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17. ्ा्ा : व्तकतगत ्ांनत के शलए आध्ाततमक सफ़र

# **्ा्ा : व्तकतगत ्ांनत के शलए आध्ाततमक सफ़र**

गोमुख , २००४ की च्र ि्म य्ि के दौर्न

मान्ता के मलये एक शांततदत के ूप म ू ं, तनतयानंदिी सारे व्श् से लोगं को उचच उिाण तीथण के निं की आधयाजतमक या्ाओं पर ले िातं है, िैसे कक दहमालय प्णत, भारत के पव्् तीथण िे्ं ए्ं भारत के बाहर अनय पव्् सथलं मं। इन या्ाओं के समय कई र्चन देते हुए, ्े रहमाणड का सतय को तीथणयाब्ओं मं भीतर गहराई से आतमसात करा देते है ए्ं एक शांततपूणण मन हेतु अंतराकाश की उतपजतत करते हं। िब वयज्तओं के भीतर शांतत लाई िाती है, स्तः ही व्श्वयापी शांतत का आरमभ होने लगता है।

तनतयानंद रतत्षण याब्कं के समूह को उचच उिाण के तीथणिे्ं मं ददवयगमन कराते है, जिसमं दहमालय या्ा हर साल की व्शेषता है। ददवयगमन करने के रमुख सथलं मं 'चारधाम', िो चार पव्् महािे् है - बिीनाथ, के दारनाथ, गंगो्ी ए्ं यमुनो्ी, िो गह्ाणल पंज्त ्ंखला मं है तथा अनय िे् िैसे की गोमुख, ऋषीके श, हररद्ार, उततरकाशी, ्ीनगर, सीतापुर, िोशीमि ए्ं पीपलकोदट भी सजमममलत है। दहमालय या्ा एक अतत रमसध व्शेषता है िो रतत्षण सारे व्श् से लोगो को आकवषणत करती हं सिी् आतम्ानी गुु तनतयानंदिी की ददवय उपजसथतत मं दहमालय का ्ैभ् ् रहसयमय संदयण को अनुभ् दहमालय या्ा एक अतत रमसध व्शेषता है िो रतत्षण सारे व्श् से लोगो को आकवषणत करती हं सिी् आतम्ानी गुु तनतयानंदिी की ददवय उपजसथतत मं दहमालय का ्ैभ् ् रहसयमय संदयण को अनुभ् करने हेतु। रतत्षण व्श्भर से सहयाब्कं की धगनती तेिी से बढती िा रही है। आि, परमहंस तनतयानंदिी के ददवय नेतत् म ृ ं दहमालय ए्ं कै लाश या्ाएं करीब २०० याब्कं के साथ सबसे बिा या्ा रही है तथा चारधाम ् अनय पूनय िे्ं की महानया्ाओं को हमेशा सफलतापू्णक पूणण ककया है।

वबरल् मं हदर , ि्र्णसी य्ि् के दौर्न

ऊपर : गंग् के पविि तट केहकन्रे , २००६

नीचे*:* अंगकोर ि्ट कं बोहडय्

क ु मभ मेला

क ुमभ मेला मेला एक आधयाजतमक सङगम है िो पव्् नददयं के तट पर संयोजित ककया िाता है। तनतयानंद धयानपीिम ने तनरंतर से ही संपूणण व्श् मं कं भ मेले को रचाररत ए्ं आयोजित ककया है। ु

इलाहबाद मं कं भ मेला, २०१३ ु

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