43. एक तेजसवी भवव्् की दरृत्ट ू
# **एक तेजसवी भवव्् की दरृत्ट ू**
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न्ीन पी़ी मं सनातन धमण की उततमताओं का अंतसथाणवपत करने के इचछुक, परमहंस तनतयानंद िी ने सफलतापू्णक लुपत हुई परमपराओं का पुनः धमणसंसथापन कर गुुकुल मशिण ् संनयास रणाली को पुनिी्न ददया है।
गुुकुल (अथाणत 'गुु का कुल या परर्ार') बचचं के मलए एक अदव्तीय मशिा कंि है िहां मशिा सम् है और िूरत पर आधाररत है। गुुकुल बचचं का मागणदशणन करता है उनको समपूततण या एका्ता से पररपूणण वयज्त के ूप मं रफुजललत होने मं, िो आधयाजतमक आधार पर खडं उचच-उपल्धक और उततरदायी ्ैजश्क नागररक बने।
परमहंस तनतयानंद िी यु्कं मं उतरांतत का भी सिन कर रह ृ ं है, संनयास का पुनःिी्न करके न के ्ल एक ्ैकजलपक िी्न के ूप मं, पर एक परम िी्न के ूप मं, स्यं और अनयं को लाभाजन्त करने हेतु।
तनतयाननद व्दयापीिम , ्षण 2006 मं परमहंस तनतयानंद स्ामी िी द्ारा शुू ककया गया एक पररयोिना है िो कक बचचं को मशिा रदान करने का तनतयानंद संघा का एक मशिा व् ंग है ,उनके मागणदशणन मं व्मभनन कायणरमं को दतनया भर म ु ं सभी बचचं, अमभभा्कं, मशिकं और चाइलडकै अर ्ालं के मलए उपल्ध कराया िा रहा है। इन कायणरमं का अंततम ल्य बचचं और उन लोगं के साथ काम करने ्ाले हर ककसी को
आनंदमय िी्न िीने के मलए अ्सर तथा कल का नेता बनने के मलए पूरा अ्सर रदान करना है।
धरती को अधधक से अधधक िागत ृ और रबुध लोगं की िूरत है। ऐसा संभ् करने के मलए, हमं स्णरथम अपने बचचं के मलए " एनलाइटनमंट -मशिा रदान करने की आ्शयकता है जिसमं सीख मजसतषक के गैर यांब्क भागं को उततेजित करने,सही मजसतषक गततव्धध आधाररत अनुभ्ातमक आतमसात करने ,कई बुवध रणाली को सकरय करने और सबसे महतत्पूणण िी्न के समाधान को समझने पर आधाररत है ।
"यह बालक एक पुषप कक भांतत सुबह उिं, रेमपू्णक धयानी पुुषं के साथ जियं ए्ं स्यं को संतुमलत रख सकं ऐसा मेरा दशणन है। ये बालक बाहरी िगत की नकारातमकता को ्हण न करं और अपनी आतंररक िगत की पव््ता को संतुमलत रखं और 'तनतयानंद' मं जिए और रकामशत करं - ऐसी मेरी इचछा है| " ~ परमहंस तनतयानंद िी


गुुकुल एक संसकृत श्द है जिसका शाज्दक अथण है गुु का व्सतत परर्ार। तनतयानंद ग ृ ुुकुल की सथापना का उ्ेशय अतयधधक बुवधमान रिातत की रचना करना है िो की समपूततण, ्धा, उपायनं ए्ं आपयायनं पर आधाररत, व्श् के सभी बालकं को लाभाजन्त करना।
गुुकुल का ममशन है:
•बचचं को उनके सहि स्ाभा् संर्ित करने मं सहायता करना और उनकी ्ानेजनियं को व्कमसत करना।
•ऊिणस्ी शरीर का व्कास करना िो की बचचं को अपनी ऊिाणओं को संतुमलत ए्ं संचाररत करने मं
सहायक हो।
•समपूततण यु्त अखंड मशिा रदान करना, िो की बचचं को अंतर ए्ं बहार व्कमसत होने मं पोवषत करेगी।
•एक अतमा्ानी समरदाय का तनमाणण ए्ं संरिण करना िो की चेतना पर आधाररत हो न की अंतःकरण पर। िी्नमुज्त िी्न के तत्ं को हम अपने बचचं को जितना िलदी मसखा दं उतना ही उततम है।