6. परिशिष्ट
# परिशिष्ट
जीवन के सत्य की खोज की अदम्य इच्छा के कारण, 17 वर्ष की उम्र में इन्होंने घर त्याग दिया और निकल पडे पूरे भारतवर्ष एवं नेपाल की लम्बाई और चौड़ार्ड में परिव्राजक बनकर हर जगह गुप्त एवं गुह्य योग विद्या को सीखते हुए

आज नित्यानन्द, विश्व के करोड़ों लोगों के लिये आशा की किरण बन गये हैं। अपने स्वयं के सत्य के अनुभव से आनन्द के सूत्र एवं तकनीक विकसित कर दी है, हर व्यक्ति के लिये। इनकी बनाई हुई ध्यान-विधियाँ हमें शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर पूर्ण स्वस्थ बनाकर, आध्यात्मिक शक्ति के साथ, अन्तर एवं वाह्य जगत में जीवन को सक्षम एवं सशक्त बनाती हैं। बहुत ही कम समय में, पूरे विश्वभर में लाखों लोगों ने, इन ध्यान विधियों के द्वारा अभूतपूर्व मूल रूपान्तरण का अनुभव किया है।
नित्यानन्द हर संसाधनों से युक्त कर देते हैं जो रचनात्मक एवं उपयोगी जीवन के लिये आवश्यक होती है, एक ऐसा जीवन जो अंतःप्रज्ञा से निर्देशित होता है न कि बुद्धि एवं पाशविक वृत्तियों से। वाह्यजगत में श्रेष्ठता और अन्तरजीवन में ऊर्जा एक साथ खिल उठती है। इनके कार्यक्रम हमें स्वाभाविक रूप से उस आयाम में पहुँचा देते हैं, जिन्हें हम ध्यानावस्था कहते हैं।

अरुणाचल पर परमहंस ध्यान की मुद्रा में
तिरूवन्नामलाई में इनकी भेट अनेक योगियों
एवं सन्तों से हुई, जिनसे इन्होंने गुप्त
रहस्यमयी आध्यात्मिक शिक्षायें प्राप्त की।
बारह वर्ष की उम्र में इन्हें पहला सघन
आध्यात्मिक अनुभव हुआ। अरूणाचल पर्वत
पर एक पत्थर पर बैठे हुए थे कि अचानक अपने चारो तरफ का दृश्य 360 डीग्री इन्हें
दृष्टिगोचर होने लगा और अपने आस-पास
की सारी चीजों से एकरूपता और
एकात्मकता का बोध होने लगा। इस अनुभव
ने इन्हें आगे बढ़ने के लिए अत्यन्त उत्साहित
5 साल की उम्र से ही नित्यानन्द जी बड़े ही भावपूर्ण ढंग से देवमूर्तियों की पूजा में रूचि लेने लगें। इन मूर्तियों की पूजा-क्रिया को बहुत ही लगन एवं मनोयोग से करते थे। कुछ सालो के बाद एक बहुत ही आध्यात्मिक महिला माता जी कुप्पम्मल के सम्पर्क में आये जिन्होंने इनको वेदान्त और तन्त्र की दीक्षा दी और बहुत ही कम उम्र से शास्त्रों की शिक्षा प्रारम्भ हो गयी।

किया।
पालिटेकनिक और स्कूल की शिक्षा एक स्वाभाविक ढंग से होती रही। कक्षाओं में दिये गये आख्यानों पर द्वारा ये सभी परीक्षायें विशेषता के साथ पूर्ण करते गये। तमिलनाडू के एक प्रमुख प्राइवेट पालिटेकनिक से मेवेन्निकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया।

मिशन स्थल पर निर्माण का शिलान्यास करते हुए

पवित्र बट वुक्ष, बिडदी आश्रम, भारत
है, व्यक्ति की अन्तरचेतना में विस्फोट कर उसे पूर्ण रूप रूप से खिलने में अत्यन्त सहायक होती हैं।
विश्व के अग्रणी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के सहयोग से परमहंस नित्यानंद रहस्यमयी घटनाओं को वैज्ञानिक तथ्य के रूप में स्थापित कररहे हैं। अपने स्वयं स्नायुतंत्र पर किये गये शोधकार्यो के परिणामों से आधुनिक

लास एंजिल्स आश्रम, यु.एस.ए.
इनका कहना है कि "ध्यान वह मास्टर कुंजी है जो भौतिक जगत में सफलता के साथ-साथ अन्तर्मन में पूर्ण तप्ति प्रदान करती है" इनकी अत्यन्त प्रभावी
ध्यान की विधियाँ एवं क्रियायें जो ध्यान के कार्यक्रमों में कराई जाती

हैदराबाद आश्रम, भारत
चिकित्साजगत को आश्चर्य चकित कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने यह अनुभव करना शुरू कर दिया है कि अब आसाध्य बीमारियों जैसे ह्रदय रोग, कैंसर, आर्थराइटिस, अल्कोहलिज्म इत्यादि पर विजय पा सकना सम्भव है।

सियेटल आश्रम, यू.एस.ए.
करते हैं जहाँ आंतरिक विकास परम है और वाह्य विकास संयोग है। ये अकादमिया परिचारक गतिविधियों के माध्यम से ध्यान से विज्ञान तक का विस्तार करने का एक सुगम स्थल हैं। ये प्रचुर आध्यात्मिकता प्रदान करती हैं जहाँ भौतिक एवं आध्यात्मिक विश्व एकरूप होकर आनन्दमय हो जाता है और जहाँ रचनात्मक ज्ञान गहन चेतना से पैदा होता है।
यो संस्था जी वन समाधान प्रदान करती हैं जिससे

कोलम्बस आश्रम, ओहायो, यु.एस.ए.
नित्यानंद मिशन, परमहंस नित्यानंद स्वामी का ध्यान एवं परिवर्तन हेतु एक विश्वव्यापी आन्दोलन है। वर्ष 2003 में स्थापित यह संस्था मानवता के जीवन परिवर्तन हेतु निरंतर कार्य कर रही है। विश्वभर में व्याप्त नित्यानंद मिशन के आश्रम एवं वेन्द्र एक आध्यात्मिक प्रयोगशाला की तरह कार्य