6. एक ददव्द्ी काल से आगे
# **एक ददव्द्ी काल से आगे**
"दररिता दान से तनमूणल नहीं हो सकती। यह तनमूणल हो सकती है के ्ल मनुषयं की चेतना के उधार से।" - परमहंस तनतयानंद

हम परमहंस तनतयानंद की ददवय दरृजषट को ू ्या सं्ा दं? एक न्ीन दरृजषट हर मोि पर रकट ू ए्ं स्यं-रकामशत होती रहती है। जिस रकार एक कथा मं पांच अंधे मान् एक हाथी का ्णणन करने का के ्ल रयतन ही कर सकतं है, हम भी उनहं पररभावषत कर सकतं हं एक आधयाजतमक गुु, एक सामाजिक ददवयदशी, एक पथदशणक आधुतनक ्ैददक पुनिाणगरण के , भारत के आधयाजतमक व््ानं के रहसयाभेदक, एक िी्नमु्त सभयता के व्श्कमाण, या यह सभी, और आदद।
तनतयानंद स्यं पारदशणन करतं है एक सचचे िगत नागररक के उदगमन का, िो भौततक्ाद ् रहसय्ाद दोनं के साथ समान ूप से गहतन्ामसत ृ है; एक उचच-उपल्धक िो िगत मं बाहुलयता का सिन करता है ् ृ उसत् मनाता है। िगत नागररक िो गहन ूप से आधयाजतमक भी है और िो चेतनापू्णक दोनं, वयज्तगत ूपांतरण ् मान्ता के ूपांतरण के रतत सदा ततपर है।
दहनदत् की पव््ता का ु प ुनःसंसथापन

्ैददक समय के राचीन ृषटा, जिनके पास रतयेक िे् के ्ान कोषं की पहुँच थी, व््ान, कला, धयान, धचककतसा, योग, मशिा, िी्नशैली ए्ं पूिा। ककनतु, समय के साथ ही अधधकतर ्ान छुटा ददया गया है और व्समत ृ या लुपत हो गया है। परमहंस तनतयानंदिी एक ्ैददक पुनिाणगरण लाकर मान्िातत को िी्न ् िीने के अथण के सही ्ान से, उनके ्ासतव्क स्भा् से पुनःसंबनध सथावपत करने मं सहयोग दे रहे हं। यह रयास जिसमे सजमममलत है, भारत के स्ोततम समध ्ैददक परंपरा का ृ पुनःिागरण - उसकी व्द्तता, संसकृतत, रथाएं, उतस् ए्ं सम् िी्नशैली।

सीएटल : अमेररक्












व्श्वयापी ममशन
आि व्श् भर मं संजसथत हं आ्म, मंददर ए्ं कंि,









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्ी रमुख स्ा मी महाराि, स्ा मीनारायण आ्म के रमुख के साथ