21. क् म्नित् िेतु उज्गरण
# क् म्नित् िेतु उज्गरण
परमहंस ननतयानंि जी ने शज्तशाली सतयं को उजागर कर मानवता को चार महाशज्तयं की ओर जागत ककया: ृ
श्दं की शज्त या संसकृत मं '्ाक् शज्त'। समपूततण या अखंडता, इस ्ाक-शज्त को िागत ृ करने का मूल तत् है।
व्चारं की शज्त या 'मनोशज्त'। ्धा या एक संरेणखत पहचान (बाहरी ् आतंररक पहचान का एकाकार) के साथ उचच संभा्ना मं िीना, इस मानोशज्त को िागत करने का म ृ ूल तत् है।
भा्ना की शज्त या 'रेम शज्त'। उपायनम या उततरदातयत्, इस रेम शज्त को िाग ् त करने ृ का मूल तत् है।
िीने की शज्त या 'आतमशज्त', अपयायनम या अनय ् स्यं को लाभाजन्त करना, इस ् आतमशज्त को िागत करने का म ृ ूल तत् है।
स्ासथय, सफलता और तनतय आनंद को अनुभ् करने का मूल सहसय इन चार महाशज्तयं को िी्न के चतुरतत्ं (चार तत्ं) द्ारा िागत करने म ृ ं है। यह शज्तयां स्णदा हमारे भीतर व्दयमान ् रापय है।
््ण और पूणणत् – हमारी चार शज्तयं को अना्त करने के अस् ृ
स्यं से बात करना हमारे अंतःकरण मं आरामकता के समान है । हम हमेशा इस बात की अ्धारणा करते हं की हमं चीिं की रिा करने की ज़ूरत है, इसमलए हम स्यं से बात करते हं| स्यं को ््ण करना ही अंतःकरण की ्ाहकता है| स्यं से बात करना अपूणणत् है| स्यं को ््ण करना ही पूणणत् है|
िब भी आप स्यं को आपके ््ण अंश के साथ संयु्त कर लेते हं तब आप पूणणत् की जसथतत मं आ िाते हं| िब भी आप पूणणत् की अ्सथा मं होते हं , तब आपके अंदर की चेतना आपके अंदर के शोर को चुप करा कर आप के साथ संबंधधत हो िाती है। िब भी आप स्यं को ््ण से संबंधधत करते हं तब इस भय मं ना रहे की आपके आरामक दहससा आप से बात करता रहेगा और आप उसे सुनने के मलए बाधधत हंगे|
प ूणणत् ्या है?
अतीत की घटनाओं , श्दं, कायं या समतत के `ककसी भी अ्ेशष के बबना रहना ही ृ पूणणत् है। अ्शेष न रहने का मतलब यह नहीं की आप को अपने अतीत का बबलकुल ही समरण नहीं रहेगा| िब आप पूणणत् की जसथतत मं रहंगे तब आपको आपके अतीत का समरण तो रहेगा लेककन ्े अब आपको रोध, ददण, पीिा नहीं दंगी|



सतसंग गहन सकारातमक उिाण को बांटने और रसाररत करने का एक संगम है। यह आतम्ानी पुुषं के ्चनं ुपी शास् शस्ं (्ान के शस्) को एकब्त ए्ं रयोग करने का सथल है जिसके माधयम से हम तनतयानंद को रापत होते हं। सतसंग एक एसा सथल भी है िहाँ रततददन मान्ता की और उततम ूप से से्ा करने के उपाय ककये िाते हं। िब हम एक ऐसे संघ का तनमाणण करते हं िो आपस मं तथा अजसतत् के साथ रेम और भज्त को सश्त ए्ं रोतसादहत करता है, तब हम एक ऐसी शज्तशाली उिाण बन िाते हं िो की स्यं ् दसरं को आनंदमय वयज्तत् ू मं परर्ततणत कर सकती हं।
तनतयानंद िी ने एक ्ैजश्क ्ैददक पुनःिागरण को अपने तनतय सतसंग के आधयाजतमक
संगम के माधयम से रेररत ककया है जिसका धयय है सकारातमक ए्ं शांततपूणण तरंगं का सिन ृ ् संचारण करना, वयज्तगत ् व्श् सतर पर। तनतयानंद परर्ार के सदसय अपने िी्न मं ब़ रहे आनंद को बांटने हेतु रततददन अपने शहरं मं एकब्त होते हं। तनतयानंद िी स्यं इस शज्तशाली तनतय सतसंग का हर सुबह नेतत् करते ह ृ ं। इस सतसंग का सारे व्श् मं सीधा रसारण होता है और ४० देशं से भी अधधक इसे दो तरफा व्डडयो कॉन्ंमस ंग ए्ं तनतयानंद टी्ी के माधयम से देखा िाता है।
इसके अला्ा, २० से अधधक व्मभनन रकार के धयान कायणरम अनेक सतरं पर ममशन द्ारा आयोजित ककये िाते हं, िो कॉपोरेट, व्दयालयं, िेलं आदद मं रदान ककये िातं हं।

तनतय धयान योग (लाइफ ज्लस कायणरम)

तनतय धयान योग/लाइफ ज्लस कायणरम एक अदव्तीय ध यान ् की व्धध हं जिसे की परमहसां तनतयानंद स ्ामीिी ने बनाया ह ् ं | यह कायणरम हमे आश चयण रदान करता है जिसके द्ारा ् हम दख, धच ंता और तना् का सामना कर सकते है साथ ु ही साथ यह हमे अपने अतंरमन की ओर ले िाता है |
यह आसान ककन त् ु शज्तशाली िी्न ररर्ततणत करने मे सिम ध यान कायणरम को बनाया गया है ताकक हम ् अपने आतंररक ूपातंरण को गहरायी मे कर सके साथ ही साथ यह हमारी बबमाररयं को भी िीक कर देता है | यह ध यान की व्धध स ् ्यमं िी्न म ् ुज्त रदान करने मे सिम गुू परमहसं तनत यानंद स ् ्ामी द्ारा तनिेमशत ् है | इस ध यान को करने से हम अपने द ् व्धा और ु उलझन के मूल कारण को आसानी से समझ पाते है साथ ही साथ उन नकारात मक व्चार की धारा को नष ् ट ् कर पाते हे और अपने िी्न मे उलझन और दव्धा ु को त यागते ह ् ुये इस पथ की ओर आगे ब़ िाते हं
सम पकण ः भारत ए्मं अन ् य देशः +91 27279999, ् उत तरी ए्मं द्िणी अमेररकाः 1-800-256-3386 ्
