22. इिर अवेकनिंग
# **इिर अवेकनिंग**
'इनर अ्ेकतन ंग एक कायणरम नहीं, यह एक अतयुततम दलणभ संभा्ना है। यह अंततः है ु आपके अपने परर्तणन का स्यं अनुभ्, आपका घतनषि संपकण आप ही की अपनी उचचतम संभा्नाओं से। इनर अ्ेकतन ंग हर िण एक तािा पररचय है, ्यंकक िी्न आपको अपना पररचय दे रहा है हर िण रततिण। कोई भी पू्णसूधचत नहीं कर सकता कक इस कायणरम मं आपका अदव्तीय अनुभ् ्या होगा! लेककन म यह बता सकता ह ं ूं ्यंकक यह मने बार बार होत ं ं देखा है। इनर अ्ेकतन ंग से कोई भी नहीं - कोई भी नहीं कभी ्ापस गया है, बबना 'िी्नमुज्त' के कम से कम एक पहलु के रतयि अनुभ् के ।"
- परमहंस तनतयानंद िी ~

्या आप अपने '्ासतव्क' स्ुप से ममलने के मलए तैयार हं ्या आप सामाजिक रततबंधं के वयज्तत् से मु्त अपने 'वयज्तगत आतम' से पररधचत होने के मलए तैयार हं, िो पूणणतः अदव्तीय 'आप' है ? ्या आप अपनी अ्धा से पररधचत होने और अपनी ्ासतव्कता को खोिने के मलए तैयार हं ?
्या आप अपनी उचचतम िमता तक पहुँचाने के मलए तैयार हं और अपनी मनचाही ्ासतव्कता को िी्न देने हेतु तैयार हं? यदद आपका उततर 'हाँ' है तो 'इनर अ्ेकतन ंग' आपके मलए ही है! इनर अ्ेकतन ंग एक अदव्तीय िी्न परर्तणनीय कायणरम है िो आपको, आपके 'स्यं' से पररधचत कराता है!
एक दलणभ सिी् अ्तार द्ारा रधचत ए्ं संचामलत इनर ु अ्ेकतन ंग कायणरम आपको शज्तशाली िी्न परर्तणनं की एक इसी या्ा पर ले िाता है िो आपको स्यं की उचचतम संभा्ना से पररधचत करायगी। ं
यह कायणरम 'कुणडमलनी शज्त' के िागरण पर के जनित है। िैसे ही आपकी कुणडमलनी शज्त दीिा के माधयम से िागत होती है, आप रतयाघात चैतनय िाग ृ तत का ृ अनुभ् करंगे िो की आपको सकारातमकता, स्ोचच संभा्ना, अ्त नेत ु त्, ओर व्लिण आतम्ान की और ृ अ्सर करेगी।
इनर अ्ेकतन ंग अदव्तीय ्यं है ?
इनर अ्ेकतन ंग आपको िी्न के उपयु्त ्ान से सश्त करता है। इनर अ्ेकतन ंग मं आप सािात िी्ंत अ्तार परमहंस तनतयानंद िी की शारीररक उपजसथतत मं रहते हं। ऐसे रबुध चेतना के संपकण मं २१ ददन रहने मा् से आपमं कई संभा्नाएं िागत हो िाती ह ृ ं। िब आप ५०००० ्षं से भी पुराने चार तत्ं पर अपने िी्न को आधाररत करंगे तो आप िी्न की समझ के रतत स्यं की धारणा परर्तणन का अनुभ् करंगे। इन ततत्ं मं आपके स्यं ए्ं िी्न से संबंधं को परर्ततणत करने की िमता है और यह ्ान आपको मुज्त और अपनी मनचाही ्ासतव्कता के तनमाणण के मलए सश्त करता है। एक बहुआयामी िी्न का अनुभ् कीजिये जिसमे योग, साजतत्क भोिन, पुरातन ्ैददक उतस् सजमममलत हं। िब आप एक पव्् ऊिाण िे् मं होते हं तो ये तत् (मसधांत) सहि ही आपके मलए सतय (अनुभ्) बन िाते हं। गहरे शारीररक, मानमसक ए्ं भा्नातमक धचककतसा का अनुभ् कीजिय। अपनी मूल ्ासनाओं के बारे मं िातनये िो की आपकी िी्न को ददशा रदान करती हं। आप िैसे ही इन मूल ्ासनाओं से पूणणत् लाते हं, आप चेतना के साथ िी्न को िीने ए्ं धरनाबोध करने हेतु सश्त हो िाते हं। स्यं ् अनयं को लाभाजन्त करने
के व््ान मं दी्ित हो िाईये ओर एक अधयाजतमक कायणकताण बनने के मागण पर अ्सर हो िाईये जिससे की आप व्श् चेतना को नयी उनचातययो तक पहुँचाने मं सहयोग कर सकंगे। इतना ही नहीं आप स्यं ् अनयं का उपचार करने की दीिा ए्ं ्ान भी रापत करंगे।

With participants India in Rishikesh, India

With participants on a cruise in the waters of Thailand

With participants in Bali, Indonesia
ईनर अिेकनन ंग िनतभाधगयं के अनु भि
मस ंधथया नामसणसी - योग मशिक, स्ासथय िागूकता और उचचतम नेतत् का व्सतार कर सके | ृ

तनतय सतयस्ूपन - बबलडर - लॉस एंजिलस, संयु्त राजय अमरीका
यह मेरा दसरा इनर अ्ेकतन ंग है और िैसे की स्ामीिी कहते ू हं कोई दो इनर अ्ेकतन ंग एक सामान नहीं होते|मेरा पहले इनर अ्ेकतन ंग का अनुभ् बहुत ही रभा्शाली था और मने ं कुछ अचछे परर्तणन भी महसूस ककये| परनतु दसरे आई.ए. ु म मनो अंतरातमा म ं ं एक परमाणु व्सफोट सा हो गया हो| यहाँ आने से पहले िी्न के रतत मेरा रबल रततरोध था| िी्न मं जज़ममेदारी लेना के रतत मेरी अिमता को म समझ नहीं पा रहा था|म ं अपने आपको एक ही से ं हालातं मं फसा हुआ पाता था|म व्िमता अन ं ुभ् कर रहा था और मेरा पूणणत् के रतत किा रततरोध था|म यहाँ ं सब कुछ बदलने के उ्ेशय से आया था, और स्ामीिी के सातनधय मं यह काफी आसान साबबत हुआ| िब हम संसकारं के साथ पूणणत् करया कर रहे थे मुझे ्ह घटना याद आई जिससे मुझे मेरे अजसतत् का ्ात हुआ| म सपषट ूप से देख सकता ह ं ूँ की कै से इसने मेरे पूरे िी्न को रभाव्त ककया| और िब म अपने संसकारं को ्ात ं कर पाया, म उनह ं ं पूरी तरह छोिने के मलए सिम था, ऐसा महसूस हुआ कई ्षं के रततरोध, संदेह, आतमोतसगण और आतम घणा वपघल गए। यह मेरे मलए एक बिी राहत की ृ बात है|िब मने अपने परर्ार से संपकण ककया और उनके ं साथ पूणणत् ककया, तब उनहंने काफी सराहा, और ्े काफी ्हणशील और खुश थे| पहली बार मुझे ऐसा महसूस हुआ
रमशिक, लेखक - मशकागो, संयु्त राजय अमरीका पहले दस ददनं मे हमं कई भा्नातमक उपचार का अनुभ् हुआ: स्यं से, दसरं से, अपने स्ासथय ू से ए्ं अपने पू्ण िनम की असमपूततण को ममटाने पर कायण ककया| परमहंस तनतयानंद िी ने हमं एक ल्य के मुताबबक इन रकरयाओं का अनुसरण करने के मलए कहा: ्ह अ्सथा खोिना िहाँ शज्तहीनता और आतमशंका उतपनन न हो, और अगर उतपनन हो भी तो हम मं इतनी िमता होनी चादहए की हम उसे तुरंत िान पाएँ| कै से मने इस तरह से मेरे सारे िी्न को नहीं जिया? म ं ं सपषट ूप से ्े संसकार देख सकती हूँ, जिसने मुझे हताशा और पीिा से िकि मलया था और ककस तरह इन संसकारं की ्िह से म काफी छोटा महस ं ूस करती थी, ऐसा रतीत हो रहा था की म अपने िी्न म ं ं स्ोततम चीिं की हकदार नहीं हूँ|
बेशक म खं ुद के मलए यह चाहती थी, लेककन म अपने ं संसकारं से इतनी धूममल थी की मेरे मलए आगे ब़ पाना मुजशकल था| यह एक सशज्तकरण की रकरया है| और म अव्श्सनीय ूप से स्ाददषट भोिन के साथ ं शांततपूणण योग, आयु्ेद, ्ैददक अनुषिानं का उललेख करना तो भूल गयी| इनर अ्ेकतन ंग अदभुत है| मं ्ासतव्क ूप से चाहूंगी की सभी इस करया का अनुभ् करं, और स्ामीिी का भी| स्ामीिी और कुछ नहीं बस इतना चाहते हं की समपूणण व्श् अपनी उचचतम संभा्ना, उचचतम
की एक खूबसूरत ररशते की शुुआत के मलए सारे दर्ािे खुल गए हं| यह ्ासत् मं अ्त है!म ु ुझे पता हं की अपसे पूणणत् ही मेरी िी्न शैली है| यह के ्ल मेरी ही िी्न शैली नहीं होने िा रही है;अवपतु म यह स ं ुतनजशचत कूँगा म भी यह कई अनय लोगं की भी िी्न शैली हो| ं
सोतनका गंभीर - फै शन उदयमी और छव् पाषणद - मुंबई, भारत
इनर अ्ेकतन ंग की बात करं तो इतने कम समय मं मेरे पास बहुत सारे अनुभ् और बातं हं साझा करने के मलए| रारंभ मं, इ्कीस ददन का समय काफी लंबा समय लग रहा था। मने सोचा "हे भग्ान! म ं इतने ं ददनं के मलए ्या करने िा रही हूँ और म ्या िानने ं के मलए िा रही हूँ? "लेककन अब बीस्े ददन मुझे ऐसा महसूस हो रहा है की यह इ्कीस ददनं का समय बहुत कम है। इनर अ्ेकतन ंग मं मसखने और अ्शोवषत करने को इतना कुछ है की शायद तीन महीने या चार महीने की िूरत है। समय बस इतनी िलदी से चला गया| रतयेक वयज्त का आई.ए. करने का अपना एक कारण है| मेरे मलए िब मने सोचा की म ं यहाँ ्यं आ रही ं हूँ, मेरे पास कोई व्शेष कारण नहीं था; िी्न अचचा था सब कुछ सही चल रहा था| यह बस यहाँ आने का एक बुला्ा था| मेरे पहले स् के दौरान िब म यहाँ ं स्ामीिी के साथ बैिी थी और कफर मने िब आ्म, ं बरगद के पेि और मंददर का दौरा ककया तब ऐसा रतीत हुआ मानो म सही िगह पे ह ं ूँ और सही समय पे सही चीज़ कर रही हूँ| म इस अहसास को जज़नदगी भर संिो ं के रखूंगी| जितनी भी मशिा मने यहाँ ्हण की ्ह ं इतनी रयोगातमक है की म घर िाकर उनह ं ं रयोग मं लाने के मलए बहुत उतसुक हूँ|
स्ामीिी ने ने मुझे मेरे िी्न की चाबी दे दी हं, बहुत ख़ूबसूरती से उनहंने मुझे खुद से ममलाया है|स्ामीिी की मशिाओं को एक तरफ रख दं तो के ्ल स्ामीिी की उपजसथतत ही अ्णणनीय है| इनर अ्ेकतन ंग स्ामीिी को अनुभ् करने की रकरया है, और यह अपने आप मं ही एक शज्तशाली रकरया है| रथम ददन िब म यहाँ ं बैिी थी तब मने स्ामीिी को एक रमशिक की तरह ं देखा, पर आई. ए. के आणखरी ददन अब म ग्ण के साथ ं कह सकती हूँ की म एक ग ं ुु घर ्ापस ले िा रही हूँ| और यह एक महानतम अहसास है|
ि्र्णसी मं्वतभ््गयोंकेस्थ



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