Books / Living Advaita Hindi merged

48. नित्ािंद ववशवववद्ाल्

# **नित्ािंद ववशवववद्ाल्**

तनतयानंद व्श्व्दयालय एक व्श्वयापी व्दयालय है जिसकी शाखाय अब तक य ं ुनाइटेड सटेटस ऑफ़ अमेररका और ्ांस मं हं, और व्सताररत हो रही हं मस ंगापुर, मलेमशया, मेज्सको, और आदद सथानं मं। तनतयानंद व्श्व्दयालय यू.एस.ए कै मलफोतनणया मं पंिीकृत (रजिसटडण) एक स्ायतत व्श्व्दयालय है िो धाममणक डड्ी रदान कर सकता हं ए्ं सीईसी के तहत इसे िी्नकालीन छूट रापत है (सीईसी यानी कै मलफोतनणया मशिा कोड) 94874 (ई) (1), कै मलफोतनणया राजय के मलए एक ्यूरो ऑफ़ राइ्ेट ् पोसट सेकंडरी मशिा। यह व्श्भर से लोगं को धयान, योग और ्ैददक परंपरा से संबंधधत व्दया िे्ं मं अनेक डड्ी पाठयरमं को रदान करता है, िो परमहंस तनतयानंद िी से रेररत और उनके द्ारा रततपाददत है। 4 अ्टूबर 2013 को, तनतयानंद व्श्व्दयालय ने अपने पंख फै लाएं ्ांस मं। उसका पैररस मं पंिीकृत ककया गया यह शीषणकं के साथ - ्ंच मं (उतन्मसणते दहनदए ु तनतयानंद) और अं्ेिी मं (तनतयानंद दहंद यू ूतन्मसणटी).

"अद्ैत िी्न का परम सतय मं से एक है। अद्ैत का अथण है गैर-दोहरी: एकता। भग्ान एक नहीं है अवपतु भग्न 'एकता' है। भग्ान अनंत है –एकता है, एक नहीं! एकता और एक मं फकण है| एकता को एक के बराबर नहीं मानना चादहए| एकता अनुभ् की िाती है| ककनतु एक संखया मा् है| सब िी्ं और सब ्सतुओं के साथ गैर-दोहरी चेतना का अनुभ् ही िी्न का उ्ेशय है। िब आप मनन कर इस सतय को समझ िाते हं की िी्न मं सब लोग स्यं आपका ही व्सतार हं, तब आप अद्ैत की ्ासतव्क अनुभूतत कर पाते हं| अद्ैत की अ्सथा मं रहना आपको आपके ्ासतव्क स्भा् मं रहना मसखाता है और खुद का स्यं से पररचय करता है|

िब कोई सतय सामने आता है, कुछ लोग उसे सतय समझते हं और ्े ऐसा तब तक समझते हं िब तक ्ह सतय गलत ना साबबत हो िाये| और कुछ लोग ऐसे भी होते हं िो उसे गलत समझते हं, िब तक ्ह सतय साबबत नहीं हो िाये| म यह नहीं कह ं ूँगा की पहली ्ेणी सही है और दसरी गलत | म ू तो मसफण इतना कहना चाहता ह ं ूँ की रथम ्ेणी को मानने ्ाले लोग एक अ्तार की उपजसथतत और उनकी लीला का ददवय आनंद ले सकते हं, ए्ं दसरी ू ्ेणी ्ाले लोग दे्ताओं,मूततणयं और गुु के धच्ं के साथ िी सकते हं|

्ी कृषण भग्ान ने बिी खूबसूरती से भग्त गीता मं कहा है, 'िो कोई भी मेरे कायं के संदभण को समझता है ्ह मेरे अंतःकरण को समझ सकता है'| यदद आप मेरे कायं को करने का कारण खोिने की कोमशश कर रहे 96

हं, तो यह आपको के ्ल असमथणता की ओर ले िायेगा, और असमथणता के ्ल शज्तहीनता की ओर ले िाती है| यदद कुछ भी आपको शज्तहीन बना देता है , तो आप उसके रतत रोधधत हंगे| मेरे कायं के पीछे तछपे संदभण को समझने की कोमशश करं ना की करणं को|

मेरा संदभण हमेशा अद्ैत की अ्सथा से होता है| िब आप धैयणता के साथ मेरे कायं के संदभण को समझ पाएंगे तब ना ही मसफण आपकी मेरे रतत पयार मं ्वध होगी, अवपत ृ ु आप मेरे साथ आतमसात भी हो िायगे | ं