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9. अतिरिक्त पाठ्यक्रम

# अतिरिक्त पाठ्यक्रम

हमारे दोनो बच्चों को च्चों नित्यानंद गुरुकु ल में भर्ति कराना हमारे जीवन का सबसे उत्तम निर्णय रहा है । हमने उन्हें परिपक्व और पुश्पित होते देखा है जो हमारी कल्पना के परे है । उनका शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण बहुत सुंदर है । उन्हे शिक्षा गृहण करने से प्रेम है और वे यह व्यवहार जीवन के सभी भागो मे धारण करते है । शिक्षा मे श्रेष्ठ होना उनकी विद्या के प्रति प्रेम, उत्साह का उपफल है । और इस प्रेम भाव से, उनमे शक्तियां भी प्रकट हो रही है जैसे नेत्र बंद कर पडना और भविष्यवाणी करना आदि। धन्यवाद नित्यानंद गुरुकु ल और नित्यानंद स्वमीजी ।

दिनेश गुप्ता, अनु देशपांडे नित्यानंद गुरुकु ल बालसन्तों के न्तों माता-पिता, सिगापुर ं

नित्यानंद गुरुकु ल ने मेरी बालिका को घर से विद्यालय तक एक सुचारू परिवर्तन दिया । उनके पास प्रशिक्षित शिक्षक है जो बालको के प्रति दया और सं भावना से व्यवहार करते है । पाठ्यक्रम बहुत प्रगतीशील है फिर भी बालक उत्साह से सीखते है । बहुत पौष्टिक भोजन दिया जाता है और मेरी बालिका को बहुत पसंद है । यह एक सं पूर्ण विद्यालय है जो बालको को सभी

सुवेधा, माता, चेन्नै, भारत

" त्रिनेत्र जागरण की दीक्षा के बाद बाल सं त आखं पर पट्टी बाधं कर न के वल अग्रेंजी बल्कि ऐसी भाषाओ ंजिन्हेंवे नही ंजानते हैं, जैसे जर्मन, हिन्दी, गुजराती और तमिल में भी पढ़ने में सक्षम हो जाते हैं। इतना ही नही ंकिसी अन्य स्थान पर रखे गये कागज पर लिखित शब्दों को भी शब्दों वे पढ़ सकते हैं।

बाल सं तो ने अपने अं ं दर एक और विशाल सं भावना की खोज की है, जिसे अभिव्यक्ति का विज्ञान कहते हैं। इस ज्ञान से वे किसी भी समय इच्छित वस् तुप्राप्त कर सकते हैं। उनमें अपनी कल्पनाओ ं को यथार्थमें बदलने की क्षमता उत्पन्न हो जाती हैं। कु छ बाल सं तो ने ं स्वामीजी के दर्शन व बरसात की इच्छा प्रकट की। उन्होंनेन्हों साधरान रूप से इसकी घोषणा करते हुये कु छ विभूति को हवा में फू का। आश्चर्यजनक रूप से कु छ मिनट बाद ही स्वामीजी वहा ंआये और सबको आं शीर्वाद दिया, जिसके बाद बहुत तेज बरसात हुयी! पाचं वी ंकक्षा के कई बाल सं तो ंको उन्नयित करके दसवी ंकक्षा में बोर्ड की परीक्षा देने हेतु भेजा गया! त्रिनेत्र जागरण से उनमें अकल्पनीय बौ द्धिक क्षम ता आ गयी। स्वामीजी के अपने पुत्र, बाल सं तो ने ं स्वामीजी द्वारा दिये गये आत्मलिगं से कभी भी किसी असहाय अथवा कष्ट में व्यक्ति के उपचार का अवसर नही ं खोया। बाल सं त प्रेम से पाले गये अपने पशओु ंजैसे खरगोश, पक्षियो ंआदि के प्रति भी अपना प्यार बरसाने में आनंद की अनुभूति करते है।"

~ शरण्य श्रीधर, नित्यानन्द गुरुकु ल छात्रा

" हमारे गुरुकु ल में, मैं बच्चों (छा च्चों त्रों ) को नाना प्रकार की त्रों शक्तियो से ं दीक्षित करता हूँ। फिर उन्हें स्वयं उस सिद्धि को और विकसित करने की छूट दे देता हूँ।

१२ वर्ष की आयु में जब मेरे भीतर ज्ञानोदय हुआ, तब मुझे दसो दिं शाओं में देखने का अनुभव प्राप्त हुआ। मैंने बच्चों को इस स च्चों िद्धि की दीक्षा दी, और उन्हें स्वयं इस पर प्रयोग करने की पूरी स्वतंत्रता दी। इस कारण अब ये बच्चे और भी कई नयी शक्तियो का प्र ं दर्शन करने लगे हैं। ये बच्चे विभिन्न भाषायो को ं डाउनलोड (सं कलित) कर लेते हैं। वे और भी कई नए कार्य कर दिखाते हैं , जिन्हेंमैंने भी नहींकिया इस आयु में। "

~ परमहंस श्री नित्यानंद

तृतीय नेत्र जागरण दीक्षा प्राप्त करने के पश्चात कई बच्चे और व्यस्क महा सिद्धियाँ एवं अलौकिक शक्तियां व्यक्त करने लगते हैं। उदहारण के लिए :-

  • ® उच्च कोटि की सर्जनशीलता, नए विषयो को ं शीघ्र सीखने और समझने की क्षमता, अद्भुत अंतर्ज्ञान का अनुभव, इत्यादि
  • ® स्वास्थ्य में सुधार, प्रबल रोग प्रतिरोधक क्षमता।
  • ® दोनो ने ं त्रों के त्रों बिना देखने और पढ़ने की क्षमता। इससे मस्तिष्क में नए आयाम जागृत होते हैं, जिसके परिमाण स्वरुप कई नयी सिद्धियाँ मनुष्य के लिए सं भव हैं, विशेष रूप से स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के क्षेत्र में । उदाहरण के लिए, क्षीण दृष्टि वाले लोगो के ल ं िए तृतीय नेत्र की मदद से देख पाना सं भव हो सकता है ।
  • ® तृतीय नेत्र के माध्यम से शारीरिक बीमारियो का पता लगाना | ं