परमेश, अदभुत युवाओ के रूप ं में खिल रहे हैं, बिना उस तनाव के जिसके साथ आम तौर पर उच्च प्रदर्शन वाले व्यक्ति रहते हैं।

  • श्री ऋषि नित्य अद्वैतानंद, नित्यानंद ऋषि परंपरा प्रशासनिक प्रमुख, नित्यानंद विद्यापीठ

शिक्षा के माध्यम से जीवन को आभूषित करने की जीवन शैली से पहले, ऋषि अद्वैत फार्च्यून २०० कम्पनी में कार्यरत एक निपुण आईटी व्यवसायी थे।

ऋषि विश्व को आभूषित करने का उच्चतम उत्तरदायित्व लेते हैं। वे ध्यान एवं योग कार्यक्रमो के सञ् ं चालन द्वारा मानवता को चरम जीवन जीने की ओर अग्रसर करते हैं। वे टेलीविज़न कार्यक्रमो के सञ् ं चालन एवं ऑनलाइन साधनो के उपयोग से पर ं महंस नित्यानद जी के द्वारा व्यक्त किये गए पवित्र सत्यों की ओर विश्व का त्यों मार्गदर्शन करते हैं।

सन्यासी एवं ऋषि वैदिक ज्ञान का प्रसार करते हुए

सं सार के आरोग्य हेतु

अध्यात्मिक उपचार में दक्ष सं न्यासी विश्वभर में पीड़ितो को अध् ं यात्मिक आरोग्य प्रदान करते हैं

परमहंस नित्यानंदा स्वामीजी डॉ.श्री प्राणनंदा स्वामी को चिकित्सा मे दीक्षा देकर अपने सकिर्य छड़ी दिया और आशीवाद देते हुए कहा "यह एक वैडयशवरा (एक महान आरोग्यकार) हो जाएगा। जो व्यक्ति कोई भी बीमारी की चिकित्सा के लिए आए,इस सक्रिया छड़ी से स्पर्श करते ही वे टीक हो जाएँगे"I तब से वे ईमेल और फोन के माध्यम से, दूर से भी, चिकित्सा देने लगे| श्री प्राणनंदा स्वामी कहते हैं "मुझे बेजे गये चित्र लेकर, अपने आप को आनंद गन्ध स्थिति मे लाकर, चित्र पर चिकित्सा छड़ी से स्पर्श करते चिकित्सा देता हूँ| लोग तत्काल उपचार यानी २ से ३ मिनट के भीतर रिपोर्ट कर रहे हैं। में सिर्फ़ उनसे स्वामीजं ी को प्रार्थना करने को कहता हूँ और वे कहते हैं की वे तुंरांत अपने शरीर के मध्यम से उर्जा अनुभूति करते है"|

परमहंस नित्यानंदा स्वामीजी श्री ज्ञाणस्वरूपनंदा स्वामी को आशीर्वाद देकर, स्वामीजी की स्वर्ण

भाला दिया और कहा, ' जो कोई भी तुम स्पर्श करोगे वे ठीक हो जाएँगे| आप उस व्यक्ति का चित्र स्पर्श कर सकते हैं या फोन के द्वारा या आप दूरी से चिकित्सा दे सकते हैं । श्री ज्ञाणस्वरूपनंदा स्वामी कहते हैं "जिस क्ष्ण मैं भाला से कोई भी व्यक्ति को स्पर्श करता हूँ, और स्वामीजं ी के चहेरा मेरे मन में लाता हूँ, और शरीर में उर्जा प्रवाह अनुभूति कर सकता हूँ तब मुझे पता है कि व्यक्ति ठीक हो गये| मैंने स्वामीजी से यह दीक्षा प्राप्त करके बहुत भाग्यशाली मानता हूँ और मैं अब किसी को भी, जो भी तरह की उपचार की जरूरत है, मैं उनके लिए के लिए उपलब्ध है।

व्यक्तिगत रूप में, फ़ेसबुक पर या फ़ोन चैट आदि के माध्यम से उपचार कर रहे हैं। वे कहते हैं, जिस क्षण इस त्रिशूल के साथ किसी को स्पर्श करती हूँ और अंतर में शिओहां कि अनुभूति करती हूँ, बस स्वामीजी और त्रिशूल के माध्यम से बहता ऊर्जा से अन्य व्यक्ति उपचार अनुभूति करते हैं|

माँ नित्या प्रेमतमानंदा स्वामी एक विशेषज्ञ और दूरी आरोग्यकार के रूप में परम पावन श्री परमहंस नित्यानंदा स्वामीजी द्वारा दीक्षा दिए गये हैं । वे कहती हैं, "स्वामीजी एक चिकित्सा विशेषज्ञ और एक लं बी दूरी आरोग्यकार का दीक्षा देकर, किसी को भी, दोनो, ं व्यक्ति में या यहां तक कि उनकी चित्र के साथ एक सक्रिय चिकित्सा भाला का उपयोग से लोगो के ं स्वासत ठीक करने के लिए मुझे आशीर्वाद दिया। यह स्वामीजी से एक असाधारण उपहार है और मैं अपने आप को धन्य मानति हूँ और दनिु या के साथ साझा करती हूँ"I

tव्यक्गित, तीव्र विकास और उच्च उपलब्धि प्राप्त करके वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षा वाले सभी पृष्ठभमिू के युवाओ ंके लिये सं न्यास को एक लाभप्रद विकल्प के रूप में बनाना।

t10 लाख सं न्यासियो ं को दीक्षित करना, जो जीवन मुक्ति मे निर्वाह करे एवं अन्य लोगो ं में सं चारित कर सकें

tभारत में सं न्यास प्रशिक्षण केंद्रों की स् द्रों थापना द्वारा उचित वैदिक अध्ययन एवं जीवनशैली की शिक्षा प्रदान करना।

भावी योजनायें……

डॉ माँ आतमप्रियनंदा स्वामी एक आध्यात्मिक आरोग्यकार और सं न्यास शिष्य परमहंस नित्यानंदा की है। वह यात्रा करते आ रहे है और प्रति दिन तमिलनाडु के विभिन्न भागों में सैकड़ों हीलिं ग कॉल्स में भाग लेते और एक विशेषज्ञ दूरी आरोग्यकार भी है। लोग उपचार के लिए सिर्फ एक ही टेलीफोन अनुरोध में स्वस्त ठीक होने का अनुभूति करते हैं। स्वामीजी ने दीक्षा देकर उन्हे एक चिकित्सा छड़ी दिया और आशीर्वाद दिया की वे जो भी व्यक्ति को उपचार करते हैं, उनके स्वास्थ ठीक कर सकते हैंI

डॉ माँ आतमप्रियनंदा अपने चेतना में 'आनंद 'गन्ध (ब्रह्मांडीय ऊर्जा केंद्र जागृत द्वारा अवतार) लाते है और स्वामीजी को स्मरण करते हुए व्यक्ति को छड़ी के साथ स्पर्श करते चिकित्सा देते हैं I जब फोन पर चिकित्सा देते है, व्यक्ति की छवि लाते है और अगर चित्र प्रस्तुत करते हैं तो वह चित्रा को छड़ी से स्पर्श करते हुए चमत्कारी रूप से पीड़ित को राहत मिलने दी रिपोर्ट और लंबी बीमारियो को ं दीनो मे ही ठीक करते हैं I

माँनित्या ज्योतिकनंदा स्वामी, स्वामीजी परमहंस नित्यानंद से आशीर्वाद प्राप्ती के पश्चात, एक आध्यात्मिक आरोग्यकार के रूप में काम शुरू किया I स्वामीजी से आशीर्वाद लेते हुए समय को याद करते हुए, उनके कहे गया शब्दों को शब्दों दोहरातें हैं "जो भी व्यक्ति इस छड़ी से स्पर्शकिया जाता हैं, वे कोई भी रोग से मुक्ति पा सकते हैं", और फिर धीरे से चिकित्सा छड़ी व्यक्ति या व्यक्ति की छवि पर रखते है। चमत्कारिक ढंग से कई तुरन्त दर्द से बाहर निकलना और यहां तक कि

उन गंभीर चिकित्सा शर्तों के साथ एक चमत्कारी इलाज के कई नियमित रूप से मेडिकल सिस्टम के द्वारा दिए गए कु छ ही घं टो के भीतर अनुभ ं व करते हैं I 'उपचार तुरन्त, होता है स्वामीजी के आशीर्वाद के साथ' माँज्योतिकनंदा स्वामी कहते हैं। घुटने के दर्द से आपातकालीन चिकित्सा शर्तों के लिए, लोगो की ं मांग की है और चमत्कारी वसूली का अनुभव किया।

परिकल्पना है कि जो लोग वैदिक सत्य को जीने के इच्छुक है, उन्हेप्रेरणा देना, शिक्षा व शक्ति प्रदान करना जिससे कि वे वेद माता की रक्षा कर सके । इन निम्नलिखित प्रकारो से विश्वभर मे वैदिक धर्म क प्रचार-प्रसार होगा:

  • ® नवआकाक्षिं यो ंको हिदं त्वु से परिचत कराना समरस, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन जीने के लिये ।
  • ® पहले से अभ्यास करने वालो ंको अभ्यास में अधिक प्रमाणिक होने के लिये प्रेरित करना।
  • ® अनुष्ठानो,ं प्रभावशाली प्रवचनो ं एवं तकनीको ं के माध्यम से वैदिक जीवन पद्धति के प्रचार-प्रसार के लिये पुजारियो ं एवं आचार्यों को प्रशिक्षित करना।
  • ® प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों एत्वों वं अध्यात्मिक नेताओ ं को सनातन हिं दू धर्मजीने के लिये शिक्षित और शक्तिसम्पन्न बनाकर वैश्विक विश्वविद्यालयो ं एवं शिक्षण सं स्थानो ं में हिं दू पीठ पर स्थापित करना।

इस प्रकार, प्रबुद्ध वैदिक सभ्यता को पुनर्स्थापि त किया जायेगा और इसे मौलिक अवतारो ंतथा ऋषियो ंकी परिकल्पना के अनुरूप एक नवीन एवं उच्चतर चेतनायुक्त सम्भावना पर ले जाया जायेगा।

शक्तिशाली मनुष्य का न ों िर्माण धर्मेव हतो हंता धर्मो रक्षति रक्षितः।

Section 2

तस्माद्धर्मो न हंतभ्यो मा नो धर्मो हतोवधित।। जो लोग धर्म, दैवी नियम को नष्ट करने का प्रयास करते हैं, वे इसके द्वारा नष्ट करदिये जाते हैं। धर्म उन लोगो की र ं क्षा एवं पालन-पोषण करता है जो लोग धर्म के रक्षक हैं। इसलिये, कभी धर्म को नष्ट करने का प्रयास मत करो। ~ मनुस्मृति , ८.१५

भारत की विशिष्ट पहचान है, समस्त सं सार की मानवता को, सनातन हिं दू धर्म के माध्यम से, जीवन मुक्ति विज्ञान का उपहार देना। सनातन हिदं ू धर्म के प्रतिनिधि एवं अवतार के रूप में परमह ंस नित्यानंद हिं दु त्व को समस्त आयामो ं में सबसे अधिक रहने लायक, मानवतापूर्ण एवं विकृ ति-अभेद्य बना रहे हैं।

मानवता तो धार्मिक जीवन जीनेकेलिए प्रेरित करना

विश्व हिदं ू परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक सिघं ल जी के साथ