12. बच्चों के ल च्चों िए कल्पतरु - 1 दिवसीय कार्यक्रम
# बच्चों के ल च्चों िए कल्पतरु - 1 दिवसीय कार्यक्रम
बच्चों को तृतीय नेत्र च्चों जागरणSM के असाधारण विज्ञान से परिचित करवाया जाता है। इसमें परमहंस नित्यानंद बच्चों को इनर का च्चों र्यक्रम® का एक अनुभव देते हैं। वे उनको उनकी किसी एक इच्छा के पूरे होने का वरदान देते हैं, और उनको अपनी मनचाही वास्तविकता का सृजन करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
नित्या ध्यान किड्स SM - 2 दिवसीय कार्यक्रम
बच्चेजैसे ही चार तत्त्व और पूर्णत्व क्रिया से परिचित होते हैं वे पूरी तरह से परिवर्तित हो जाते हैं। तृतीय नेत्र जागरण, वैदिक स्मरण विधियां और श्रद्धा पूर्णश्रवण कौशल प्रत्यक्ष रूप से उनकी पढ़ाई के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं। यह उन्हें अच्छे अंक, सकारात्मक मित्रता, बेहतर स्वास्थ्य और उन्नत प्रज्ञा आदि लाभ देते हैं।

नित्यानंदम 10 दिवसीय कार्यक्रम
तृतीय नेत्र जागरण के असाधारण विज्ञान के अनुभव के लिए एक अदभुत कार्यक्रम
- ® अंतर्ज्ञान में वृद्धि के लिए
- ® प्रज्ञा में वृद्धि के लिए
- ® रचनात्मकता में वृद्धि के लिए
- ® उन्नत स्वास्थ्य के लिए

जिस तरह से हम बच्चों को ग च्चों णित में मूल इकाई सिखाते हैं जैसे कि- एक और एक दो होता है, उसी तरह, उन्हें सं सार और ईश्वर के साथ कै से जीना है इसकी भी मूल इकाई को जानना जरुरी है। जो विचार आप अपने बारे में रखते हैं, वह मूल इकाई है। आप अपने बारे में जो विचार रखते हैं वही विचार आप अपने माता-पिता, शिक्षक, ईश्वर और सं सार के बारे में रखेंगे।
- परमहंस नित्यानंद
पारम्परिक वैदिक शिक्षा की ज्योति को पृथ्वी के प्रत्येक बच्चे तक ले जाने के लिए परमहंस नित्यानंद जी ने नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल की स्थापना की है। नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल, दनिु याभर में कई स्थानो पर सफलता पू ं र्वक नई पीढ़ी के बच्चों को च्चों लाभान्वित कर रहे हैं है। यह रोचक सप्ताहांत शिक्षा प्रणाली, आधुनिक पाठ्यक्रम में उपस्थित कई कमियो को पूरा कर र ं ही है। एक नयी शिक्षा प्रणाली की सार्वभौम्य आवश्यकता को यह पूरा करती है, इसी लिए इसका तेज़ गति से प्रचार हो रहा है।
- w इसमें आध्यात्मिक विज्ञान, और उच्चतर विचार करने की शक्ति, दोनो का सा ं मंजस्य है, जिससे कि बच्चों को च्चों जीवन कौशल का ज्ञान प्राप्त होता है
- w यह शाश्वत सत्यों पर आधार त्यों ित जीवन की नीवं रखती है, उच्च प्रज्ञा को जागृत करती है
- w यह बच्चों को ऐसे सटीक शिक्षण प्र च्चों दान करती है कि वे भविष्य में विशिष्ट प्रतभाओं और ईशत्व शक्ति को व्यक्त करते हैं |
नित्यानंद सप्ताहांत गुरूकु ल SM दनिु या भर में हज़ारो बं च्चों के ल च्चों िये पारम्परिक गुरुकु ल शिक्षा
दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के विभिन्न स्थानोंमें नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल




नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल -सिं गापूर - बच्चेदेवी देवताओ से भक्ति के ं माध्यम से जुड़ते हुए और नित्य योग का अभ्यास करते हुए









नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल, बेंगलुरु


नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल, मुं बई






नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकु ल के बच्चे ओमान, मेक्सिको और सं युक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्थानो पर ं
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आनंद योगम एक साधक के लिए इस धरती पर सबसे बड़ा आध्यात्मिक अवसर है। यहाँ परम स्नेही व कृ पालु ईश्वरीय हाथ हर क्षण हमारी सर्वोच्च सम्भावना को तराशने के लिए कार्य करता है। इसके अतिरिक्त यहाँ प्रत्येक व्यक्ति को अपने सच्चे स्वरुप को जीने का अवसर मिलता है, उन सब बाधाओ से परे ं जाने का अवसर मिलता है जो उनकी इच्छाओं को फलीभूत होने से रोकती हैं। यहाँ आध्यात्मिक उन्नति के प्रत्येक आयाम और जीवन के अनुभव का अवसर मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सब महानतम जीवित गुरु नित्यानंद जी के आश्रम में, उनके प्राण मंडल में होता है। आनंद योगम में आना स्वयं को एक उत्तम जीवन जीने का उपहार देने समान है। - अडम डोके , कै लिफ़ोर्निया, यु एस ए
आनंद योगम में आप लगातार ऐसी परिस्थितियो का सा ं मना करते हैं जहाँ आप पूर्णत्व की ओर बढ़ते हैं। आपकी मूल अपूर्णता को बाहर लाया जाता है जिससे की आप त्वरित पूर्णत्व कर सकें : यह बहुत ही मुक्ति देने वाला अभ्यास है। यह सब बहुत ही मत्री ै पूर्णवातावरण में होता है। आनंद योगम में आप स्वामीजी और अपने वास्तविक स्वरुप की तरफ बढ़ते हैं - अपने मूल तत्त्व और अपनी आत्मा की तरफ - और इसके लिए साहस चाहिए। स्वयं के अंदर झाँक के देखिये, आप कितने साहसी बनना चाहते हैं। मैं चाहता हूँकि सब लोग इस मार्ग पे चलें! - एड्रिअन बैली, न्यूॉर्क, यु एस ए

आनंद योगमSM वैदिक शिक्षण कार्यक्रम
''मैं आधनिु क यवु ाओ ंको साहसी और प्रबुद्ध मनष्यु बनाऊं गा, जहां वे अपने जन्म और जीवन का उद्देश्य जान सकें , जहां वें अपने जीवन पद्धति की विसं गतियो को स ं माप्त कर सकें । मैं आनंद योगमS् M कार्यक्रम में यवु ाओ ंको आमंत्रित करता हूं।" ~ परमहंस नित्यानंद
युवा पीढ़ी को वैदिक जीवन के अनुभव करने हेतु, परमह ंस नित्यानंद ने वर्ष 2003 में बं गलोर स्थित आश्रम के ऊर्जाक्षेत्र में निःशुल्क वैदिक शिक्षा एवं जीवन पद्धति कार्यक्रम के अध्ययन के लिये 3 महीने, 6 महीने और 1 वर्ष के पाठ्यक्रम के उद्देश्य से आनंद योगम् की रचना की।

वैदिक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं अनुसं धान सं स्थान
'' वैदिक शिक्षण सं स्थानो ं की स्थापना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम ें वैदिक विद्वानो ं के नि र्माण के लिये विश्वविद्यालय की आवश्यकता है। मैं हिन्दुत्व के प्रति आस्थावान लोगो ं के लिये वैदिक दर्शन शास्त्र के अध्ययन के उद्देश्य से विशाल विश्वविद्यालयो की रचना करके ं वैदिक दर्शन शास्त्र की विभिन्न शाखाओ ंमें डाक्टर की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्वानो का ं निर्माण करूंगा। दूरस्थ शिक्षा के लिये आनलाइन ॅ वैदिक पाठ्यक्रम आरंभ किये जायेंगे।" ~ परमहंस नित्यानंद






विश्व भर के ऐसे युवा जो समृद्ध वैदिक परंपरा और आत्मबोध के विज्ञान को खं गालना और सीखना चाहते हैं उन्हेंनिःशुल्क आवास, भोजन एवं चिकित्सा उपलब्ध कराकर शक्तिशाली यौगिक क्रि याओ,ं वैदिक मं दिर विज्ञा न एवं कला, वैदिक ज्ञान, वैदिक जप और काफी कु छ बताया व सिखाया जाता है। वे सभी प्रकार की लत (नाशिले पदार्थ, धूम्रपान आदि), अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओ ंसे मुक्त हो जाते हैं। वे योग, ध्यान व ज्ञान के आचार्य बनकर विश्व में प्रमाणित हिन्त्वद का प्रचार-प्रसार करते ु हैं।

t नित्यानंद गुरूकु लS M, बं गलोर आश्रम में 50,000 आवासीय और 10,000 गैर-आवासीय विद्यार्थियो ं के शिक्षण की योजना।
tविश्व भर में 10,000 गुरूकु लो ं की स्थापना (भारत में राजपालयम, होसुर, सेलम, चेन्नई, एरोड, श्रीरागापडी, रासीपुरम्, हदैराबाद, मं ुबई, बड़ौदा, पाण्ॅडिचेरी और वाराणसी में कार्य प्रगति पर)
t5000 शिक्षको ं एवं आधुनिक अवसं रचना के सा थ एक पूर्ण वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना।
tगुरूकु ल वि द्यार्थी कम समय मे पी .एच.डी उपाधि प्राप्त करके भावी प्रबुद्ध समाज की नयी पीढ़ी बनकर असामान्य ज्ञान शक्ति एवं धरती की समस्याओ ं के समाधान को धारण करेंगे।
tआगामी पांच वर्षों में 108 देशो ं में नित्यानंद बाल विद्यालयो ं (सप्ताहांत गुरूकु लो)ं की स्थापना प्रस्तावित। (यू.एस .ए, यू.के ., औसटरेलिया, न्यूजीलैंड, ओमन और सि ंगापुर में कार्य प्रगति पर)
tभारत के सभी गांवो ं में गुरूकु ल शिक्षा पद्धतिकी स्थापना।