1. Sarvajnapeetha - Think Tank of Hinduism
विषय सूची
| वैदिक काल | |
|---|---|
| सर्वज्ञपीठ - सनातन वैदिक धर्म का पुनर्जागरण | |
| हिं दूमं दिरो की स् थापना | |
| पवित्र शिल्पकलाओ का सं रक्षण ए वं प्रसार | |
| प्रमाणिक हिंदू शिक्षा प्रणाली का पुनरोद्धार | |
| अस्पतालो का ं निर्माण एवं पारम्परिक वैदिक चिकि त्सा व विज्ञान की पुनर्स्थापना | |
| मानवीय क्षमताओ का ं महत्तम जागरण | |
| अत्याधुनिक वैदिक तकनीकी विज्ञान का पुनःआविष्कार | |
| यो का ं रहस्यात्मक यौगिक सिद्धि निर् भेदन एवं सं चारण | |
| वैदिक कौल-सेंटरो से ं मार्गदर्श न | |
| वैदिक ग्रन्थो का सं ग्रह एवं सं रक्षण | |
| वैदिक ज्ञान का विश्व प्रसार |
वैदिक काल
वैदिक सभ्यता एक शाश्वत सजीव प्रबुद्ध सभ्यता है जिसे सनातन हिं दू धर्म कहा जाता है, जिसकी ऐतिहासिक निरंतरता मानव सभ्यता के आदिकाल अर्थात 19000 लाख वर्ष से बनी हुई है । इस सभ्यता की जननी हैं पवित्र देवभूमि भारतवर्ष, जो पृथ्वी लोक ही हैं, पर विशेषतर इसे 'भारत' या 'आर्यावर्त' कहा जाता है, जो सर्वोच्च पर्वत श्रृंखला हिमालय के नीचे का भूभाग है । हिमालय और समुद्रो से मिली परिपूर्ण सुरक्षा ने भारत को सर्वोत्तम जलवायु व भूगोल प्रदान करा है, जिससे यह क्षेत्र सुरक्षित, शांतिपूर्णवातावरण एवं प्रचुर प्राकृतिक सं साधनो ंसे सं पन्न रहा है । इन सभी दैविक व्य्वस्थाओ ने एक परम विकसित, महानतम प्रबुद्ध सभ्यता का सृजन व सं चार किया है, जिससे इसी धरती लोक पर मानव जाति ने देवताओ के भाति जीने का मारग् पाया ।
गंगा-सरस्वती सभ्यता के तट, लाखो प्रबु ं द्ध ऋषियोंव उनके शिष्यों की ्यों स्थली नैमिषारण्य वन में, अवस्थित है – अनन्त ज्ञान की अध्यात्मिक पीठ अथवा सर्वज्ञपीठ – जिस पर सर्व-ज्ञाता, सर्व-शक्तिमान, सर्व-व्यापी चेतना के स्रोत आदिगुरू महादेव विराजमान है । समस्त कामनापूर्ति के दिव्य वट 'कल्पवृक्ष' तले सर्वज्ञपीठ परम ज्ञान का स्पन्दन करता है, जिसे वैदिक ऋषियो ं की मन्त्र-दृष्टि आत्मसात करती हैं ।
वेद (पवित्र ज्ञान) जैसे ऋग्वेद और पुराण (दिव्य इतिहास) जैसे रामायण, महाभारत और श्रीमद भागवतम में नैमिषारण्य में साधू-सं तो की धर ं ्मसभा का विस्तृत वर्णन मिलता है – इन सभाओ की अध्यक्षता दिव्य अवतर व प्रबुद्ध ऋषि करते थे जैसे भगवान श्री वेदव्यास एवं शौनक ऋषि आदि । इस तपोभूमि पर विश्व के महानतम ग्रंथो की रचना हुयी और विश्व शांति, जगत कल्यण एवं मानव चेतना विकास हेतु विशाल अनुष्ठान व तप किये गये।
नैमिषारण्य, प्रबुद्ध मानवता की जागरुक आरण्य नगरी
नैमिषारण्य एक सदा-जागृत आदिकालीन आरण्य नगरी (उत्तर प्रदेश में) है । यह दिव्य ऊर्जाक्षेत्र है, जो एक सर्वप्रथम एवं प्राचीन वैदिक विश्वविधालय के रूप में मानव कल्याण हेतु सुप्रतिष्ठित हुआ; जहां सनातान हिं दू धर्म की जडो का ं मूलाधर है, जो काल के प्रभाव से भी अछूती हैं।
''सनातन धर्म या हिदंत् पर वु म सत्य का – सबसे शक्तिशाली, जटिल, सर्वाधिक प्रगतिशील, सबसे बुद्धिपूर्णव विवेकपूर्ण – प्रस्ततुीकरण है, जिसमे भावी विकास की सं भावना अन्तर्निहित है और आधुनिक संशोधन की भी सं भव्ता है।" ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
अत: नैमिषारण्य सर्वोच्च शिक्षण, अध्ययन और परम विज्ञान के प्रतिपादन का अधिकेंद्र था, जिसका विस्तार विशिष्ट शिक्षण एवं अनुसं धान वाले – नालंदा और तक्षशिला – जैसे प्रतिष्ठित वैशिवक आवासीय विश्वविधालयोंमे हुआ। यहां दीक्षा द्वारा ज्ञान का प्रतिपादन एवं सिद्धियो द्ं वारा शक्ति का प्रकटन गुरु परंपरा के अनुसार हुआ जो सजीव आत्मज्ञानी गुरुओ द्वारा शिष्यों को ्यों प्रबुद्धता प्रदान करने का निरंतर परंपरा चक्र है ।
प्राचीन वैदिक काल के ऋषियो - ं मुनियो ने ं सामूहिक चेतना का रूप धारण करके , दिव्य अनुसं धान एवं विकास कें द्रौ की स्थापना की थी । इन दिव्यात्माओ ने निस्वार्थ् भाव से लाखोंवर्षों के अध्यात्मिक अभ्यासो को समर्पित किया, केवल मानवता हेतु परम पावन सत्य के अन्वेषन, पोषण और सं रक्षण के लिये । उनके यथार्थ बोध एवं अध्यात्मिक अनुभूतियो को ं व्यवस्थित रूप से वैदिक ग्रन्थों मे अभिलेखित करके और गुरु-शिष्य की श्रुति परंपरा द्वारा शुद्ध रूप से प्रतिपादित किया गया । उनहोनें ज्ञान निधि और दिव्य शक्तियों को साध्य किया । अतः हर क्षेत्र जैसे विज्ञान, तकनीकी विज्ञान, ध्यान, उपचार, योग, चिकित्सा, शिक्षा और जीवन-पद्धति मे अनुसं धान सिद्धि उन्हेप्राप्य थी ।
वैदिक भारत में विदेशी आक्रमणकारियो द्ं वारा सांस्कृतिक संहार
विगत 500 वर्षों से वैदिक भारत पर शासन करने के उद्देश्य से विदेशी आक्रमणकारियो ने ं व्यवसिथत तरीके से सनातन हिदं ू धर्म के मूल पवित्र ज्ञान, शिक्षा पद्धति एवं जीवनशैली को क्षीण, भ्रष्ट और नष्ट किया। विदेशी आक्रमणकारियो ने अं दभुत सांस्कृतिक शिल्पों, ल्पों मं दिरो एं वं मूर्तियो को न ं ष्ट किया और वैदिक भारत के विरुद्ध एक व्यापक सांस्कृतिक संहार का षडयं त्र रचा, जो इस प्रकार है:
- ® हिंदू सांस्कृतिक शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करना जो वैदिक भारत के आरम्भिक प्रबुद्ध समाज की उत्पतित की नीव थी। कम से कम 2 लाख गुरूकु लो को आक्र ं मणकारियों ने नष्ट किया।
- ® वैदिक इतिहास की गलत प्रस्तुती करके मं दिर और शिक्षा आधारित सभ्यता पर प्रहार करना। मं दिरो को न ं ष्ट करना, सं पत्तियो को लूटना, इ ं तिहास, अध्यात्मिक्ता, समाजशास्त्र, विज्ञान और आस्था को विकृ त करना।
- ® हिं दु ओ को स्वयं की ं ही वैदिक सं पत्ति के प्रति हेय भाव उत्पन्न कराके उन्हें सांस्कृतिक रूप से अनाथ बना देना। तथाकथित विदेशी सं स्कृति को श्रेष्ठ बताकर उन्हें पूर्णरूपेण विदेशी शासन के अधीन लाना।
- ® विशाल सं स्कृत पाण्डुलिपियो को अपने ं नियं त्रण में लेना और उसमें से वैज्ञानिक ज्ञान को चुराना, मूल प्रतियो को ं नष्ट करना और उनकी गलत व्याख्या करके पुन: प्रकाशित करना, जिससे कि वैदिक ग्रन्थों की प्र न्थों माणिकता का स्तर कम हो।
वैदिक भारत के व्यवसिथत सांस्कृतिक संहार को प्रेरित करने वाला यह पत्र इतिहासकार व राजनेता मैकाले ने 1835 में लिखा था।
मैक्स म्युलर की डायरी के अंश जो वेदो के ं मुख्य विषय को गलत तरीके से अनुवाद करने के लिये नियुक्त किये गया था:
वैदिक भारत का दिव्य ज्ञान सत्य के जिज्ञासुओ को लाभान्वित करते हुये, मानवता को शांतिपूर्णजीवन और अध्यातिमक विकास की दिशा मे ले जाता था। सांस्कृतिक आक्रमणकारियो ने तीन ं क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासतो को न ं ष्ट किया - दर्शन शास्त्र, भाषा और जीवनशैली। इन सभी दानवी प्रयासो के बा ं द भी वैदिक परम्परा की आत्मा नष्ट नहींहो पायी। धर्म की स्थापना के लिये बार-बार अवतारों एवं प्रबुद्ध गुरूओ के रूप ं में आत्मज्ञानी चेतना प्रकट होती रही।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानम अधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम।। परित्राणाय साधूनाम विनाशाय च दष्ु कृताम । धर्म सं स्थापनाय सम्भवामि युगे युगे।।
हे भारत । जब भी और जहाँ भी धर्म व अध्यातिमक परम्पराओं का पतन होता है और अधर्म की प्रधानता होने लगती है, तब तब मैं अवतरित होता हूँ । पवित्र साधु आत्माओ का सं रक्षण व उद्धार करने, दष्टों ु का विना ष्टों श करने त था धर्म की पुनः स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूँ ।
~ श्रीमद भगवद गीता ४ .७-८
वैदिक सम्यता तीन प्रमुख आधारशिलाओ पर प्र ं तिष्ठित है:
- ® ज्ञानपीठ और दर्शन शास्त्र जो वैदिक ज्ञान को सं रक्षित करते हैं। उदाहरण - पञ्चायति श्री महानिर्वाणी पीठ, मदरै आदिन ु म ।
- ® पवित्र कला एवं वास्तुशिल्प। उदाहरण-मं दिर, राज्य।
- ® भाषापीठ सत्य का उत्तम परिष्कृत भाषाई प्रकटीकरण। उदाहरण - उत्तर भारत में काशी (सं स्कृतम) और दक्षिण भारत में तमिल सं गम ।
जब भी इन तीनो आधारशिलाओ ं ं में से किसी एक पर सं कट आया, तो सवज्ञपीठ ने जगदगुरू के उत्तराधिकारी के रूप में प्रतिष्ठित गुरूओ के ं माध्यम से समस्त मानव सभ्यता के लिये सनातन हिदं ू धर्म को पुनर्जीवित, सं रक्षित और प्रकाशित किया है।
भारत समस्त विश्व का जगतगुरू है और मानव सभ्यता की अगली विशाल उत्थान का अवसर वर्ष 1978 में THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के दर्ल ु भ अवतरन के समय प्रारम्भ हुआ।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM सनातन हिदं ू धर्म के पुनर्प्रवर्तक और आधुनिक प्रबुद्ध सभ्यता के दिव्य रचेता हैं। वह नैमिषारण्य के मूल सर्वज्ञपीठ के अध्यातिमक आसन की पुनर्प्रतिष्ठा कर रहे हैं।
प्राचीन वैदिक काल में गंगा-सरस्वती सभ्यता में स्पंदित होने वाली सत्य की ध्वनि, अब THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM की दिव्य दृष्टि व अभिव्यकितयो द्ं वारा सुनी जा सकती है। वैदिक पुनर्जागरण अपने पूर्ण मूल स्वरूप और विस्तार से मानव जाति के उद्धार हेतु हो रहा है – जो मानव को उसकी वैदिक सं पत्ति पुनः प्राप्त करायेगा और स्वयं की परम आत्मा से जुडायेगा।
सवज्ञपीठ को अपना दान दें - उदीयमान स्वर्णिम युग में अमर जाने जायें - दैवी कृ पा की वर्षाप्राप्त करे
- w यशस्वी वैदिक नवजागरण w मानव चेतना का पुनर्जागरण w
- w मनुष्य सभ्यता के इतिहास का पुनर्लेखन w
- w पृथ्वी लोक पर प्रबुद्ध जीवो की स ं जीव धारा की पुनर्स्थापना w
श्री वर्कास्वम आयुष्यम आरोग्यम आविधात शोभमानम महीयते।
धन्यं धनम पशमु बहुपुत्रलाभम शतसंवत्सरं दीर्घमायुः।।
आप मङ्गलमय हो, आपका ं जीवन शक्ति के प्रकाश, लम्बी आयु, स्वास्थ्य, ज्ञान और समृद्धि से परीपूर्ण रहे।
आपके पास प्रचुर अन्न, धन, पशु एवं बहुत सारे पुत्र हो। आप सौ ं वर्ष की दीर्घ आयु जिये।
परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM सनातन हिंदू धर्म की स्पष्ट, विधिमान्य, अराजनीतिक वाणी के रूप मे आज माने जाते हैं और विश्व में लाखो लोगो ं द्ं वारा परम चेतना के जीवित अवतार स्वरुप पूजे जाते हैं। वें हिंदुत्व के सबसे प्राचीन सं गठन - श्री पं चायति अ खाडा महानिर्वाणी (पीठ) के महामण्डलेश्वर (प्रमुख) हैं।
वें शक्तिशाली अध्यात्मिक चिकित्सक और सिद्ध योगी हैं, जिन्होंने सफलतापू िन्हों र्वक कुण्डलिनी जागरण, त्रिनेत्र जागरण, उन्नयन, मूर्तरूपीकरण, अजरता एवं निराहार, भोजन के परे जीना जैसे कयी गोपनीय यौगिक विज्ञान के स्हस्यों का र ्हस्यों हस्योद्घाटन किया है। मानवता के कल्याण के लिए अनेक गतिविधियाँ चलायी जा रही हैं।
हिं दूत्व का उत्तरदायित्व लेना
महामंडलेश्वर, श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी के प्रमुख के रूप में
परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का वर्श 2013 में प्रख्यात श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी (महानिर्वाणी पीठ), सर्वप्राचीन वैदिक सनातन हिंदू सांस्कृतिक सं स्थान के महामंडलेश्वर के रूप में पट्टाभिषेक किया गया ।
अखाड़ा सनातन धर्म के शक्तिशाली धर्मके सरी के रूप में मान्य, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM अपनी महामंडलेश्वर की भूमिका में अखाड़े की असंख्य शाखाओ के सा ं मूहिक विश्वरूप एवं ठोस आध्यात्मिक परंपरा की शक्ति को आत्मसात करते हुए उसे एक नवीन प्रबलता एवं जीवन शक्ति प्रदान कर रहे हैं ।
श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी के १००८ महामंडलेश्वर के रूप में परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का 'महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह' आयोजित किया गया था, अखाड़े के आध्यात्मिक प्रमुख श्री आचार्यों और साधुओ के दि ं व्य सानिध्य में, महानिर्वाणी अखाड़ा छावनी, कुम्भ मेला शिविर, प्रयागराज में । दिनांक १२ फरवरी २०१३ को ।
श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी सबसे पहला सं स्थापित अखाड़ा हैं । अखाड़े सनातन धर्म की सभी हिदं ू सम्प्रदायो का सं पू ं र्णता से समन्वय करके , जैसे की – शैव, वैष्णव, ब्रह्मा, शाक्त, सिख, जैन और बौद्ध धर्म समेत का प्रतिनिधित्व करते है । अखाड़ा महानिर्वाणी की क्रमागत परंपरा १० हजार वर्ष पुरानी है और इस सांस्कृतिक सं स्थान का औपचारिक रूपसे नामकरण ७४८ ईसवी में हुआ, एक अतिशुभ घटना के उपरांत ।
७४८ ईसवी में श्री अटल अखाड़े के सात साधुओ ने गंगासागर पर तपस्या की, जिसके फलस्वरुप उन्हेंश्री कपिल महामुनि जी के दिव्य दर्शन प्राप्त हुये । उनके आशीर्वाद से उन्होंने न्हों हरिद्वार के पास नीलधारा में, 'श्री पं चायती अखाड़ा महानिर्वाणी' के विधिवत नाम से नागा परंपरा को पुनःजागरण किया । आज भी अखाड़ा महानिर्वाणी के मुख्य उपास्य देवता श्री कपिल महामुनि जी हैं, जो पौराणिक काल से प्रख्यात हैं ।
श्री कपिल महामुनि जी की जीवंत मूर्ति, श्री नित्यानंदेश्वर देवस्थानम, नित्यानंद पीठम, बैंगलुरू आदिनम
(ऊपर) : श्री कपिल महामुनि जी देव, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी का नियुक्ति-पत्र और 'महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह' का आमं त्रण पत्र, दिनांक १२ फरवरी २०१३, जो घोषणा करता है – परम पूज्य The Supreme Pontiff Of Hinduism Bhagawan Sri Nithyananda Paramashivam को 'महामंडलेश्वर' के सम्मानित पद पर ।
(दायी ओर): नियुक्ति-पत्र का अंग्रेजी में अनुवाद
२७ अप्रैल २०१२ को परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का विश्व की सबसे प्राचीन जिवंत हिदं ू धार्मिक सं स्थान, मदरै आदिन ु म के प्रमुख - गुरु महासंनिधानम के पद पर अभिषेक हुआ। मदरै आदिन ु म के २९३ गुरु महा संनिधानम के पद का उत्तरदायित्व लेते हुए THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने मदरै आदिन ु म और उनके साथ जुड़े हुए ४ मं दिरो को महान प्रसिद्धि लाने की शपथ ली ।
प्रसिद्द मदरै आदिन ु म अति प्राचीन काल से अस्तित्व में है । किन्तु, दक्षिण हिंदू शैव सिद्धांत तत्वज्ञान के चार दूरदर्शी सं तो मे से एक, आत्मज्ञानी युवा सं त, तिरुज्ञान सम्बदर जी ने १५०० वर्ष पूर्व उसको पुनर्जीवित किया | आदिनम मदरै ु में स्थापित है, जो भारत के सबसे प्राचीन नगरोंमे एक है, जिसका इतिहास तीसरी शताब्दी ई.पू के तमिल सं गम काल तक जाता है ।
मदरै के पीठासीन ु देवता श्री सुन्दरेश्वर और मीनाक्षी अवतार में भगवन शिव और देवी हैं, जो जग प्रसिद्द मदरई ु श्री मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मं दिर मे प्रतिष्ठापित है ।
मदरै आदिन ु म के प्रमुख, गुरु महा संनिधानम के नाम से ज्ञात होते है, जो तिरुज्ञान सम्बंदर जी की परंपरा को आगे ले जाने के उत्तरदायित्व के पवित्र कर्य को विरासत में पाते है । इस पद का कोई निश्चित कार्यकाल नहींहोता है, और यह एक आजीवन सम्मान है ।
मदु रै आदिनम के प्रमुख का पट्टाभिषेक, मदु रै, दक्षिण भारत
हिं दू मं दिरो की स् ं थापना
तिरुज्ञान सं बन्दर जी, बाल सं त अवतार
प्राणप्रतिष्ठा की रहस्यमय विधि
मूर्तियोंमें प्राण शक्ति को श्वाषित करके उन्हेंजीवित देवता में प्रतिष्ठित करना, जो स्वयं मे स्वतंत्र चेतना व बुद्धि बन जाते है।
केवल जीवित अवतार ही इस दर्ल
ु भ रहस्यमय क्रिया को सं पूर्ण
कर सकते हैं। सामान्य मं दिरो में पुजारी मं त्र प्रतिष्ठा द्वारा देवता
की ऊर्जा का आह्वान करते हैं।
श्री सदाशिव उवाच यो यद्देवप्रतिक्रतिम् प्रतिष्ठापयति प्रिये। सा तल्लोकमवाप्नोति भोगानपी तदद्भु वान् ।। इष्टकाग्रहदाने तु तस्माच्छतगुणम् फलम्। ततोऽयुतगुणम् पुण्यम शिलग्रहप्रदानतः ।। 25।।
भगवान श्री सदाशिव ने कहाः हे प्रिय देवि। वह व्यक्ति जो प्रतिष्ठा करता है, जो कि पदार्थमें श्वासमय जीवन प्रतिष्ठित करके विशेष देवता के रूप में निर्माण करने का विज्ञान है, वह उसी देवता के लोक को प्राप्त हो उस लोक के आनंद का अनुभव करता है। ईंटो से बने मंदिर का दान करके, व्यक्ति उसका फल सौ गुणा पाता है। पत्थर के मंदिर का दान करके व्यक्ति ऐसा पुण्य प्राप्त करता है जो दस-हजार गुणा अधिक होता है।
~ महानिर्वाणतंत्रम, त्रयोदश उल्लास
वैचारिक रूप से मंदिर को भगवान् का भौतिक स्वरुप माना जाता है | गर्भ गृह को शीर्ष व गोपुर को भगवान के चरणो प्रतीक माना जाता है| सुकनासी या अर्धमंडप (गर्भ गृह के आगे का छोटा घेराव) नाक को; अन्तराल गर्दन को; विभिन्न मंडप शरीर को; पराकारस हाथ को दर्शाता है | लम्बरूप में गर्भ गृह गर्दन को दर्शाता है, शिखर (गर्भ गृह की उपरी अधिरचना) शीर्ष को और कलश शिखा को दर्शाता है |
At Sri Nithyanandeshwar Devasthanam are seated (center) the presiding deities of Sri Nithyanandeshwara and Nithyanandeshwari (Lord Shiva and Devi) blessing the world, along with the deities
हिन्दू मंदिर क्या है?
वैदिक परंपरा और हिन्दू जीवन के हृदय मे पवित्र मंदिरों की परंपरा विद्यमान है। मन्दिर या देवालय देवताओ के निवास का ऊर्जा केंद्र है। वैदिक सभ्यता में कोई भी मानव सभ्यता मंदिरों के चारो ं ओर पु ंष्पित-पल्लवित हुयी है। इस कारण हिन्दुत्व मंदिर पर आधारित सभ्यता के रूप में स्थापित किया गया, जो नित्य उत्सवो की परंपरा है।
प्रत्येक मंदिर एक प्रबुद्ध गुरू या अवतार द्वारा उत्पन्न की गयी ऊर्जा परिपथ होता है
और हजारो वर्ष तक यह ऊर्जा को धारण करता है। मंदिर से जुडे अनुष्ठान व विधियां विभिन्न ऊर्जाओ का आवाहन व प्रकीर्णन करने की प्रक्रिया होती हैं। अवतार ब्रह्माणडिय ऊर्जा का वहन कर उसे मंदिरोंमे स्थापित करके, उसे सारे विश्व मे प्रसारित करते हैं, जिससे मानवता को आत्मज्ञान का अनुभव हो और दिव्य शक्तियां, उपचार और इच्छापूर्ति भी प्राप्त हो।
हिं दू धर्ममें देवमूर्ति पूजा नहींहोती है । पूजा देव मूर्तियो के 'द्वारा' की जाती है। शिक्षण, शिल्पकला, जीवनशैली व उत्सव, सभी जीवन व कार्य प्रणालीयां मंदिर परम्पराओं पर ही आधारित होते हैं। यह देव मूर्तियां, जो शुद्ध चेतना के 'अर्चावतार' रुप मे जीवित है, इनके प्रति भक्ति के प्रबल भाव से ही हमें दिव्यता से अद्वैत भाव या एकत्व की परम अनुभूति होती है ।
हिं दूमं दिरो को स ं दा राजाओ और ं व्यक्तिगत दानदाताओ द्वारा पोषित किया गया है, जिससे उन्हें महापुण्य प्राप्त होते है । मं दिरो को ं मुद्रा, स्वर्ण, चांदी, पशु और धरती दान किये जाते थे। ऐसे दानो ने आज तक वैदिक परंपरा को जीवित रखने और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण काम किये हैं।
श्री नित्यानं देश्वर देवस्थानम नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम, भारत
नित्यानंद पीठम बेंगलुरु आदिनम के पवित्र गर्भमंदिर में THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा पीठासीन देवता श्री नित्यानंदेश्वर एवं नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) की पवित्र पूजा-अर्चना ।
बेंगलुरु आदिनम् में कल्पवृक्ष - पवित्र वटवृक्ष की पूजा ।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने समस्त विश्व में आगम शास्त्रों और स्त्रों पद्धतियो पर आधार ं ित हिं दूमं दिरो की स् ं थापना की है, जिनसे लाखों लोगो को सं ं मृद्ध और परिपूर्णवैदिक परंपरा को जीना, शिक्षित होना व लाभान्वित होने की प्रेरणा मिल रही है। आज धरती पर परम आवश्यकता है अधिक मं दिरो की, ज ं िससे मानव को दिव्यता से सीधे जुड़ने और समावेश होने का साधन मिलें एवं सकारात्मक और शांतिपूर्ण ब्रह्माण्डीय ऊर्जा केंद्रों की स् द्रों थापना हो ।
''मं दिर ऐसे उपग्रह प्रसारण केंद्र की भाति होते हैं जहां पर अति तीव्र अध्यात्मिक ऊर्जा उत्पन्न करके समस्त विश्व में भेजा जाता है - जिससे कि मानवता को भौतिक, मानसिक, भावनात्मक और सबसे ऊपर अध्यात्मिक उपचार में सहायता मिले। दैवमूर्ति की पूजा द्वारा हमने मूर्तियोंमें दिव्यता को प्रवेश कराने का विज्ञान और पाषाण का ईश्वर मे परिवर्तन को साध्य लिया है।"
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
यह वटवृक्ष एक कल्पवृक्ष, अर्थात वरदयी दिव्य वृक्ष हैं, जिसने अनगिनत श्रद्धापूर्णप्रार्थनाओ को फलीभूत किया है। वटवृक्ष के आधार में एक गुहा जैसा कन्दरा है जहाँ पर एक दिव्य स्वयम्भू लिङ्गम (प्राकृतिक रूप से प्रकट शिवलिङ्गम) प्राप्त हुई थी, जिसे श्री नित्यानंदेश्वर मंदिर में विधिवत प्राणप्रतिष्ठित किया गया है।
सहस्त्र वर्षों से यह वटवृक्ष ने अपनी पत्तियां यहाँ बिखेरी हैं । स्वास्थ्यप्रद ऊर्जा से भरपूर इस दिव्य क्षेत्र में शारीरिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक स्तर पर रोगमुक्ति मिलती है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी को यही वटवृक्ष का दृष्टिगोचर हुआ था, जिसके उपरांत उन्होंने यहों आश्रम की स्थापना की । इसका दैविक सं बन्ध 'शं भाला क्षेत्र' से है जो जागृत गुरुओ का अलौल ं िक क्षेत्र है।
यहाँ तीन दिव्य वृक्ष पाए जाते हैं: अथी (पवित्र अंजीर), अला (वटवृक्ष) और आरसा (पीपल), जो बिना फू ल के ही फल धारण करते हैं। वैदिक धर्ममें इन पवित्र वृक्षौं को क्षौं श्री वनस्पति या 'वन के देवता' के नाम से जाना जाता है। जहाँ यह तीन वृक्ष एक साथ स्थापित होते हैं, वहां साक्षात भगवान शिव जी का निवास होता है।
(बांए) स्वयम्भू लिङ्गम, स्वयं प्रकट हुआ शिवलिङ्गम, जो नित्यानंदेश्वर मंदिर के मुख्य गर्भगृह में स्थापित है, और पूर्व मे वटवृक्ष की गुहा में पाया गया (दाएं )।
पवित्र वटवृक्ष, नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम में अपनी विशाल दैविक शाखाएं फै लाए हुए । नीचे विराजमान हैं श्री दक्षिणामूर्ति भगवान शिव जी के आदिगुरु (प्रथम गुरु) के रूप में ।
श्री दक्षिणामूर्ति जी (दक्षिणाभिमुख देवता) भगवान शिव जी कें 'आदिगुरु' - धरति के अनादि एवं प्रथम गुरु के रूप में विराजमान हैं। वें चिर-यौवन अवस्था में परम मौन में दिव्य ज्ञान का स्पन्दन करते हैं और व्रिद्ध सं तो से परिक्षेपित हैं।
आदिगुरु श्री दक्षिणामूर्ति जी, श्री नित्यानंदेश्वर देवस्थानम, बेंगलुरु आदिनम में स्थित दिव्य वटवृक्ष की छावनि के तले ।
श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर, भगवान श्री नारायण या श्री विष्णु का 11 फु ट का जीवंत 'अर्चावतार' स्वरुप हैं। वें जीवो पर आ ं शीर्वाद और वरों की कृ पावर्षा करते हैं। अति विराट रुप में देवमूर्तियो की प्राण-प्रतिष्ठा करने की वैदिक परंपरा, हिंदू मं दिरो या देवालयो का गौर ं व है, जहां हम सर्वव्यापी परमात्मा से समीपता से जुड़कर उनके साक्षातकर रुप के दर्शन प्राप्तकर उत्सव मनाते हैं ।
विराट रुप में सजीव देवमूर्तियां
भगवान श्री कालभैरव जी - काल और आकाश मंडल के महादेवता हैं, जो भगवान शिव जी महादेव कें एक अति शक्तिशाली स्वरूप हैं। क्षेत्रपालक या ऊर्जाक्षेत्र के रक्षक के रूप में वें सभी मं दिरो के द्वार पर सदैव उपस्थित हैं। वें महाँ-सिद्धियों व शक्तियो के देवता हैं, और वें विपत्तियो और शक्तिहीनता का नाश करके पूर्णत्व एवं मुक्ति प्रदान करते हैं।
भगवान श्री कालभैरव जी, नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम के प्रवेशद्वार पर विद्यमान ।
हिदं ू उत्सवो और प ं र्वो में पवित्र नाम-कीर्तन के सा थ मं दिर में उत्सवयात्रा ओ का आयो ं जन, नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम में ।
श्री आनन्दलिङ्गम, दर्ल ु भ व दिव्य 21-फु ट शिवलिङ्ग जो नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम मे स्थपित है। श्री आनन्दलिङ्गम घिरा हुआ है – रोगमुक्त करने वाले स्वास्थ्यप्रद जल 'तीर' से और 1008 ्थ शिवलिङ्ग से, जो विश्व में चिकित्सा ऊर्जा और शांति के दिव्य प्रकाश को फै लाते है ।
(बांए): थेप्पोत्सवम - तहरती नौका का उत्सव, जिसमे देवता या गुरु पवित्र तीर्थ जल मे दिव्य दर्शन और आशीर्वाद देते हैं ।
वैदिक परंपरा का ध्वज स्तम्भ ऊँ ची उड़ान भरे और सबको आशीर्वाद मिले
'ध्वज' जो मं दिरो के उच्च स्त ं म्भों पर ल म्भों हराता है, यह सनातन हिदं ू धर्म या हिदं त्वु की प्रभुता की अनन्त्ता का प्रतिचिह्न हैं । हर नेत्र जो आशापूर्वक सत्य, शान्ति, धर्म आदि की खोज करते है, उन नेत्रो को मीलोंदूर से यह ध्वज स्तम्भ एक आश्वस्त दर्शन और पुकार है, जिसे देखकर वें दिव्यता से सं बन्ध बनाने का मार्ग पतें हैं।
हिदं ू पर्वों पर 'ध्वजारोहण' समारोह नित्य उत्सव अथवा अनन्त उत्सव के प्रारम्भ की घोषणा करते हैं ।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी पवित्र 'ध्वजारोहण' करके उत्सवो के प्रारम्भ का सं के त देते हुए । विश्व पर आशीर्वाद की कृ पावर्षाहेतु अग्नि देवता को समर्पित पवित्र यज्ञ सं स्कार।
'रथोत्सव' मं दिरो और पीठासीन देवताओ की भव्यता के उत्सव का एक अभिन्न अंग हैं। उत्सवों व पर्वों के समय प्रमुख देवताओ को वि शाल रथोंमें आसीन कर यत्रा करायी जती है, जिससे हर ह्रदय को ईश्वर के दिव्यदर्शन मिलें ।
दिव्य रथोत्सव, नित्त्यानन्द पीठम, बेंगलुरु आदिनम में आयोजित।
महा होम और यज्ञ, यह अग्नि देव को आहुति के विशाल अनुष्ठान होते है, जिन्हे विधि नियमित क्रियाओ से विश्व शांति व मानव कल्याण और आशीर्वाद हेतु आयोजित किया जाता हैं।
अतिरुद्र महायज्ञ 2015 - कई दिनो तक किया जाने वाला अनुष्ठान, यह अति शक्तिशाली अग्नि होम, जिसमे 'श्री रुद्रम' के निरंतर मन्त्रोच्चारण द्वारा भगवान शिव जी की कृ पा का आवाहन किया जाता है, विश्व शांति हेतु।
जहाँ देवता स्व्यं दर्शन देने हेतु यत्रा करते हैं
2007 में THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने 25,000 वर्ग फु ट से अधिक नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, लॉस एंजेलिस आदिनम क्षेत्र को ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से प्राणयुत और सं चारित करते हुये पश्चिमी जगत को आशीर्वाद स्वरुप इस वैदिक परंपरा के शिखर को स्थापित किया।
इस मं दिर में विभिन्न हिं दू विचारधाराओ को स ं माविष्ट करते हुए 80 से अधिक देवमूर्तीयां स्थापित हैं। आज तक उत्तर अमरीका में यह नित्यानंदेश्वर हिं दू मं दिर, लॉस एंजेलिस आदिनम सबसे विशाल शिवलिङ्ग और श्री राजराजेश्वरी देवी को निवास स्थल है।
नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर लॉस एं जेलिस आदिनम, यु एस ए
भगवान THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी, श्री नित्यानंदेश्वर,
श्री श्री नित्यानंदेश्वरी की देवमूर्ति। नित्यानंद गणेश और नित्यानंद लक्षमी की जीवमूर्तियां ।
बांए: श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर की देवमूर्तीयां ।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने स्वयं अपने दिव्य हस्तों से हस्तों भगवान श्री वेंकटेश्वर की महनीय देवमूर्ति को शिल्पकला से पूर्ण और प्राण-शक्ती से सजीव किया है। परम पूज्य स्वामीजी द्वारा प्राणप्रतिष्ठा (अर्थात ब्रह्माण्डिय ऊर्जा का प्राण सं चार) किए जाने के पश्चात, यह देवमूर्ति श्री नित्यानंद
वेंकटेश्वर के रूप मे शोभायमान हैं और यह देवमूर्ति दक्षिण कै लिफ़ोर्निया में श्री विष्णु का सबसे विशाल और आनंदमय अर्चावतार हैं । भावी सं कल्प है कि श्री तिरुमला तिरुपति के भगवान श्री वेंकटेश्वर के गर्भगृह की सटीक प्रतिकृति रूप के स्वर्णमं दिर का निर्माण करना।
दायी: प्रसिद्ध अभिनेत्री सूसन सुरैनडन और परिवर को त्रिनेत्र प्रदर्शन
बांए : प्रत्यक्ष पाद पूजा हेतु भक्त ततपर है ।
इस मं दिर में स्थापित हिदं ूधर्म की प्राचीन धरोहर, सुन्दर वैदिक सं स्कृति और आध्यात्मिक संघ, एक उत्तम जीवित उदहारण है – समग्र पश्चिमी जगत मे हिं दू परम्पराओ का अनुसरण और ं अभ्यास करने वाले हिं दूओ का। ं
लॉस एंजेलिस आदिनम नाम से अभिशब्दित, यह हिं दूमं दिर पश्चिमी जगत के सबसे विशाल 8 फ़ीट ऊँ चे 'शिवलिङ्ग' का निवास क्षेत्र हैं। यह देवालय दक्षिण भारत में तिरुवन्नामलई स्थित श्री अरुणाचलेश्वर मं दिर की शक्ति और ऊर्जा धारण किए हुए है।
श्री अरुणाचलेश्वर पं चभूत शिवलिङ्ग (पञ्चतत्त्व की परम ऊर्जा) में से अग्नि लिङ्ग, भगवान् शिव के अग्नि तत्त्व के ब्रह्माण्डीय शाश्वत स्वरूप है ।
पश्चिम में श्री अरुणाचल शिव की ब्रह्माण्डीय ऊर्जा केंद्र
आत्मा और परमात्मा (जीव और शिव) के समागम के अद्वैतिक सत्य का उत्सव मनाने हेतु नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर में वैदिक अनुष्ठानो, ना ं म-कीर्तन एवं ध्यान के कार्यक्रमो का पुनरु ं थान।
पृष्ठ भूमि: अरुणाचल पर्वत, स्वयं भगवान शिव का स्वरुप व तलहटी में श्री अरुणाचलेश्वर मं दिर तिरुवन्नामलई, दक्षिण भारत
नित्यानंद संघ, लॉस एंजेलिस आदिनम मे
(बांए) : भगवान THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की देवमूर्ति ।
(दाए): भगवान श्री कपिल महामुनि जी की भारत के बाहर स्थित सबसे विशल देवमूर्ति है। श्री कपिल मुनि जी हज़ारोंवर्ष पूर्व प्रथिवी के पश्चिमी भाग में निवस करते थे और यह मन्यता है की 'के लिफोर्निया' प्रदेश का नामकरण 'कपिलारण्य' नामक श्री कपिल महामुनि जी के तपोक्षेत्र निवस से प्रेरित होकर किया गया था ।
(बांए): नित्यानंद संघ, लॉस एंजेलिस आदिनम मे (दाए): श्री नित्यानंदेश्वर को अभिषेक
"क्यूंकि आकाश सदैव उत्सवमय होते हैं, यह मं दिर सदैव आकाश तत्त्व की ऊर्जा प्रसारित करते रहे ।"
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
बांए: नित्यानंद गणेश एक अद्वितीय, दर्ल ु भ दर्शन पाये जाने वाले - आनन्दमय नर्तन रूप में। दाए: THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी प्रमुख देवताओ की देवमूर्तीयो के सा थ आशीर्वाद देते हुए।
बांए: ग्रेनाइट शिला से बने 8-फ़ीट के श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर की देवमूर्ति, जो भगवान श्री नारायण के जागृत अर्चावतार है।
नित्यानंद संघ, सीएटल आदिनम मे
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने 24 फरवरी 2008 को सीएटल, यु एस ए में नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर का उद्घाटन किया, जो पश्चिम जगत के चिदम्बरम क्षेत्र के नाम से अभिशब्दित है । यहाँ के पवित्र धार्मिक अनुष्ठान, भारत में स्थित चिदंबरम मं दिर की वैदिक परंपराओ एवं पं चांगानुसार किये जाते हैं।
चिदंबरम 'आकाश तत्त्व' का प्रतीक हैं, जो पञ्चभूत स्थल (पञ्च तत्त्वओ की ऊर्जा) में से एक है, जहाँ भगवान शिव 'श्री नित्यानंद नटराज' के निराकार रूप में निवास करते हैं। 'श्री नित्यानंद नटराज' सारे ब्रह्माण्ड में आनंद ताण्डव लीला करते हैं ।
नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर सीएटल आदिनम, यु एस ए
सीएटल आदिनम चिदम्बरम में नित्यानंद संघ चेतना जागरण हेतु नियमित ध्यान व योग कार्यक्रमो का आयो ं जन होता है । कीर्तन और भक्ति द्वारा दिव्यता के सानिध्य का उत्सव ।
सीएटल आदिनम का संघ हिदं ू उत्स्वों को प्र स्वों माणिक वैदिक पद्धतियों से मनाते है ।
विधिवत पूजा-अर्चना करते व संमृद्ध वैदिक जीवन का पालन करते हुए बालक रथ उत्सव, यात्रा पर देवता जो सबको दर्शन और आशीर्वाद प्रदान करते हुये ।
ऊपर: राधा-कृ ष्ण मूर्ति एवं राम परिवार
मिनाक्षी देवी जी की मूर्ति, जगनमाता, जो भगवान शिव रुपी श्री सुंदरेश्वर की पत्नि है - 8.5 फु ट मूर्ति जो THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा आशीर्वादित है और नित्यानंदेश्वर हिदं ू मं दिर, सीएटल को अनुग्रहित करेंगी ।
पृष्ठभूमि: पवित्र जल तीर, सुन ्थ हरा पाटन तथा मन्दिर गोपुरम, थिल्लई नटराज मं दिर का दर्शन, चिदंबरम, तमिलनाडु, भारत में - जहाँ भगवान नटराज पीठासीन हैं आकार एवं निराकार अवस्था में।
पवित्र चिदंबरम मं दिर का पुनर्निर्माण
नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, सीएटल आदिनम एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र है, एक महान दूरदृष्टि और दैव ऊर्जा से परिपूर्ण, अमेरिका के पेसिफिक तथा उत्तरपश्चिम भाग में आध्यात्मिक चेतना का जागरण करने हेतु ।
- ® देवालय एक मं दिर तेजस्वी जिवंत मूर्तियो का निवास एवं नित्य पूजाए ।
- ® विद्यालय आत्मज्ञानी बालको का प्रादुर्भाव प्राचीन वैदिक ज्ञान के साथ।
- ® अन्नालय प्रसाद के रूप में रुचिकर सात्विक भोजन उपलब्धि में सेवारत।
- ® ध्यानालय ध्यान व ज्ञान सं चय का केंद्र।
- ® सेवालय एक पवित्र ऊर्जा केंद्र विश्व को लाभान्वित करने हेतु प्रतिबद्ध।
युवा भक्त भरतनाट्यम नृत्य प्रदर्शन करते हुए, सीएटल आदिनम में
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी श्री नित्यानंदेश्वर और श्री नित्यानंदेश्वरी के साथ आशीर्वाद देते हुये ।
नित्यनन्देशवर हिन्दू मं दिर, ओहायो आदीनम में स्वयं सेवको की प्र शं सा दिवस
भक्त जन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के प्रवचन को श्रवन करने मन्दिर मे । नीचे: श्री नित्यानंद गणेश और नित्यानंद महालक्ष्मी ।
नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, कोलं बस, ओहायो, युएसए का उद्घाटन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा 14 अप्रैल 2007 को हुआ । यह मं दिर परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा भारत के बाहर स्थापित प्रथम मं दिर है। यह मं दिर भौतिक रूप से केवल नौ महीनोंमें अस्तित्व में आया था, जब THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने घोषणा की थी कि ओहायो में एक शिव जी मं दिर स्थापित होगा ।
मं दिर की मुख्य अधिकृ त मूर्तियां हैं, श्री नित्यानंदेश्वर और श्री नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) 7 फु ट लम्बी और 6 टन की ग्रेनाइट की मूर्तियां हैं, जिनके मुख स्वयं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा शिल्पित किये गए हैं।
मूर्तियां दक्षिण भारत के अरुणाचल पर्वत की दिव्य ऊर्जाव शक्ति का प्रतीक हैं, जहां भगवान शिव जी स्वयं अनंत ज्योतिर स्थम्भ के 'लिङ्गोत्भव' रुप मे प्रकट हुये थे ।
नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर कोलं बस आदिनम, यु एस ए
मं दिर उद्घाटन समारोह दो सप्ताह तक चले और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा अधिकृ त मूर्तियों में दिव्य ऊर्जा की प्राणप्रतिष्ठा, एक दर्ल ु भ दैवक प्रक्रिया द्वारा सं स्थापित हुई जिससे उनके आशीर्वाद सहित मूर्तियां जीवंत हो उठी। ं
कुम्भाभिषेकम, एक पवित्र विधि है, मं दिर को ब्रह्म ऊर्जा से ऊर्जान्वित करने के लिए, जो मूर्तियों में प्रतिष्ठित होती है, यह मानवता की बहुत बड़ी सेवा है, क्योंकि यह आसपास के क्षेत्रों की सकारात्मक क्षेत्रों ऊर्जा को बढाती है, और शुद्ध दिव्य ऊर्जा सबके लिए उपलब्ध करवाती है।
नित्यनानन्देश्वर हिदं ूमं दिर प्रवेश मार्ग, कोलंबस, ओहायो
ध्यान कार्यक्रम: समुदाय को कल्याण और पूर्णत्व देते हुए ।
रथोत्सव, देवताओ की यात्रा, समस्त समुदाय के साथ दिव्यता के सानिध्य का उत्सव ।
मं दिर सुंदर प्राकृतिक स्थल पर है, जहाँ दो नदियां बह रही है, ओलेंतंञ नदी, और एक छोटी नदी जो इसमें मिलती है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने इन दो नदियो के सं ग ं म को "पश्चिम का प्रयाग" घोषित किया है, तथा इस मं दिर को आध्यात्मिक नाम "ओहायो प्रयाग" दिया है । अमरीकी कुम्भ मेला के समय, अप्रैल १५, २००७ में, स्वामीजी ने कहा था कि – इन दोनो नदियां का सं ग ं म भारत के प्रयाग की भांति है, तथा इस बहाव की दिशा तीन पवित्र नदियो से ं मिलती जुलती है (त्रिवेणी सं गम) - गंगा, यमुना तथा सरस्वती । नदी की सुंदरता तथा शांत वातावरण के कारण, मं दिर भगवान शिव के निवास कै लाश एवं हिमालय की स्मृति दिलाता है ।
वैदिक सं स्कृति के मूल आदर्शों के सं रक्षण हेतु तथा उसके प्रति समर्पित पूजा, हवन एवं वैदिक मं त्र उच्चारण क्रियाएं सं चालित कर तथा सब महान हिदं ू उत्सव मनाए जाते हैं ।
ओहायो प्रयाग - पश्चिम का प्रयाग
समर्पित है और पूजा, होम और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ साथ हिदं ू के लेंडर के अनुसार महत्त्वपूर्ण पर्वों और धार्मिक सं स्कृतियो, वि ं धियो को प्र ं दान करता है । यह मं दिर,भारत से दोनो तरफ की वि ं डिओ स्ट्रीम (two way video stream) से सत्संग, विशेष कार्यक्रम और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा दिए जानी वाली दीक्षा को प्रसारित करने हेतु प्रौद्योगिक तरह से सज्ज है ।
दायी: श्री नित्यानंद गणेश नीचे: ओक्लाहोमा नित्यानंदेश्वर मं दिर की शोभा बढ़ाते हुए THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
नंदी देव, भगवान शिव का दिव्य वाहन एवं परम भक्त
नीचे : श्री नित्यानंद सुब्रमन्य
सभी देवी देवताओ की उपस्थिति से शोभित मं दिर का एक दृश्य।
नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, ओक्लाहोमा सिटी, यु एस ए का उद्घाटन 30 अक्तूबर 2007 में परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा हुआ था । यह मं दिर गुजरात, Bharat के पश्चिम किनारे के प्रभास क्षेत्र मे स्थित 'श्री सोमनाथ मं दिर', जो भगवान शिव के १२ ज्योतीर्लिङ्गो में से प्रथम है - उस ऊर्जाक्षेत्र के प्रतीक के रूप में घोषित है ।
श्री मीनाक्षी देवी, जो सारे विश्व की जगनमाता है । ब्रह्मांडीय उपस्थिति को प्राकशित करती हुई श्री गुरु आत्ममूर्ति।
श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर
नीचे : भक्त जन देवी की नवरात्री उत्सव पर गर्भामनाते हऐ ।
पृष्ठ भूमि : मदराई ु मीनाक्षी मं दिर, मदरई, त ु मिल नाडू Bharat और पवित्र जल तीर कु ्थ ण्ड ।
श्री मीनाक्षी देवी, जगनमाता जो मदरई ु व वोश्व की दिव्य महारानी है ।
वर्ष 2009 में उद्घाटित सैन होसे का नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, 'मदराई ु श्री मीनाक्षी मं दिर' की दिव्य ऊर्जा को प्रकाशित करता है, जो की भगवान सुन्दरेश्वर की पत्नी - जगनमता देवी मीनाक्षी, स्व्यं देवी पार्वती स्वरुपिनी का निवास क्षेत्र है । भगवान सुन्दरेश्वर स्वयं भगवान शिव के सबसे सुन्दर और आनंदमय स्वरुप है ।
मं दिर के मुख्य पीठासीन देवमूर्तीयां, देवी मीनाक्षी, शिव लिङ्ग और भगवान श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (भगवान शिव और देवी) है, जो THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा निर्मित, प्रस्थापित और ऊर्जित है।
पश्चिम जगत का मनोरमणीय मदराई ु
श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर की विशाल देवमूर्ती
मं दिर में बच्चों और च्चों वयस्कों के ल स्कों िए तीसरी नेत्र को जागरण की ध्यान प्रक्रिया ।
आदिगुरू श्री दक्षिणामूर्ति, जो विश्व के प्रथम व अदि गुरु है ।
मं दिर में सत्संग और ध्यान कार्यक्रमो का ं नित्य आयोजन होता है
श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (भगवान् शिव और देवी) प्रेमपूर्वक सबको आशीर्वाद देते हुए
विग्रह, जिवंत देवताओ के सा ं निध्य का उत्सव मानाने हेतु वैदिक आगमो अनुसार ं धार्मिक पूजा अनुष्ठानो का आयोजन होता है l
त्रीनेत्र जागरण की ध्यान क्रिया
नीचे : पवित्र स्नान या अभिषेकम विधी का अनुष्ठान ।
श्री नित्यानंद गणेश
दोनो तरफ से (two way) वि ं डिओ कोन्फरेंस द्वारा ध्यान कार्यक्रमो का आयोजन ।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की आत्ममूर्ति और श्री गुरु पादका ु
दर्गा ु देवी माँ
नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर फिनिक्स आदिनम, यु एस ए
परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा स्थापित, फिनिक्स आदिनम पिछले सात साल़ो से पूजा, ध्यान और उत्सवो का ऊर्जाक्षेत्र है । ब्रह्मांडीय उर्जा से जागृत फिनिक्स आदिनम का मन्दिर स्थल २५०० चौ. फु ट में सं रचित है । श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (शिव और देवी) शिवलिङ्ग के साथ पीठासीन देवता है । २१ से भी अधिक देवता मं दिर मे निवास करते है ।
फिनिक्स आदिनम पारंपरिक हिं दू आदिनम के जीवन सिद्धांतो का अनुसरण करता है। मं दिर में दक्षिण Bharat के कांचीपुरम स्थित श्री कांची कामाक्षी मं दिर की ऊर्जा विद्यमान है।
14 फु ट विशाल श्री नित्यानंद वेन्कटेशवर
श्री कृ ष्ण जयन्ती का उत्सव श्री नित्यानंदेश्वर और
देवी नित्यानंदेश्वरी
श्री नित्यानंद वेन्कटेशवर त्रिनेत्र जागरण का प्रदर्शन
ध्यान व योग की पुस्तको को ं दान द्वारा समाज को समृद्ध करना
नित्यानं देश्वर हिं दू मंदिर
सेंट लुइस आदिनम, यु एस ए सेंट लुइस आदिनम, दक्षिण Bharat की श्री तिरुमला तिरुपति मन्दिर की ऊर्जा सं चारित करता है और पूर्वी अमेरिका के सबसे ऊँ चे वेंकटेश्वर की देवमूर्तियोंमे से एक है । श्री वेंकटेश्वर उनकी पत्नियां - श्रीदेवी और भूदेवी के साथ स्थापित है । सुन्दर शिवलिङ्ग और नित्यानंद गणेश, मं दिर में निवास करते हैं ।
सेंट लुइस आदिनम् प्राकृतिक दृश्य वाले मार्ग पर - नगर से केवल ३० मिनट की दूरी पर है । सुन्दर प्राकृतिक भू-दृश्य, सुहाने जं गल और मिसौरी की पहाड़ियों के बीच बसा , २० एकड़ स्थान में फै ला हुआ है । प्रवेश करते हुये, हम परमहंस उद्यान को देखते हैं, जो पुष्करणी झील के तट पर है। वैदिक समाज का निर्माण
श्री वेंकटेश्वर की विशाल देवमूर्ति का निवास लोक
पीठासीन देवता श्री नित्यानंदेश्वर और देवी नित्यानंदेश्वरी (शिव और देवी) और शिवलिङ्ग, इनके साथ देवी मिनाक्षी, श्री नित्यानंद गणेश, श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर, देवी महालक्ष्मी, तथा और कई मूर्तियां हैं ।
कै लास - भगवान शिव का लोक
टोरंटो आदिनम् को THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने जुलाई २०११ में उद्घाटित किया था। इस आदिनम को भगवान शिव के लोक, कै लास की समस्त परमचेतना की ऊर्जाओ को प्रसार ं ित करने के लिए आशीर्वाद प्राप्त है। मं दिर की देवमूर्तीयां उसी तरह से विराजमान हैं, जैसे वे महादेव के आस-पास कै लास में विद्यमान हैं ।महादेव के भक्त, तिरुनावुक्करसर, जो एक कवी सं त थे, उनहे एक समय साक्षात कै लास में महादेव
और देवी पारवती के दर्ल ु भ दर्शन प्राप्त हुये थे । वें इस कै लास दर्शन के वृतांत को चौथी तिरुमुरै में गाते हैं । टोरंटो आदिनम के नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर के गर्भगृह में कै लास के वही दर्शन होने की योजना है।
श्री नित्यानंद वेंकटेश्वर
बालको हेतु कार्यक्रम जिससे वे वैदिक धर्म का ज्ञान प्राप्त करे ।
अन्न दान - समुदाय में प्रसाद परोसना
सशक्त ध्यान के कार्यक्रम, मन व शरीर का रूपांतरण करने हेतु।
नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर, टोरंटो आदिनम आयोजित करता है – नित्य ध्यान व योग कार्यक्रम, नित्य सत्संग और वैदिक अनुष्ठान जैसे पूजा और यज्ञ। यह समाज कल्याण हेतु मानव की आध्यात्मिक आवश्यकताओ की पूर् ं ति करने की हिं दू परंपरा में सेवारत है।
टोरंटो मं दिर द्वारा आयोजित रथ उत्सव नीचे: ध्यान कार्यक्रम और सत्संग
7-फु ट शिवलिङ्ग जो श्री कालहस्ती लिङ्गा की प्रतिमा हैं।
श्री दक्षिणामूर्ति जो THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने स्वयं अपने हाथो से ं शिल्पित किया है ।
श्री कालहस्ती शिव की ऊर्जाव अनुभव ह्यू स्टन में प्राप्य
आगामी ह्यू स्टन आदिनम के नित्यानंदेश्वर हिदं ूमं दिर का भव्य उद्घाटन होगा –19 देवमूर्ती, 13 ग्रेनाइट और 6 सं गमरमर की देवमूर्तीयां तथा नवग्रहो के सा ं थ । सारी देवमूर्तीयां जीवित परिमाण में होगी। इस ं मं दिर की दर्ल ु भता यह होगी की – भक्त जन उनके निकट जाकर प्रार्थना कर ईश्वर से सम्बन्ध जोड़ कर "निकटतम व व्यक्तिगत अनुभव" प्राप्त करेंगे। विशाल देवमूर्तीयां तथा THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की तीव्र दैविक ऊर्जा भक्तों को क्तों शांति व आनंद के अनुभव कराएगी । ह्यू स्टन मं दिर पूर्ण रूप से आगम शास्त्र के अनुसार निर्माण होगा - जो महादेव द्वारा अनुशासित पवित्र शास्त्र हैं।
श्री दक्षिणामूर्ति जो THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने स्वयं अपने हाथों से शिल्पित किया है।
मुख्य पीठासीन देवता ७-फु ट के श्री कालहस्ती लिङ्ग की सटीक प्रतिकृति है, जो दक्षिण Bharat में भगवान शिव की 'वायु तत्त्व' की ऊर्जा को सं चारित करती हैं।
पृष्ठभूमि : श्री कालहस्ती मं दिर, आँध्रप्रदेश, Bharat का मं दिर
भगवान श्री नित्यानंद स्वामी , श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी की मूर्तियां
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM की परार्थमूर्ति और स्वर्ण पादकाएं ु Padukas
आचार्यों द्वारा आयोजित ध्यान शिविर
सप्ताहांत गुरुकु ल कक्षा
(बाएँ) भगवान श्री नित्यानंद स्वामी जी (ऊपर) मं दिर के सभी कार्यों एवं प्रचार कार्यों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली गाड़ी ( दाएं ) नैवेद्यम
दिसं बर 2010 में नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर को 'पादु का मं दिर' (श्री गुरु की पादकाए) के रूप ु में आशीर्वाद प्राप्त हुआ था ।
अक्टूबर 2013 में, विजय दशमी के मं गल पर्व पर स्वामीजी ने मं दिर का मूर्तियो के सा ं थ उद्घाटन किया तथा 'श्री रूद्र होम' तथा 'रुद्राभिषेकम' के पवित्र वैदिक अनुष्ठानो का आयोजन किया गया था । देवमूर्तियां मेरु और आम्बल की हैं, जिनहे THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने ऊर्जान्वित किया है । मं दिर को आध्यात्मिक नाम 'शार्लेट श्रीसैलम' का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है ।
ओ म ा न
आदीनम् एक ग्रह मं दिर है जिसका आध्यात्मिक नाम ओमान शिवगंगई है| यह मं दिर इस क्षेत्र में रहने वाले हिदं ओु की आध् ं यात्मिक आवश्यकता को पूर्ण करता है एवम कई शक्तिशाली मूर्तियो को ं क्षेत्र में सं रक्षित करता है| इस मं दिर में श्री नित्यानंद स्वामी जी, श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी समेत श्री गुरु की परार्थमूर्ति स्थापित है| इन मूर्तियो से य ं हां का समुदाय अत्यधिक लाभांवित हुआ है|
ओमान आदिनम वैदिक सभ्यता को बढ़ावा देने में एक शक्तिशाली स्तंभ का कार्य कर रहा है| यहां पर योग ध्यान एवं शांति को बढ़ावा देने के लिए कई कार्यकिये जाते हैं यहां सारे हिं दू त्योहार मनाए जाते हैं एवं नित्यपूजा की जाती है | यहां पर कई चमत्कार जैसे पवित्र वस्तुओ का भौ ं तिकीकरण इत्यादि परम पूज्य स्वामी जी की कृ पा से घटित होते हैं| इस मं दिर में गुरु एवं काल भैरव की ज्वलंत शक्ति उपस्थित है |
ऑस्रेट्लिया का पहला नित्यानंदेश्वर हिं दू मं दिर मेलबोर्न आदीनम् THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा सन 2015 में घोषित किया गया| यहां की प्रमुख मूर्ति THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी की मूर्ति है जो सं पूर्णऑस्रेट्लिया को आशीर्वाद एवं चिकित्सा प्रदान करती है| मेलबोर्न आदीनम् बेंगलुरु आश्रम के बाहर सबसे बड़ा संघ है जहां पर कई भक्त एक साथ मिलकर नित्यानंद महल में रहते हैं|
सिं गापुर आदीनम् की स्थापना सन 2006 के अक्टूबर माह में हुई थी| यह मं दिर ध्यान एवं योग के लिए THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी द्वारा सशक्त किया गया प्रार्थना स्थल प्रदान करता है| यहां पर भक्ति योग एवं पवित्र वैदिक समारोह का आयोजन किया जाता है|
यहां पर मनुष्य को उसकी उच्चतम क्षमता तक पहुंचाने के लिए कुंडलिनी शक्ति जागरण हेतु कई अभ्यास किए जाते हैं| इसमें नित्य योग, नित्य चिकित्सा , नित्य ध्यान, क्रियाएं एवं सप्ताहांत गुरुकु ल शिक्षा सम्मिलित है|
सिं गापुर संघ द्वारा हजारो सं िं गापुर वासियो को लाभांवित ं किया गया है एवं एक सशक्त शांति और आनंद की समाज में स्थापना की गई है|
भगवान श्री नित्यानंद स्वामी, श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी की मूर्तियां
क्वालालंपुर आदीनम्, मलेशिया सन 2008 में परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था | मं दिर श्रद्धालुओ को योग ए ं वं ध्यान के कई लाभो से अ ं वगत कराता है एवं चैतन्य जीवन की ओर प्रेरित करता है| सप्ताहांत गुरुकु ल में बच्चों को भवि च्चों ष्य के प्रति नई सं भावनाओ की ओर ं वैदिक परंपरा के माध्यम से अवगत कराया जाता है | यहां का जीवंत एवम विविध समुदाय वैदिक त्योहारो के स ं मय आनंद का अनुभव करता है | यहां पर स्थापित मूर्तियां आत्मज्ञान की शक्ति का सं चार करती है|
Bhagavan Sri Nithyananda Swamiji, Sri Nithyanandeshwara
भगवान श्री नित्यानंद स्वामी जी की मूर्ति
(बाएँ): काल भैरव शिव की शक्ति and top: Sri Guru Paduka
नीचे: त्योहार पर अन्नदान और प्रसाद का वितरण
नित्यानंदेश्वरी देवस्थानम, यह हिदं ूमं दिर दक्षिण Bharat के हैदराबाद शहर में सन् 2006 में THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा घोषित किया गया था|
शांतिपूर्णवातावरण से परिपूर्ण इस पवित्र भूमि पर मं दिर का गोपुरम बहुत ही सुंदरता से खड़ा हुआ है| हरियाली के मध्य मं दिर के प्रांगण में देवी नित्यानंदेश्वरी विराजमान है| श्री गणेश, श्री वेंकटेश्वर, शिवलिं ग,सूर्य एवं नवग्रह इस मं दिर में स्थापित हैं| इस मं दिर में उपस्थित बरगद का वृक्ष THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा स्वयं रोपित किया गया था जो ब्रह्मांडीय उर्जा का सं चार कर रहा है|
श्री नित्यानंदेश्वरी देवस्थानम, हैदराबाद
वाई, पुदु च्चेरी में स्थित नित्यानंदेश्वर हिं दू मं दिर की स्थापना सन् 2014 में परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा द्वारा की गई|
यहां पर भगवान श्री नित्यानंद स्वामी, श्री नित्यानंदेश्वर, और देवी नित्यानंदेश्वरी की मूर्तियां है| यहां पर स्फटिक लिग और ं श्री चक्र भी मौजूद है|
यहां पर श्रीविद्या होम, गुरु होम, और गणेश होम जैसी पूजाएं यहां के समुदाय को नियमित रूप से लाभान्वित करती हैं| परम पूज्य परम हमसे नित्यानंद यहां पर नियमित रूप से कल्पतरू कार्यक्रम का आयोजन करते हैं जिसमें दक्षिण Bharat से हजारो लोग स ं म्मिलित और लाभान्वित होते हैं|
समुद्र के किनारे ईस्ट कोस्ट रोड के पास, चेन्नई तिरुवन्मियूर आदिनम, दक्षिण Bharat में, नित्यानंद संघ का एक प्रमुख आदिनम है। मं दिर में श्री नित्यानंदेश्वर, श्री नित्यानंदेश्वरी त था THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की ऊर्जान्वित देवमूर्तियां विद्यमान हैं । यह गुरुमूर्ति विशेष रूप से THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा ऊर्जान्वित की गयी है, भक्तों को क्तों जीवन के हर आयाम में पूर्णत्व का आशीर्वाद प्रदान करने हेतु । ये देवमूर्तियां, शक्तिशाली जागृत विग्रह है, जो प्रा र्थनाओ का ं उत्तर और स्पष्टता देती हैं और वरदान देती हैं । इन देवमूर्तियो और ं गुरु पादकाओु पर कई बार विभू ं ति का प्रकटन हुआ है, जो मं गल सं के त है कि ईश्वर ने प्रा र्थना स्वीकार की है ।
आदिनम एक मनभावन स्वर्ग है, आतंरिक शांति हेतु और यात्री यहाँ आते हैं, चेन्नई के सुप्रसिद्ध व्यक्तियो से लेकर आसपास के गा ं वों से मछुआरो तक। ं मुख्य कार्यों में ध्यान कार्यक्रम सञ्चालन, जीवं त और "टू वे कॉन्फ़्रेंसिगं " द्वारा, घरों में पूजा व हवन, नित्य आध्यात्मिक उपचार, त था आध्यात्मिक परामर्श, अन्नदान एवं अन्य कई कार्य हैं ।
एक जैविक सब्ज़ियो का उ ं द्यान और एक गोशाला भी जल्द आने वाले हैं।
नित्यानंद पीठम तिरुवन्नामलई आदिनम, Bharat
दक्षिण Bharat की पवित्र मं दिर नगरी, तिरुवन्नामलई, जो THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी का जन्मस्थल है, यहाँ का आदिनम, एक सुन्दर मठ है, जो अरुणाचल पर्वत, भगवान शिव का भौतिक स्वरुप, उसके तले स्थित है।
आदिनम मे पवित्र वटवृक्ष है और इस दिव्य शांति क्षेत्र में नियमानुसार पूजाएं की जाती है, जो भगवान शिव का ही ऊर्जाक्षेत्र है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी यहाँ पर कई हज़ारो लोगो ं के ल ं िये ध्यान कार्यक्रम का आयोजन करते हैं, त था उन्हें शांति, कल्याण एवं चेतना का आशीर्वाद प्रदान करते है।
हर माह की ' पौर्णमी' के दिन व रातों में त था विशेष उत्सवो के दिनों में यहाँ हज़ारो तीर ं ्थयात्री, भिक्षुक और भक्तों को क्तों महाप्रसाद के रुप मे अन्नदान दिया जाता है।
चिकित्सा शिबिर त था सप्ताहांत गुरुकु ल कक्षाएं सं चालित कर स्थानीय समाज को लाभान्वित किया जाता है।
"जो भी जीवन मुक्ति के विज्ञान को स्वीकार करता है और उसे अपने जीवन में प्रकाशित करता है और दूसरो को इस ं महान धम्मा से लाभान्वित करता है, मैं उन्हेंही नित्यानंद संघ कहता हूँ।"
- परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
नित्यानंद संघ, वाशिं गटन डी सी, यु एस ए
नित्यानंद संघ, वेलिङ्गटन, न्यूज़ीलैंड
नित्यानंद संघ, दु बई आदिनम, यू ए ई
नित्यानंद संघ, मेक्सिको
नित्यानंद सत्सङ्ग केद्र, कस्तव, क्रोएशिया
नित्यानंद संघ, कै लगरी, कै नडा
नित्यानंद संघ, मिनेसोटा, यु एस ए
नित्यानंद संघ, दिल्ली, Bharat
नित्यानंद संघ, मुं बई, महाराष्ट्र, Bharat
नित्यानंद संघ, वदोदरा, गुजरात, Bharat
नित्यानंद संघ, बेंगलुरु, कर्णाटक
नित्यानंद पीठम, सेलम आदिनम्, तमिल नाड
नित्यानंद वैश्विक संघ ऐसे लोगो का आध्यात्मिक संघ है, जिन्होंने अपना जीवन धर्म और गुरु, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा सिखाए सत्य के पथ पर समर्पित किया है ।
सत्संग केंद्र, घर तथा समुदाय मंदिर पूरे विश्व के ४७ देशो तथा ३४७ नगरोंमें वृद्धि प्राप्त कर रहे हैं । प्रतिबद्ध स्वयं सेवक आध्यात्मिक ज्ञान को मंदिर सेवाओ, ध्यान कार्यक्रमो, आध्यात्मिक उपचार, समाज विस्तार, सकारात्मक चेतना वृद्धि द्वारा प्रसारित कर, सब जीवो तथा पृथ्वी को आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं।
नित्यानंद पीठम, तिरुपथुर आदिनम्, तमिल नाड
नित्यानंद पीठम, कोयम्बटूर आदिनम्, तमिल नाड
नित्यानंद पीठम, सिरकाली आदिनम्, तमिल नाड
नित्यानंद पीठम, रासिपुरम आदिनम्, तमिल नाडु
नित्यानंद पीठम, पट्टनम आदिनम्, तमिल नाडु
नित्यानंद पीठम, मदु रै आदिनम्, तमिल नाडु
सं पूर्ण दिव्यता को समेटे यह भव्य वैभवशाली मंदिर पृथ्वी के अरबोंमनुष्यों की दैवी आस्था और भौतिक मनोरथ को पूर्ण करने का 'धाम' व महातीर्थस्थल बनेगा। इसका पवित्र ऊर्जाक्षेत्र मानव को पूजा, समर्पण, ध्यान और आगम विधियो से जुड़े उत्सवो द्वारा दिव्यता से जुड़ने व अनुभूति करवा कर वैदिक युग के आगमन की घोषणा करेगा।
स्वयंभू नित्यानंदेश्वर स्वर्णमं दिर नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम, भारत
वर्ष में THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के पवित्र निर्देशन में विश्व के सबसे बड़े शिवमं दिर के निर्माण के लिये नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम में नित्यानंदेश्वर मं दिर का निर्माण आरंभ हुआ, जो आधुनिक युग में भगवान शिव के लिये पहला स्वर्णमं दिर है। मं दिर का निर्माण भगवान शिव के शासन अनुसार 'आगम शास्त्र' के आधार पर किया जा रहा है।
'' यह महादेव, शिव के लिये पहला स्वर्णमं दिर है। महादेव के पहले भी सोने से निर्मित मं दिर थे। तंजौर में (बृहदीश्वर मं दिर) सोने का मं दिर था। दु र्भाग्यवश, आक्रमण के समय इसका सोना निकाल लिया गया। आधुनिक युग में महादेव के लिये यह पहला स्वर्णमं दिर होगा।
मं दिर का मुख्य भाग स्वर्ण की परत से ढंका हुआ होगा – गर्भगृह, मुख मंडप (गर्भमं दिर के सामने स्थम्भ की सभा), अर्द्धमंडप, महामंडप, बसं त मंडप और आदि ..."
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
पत्थर के स्तम्भ और द्वारें जो आगामी मं दिर के लिए हैं ।
नित्यानंद पीठम, बेंगलुरु आदिनम के दिव्य सुवर्णमं दिर के निर्माण कार्य प्रगती पर है । पत्थर और मिटटी कार्य, तथा नीव की स्थापना ।
अध्यात्मिक प्रेरणा के रूप में परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने निम्नवत् मं दिरो की स्थापना की :
- ® 15 हिंदू मं दिर, भारत में – बेंगलुर, सलेम, होसुर, राजपालयम, तिरुवन्नामलई, पोडंिचेरी, चेन्नई, इरोड, मदु रै, कांचीपुरम, हैदराबाद, वाराणसी, सीरगापडी, रासीपुरम तथा सिरक़ाज़ी में।
- ® 17 मं दिर विश्व भर में - अमेरिका में लॉस एंजेलिस, सियेटल, ओहायो, ओकलाहोमा, सैन होसे, न्यूार्क, सेंट लुई, फीनिक्स, ह्यूस्टन, शैरलट, वौशिङ्गटन डी सी। कै नडा में टोरंटो, न्यूजीलैंड, सिगापुर, गुआ ं डेलुप, ओमान। आस्रेट्लिया में मेलबोर्न, मलेशिया में क्वाला लम्पुर।
- ® भारत में 8 और मं दिरो की स्थापना हेतु कार्य चल रहा है।
ये मं दिर दिव्य ऊर्जा केंद्र व अध्ययन केंद्र के रूप में लोगों को उनके स्थानो तक वैदिक जीवन पद्धति को पहुंचाने के रूप में सेवा प्रदान कर रहे हैं ।
पवित्र शिल्पकलाओं का सं रक्षण एवं संवर्धन
शिल्पं हासमिन्नधिगमयत य एवं वेद। यदेव शिल्पाणी। आत्म सं स्कृर्तिवाव शिल्पाणी छंदोमयम वा येतैर्यजमान आत्मानं सं स्कृते।।
शिल्प, मनुष्य की कला का कार्य, दिव्य अवतारो की अनुकृति हैं। अपनी लय का उपयोग करके शिल्पी मापन करके मानवीय क्षमताओ की सीमाओं के साथ पुनर्निर्माण एवं पवित्र ऋचाओ के अनंत ज्ञान का अर्थ प्रकट करते हैं।
~ ऐतरेय ब्राह्मण, ऋग्वेद, ६-५-२७
'नित्यानंद शिल्प पवित्र कला की स्थापना, लोगो को समृद्ध चेतना पर आधारित वैदिक संपत्ति के जीवन को अनुभव करने के उद्देश्य से - वैदिक मं दिरो की कला, उनके शिल्प एवं मूर्तियों के संरक्षण, पुनर्निर्माण व प्रसार के लिये की गयी है।"
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
Offering worship to Vishvakarma, the Divine Architect of Gods who builds their celestial abodes and sacred arts (at Nithyananda Sacred Arts, Bengaluru Aadheenam)
® पं चलोह (तांबा, पीतल, जस्ता, टिन व स्वर्ण) से निम्न प्रक्रियाओ के माध्यम से विस्तृत एवं प्रमाणिक एक ढांचे की पद्धति द्वारा देवताओ की मूर्तियो का निर्माणः
- w मोम द्वारा देवताओ के ढांचे का निर्माण।
- w कावेरी नदी की मिट्टी से मोम के ढांचो को ढकना।
- w अत्यधिक उच्च तापमान पर मोम को पिघलाना।
- w देवताओ की मूर्तियो के निर्माण के लिये पिघली धातु को मिट्टी के ढांचे में उंड़ेलना।
- w ढांचे से धातु की मूर्तियो को बाहर निकालकर कुशल शिल्पकार्यों द्वारा अंतिम रूप देना।
- ® सामान्य बाजार में जटिल रेखा चित्र और विलक्षण मूर्तियो के निर्माण से जुड़े अनुपलब्ध हैं।
- ® अतिसूक्ष्म यन्त्रो के प्रयोग से मूर्तियो के श्रृंगार की सूक्ष्मतम विशेषताओ को 'सितुजी वेलाइ' पद्धति द्वारा उभारना।
- ® केवल नारियल के पत्तों के प्रयोग से वैदिक मापन इकाई 'तालम' से मापन करना।
स्थपति, मं दिर वास्तुकला और मूर्ति निर्माण में विशेषज्ञ हैं। वे विश्वकर्मा समुदाय की अनोखी परंपरा के हैं, वास्तुकार विश्वकर्मा के वंशज है।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी मं दिर निर्माण की शिल्प कला के शुद्ध विज्ञान की स्थापना करते हुए, दुर्लभ स्थपतियो और शिल्पकारो के समुदाय को नव जीवन और आजीविका प्रदान कर रहे है तथा प्रमाणिक मं दिर कलाओ की विश्वसनीय विद्या का भी विस्तार कर रहे है। स्थपति के शिल्प कार्य की प्रत्येक प्रणाली स्थापत्य वेद और अागम शास्त्रो मे वर्णित है, और उसे अति सावधानी व श्रद्धा से मानवता तक पहुंचाया गया है ।
स्थपतियो की शिल्प परंपरा और आजीविका को पुनः जीवित करना
- ® सैकड़ों शिल्पकारो और उनके परिजनो को प्रशिक्षण, जीवन यापन एवं मं दिर शिल्प से जोड़कर उन्हें आर्थिक स्थिरता प्रदान करते हुये इस प्राचीन कला को पारिवारिक व्यवसाय के रूप में भावी पीदि़यो तक जारी रखना।
Ceremonial puja at the Sacred Arts
His Holiness with Sadguru Sri Jayaprakeshendra Saraswathi Mahaswamiji, 169th Guru Mahasannidhanam of Sri Chakra Sri Deity of Vishvakarma, the Divine
पं चलोह धातु की मूर्तियां
® मं दिर कला केवल पं च लौह में नही बल्कि चांदी, पत्थर, धातु की चद्दरो, संगमरमर और काष्ठ में भी होती है।
- ® निरंतर मं दिर के ढांचो, देवताओ, वाहनो, ध्वज दंडो, मं दिर के आभूषण, पूजा की वस्तु ओ, कं वचम्, पवित्र अस्त्र-शस्त्रों देवताओ के धनुषो, देवताओ के मुकु ट एवं आभूषणो, रं थों एवं राजगद्दियो का भगवान शिव द्वारा निर्देशित प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ पर आधारित निर्माण।
- ® इन पवित्र रचनाओ को 33 देशों में समस्त नित्यानंदेश्वर हिंदू मं दिरो और गृह मं दिरों मे भेजा जाता है, जैसे कि सिं गापुर, मलेशिया, यू.एस .ए, कै नडा, औसट्रेलिया तथा भारत के भिन्न राज्यों मे।
उपलब्धियां
| पदार्थ | मात्रा | वजन |
|---|---|---|
| धातु | मूर्तियां | |
| पत्थर (ग्रेनाइट) | मूर्तियां | |
| सं गमरमर | मूर्तियां | |
| काष्ठ | मूर्तियां, वाहन, आसन, आदि | - |
| आभूषण व शगार ्रृं | देवताओं हेतु | - |
विशाल मं दिर सं रचनाओ और ग्रेनाइट पत्थर में मूर्तियाँ का निर्माण
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी का कहना है कि आकाश मंडल की ऊर्जा का सदोपयोग करने का शाश्वत विज्ञान ही वास्तुशास्त्र का मूल है । हम ब्रह्मांड की दिव्य शक्तियो के साथ साम्मनस्य भाव या एकत्व स्थिति प्राप्त पर सकते हैं यदि हम इस प्रकार निवास गृहो और सं रचनाओ का निर्माण करे जो ब्रह्मांड की स्थानिक ऊर्जा के अनुकूल एवं अनुरूपित हो।
स्पटीक लिङ्गम्
दुर्लभ यंत्रों के साथ वर्धित व शिल्पित कई दिव्य शिव लिङ्ग
दिव्य शिल्प कला के निर्मण पश्चात पत्थर में बनी भगवान श्री गणेश की विशाल मूर्ति उठायी जा रही है।
कवचम जीवमर्ती ओ के लिये दिव्य कवच
Temple jewelry production for adorning the deities
® समस्त भारत से वैदिक कलाकृतियोंको एकत्र करके उन्हें पुन: निर्मित करके आधुनिक जीवन पद्धति में गहरी चेतना और उत्तम स्वास्थ्य का संचार करने के लिये दैनंदिन प्रयोग के उद्देश्य से वितरित करना।
t वैदिक मं दिर कलाओ एवं शिल्पों का निर्माण करके संपूर्ण विश्व के वितरण के लिये स्वतंत्र नगरो का विकास करना। आगांमी तीन वर्षों में 400 मं दिरो के लिये विभिन्न वस्तुओ का निर्माण करना।
t बहुमूल्य वैदिक ज्ञान एवं कौशल का संरक्षण कर रहे शिल्पकारो को डाक्टर की उपाधि प्रदान करना।
भावी योजनायें...
Reviving The Authentic Hindu Education System
'' भारत में मैकाले और मैक्स मयूलर द्वारा स्थापित वर्तम ान शिक्षा प्रणाली 'भागीदारी के बिना बोल कर पढ़ाई' जाने वाली शिक्षा शैली है। मूल हिंदू शिक्षा प्रणाली में शब्दों, विचारो, परिकल्पनाओ, सिद्धांतो, धर्मशास्त्रों को लगातार बताया न हीं जाता था। यह विद्यार्थियो को सही संदर्भ में जागृत (आत्मबोध) करती थी। हिंदू शिक्षा पद्धति - 'गुरूकु ल' - के अंतर्गत ज्ञान को स्थांतरित न करके पारेषित किया जाता था। मेरे गुरूकु ल के शिष्य अपने शरीर का उपयोग 'पीसी' की तरह नही करेंगे, जो मात्र दी गयी सूचनाओ के आधार पर काम करता है। वे 'इंटरनेट' की तरह दिव्य अभिलेखागारों में भंडारित ज्ञान तक पहुंच बनाकर स्वयं का अविष्कार और शोध करेंगे ! " ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
नित्यानंद गुरूकु ल Sm एक प्रबुद्ध वं श का निरयामाण
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यम करवावहे। तेजस्वी नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।।
ॐ हम दोनो (गुरू और शिष्य) की साथ मे रक्षा हो। हम दोनोंज्ञान से पोषित और लाभान्वित होये। हम दोनोंमहान बल, ऊर्जा और उत्साह के साथ कार्य करें। हम दोनो का शिक्षण हमे तीव्र, उत्तम बुद्धि के तेज से प्रकाशित करे। हम दोनों में परस्पर शत्रुता या अपूर्णता न हो। ॐ अंतर आकाश में शांति हो, प्रकृति में शांति हो। दैविक शक्तियां में शांत हो। ~ कृ ष्ण यजर्वेदु , तैतरेय उपनिषद, २ . २ . २
यह सनातन हिंदू धर्म की मौलिक हिंदू शिक्षण पद्धति है, जहाां पर शिष्य कम आयु से ही अपने प्रबुद्ध गुरूओ के साथ रहते हुये 64 विद्याओ को सीखते हैं। ज्ञान को गुरू की जैविक-स्मृति (bio-memory) द्वारा शिष्यों में पारेषित किया जाता था। यहां से प्रशिक्षित शिष्य अध्यात्मिक रूप से बुद्धिमान बनकर निकलते थे और अपनी सिद्धियो (रहस्यमय शक्तियो) के विकिरण से ऊं ची उपलब्धि प्राप्त कर विश्व का नेतृत्व किया करते थे। नित्यानंद गुरूकु लSM तेजी से न के वल भारत में पर दुनिया भर में, अवतार THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के नेतृत्व में प्राचीन गुरूकु ल शिक्षा पद्धति को उसके पूर्णमौलिक रूप में पुनर्जीवित करने मे कार्यरत है। ~ परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी
गुरुकु ल का अर्थहै गुरु का परिवार| गुरुकु ल में शिक्षको से ज्यादा शिक्षा पर महत्व दिया जाता है|छात्रों को विकसित होने और आविष्कार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है | बाल सं तो को अपनी क्रियात्मकता को खोजने के लिए सं पूर्ण आजादी दी जाती है| गुरु अंधेरे में दिए की तरह सदेव छात्रों को का मार्गदर्शन करते हैं तथा उन्हें आत्मखोज में सहायता करते हैं|
- ® उत्तम शिक्षाविदो के साथ नित्य योग, मलखं भ, रस्सी योग,धनुर्विद्या, ध्यान, अखाड़ा, वेद प्राणायाम, नाट्य-नाटक-संगीत-शिल्प-चित्रकला (सभी प्रकार की पारंपरिक प्रदर्शन कलाएं एवं सूक्ष्म कलाएं ), वाक्यार्थ सदस (जीवन समाधान के अध्यात्मिकवादविवाद), पूजा, विधि और अगम शास्त्र के अनुसार जीवन पद्धति।
- ® पूर्णमस्तिष्क प्रशिक्षण, तनावमुक्त, किशोर हिंसा अथवा आक्रमण रहित।
- ® 50 % शिष्य अपने स्तर से एक से तीन वर्ष आगे हैं, 15 वर्ष की आयु के पूर्व ही दसवी ंकी बोर्ड परीक्षा देते हैं।
- ® 35 % शिष्य का बौद्धिक स्तर 130 से ऊपर है-स्लोसन आईक् यूस्कोर की श्रेणी के अनुसार प्रतिभाशाली हैं।
उपलब्धियां
- ® सं पूर्णत: बालसन्तों द्वारा आयोजित पहला टी वी शो जो आध्यात्मिक वाद-प्रतिवाद को दर्शाता है । गुरु द्वारा प्रकाशित आध्यात्मिक सत्यों को सुनकर, उनके विषय पर 'मनन' करना उन पर आध्यात्मिक चर्चा करने को वाक्यार्थ सदस कहते हैं|
- ® गुरुकु ल के बालसन्तों ने स्वयं की वेबसाइट लांच की है जिससे वह अन्य बालको तक पहुंच सके और उनको आध्यात्मिक उपचार दे सके तथा बालको की दिन-प्रतिदिन की समस्याओ का समाधान कर सके ।
टी वी शो और मीडिया
- ® सभी 100 प्रतिशत बालक सं पूर्णवर्ष पूजा अभिषेक होम एवं अलंकार जैसे कई पवित्र अनुष्ठानो को स्वत ह पूर्ण करते हैं ।
- ® बालक आगम शास्त्र, उपनिषद, रुद्रम, गुरु होम, श्रीविद्या होम, गुरु पूजा इत्यादि के वैदिक सं स्कृत मंत्रों के उच्चारण में सहज ही सक्षम है
- ® यह छात्र THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के चतुर तत्व सम्पूर्ति, श्रद्धा, उपायनं एवं अप्यायनम एवं पूर्णत्व व श्रर्वण की विद्या को प्रतिपल जीते हैं ।
अन्य गुरुकु ल
- ® बिडदी, तिरूवन्नामलई, चेन्नई में विद्यालय की स्थापना, जिनमें 250 शिष्य अध्ययनरत हैं।
- ® विश्वभर के नित्यानंद बाल विद्यालयो (सप्ताहांत गुरूकु ल शिक्षा) के माध्यम से 1000 शिष्यों को दीक्षित किया गया।
बच्चे गुलाब के पौधो से अद्वैत भाव से उनके कांटो गिराने का अभ्यास करते
त्रिनेत्र जागरण की शक्ति प्रदर्शन हेतु आंख पर विशेष उपकरण पहनकर पढ़ते व लिखते शिष्य।
When children use their creativity and intelligence to explore various, traditional Hindu art forms such as dance, music, theater, painting, sculpture, jewelry making and flower garlands.
- ® 30 % शिष्य बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के संगीत यंत्रों को तुरंत बजा लेते हैं।
- ® 100 % शिष्य रचनात्मक मं दिर कलाओ जैसे मूर्ति निर्माण,मूर्तियो का अलंकार, बच्चों के मं दिरो ंकी योजना एवं उनका निर्माण, मूर्तियो ंके आभषू णाे का निर्माण एवं अन्य कलाओ ंमें दक्ष होते हैं।
कला प्रशिक्षण
- ® यहां सभी बाल सं तो में क्वांटम मेमोरी एक्टिवेशन होता है जिसके द्वारा वे एकदंत ग्राही बन जाते हैं और एक बार सुनकर ही सशब्द याद रखने में सक्षम हो जाते हैं|
- ® छात्रों में कई योगिक शक्तियो का जागरण होता है, जैसे प्रकृति से बात कर बारिश बुलाना और गुलाब के पौधो से बात कर कांटे गिरा देने का आग्रह करना|
- ® 100% बालसन्त त्रिनेत्र जागरण में शिक्षित हैं और कई विलक्षण प्रतिभा है जैसे आंखो पर पट्टी बांध कर पढ़ना और एक्स-रे विज़न जैसी सिद्धियां व्यक्त करते हैं |
वैदिक विज्ञान
- ® गुरुकु ल के बाल सं त ने कई जं तु जैसे मछली, कछुआ, खरगोश, कबूतर, तोते इत्यादि को पालने की जिम्मेदारी ली है | वह उनका घर एवं खाना प्राकृतिक रूप से बनाकर संरक्षित रखते हैं | बच्चे गाय की पवित्रता गौशाला में सीखते हैं
अतिरिक्त पाठ्यक्रम
हमारे दोनो बच्चों को नित्यानंद गुरुकु ल में भर्ति कराना हमारे जीवन का सबसे उत्तम निर्णय रहा है । हमने उन्हें परिपक्व और पुश्पित होते देखा है जो हमारी कल्पना के परे है । उनका शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण बहुत सुंदर है । उन्हे शिक्षा गृहण करने से प्रेम है और वे यह व्यवहार जीवन के सभी भागो मे धारण करते है । शिक्षा मे श्रेष्ठ होना उनकी विद्या के प्रति प्रेम, उत्साह का उपफल है । और इस प्रेम भाव से, उनमे शक्तियां भी प्रकट हो रही है जैसे नेत्र बंद कर पडना और भविष्यवाणी करना आदि। धन्यवाद नित्यानंद गुरुकु ल और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वमीजी ।
नित्यानंद गुरुकु ल ने मेरी बालिका को घर से विद्यालय तक एक सुचारू परिवर्तन दिया । उनके पास प्रशिक्षित शिक्षक है जो बालको के प्रति दया और सं भावना से व्यवहार करते है । पाठ्यक्रम बहुत प्रगतीशील है फिर भी बालक उत्साह से सीखते है । बहुत पौष्टिक भोजन दिया जाता है और मेरी बालिका को बहुत पसंद है । यह एक सं पूर्ण विद्यालय है जो बालको को सभी
" त्रिनेत्र जागरण की दीक्षा के बाद बाल सं त आखं पर पट्टी बाधं कर न के वल अग्रेंजी बल्कि ऐसी भाषाओ ंजिन्हेंवे नही ंजानते हैं, जैसे जर्मन, हिन्दी, गुजराती और तमिल में भी पढ़ने में सक्षम हो जाते हैं। इतना ही नही ंकिसी अन्य स्थान पर रखे गये कागज पर लिखित शब्दों को भी शब्दों वे पढ़ सकते हैं।
बाल संतों ने अपने अंदर एक और विशाल संभावना की खोज की है, जिसे अभिव्यक्ति का विज्ञान कहते हैं। इस ज्ञान से वे किसी भी समय इच्छित वस्तु प्राप्त कर सकते हैं। उनमें अपनी कल्पनाओं को यथार्थ में बदलने की क्षमता उत्पन्न हो जाती हैं। कुछ बाल संतों ने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के दर्शन व बरसात की इच्छा प्रकट की। उन्होंने साधारण रूप से इसकी घोषणा करते हुये कुछ विभूति को हवा में फूंका। आश्चर्यजनक रूप से कुछ मिनट बाद ही THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM वहां आये और सबको आशीर्वाद दिया, जिसके बाद बहुत तेज बरसात हुयी! पांचवीं कक्षा के कई बाल संतों को उन्नयित करके दसवीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा देने हेतु भेजा गया! त्रिनेत्र जागरण से उनमें अकल्पनीय बौद्धिक क्षमता आ गयी। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के अपने पुत्र, बाल संतों ने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा दिये गये आत्मलिंग से कभी भी किसी असहाय अथवा कष्ट में व्यक्ति के उपचार का अवसर नहीं खोया। बाल संत प्रेम से पाले गये अपने पशुओं जैसे खरगोश, पक्षियों आदि के प्रति भी अपना प्यार बरसाने में आनंद की अनुभूति करते है।"
~ शरण्य श्रीधर, नित्यानन्द गुरुकु ल छात्रा
" हमारे गुरुकु ल में, मैं बच्चों को नाना प्रकार की शक्तियों से दीक्षित करता हूँ। फिर उन्हें स्वयं उस सिद्धि को और विकसित करने की छूट दे देता हूँ।
१२ वर्ष की आयु में जब मेरे भीतर ज्ञानोदय हुआ, तब मुझे दसो दिशाओं में देखने का अनुभव प्राप्त हुआ। मैंने बच्चों को इस सिद्धि की दीक्षा दी, और उन्हें स्वयं इस पर प्रयोग करने की पूरी स्वतंत्रता दी। इस कारण अब ये बच्चे और भी कई नयी शक्तियों का प्रदर्शन करने लगे हैं। ये बच्चे विभिन्न भाषाओं को डाउनलोड (संकलित) कर लेते हैं। वे और भी कई नए कार्य कर दिखाते हैं, जिन्हें मैंने भी नहीं किया इस आयु में। "
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
तृतीय नेत्र जागरण दीक्षा प्राप्त करने के पश्चात कई बच्चे और व्यस्क महा सिद्धियाँ एवं अलौकिक शक्तियां व्यक्त करने लगते हैं। उदहारण के लिए :-
- ® उच्च कोटि की सर्जनशीलता, नए विषयों को शीघ्र सीखने और समझने की क्षमता, अद्भुत अंतर्ज्ञान का अनुभव, इत्यादि
- ® स्वास्थ्य में सुधार, प्रबल रोग प्रतिरोधक क्षमता।
- ® दोनों नेत्रों के बिना देखने और पढ़ने की क्षमता। इससे मस्तिष्क में नए आयाम जागृत होते हैं, जिसके परिमाण स्वरुप कई नयी सिद्धियाँ मनुष्य के लिए संभव हैं, विशेष रूप से स्वास्थ्य और शारीरिक विकास के क्षेत्र में । उदाहरण के लिए, क्षीण दृष्टि वाले लोगो के लिए तृतीय नेत्र की मदद से देख पाना संभव हो सकता है ।
- ® तृतीय नेत्र के माध्यम से शारीरिक बीमारियों का पता लगाना |
तृतीय नेत्र जागरण
अवतार पुरुष THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की साक्षात दीक्षा द्वारा तृतीय नेत्र जागरण संभव है।
'तृतीय नेत्र' अथवा आज्ञा चक्र, जो कि भृकुटि (भौ) के मध्य में स्थित होता है, एक गुप्त (गूढ) ऊर्जा केंद्र है और उच्चतम चेतना और सिद्धियों का प्रवेश द्वार है।
Part 2: Sarvajnapeetha - Think Tank of Hinduism_Hindi_part_2.md
बायें - नित्यानंद गुरुकुल द्वारा आंख पर पट्टी बांधकर की जा रही पढ़ाई। साथ में हैं कांची शंकर मठ में बच्चे श्री जयेन्द्र सरस्वती स्वामीगल और श्री थोडं ाई मंडल अदिनम गुरू महासन्निधानम। दायें - बिजनेस एडवोके सी सम्मेलन वाशिंगटन डीसी, यूएसए में आंख पर पट्टी बांधकर पढ़ाई करती शिष्य।
Third Eye demonstration to
हमारा पूरा पालन पोषण हमारे बच्चों को वास्तव में नीचे ला रहा है। वे पहले से ही संपूर्ण हैं, और भोलेपन, सरलता एवं प्रज्ञा के साथ पैदा होते हैं। उन्हें केवल एक उचित वातावरण, और उच्च चेतना का सही मार्गदर्शन चाहिए, जिससे कि वो अपने उन असाधारण आयामों को व्यक्त कर पाएं जो कि आधुनिक शिक्षा और सामाजिक प्रणाली से अवरोधित हो जाते हैं। - THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
तृतीय नेत्र की शक्तियों का प्रदर्शन
जागृत तृतीय नेत्र की शक्तियों का अद्भुत प्रदर्शन कई सम्मानित अतिथियों द्वारा देखा और सराहा गया। ऑस्ट्रेलिया, भारत, यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका, सिंगापुर सहित और भी देशों में यह प्रदर्शन किया गया। उदाहरण के लिये यह निम्न स्थानों पर प्रदर्शित किया गया:-
- ® कैपिटल हिल, वाशिंगटन डी.सी.में प्रख्यात व्यवसायियों एवं चिकित्सकों के समक्ष ।
- ® अमेरिकन राजनैतिक और व्यवसायिक दिग्गजों के समक्ष कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका में ।
- ® फेडरेशन ऑफ़ Hindu एसोसिएशन (FIA), अमेरिका में हज़ारो के जन समूह के समक्ष।
नीतिज्ञों को तृतीय नेत्र से पढ़ने का प्रदर्शन l जागृत तृतीय नेत्र का प्रदर्शन, सियाटल, अमेरिका में तृतीय नेत्र का प्रदर्शन, शंकर नेत्रालय के चिकित्सकों के समक्ष, चेन्नई में
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® NIMHANS नेशनल इंस्टीटूट ऑफ़ मेन्टल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज में ,जो कि एक विश्व प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक अनुसन्धान केंद्र है बेंगलुरु, भारत में।
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® नित्यानंद गुरुकुल शंकर नेत्रालय, चेन्नई, जो कि एक विश्व विख्यात नेत्र विशेषज्ञ अस्पताल है - के साथ क्षीण दृष्टि लोगों तक इस विज्ञान को पहुँचाने का काम कर रहें हैं ।
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® अनेक हिन्दू धर्म के मार्गदर्शकों जैसे कि परम पूज्य श्री जयेंद्र सरस्वती जी को, काँची शंकराचार्यमठ से, परम पूज्य श्री नारायणी अम्मा को, नारायणी पीठ, वेल्लोर से, परम पूज्य ज्ञानप्रकाश स्वामीगल्, थोनडाईमण्डल आदिनम्, कांचीपुरम से, विश्व हिन्दू परिषद के श्री अशोक सिंघल जी, इत्यादि को ।
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® बच्चों के लिए इनर अवेकनिंग® कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और सैकड़ों में उच्च प्रज्ञा जागृत की गयी ।
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® भारत, श्रीलंका, यूरोप, अमरीका, कनाडा, ब्रिटेन, दक्षिण पूर्व एशिया, संयुक्त अरब अमीरात, और मेक्सिको जैसे 20 देशों से बच्चों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया
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® दक्षिण पूर्व एशिया की समुद्र पर्यटन यात्रा, कम्बोडिया, बाली, वाराणसी, हरिद्वार, कोडाइकनाल, तिरुवन्नामलाई, मदुरई, बेंगलुरु पवित्र स्थानों में कार्यक्रम आयोजित किया गया
"इनर अवेकनिगं ®" बच्चों के लिए एक २१-दिवसीय ध्यान कार्यक्रम है जो कि एक ऐसा उत्तम वातावरण प्रदान कराता है जिसमे नई पीढ़ी को जागृत होने और अपनी उन असाधारण प्रतिभाओ को व्यक्त करने का अवसर मिलता है, जो कि उनके अंदर हमेशा से ही कुलबुलाती रहती हैं। अवतार THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की दीक्षा से, बच्चे सत्य, ज्ञान और आनंद (सच्चिदानंद) की उत्तम जैव स्मृति को आत्मसात कर लेते है जो कि उन्हें एक ऐसे पवित्र कमल पुष्प की भाँति खिलने देती है, जिस पर आज कल की संकुचित शिक्षा प्रणाली और विभिन्न सामाजिक संस्कारों का कोई विपरीत प्रभाव नही पड़ता।
- ® बच्चों का इनर अवेकनिग का कार्यक्रम इस गृह के प्रबुध भविष्य के लिए नई नेतृत्व चेतना से युक्त पीढ़ी का निर्माण कर रहा है। यह उनके जीवन को एक उत्सव भाँति बनाने के लिए उनमें भीतरी और बाहरी सफलता के सभी आयामों का विकास करता है। ® एक योगिक शरीर और वैदिक मनस का निर्माण करता है ।
- ® सृजनात्मक कार्यशालाएं
- ® वैदिक संस्कृति और अनुष्ठानों का अनुभव
- ® पवित्र वैदिक समारोह
बच्चों के लिए कल्पतरु - 1 दिवसीय कार्यक्रम
बच्चों को तृतीय नेत्र जागरणSM के असाधारण विज्ञान से परिचित करवाया जाता है। इसमें THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM बच्चों को इनर कार्यक्रम® का एक अनुभव देते हैं। वे उनको उनकी किसी एक इच्छा के पूरे होने का वरदान देते हैं, और उनको अपनी मनचाही वास्तविकता का सृजन करने की शक्ति प्रदान करते हैं।
नित्या ध्यान किड्स Sm - 2 दिवसीय कार्यक्रम
बच्चे जैसे ही चार तत्त्व और पूर्णत्व क्रिया से परिचित होते हैं वे पूरी तरह से परिवर्तित हो जाते हैं। तृतीय नेत्र जागरण, वैदिक स्मरण विधियां और श्रद्धा पूर्णश्रवण कौशल प्रत्यक्ष रूप से उनकी पढ़ाई के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं। यह उन्हें अच्छे अंक, सकारात्मक मित्रता, बेहतर स्वास्थ्य और उन्नत प्रज्ञा आदि लाभ देते हैं।
नित्यानंदम 10 दिवसीय कार्यक्रम
तृतीय नेत्र जागरण के असाधारण विज्ञान के अनुभव के लिए एक अदभुत कार्यक्रम
- ® अंतर्ज्ञान में वृद्धि के लिए
- ® प्रज्ञा में वृद्धि के लिए
- ® रचनात्मकता में वृद्धि के लिए
- ® उन्नत स्वास्थ्य के लिए
जिस तरह से हम बच्चों को गणित में मूल इकाई सिखाते हैं जैसे कि- एक और एक दो होता है, उसी तरह, उन्हें संसार और ईश्वर के साथ कैसे जीना है इसकी भी मूल इकाई को जानना जरुरी है। जो विचार आप अपने बारे में रखते हैं, वह मूल इकाई है। आप अपने बारे में जो विचार रखते हैं वही विचार आप अपने माता-पिता, शिक्षक, ईश्वर और संसार के बारे में रखेंगे।
- THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
पारम्परिक वैदिक शिक्षा की ज्योति को पृथ्वी के प्रत्येक बच्चे तक ले जाने के लिए THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल की स्थापना की है। नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल, दुनियाभर में कई स्थानों पर सफलता पूर्वक नई पीढ़ी के बच्चों को लाभान्वित कर रहे हैं। यह रोचक सप्ताहांत शिक्षा प्रणाली, आधुनिक पाठ्यक्रम में उपस्थित कई कमियों को पूरा कर रही है। एक नयी शिक्षा प्रणाली की सार्वभौम्य आवश्यकता को यह पूरा करती है, इसी लिए इसका तेज़ गति से प्रचार हो रहा है।
- w इसमें आध्यात्मिक विज्ञान, और उच्चतर विचार करने की शक्ति, दोनों का सामंजस्य है, जिससे कि बच्चों को जीवन कौशल का ज्ञान प्राप्त होता है
- w यह शाश्वत सत्यों पर आधारित जीवन की नीवं रखती है, उच्च प्रज्ञा को जागृत करती है
- w यह बच्चों को ऐसे सटीक शिक्षण प्रदान करती है कि वे भविष्य में विशिष्ट प्रतिभाओं और ईशत्व शक्ति को व्यक्त करते हैं |
नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल Sm दुनिया भर में हज़ारो बच्चों के लिए पारम्परिक गुरुकुल शिक्षा
दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के विभिन्न स्थानों में नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल
नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल -सिंगापुर - बच्चे देवी देवताओं से भक्ति के माध्यम से जुड़ते हुए और नित्य योग का अभ्यास करते हुए
नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल, बेंगलुरु
नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल, मुंबई
नित्यानंद सप्ताहांत गुरुकुल के बच्चे ओमान, मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्थानों पर
आनंद योगम एक साधक के लिए इस धरती पर सबसे बड़ा आध्यात्मिक अवसर है। यहाँ परम स्नेही व कृपालु ईश्वरीय हाथ हर क्षण हमारी सर्वोच्च सम्भावना को तराशने के लिए कार्य करता है। इसके अतिरिक्त यहाँ प्रत्येक व्यक्ति को अपने सच्चे स्वरुप को जीने का अवसर मिलता है, उन सब बाधाओ से परे जाने का अवसर मिलता है जो उनकी इच्छाओं को फलीभूत होने से रोकती हैं। यहाँ आध्यात्मिक उन्नति के प्रत्येक आयाम और जीवन के अनुभव का अवसर मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये सब महानतम जीवित गुरु THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के आश्रम में, उनके प्राण मंडल में होता है। आनंद योगम में आना स्वयं को एक उत्तम जीवन जीने का उपहार देने समान है। - अडम डोके , कैलिफ़ोर्निया, यु एस ए
आनंद योगम में आप लगातार ऐसी परिस्थितियों का सामना करते हैं जहाँ आप पूर्णत्व की ओर बढ़ते हैं। आपकी मूल अपूर्णता को बाहर लाया जाता है जिससे की आप त्वरित पूर्णत्व कर सकें : यह बहुत ही मुक्ति देने वाला अभ्यास है। यह सब बहुत ही मैत्रीपूर्ण वातावरण में होता है। आनंद योगम में आप स्वामीजी और अपने वास्तविक स्वरुप की तरफ बढ़ते हैं - अपने मूल तत्त्व और अपनी आत्मा की तरफ - और इसके लिए साहस चाहिए। स्वयं के अंदर झाँक के देखिये, आप कितने साहसी बनना चाहते हैं। मैं चाहता हूँकि सब लोग इस मार्ग पे चलें! - एड्रिअन बैली, न्यूॉर्क, यु एस ए
आनंद योगमSm वैदिक शिक्षण कार्यक्रम
''मैं आधुनिक युवाओं को साहसी और प्रबुद्ध मनुष्य बनाऊंगा, जहां वे अपने जन्म और जीवन का उद्देश्य जान सकें, जहां वें अपने जीवन पद्धति की विसंगतियों को समाप्त कर सकें। मैं आनंद योगम कार्यक्रम में युवाओं को आमंत्रित करता हूं।" ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
युवा पीढ़ी को वैदिक जीवन के अनुभव करने हेतु, परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने वर्ष 2003 में बेंगलोर स्थित आश्रम के ऊर्जाक्षेत्र में निःशुल्क वैदिक शिक्षा एवं जीवन पद्धति कार्यक्रम के अध्ययन के लिये 3 महीने, 6 महीने और 1 वर्ष के पाठ्यक्रम के उद्देश्य से आनंद योगम् की रचना की।
वैदिक विश्वविद्यालय, महाविद्यालय एवं अनुसंधान संस्थान
'' वैदिक शिक्षण संस्थानों की स्थापना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमें वैदिक विद्वानों के निर्माण के लिये विश्वविद्यालय की आवश्यकता है। मैं हिंदुत्व के प्रति आस्थावान लोगों के लिये वैदिक दर्शन शास्त्र के अध्ययन के उद्देश्य से विशाल विश्वविद्यालयों की रचना करके वैदिक दर्शन शास्त्र की विभिन्न शाखाओं में डाक्टर की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्वानों का निर्माण करूंगा। दूरस्थ शिक्षा के लिये आनलाइन वैदिक पाठ्यक्रम आरंभ किये जायेंगे।" ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
विश्व भर के ऐसे युवा जो समृद्ध वैदिक परंपरा और आत्मबोध के विज्ञान को खंगालना और सीखना चाहते हैं उन्हें निःशुल्क आवास, भोजन एवं चिकित्सा उपलब्ध कराकर शक्तिशाली यौगिक क्रियाओ, वैदिक मंदिर विज्ञान एवं कला, वैदिक ज्ञान, वैदिक जप और काफी कुछ बताया व सिखाया जाता है। वे सभी प्रकार की लत (नाशिले पदार्थ, धूम्रपान आदि), अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं से मुक्त हो जाते हैं। वे योग, ध्यान व ज्ञान के आचार्य बनकर विश्व में प्रमाणित हिंदुत्व का प्रचार-प्रसार करते हैं।
t नित्यानंद गुरुकुल, बेंगलोर आश्रम में आवासीय और गैर-आवासीय विद्यार्थियों के शिक्षण की योजना।
tविश्व भर में गुरूकुलो की स्थापना (भारत में राजपालयम, होसुर, सेलम, चेन्नई, एरोड, श्रीरागापडी, रासीपुरम्, हदैराबाद, मुंबई, बड़ौदा, पाण्ॅडिचेरी और वाराणसी में कार्य प्रगति पर)
tशिक्षकों एवं आधुनिक अवसंरचना के साथ एक पूर्ण वैदिक विश्वविद्यालय की स्थापना।
tगुरुकुल विद्यार्थी कम समय मे पी .एच.डी उपाधि प्राप्त करके भावी प्रबुद्ध समाज की नयी पीढ़ी बनकर असामान्य ज्ञान शक्ति एवं धरती की समस्याओं के समाधान को धारण करेंगे।
tआगामी पांच वर्षों में 108 देशों में नित्यानंद बाल विद्यालयों (सप्ताहांत गुरुकुलो)ं की स्थापना प्रस्तावित। (यू.एस .ए, यू.के ., औसटरेलिया, न्यूजीलैंड, ओमन और सिंगापुर में कार्य प्रगति पर)
tभारत के सभी गांवों में गुरुकुल शिक्षा पद्धतिकी स्थापना।
भावी योजनायें
अस्पताल एवं पारंपरिक वेदिक चिकित्सा की पुनर्स्थापना
रागदिरोगान सततानुषक्तानशेषकाय प्रसतानशेषान। औतसुक्तय मोहारतिदाञ्जघान यो पूर्ववैद्याय नमोस्तु तस्मयै।।
उन आदि चिकित्सको को नमस्कार है, जिन्होंने राग (नश्वर वस्तुओ की इच्छा) एवं जीवन पर छाया की तरह पड़ने वाली अन्य व्याधियो, जो कि प्राणियो का अटूट भाग हैं और जो औतसुक्य (तनाव), मोह (लगाव) एवं आर्ति (बुरे समय में घबराहट) को पूर्णरूप से समाप्त करते हैं। ~ अष्टांग हृदय (आयुर्वेद अंश), १
आयुर्वेद, सिद्ध, वर्मा, प्राकृतिक चिकित्सा और उनकी शाखाओ का पुनर्गठन
वैदिक काल में अद्वितीय चिकित्सा अनुसंधानों के जीवित विज्ञान ने मानव स्वास्थ्य एवं उसकी दीर्घ आयु को अकाल्पनिक स्तर तक पहुंचा दिया था। वैदिक परंपरा चिकित्सा, जैव शास्त्र एवं मानसिक स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान का अध्यात्मिक मूल हैं, जिसने मानव मस्तिष्क-शरीर को एक अलग जैव रसायन के रूप में नही बल्कि दिव्य ऊर्जा के सूक्ष्म रूप में माना।
वैदिक परंपरा आपके माध्यम से अद्वितीय शक्तियों के तीन रास्ते बताती है, जिससे आप एक प्रबुद्ध मनुष्य बनते हैं। ये हैंः मणि - वह तकनीक जैसे उड़न यंत्र, मंत्र - पवित्र ध्वनिया और औषध - विशेष जड़ी-बूटियां, रसायन जो चेतना को जाग्रत करते हैं। गुरू की दीक्षा से आपमे तुरन्त आत्मबोध या असाधारण सिद्धियां जागृत हो सक्ति हैं, किंतु मानव शरीर इन दिव्य ऊर्जाओ को ग्रहण करने के लिये तत्पर नही होता है। यह एक उलटे बर्तन पर पानी उंड़ेलने की तरह है। पवित्र औषधियों को जब ऊर्जामय करके दिया जाता हैं, तो मानव मनो-शरीर के नाडी मार्ग सरलता से खुल जाते है और गुरू द्वारा प्रसारित शक्तिशाली दीक्षा को ग्रहन कर पाते हैं।
क्या हैं वैदिक चिकित्सा क्षेत्र?
'' वैदिक परंपरा आपकी संभावनाओ, आपकी असाधारण शक्तियों का अनुभव करने का ज्ञान है, स्वास्थ्य व धन के अनुभव का ज्ञान एवं शांतिपूर्ण, समरस, सामाजिक जीवन के अनुभव करने का ज्ञान है। स्वास्थ्य एवं सबके बारे में असीमित ज्ञान अर्जित करना ही वैदिक परंपरा है।" ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
सिद्ध, आयुर्वेद , प्राकृतिक चिकित्सा, वर्मा
- w आयुर्वेद जीने का एवं लंबी आयु का सबसे प्राचीन विज्ञान है।
- w सिद्ध में रहस्यमय यौगिक शक्तियों एवं ज्ञान के साथ बीमारियों का आसाधारण उपचार होता है। इसने विश्व में सबसे अधिक संख्या में आत्मज्ञानी चमत्कार-कर्ताओं का निर्माण किया है।
- w प्राकृतिक चिकित्सा (नैचुरोपथि) प्रकृति पर आधारित औषधि होती है।
- w वर्मा मानव तंत्रिका तंत्र के समग्र उपचार से सं बंधित विज्ञान है, जहां मुख्य बिंदु बैटरियों अथवा पारेषण यंत्रों (ट्रांसफार्मर) की तरह काम करते हैं।
सिद्ध और आयुर्वेद की औषधियां बीमारियो ं के समग्र उपचार के अतिरिक्त मस्तिष्क एवं शरीर को असाधारण शक्तियो ं से युक्त करने का साधन हैं। रहस्यवादी शक्तियाें जैसे शारीरिक रूप से उपस्थित एवं विलुप्त होना, पवित्र जड़ी-बूटियो ंका निर्माण एवं चिकित्सकीय पौधो ंके प्रयोग से किसी भी प्रकार की व्याधि के उपचार इत्यादि के लिये प्रयोग में आने योग्य एवं उपयोगी चिकित्सा विज्ञान का निर्माण किया गया। अद्वैत भाव से जड़ी-बूटियो ंएवं प्रकृति की मूल शक्तियो ंके साथ इन दिव्य चिकित्सको ंने प्रकृति को उसके चिकित्सकीय गुणो ं एवं शक्तियो ंका रहस्योद्घाटन कराया।
उपलब्धियां
वैद्य सरोवर पर आनंद लिगं म विलक्षण दैवी घटना में समस्त रहस्यमयी शक्तियो ं से सं पन्न परम सिद्ध THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने मानवता को आनंद लिगं म के माध्यम से सजीव दिव्य ऊर्जा प्रदान की है। 21 फु ट लंबा यह शिव लिगं म आरोग्य ऊर्जा और जीवन मुक्ति की वर्षा प्रदान करता रहता है और मस्तिष्क, शरीर एवं आत्मा के लिए महान दिव्य संजीवनी स्वरुप है।
9 चिकित्स कीय पदार्थों और 1008 जड़ी-बूटियो ं के गोपनीय सम्मिश्रण से निर्मित नवपाषाण। सिद्ध परम्परा में नवपाषाण एक दर्ल ु भ औषधि है जिसे दिव्य ऊर्जाओ ं से पुष्ट करके यौगिक क्रियाओ ं के माध्यम से के वल एक जीवित सिद्ध योगी द्वारा ही तैयार किया जाता है।
अति दर्ल ु भ अवसरो मे मानवता इस शक्तिशाली वैद्य विज्ञान मे पारंगत हुयी है - इसमें तीन घटनाओ की परस्पर होने की आवश्यकता होती है - स्थापति (वैदिक शिल्प) और औषधि यो ं में पारंगत एक सिद्ध योगी और आत्मज्ञानी पुरुष जो मूर्ति मे दैवी प्राणप्रतिष्ठा सम्पन्न कर सके । 2000 वर्ष पूर्व महान सिद्ध बोगर के साथ यह पलनि में हुआ था।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM विश्व के महान चिकित्स को ं एवं चिकित्सा क्षेत्र के जनको ं जैसे महर्षि सूश्रुत, महान वैदिक शल्यचिकित्स क आचार्य चरक, सिद्ध चिकित्सा के जनक - महर्षि अगस्त्य द्वारा वैज्ञानिक रूप से प्रतिपादित चिकित्सकीय क्षेत्रों आयु क्षेत्रों र्वेद, सिद्ध, प्राकृ तिक चिकित्सा एवं वर्मा को सक्रिय तरीके से पुनर्स्थापि त करने में जुटे हुये हैं।
t फार्माकोलौजि (औषध विज्ञान)
विलुप्त हो चुके वैदिक औषधि सूत्रों को ताड़प त्रों से दु बारा प्राप्त करना,औषधीय मिश्रणो ं का निर्माण, उनका चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद मानवता की सेवा के लिये उपलब्ध कराना।
उपचारात्मक आयुर्वेद और सिद्ध औषधियां आनंद लि ंगम चारो ंओर उपचारात्मक शक्तियो ंके जल से युक्त 'वैद्य सरोवर' और वातावरण को उपरात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रखने वाली जड़ी-बूटियो ंसे धिरा हुआ है, इसके अदं र और आसपास आने वाले हर व्यक्ति को तुरंत उपचार मिलता है।
t अस्पताल, महाविद्यालय, अनुसं धान केंद्र रोगि यो ंके उपचार हेतु यौगिक एवं वैदिक अस्पतालो ंका निर्मा ण। आयर्ु वेद, सिद्ध, प्राकृ तिक चिकि त्सा और वर्माजैसी पारम्परिक चिकि त्सा पद्धतियो ं पर आधारित महाविद्यालयो ं एवं अनुसं धान सं स्थानो ं की स्थापना।
t वैदिक जीवन विज्ञान का पुनर्प्रचलन
भगवान शिव द्वारा 'कामिका आगम' जो कि अति स्पष्टता से अद्वैत जीवन जीने का ज्ञान पद, क्रिया पद आदि 'शिवोऽहं की जीवनशैली' बताता है तथा घरो,ं मं दिरो,ं समुदायो ं तथा यज्ञों से जडु ़े दैनिक नित्यकर्म से नैमितिक कर्म के अनुष्ठानो ंके बारे में बताता है।
ज्योतिष, वैदिक खगोलशास्त्र, वैदिक पं चांग के पूर्ण विज्ञान एवं ग्रहो ंकी स्थिति।
वास्तुशास्त्र, वास्तुशिल्प एवं निर्माण विज्ञान।
एवं प्राणमथोङ्कारं यस्मात्सर्वमनेकधा। युनक्ति युञ्जते वापि यस्माद्योग इति स्तः मृ ॥ एकत्वं प्राणमनसोरिन्द्रियाणां तथवै च। सर्वभावपरित्यागो योग इत्यभिधीयत् ॥
जब योगी अपनी श्वासो को ॐ मे मिलाते है या जब वे विविध प्रकारो से सं पूर्णता मे समाहित हो जाते है, उसे योग कहते है। इस श्वास, मन और इंद्रियो का एकत् ं वं और समस्त विचारो और भा ं वो के पर ं ित्याग को ही योग कहा जाता है।
~ मैत्री उपनिषद्६.२५ कृ ष्ण यजर्वेदु ्
योग आज विश्व में सबसे अधिक अभ्यास किया जाने वाला धर्मव जीवनशैली है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा स्थापित नित्य योगSM, योग के परमपिता व सं स्थापक आदियोगी महादेव, महानतम हठयोगी स्वात्माराम, योगतंत्र के जनक पतञ्जलि और महान नाथ योगियोंमच्छेंद्र नाथ एवं गोरखनाथ द्वारा प्रकट 'मूल' यौगिक शास्त्र के योगो का पुन ं र्गठन है।
वर्तमान योग प्रणाली तो वास्तवित योगिक क्रियाओ का भी प्र ं तिवाद करता है और योग को इसने मात्र आसनो और ं प्राणायाम (श्वसन तकनीक) तक सीमित रखा है। अधिकतर मानवता को योग के शुद्ध व मौलिक रूप से प्रथक रखा गाय हैं। वस्त्ताव
मे योग मन-मस्तिष्क व आत्मा का अद्वैत भाव मे एकाकार होना है ।
Now has come the urgent time for these yogic sciences to be systematically revealed to the world through an adept Living Yogi, ensuring a new age of Yogic traditions flowing from the oldest, purest yogic streams.
नित्य योगSm क्या है?
आदियोगी महादेव ने 'शिव आगम' में समस्त जगत के लिये आंतरिक ऊर्जापुंज के रूप में विद्यमान कुण्डलिनी शक्ति जागरण के उद्देश्य से योग विज्ञान का रहस्योद्घाटन किया। मूल रूप से योग कुण्डलिनी को जाग्रत करके और मनोरथ को यथार्थरूप में अभिव्यक्त करके अंततः वास्तविकता के उच्चतम एकाकार स्तर शिवोहम में विलीन कर देता है। "मैं ही शिव हूं, 'मैं ही दिव्य हूं की अनुभूति होने लगती है।"
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
- ® 300+ यौगिक तकनीक का प्रकाशन प्रमाणिक योगिक ग्रंथो पर आधार ं ित ।
- ® 10,000 से अधिक व्यक्ति, 50+ देशोंमें नित्य योग में दीक्षित।
- ® 600 ध्यान तकनीक यौगिक ग्रंथो से अब तक प्रशि ं क्षित।
- ® 112 नित्य क्रियायें मानसिक, भावनात्मक एवं शारीरिक समस्याओ के स ं माधान हेतु निःशुल्क इंटरनेट पर उपलब्ध।
- ® THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा आधुनिक काल में सर्वप्रथम 108 क्रियाओंमें सामूहिक दीक्षा।
- ® 8 नियम पुस्तिका नित्य योगSM एवं नित्य क्रियाSM पर वयस्कों वं बालको के ल ं िये प्रकाशित की गयी - अर्ध
शिरः पीड़ा, महत्तम प्रदर्शन, स्मृति समस्या एवं स्थायी विकारोंहेतु।
- ® 50 लाख लोगो का ं जीवन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा पतंजलि योग सूत्र, शिव सूत्रों न्य ध्यान क्रियाओ पर ं आधारित विश्व भ्रमण प्रवचनो एं वं सामूहिक सत्संगो द्ं वारा समृद्ध हुआ।
- ® योग, कुण्डलिनी, और ध्यांन के क्षेत्र मे आरोग्य अनुसं धान एवं उत्कृष्ट प्रयोग।
उपलब्धियां
As per the Yoga Pada in Agama scriptures, that are the direct words of Mahadeva, Yoga is experiencing union with Oneness itself.This understanding of Yoga is the basis for the real science of Yoga, and not the mind control or body control methods.
H.H.THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, guided by powerful Yogis and Mystics, from childhood, has been a practitioner of all dimensions of Yogic sciences, retaining the pure form and body-language of Yoga, that till now have disappeared from the modern yoga texts.
प्रबुद्ध योगियो के ं वंशज
सं त पतञ्जलि
परम पूज्य श्री नित्यानंद गहरी योग प्रथाओंमें लीन
योगिराज योगानंद पुरी (रघुपति योगी)
जन्म से ही सिद्ध योगी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM को सं त पतञ्जलि की चेतना और भाव-भं गिमा से युक्त महान योगिराज योगानंद पुरी (रघुपति योगी) द्वारा योग के पथ पर प्रशिक्षित किया गया।
परम पूज्य स्वामी जी को विलुप्त हो चुकी योगिक शक्तियोंजैसे उत्तोलन , टेलीपोर्टेशन और पदार्थिकरण की शिक्षा दी| उनकी कुशल शिक्षा प्रणाली के तहत THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जल्द ही योग के उच्च स्तर तक पहुंच गए|
स्वामी जी ने वैदिक शास्त्रों जैसेपुराण और उपनिषदो की शि ं क्षा विभिन्न गुरुओ से ं प्राप्त की|
पृथ्वी पर यौगिक शरीर वाले प्रबुद्ध योगियो की एक नयी प्र ं जाति का निर्माण हो रहा है, जिनके पास यौगिक शरीर क्रियाविज्ञान के पांच अवयव
- शारीरिक बनावट, शक्ति, सहनशक्ति, लोचशीलता और ऊर्जा विद्यमान हैं। मानवीय क्षमताओ की ं महत्तम अनुभूति के लिये मनुष्य में जागृत करने योग्य आंतरिक स्थिर ऊर्जा- कुण्डलिनी शक्ति व अन्य रहस्यात्मक यौगिक सिद्धियो को धारण ं हेतु यौगिक शरीर का होना अनिवार्यहै।
महादेव से यथार्थ योग एवं यौगिक सिद्धियां
नित्य योग प्रशिक्षण कार्यक्रम परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी द्वारा योग के प्रशिक्षको के ल ं िए एक अद्भुत तोहफा है| इस कार्यक्रम में योग के सत्य को बिना परिवर्तित किए शास्त्रों के सू स्त्रों और त्रों क्रियाओ के ं माध्यम
से किस प्रकार योग का अभ्यास एवं प्रचार प्रसार किया जा सके , इसकी शिक्षा दी जाती है|
नित्य योग शिक्षक प्रशिक्षण
"योग हमारी विरासत है । योग सारी दनिु या की अमानत है| हमारे पास योग का कोई कॉपीराइट तो नहींहै परंतु मैं योग को सं रक्षित करने और मिश्रित होने से बचाने के पक्ष में हूं| योग के अनुकू लन से योग मिश्रित नहींहोना चाहिए| एक सच्चा योगाचार्य योग का अनुकू लन तो करता है पर उसे मिश्रित नही करता| ं जन्मजात योगी होने के नाते मैं न सिर्फ योग पद्धति के साथ प्रबलता से खड़ा हूं अपितु उसके शुद्ध तत्व को सं रक्षित करना मेरी जिम्मेदारी है|"
~ परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
नित्य योग के द्वारा परम पूज्य श्री नित्यानंद जी ने मेरे जीवन में मानो एक बहुमूल्य कोष को खोल दिया है - मुझे एक ऐसी अद्भुत द्भु शक्ति दे दी है जो अब तक मेरे भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में मेरे लिए उपलब्ध नहींथी। नित्य योग द्वारा मैंने यह सीखा है कि कै से मैं अपने शरीर और मन को अपनी मनचाही वास्तविकता की रचना करने के लिए सं रेखित कर सकती हूँ। और यह सब मैं बहुत ही आनन्दमयी एवं सरल तरीके से कर सकती हूँ। इससे मेरे हर प्रयास का आरम्भ अब सफलता एवं सुख से ही होता है। मैं अपनी इच्छा को अपने शरीर का एक अंग बन लेती हूँ, जिससे वह स्वतः पूर्णहो जाती है। मैं स्वामीजी का आभार व्यक्त करना चाहती हूँ की उन्होंने न्हों मुझे जीवन रुपी आसनं में स्थिरं और सुखं का अनुभव कराया।
अनु देशपांडे, सिगापूर ं
माइक्रोसॉफ्ट, भारत की पूर्व विपणन (मार्केटिं ग) निदेशक
नित्य योग केद्वारा परम पूज्य श्री नित्यानंद जी नेमझु ेयह अनुभव कराया कि यह प्रशिक्षण केवल आसन, ध्यान, अच्छेशारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं है। यह तो शरीर, मन और आत्मा के माध्यम सेचेतना केउच्च स्तर अनुभव करनेकेलिए ह, ै अपनी जागरूकता बढ़नेकेलिए हैऔर पुरेअस्तित्व केसाथ अद्वैत अनुभव करनेकेलिए है। यह एक नैतिक ज्ञान सेकहींअधिक ह, ै यह तो पुराचीन शास्त्रों केउस परम विज्ञान को पुनर्जीवित कर रहा हैजो हमारी चेतना का विकास करता है और हमें आत्मबोध कराता है। यह सीधे ज्ञान के परम स्रोत से ह!ै
यिग रो ं ज़ ली (माँ नित्य गंगानन्दा) जनपदीय अभियंता, कै लिफ़ोर्निया, अमेरिका
नित्य योग आचार्य प्रशिक्षण मेरे लिए एक बहुआयामी भीतरी आध्यात्मिक यात्रा के समान रही है - एक अत्यन्त ही प्रबल, लाभप्रद आत्म बोध कराने वाली यात्रा। इससे मेरे अंदर की असाधारण सिद्धियां व्यक्त हुईं, और मुझे पता चला कि एक सच्चे योगी का जीवन कै सा होता है। मेरे गुरु और महा योगी, परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी कहते हैं कि "योग एक निरन्तर अभ्यास है - जिसका कभी अंत नहींहोता"। इससे मुझे प्रेरणा मिली कि मैं अपनी सर्वोच्च क्षमता तक पहुँचूँ , और योग के पांच पथ का प्रसार करूँ: कर्म योग - कर्म का मार्ग, भक्ति योग - भक्ति का मार्ग, ज्ञान योग - ज्ञान का मार्ग, राज योग- साधना का मार्ग और हठ योग - शरीर, मन एवं प्राण कोष के शुद्धिकरण का मार्ग। इस अभ्यास से मैं आनंद और करुणा से भर गयी हूँ।
- -अराबेल्ला कार्बोन (माँ नित्य समर्पिणी) आध्यात्मिक जीवन की प्रशिक्षक न्यू यॉर्क, अमेरिका नित्य योग आचार्य प्रशिक्षण मेरे लिए एक बहुत ही अद्भुत अनुभ द्भु व रहा है। इससे हमारे लिए स्वामीजी के मार्गदर्शन से वैदिक सं स्कृति और योग को अपने विशुद्ध मूल रूप में पुनर्जीवित कर पाना सं भव हुआ है। मैं स्वामीजी का धन्यवाद व्यक्त करना चाहती हूँकि उन्होंने न्हों हमें यह अवसर दिया।
अभिषिणी सिवानेसर्जह, टोरंटो, कनाडा छात्रा
शास्त्रों द्स्त्रों वारा प्रमाणित 84 योग आसन
नित्य क्रियाSM यौगिक चिकित्सा समाधानो की उत्त ं म श्रंखला है जिसका THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने रहस्योद्घाटन किया है। इन क्रियाओ द्वारा भावनात्मक और शारीरिक समस्याओ के ल ं िए सामाधान प्राप्त होता है अन्द यें इन्टरनेट पर निशुल्क उपलब्ध हैं ।
ये अद्वितीय हैं कयोकिं इनका ज्ञान और तकनीक भारत के यौगिक शास्त्रों से ल स्त्रों िया गया है और साथ ही इनका विशिष्ट सं योजन THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के व्यक्तिगत अनुभवो, अनुस ं न्धान से व्यक्त किया गया है, इस उद्देश्य के साथ जससे विभिन्न शारीरिक रोगो की च ं िकित्सा की जा सके और विभिन्न बीमारियो को रोका ं जा सके ।
नित्य क्रियाSM ने यौगिक क्रियाओ की ं मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए उन्हेंजगत को प्रदान किया है। इनका जन्म ऐसे सिद्ध योगिओ के ं हजारो वर्षो के योगदान के बाद हुआ जिन्होंने अपना सं पू िन्हों र्णजीवन ही यौगिक विज्ञान को समर्पित कर दिया था।
नित्य क्रियाSM निम्नलिखित घटको का सं चय ं है :
- w आसन
- w कुम्भक, प्राणायाम (श्वांसो कि क्रियाएं )
- w कल्पनाविज्ञान
- w मं त्र (आतंरिक मंत्रोच्चारण) आन्तरिक रूप से सुनना अथवा किसी ध्वनि को दोहराना
- w बाहरी मंत्रोच्चारण बाहर किसी ध्वनि का उच्चारण करना
- w शिव तांडव करण भगवान् शिव की अलौकिक नृत्य मुद्राएँ
नित्य क्रियाओ से स्ं थाई उपचार होता है क्योंकि यह कोशिकीय जैव स्मृति और मानव के मन- शारीर तंत्र के स्तर पर कार्य करती है और इनका कोई नकारात्मक प्रभाव नहींहै |
नित्य क्रियायेंSm- 112 मौलिक यौगिक चिकित्सा समाधान
स्वयं महादेव के द्वारा दिए गए पाराम्परिक योग आसन, जिनका उल्लेख विभिन्न यौगिक शास्त्रों में मिलता है, इससे पहले कभी भी इतने स्पष्ट और सूक्ष्म रूप में प्रस्तुत नहींकिये गए। अब ये THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के द्वारा पुनर्जीवित कर लोगो तक ं पहुंचाए जा रहे हैं।
नित्य क्रियाएंSM धार्मिक शास्त्रों जैसे आगमो के योग पा ं द, यौगिक ग्रंथ जो योग का आधार माने जाते हैं जैसे कि – घेरंड संहिता, हठ योग प्रदीपिका, हठ रत्नावली, जोग प्रदीपिका, कुम्भक पद्धति, मत्सेंद्रिय संहिता, पतंजली योग सूत्र इत्यादि पर, पूर्ण रूप से निरधारित हैं।
नित्य क्रियाएं शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हैं जिससे असाधारण सिद्धीयों व आध्यात्मिक अनुभवो को ं जागृत किया जा सके । गुरु कृ पा से एक बार जागृत हुई कुंडलिनी शक्ति, साधक पर आशीर्वादो की ं वर्षा कर देती है जिससे उन्हें ऊर्जा स्तर में भरपूर उन्न्ति, शारीरिक स्वास्थ्य, सम्पूर्ण आंतरिक पूर्णता और परम ईश्वर का दिव्य सम्बन्ध प्राप्त होता है ।
नित्य क्रियाSm के आधारभूत यौगिक शास्त्र
"मैंने कभी किसी भी विधि के द्वारा इतना शीघ्र चीनी के स्तर को नीचे गिरते नहीं देखा है । यह अभूतपूर्व है !" - हयूस्टन, टेक्सस (USA) से रिकार्डो बोरेइकी
63 वर्षीय यह व्यक्ति जो कि पिछले 33 वर्षों से मधुमहे रोग से पीड़ित थे, नित्यक्रिया के अभ्यास के उपरांत इन्होने चमत्कारी उपचार का अनुभव किया | रिकार्डो बोरेइकी कहते हें कि उनका ब्लड शूगर का स्तर 300 व 400 के भीतर था और उनको प्रत्दीन 45 यूनिट इन्सुलिन लेनी पड़ती थी और अब उनका शूगर का स्तर 85 पर स्तिथ हो गया है और 5 यूनिट इन्सुलिन ही लेनी पड़ती है जब से नित्य क्रिया का अभ्यास शुरू किया है।
नित्य क्रियाSm से उपचारो का अनुभ ं व
"मझु े पिछले 16 वर्षों से मधुमहे की बीमारी है और पिछले 3 वर्षों बहु में यह बद गयी थी - साधारण से 3 गुना अधिक। मैंने टोरंटो नित्यानंदेश्वर हिन्दू मं दिर में मधुमेह क्लिनिक का एक सप्ताह के कोर्स में भाग लिया था। मैं आशचर्यचकित रह गया और मेरी शुगर का स्तर साधारण स्तर पर आ गया और मेरे डाक्टर ने मेरी दवाई आधी कर दी। मेरे शरीर और मन की स्तिथि दोनोंमें सुधार हुआ है। - परिमल पर्मनाथन, टोरंटो, कनाडा
t मूल हिं दू परम्परा पर आधारित योग हेतु प्रमाणीकरण सं गठन के रूप में स्थापित होना। वैदिक ग्रंथों पर आधारित प्रमाणिक योग शिक्षण के लिये विश्व स्तर पर योग शिक्षको, योग ं शालाओ एं वं योग सं स्थानो प्रं माणपत्र दिये जायेंगे।
t यौगिक ग्रंथो द्ं वारा प्रत्यक्ष प्रमाणित यौगिक तकनीक की विश्व के सबसे विशाल पुस्तकालय की स्थापना।
t विश्व को योग के प्रमाणिक विज्ञान से परिचित कराने के लिये 1000 से अधिक नित्य योग आचार्यों की नियुक्ति करना।
t योग को वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली विज्ञान के रूप में स्थापित करना जिससे मानव शरीर, मन एवं चेतना का निर्माण हो और मानवता स्वस्थ, सुखद व बोधमय जीवन जिये।
भावी योजनायें ...
INR 50 करोड़
वैसे तो मैं कई वर्षों से योग सिखा रही हूँ परन्तु सिखाने का सम्पूर्ण केंद्र ध्यानपीठं आश्रम बिड़दी से सन २००७ में नित्य योग टीचर ट्रेनिग के को ं र्स के बाद नाटकीयढंग से बदल गया जहाँ स्वामीजी ने मुझे विधिवत योग प्रशिक्षक बनाया।
बहुत वर्षों तक शरीर व मन पर काम करने के बाद मैं योग के मूल अध्यात्मिक तत्व को अपने अन्दर स्तिथ कर पाई । मैंने अपने और विद्यार्थियोंमें तीव्र परिवर्तन का अनुभव किया ।
- माँ नित्यानंद बोधना, ओहाइयो , यू.एस.ऐ
नित्य योग सीखने से पहले मैं 2001 से एक प्रमाणित योग प्रशिक्षक के रूप कार्य कर रहा था पर मैं आसन के केवल शारीरिक पहलुओ को ध् ं यान में रख कर, अहंकार भाव से, आसन और प्राणायाम सिखा रहा था। योग की गहरी समझ और अनुभव तब प्राप्त हुआ जब स्वामी नित्यानंद ने नित्य योग को मेरे जीवन में उतारा जिसने मेरे मूल यौगिक अभ्यास को पूरी तरह से बदल दिया।
नित्य योग ने न केवल मेरे जीवन की रिक्त्तताओ को पू ं र्णकिया परन्तु योग के ऐसे रहस्यों को खोला है जिसेस हम उस निराकार से समागम बना सकते हैं ।
माँ नित्य दर्गा ु नंदा, सिगापुर ं
आतंरिक जाग्रति कार्यक्रम के दोरान मैंने अपने शरीर में सिर्फ प्रबलता ही नही बं ल्कि हल्केपन का भी अनुभव किया । मुझे अपने अभ्यास की सं भावनाए दिखने लगी जो कि मुझे पहले नही दिख र ं ही थी । आसन खेल के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी हैं जो कि आरम्भको से ले कर प्रग ं तिशील सहभागियो के ल ं िए सभी स्तर पर उपलब्ध है । पूर्णत्व और विशुद्ध रूप से सुनने के विज्ञान का प्रयोग करने के कारण योग की मुद्राओ से ं मुझे योग का अबतक का सबसे उत्क्रष्ट अनुभव प्राप्त हुआ है ।
- सिन्त्ब्या, नर्सिसी, इल, यू.एस.ऐ
नित्य योग मेरे लिए जीवन परिवर्तन से कही अधिक है जिससे मैंने अपनी वास्तविकता को समझा । कुण्डलिनी जाग्रति से मेरी चेतना और अपने आपको और दूसरो को सुनने कि क्षमता में महत्वपूर्णवद्धिृ हुई है। हालाँकि यहाँ आने से पहले मैं योग के क्षेत्र में काम कर रही थी, किन्तुमेरे लिए ये किसी आश्चर्य से कम नहींथा किस प्रकार मेरा शरीर निरंतर रूपांतरित हो रहा था। हर दिन मैं अपने अभ्यास में गहराई तक जा रही थी और पूर्णत्व अनुभव कर रही थी, क्योंकि मेरा शरीर हल्का ,लचीला और अनुकू ल बन गया था।
मैंउन आसनो को करने ं में भी सक्षम हो गई जिनको में पहले आसानी से और जागरूकता के साथ नही कर पा र ं ही थी ।नित्य
योग से न सिर्फ मेरे मानसिक साँचे.. बल्कि मेरे शारीरिकसाँचे भी समाप्त हो गए। दर्द की मांसल स्मृति समाप्त होने से अब मैं जान पा रही हूँकि जीवन सं भावनाओ से भरा हुआ है ।
- ऐना बेलें, मेक्सिको सिटी, अभिनेत्री
नित्य योग से मैंने पूर्णत्व की अनुभूति की है। पहले मैं नित्य योग सीखने में प्रतिरोध कर रही थी क्योंकि मैं पहले से ही एक अलग योग का अभ्यास कर रही थी । प्रतिरोध के होते हुए भी पतंजलि ध्यान के प्रथम सत्र में मुझे मुक्ति का ऐसा अनुभव हुआ, कि मेरे आंसूं बहने लगे। ये मेरी मांसल स्मृति में लम् सबे मय से सं गृहीत थे जो कि बाहर निकल गए ।
ये मेरे रूपांतरण का प्रमुख भाग था। नित्य योग मुझे जीवन की प्रत्येक कठिन परिस्थिति, को सुलझाने के लिए विश्वास देता है, जिसका सामना मैं कर रही हूँ ।
- मैरी मब्री, कै लिफोर्निया, यू.एस.ऐ
यदि योन्यां प्रमुञ्चामि साङ्ख्यं योगं समाश्रये असुभक्षयकर्तारं फलमुक्तिप्रदायकम् यदि योन्यां प्रमुञ्चामि तं प्रपद्येमहेश्वरं असुभक्षयकर्तारं फलमुक्तिप्रदायकम् ।।
जब मैं इस गर्भ से बाहर आऊं तो मैं सांख्य योग की शरण में रहूं, जो कष्टों को ष्टों नष्ट करता है और मुक्ति प्रदान करता है। जब मै इस गर्भ से बाहर आऊं तो मैं महेश्वर (शिव) की शरण में रहूं, जो कष्टों को न ष्टों ष्ट करके फल स्वरुप मुक्ति प्रदान करते हैं।
~ गर्भोपनिषद, ४
वैदिक काल में, गर्भाधान एवं गर्भ एक सचेतन प्रक्रिया थी, उसके द्वारा इस पृथ्वी पर अनेक उच्च चेतनापूर्ण बालको ने ं जन्म लिया।
एन प्रेग्नेन्सी SM इसी वैदिक विज्ञान का पुनरोत्थान है जिससे कि प्रबुद्ध मनुष्यों की ्यों नयी पीढ़ी का निर्माण किया जा सके । यह गर्भ को एक 'घटना' नही, बं ल्कि सचेतन विकल्प के रूप में ग्रहण करके अभिभावको को अपनी भा ं वी सं तान की अनुवांशिक अभियांत्रिकी (एन पेरेनटिन्ग कार्यक्रम) की शक्ति प्रदान करता है।
एन प्रेग्नेन्सी Sm क्या है?
''एन प्रेग्नेन्सी SM एक 'दिव्य हवाई पट्टी' है। यह धरती को समृद्ध करने के लिये आवश्यक आत्माओ के अ ं वतरण हेतु आरोग्य एवं प्रबोधन ऊर्जा से युक्त एक 'दिव्य स्वागत केंद्र' है।'' ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
eN Pregnancy Care online sessions
उपलब्धियां
- ® 100% शिशु सर्वोत्तम स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा, स्वस्थ, विकसित और उत्तम भार वाले उत्पन्न होते हैं और उच्च बौद्धिक, भावनात्क एवं अध्यात्मिक स्तर पर पूर्ण विकास होता है।
- ® पीडा रहित प्राकृतिक प्रसव। अचेत करके प्रसव कराने के ' शून्य प्रकरण'। मां एवं नवजात के लिये प्रसव का सचेत व सुखद अनुभव ।
- ® शल्यक्रिया से प्रसव की दर में महत्वपूर्ण गिरावट।
- ® अपेक्षाकृ त कम प्रसव काल।
- ® अब तक प्रसव-पश्चात अवसाद की ' शून्य घटनायें'।
- ® 90 % नवजात में यौगिक मुद्रा ओ (ं जैसे चिन मुद्रा में उं गलियो अं थवा सम्पूर्ण शरीर में अध्यात्मिक लक्षण) से युक्त होते हैं।
- ® गर्भाधान के समय उपयुक्त अनुवांशिक लक्षणो के चयन के ल ं िये ''एपीजेनेसिस'' की शक्ति के दोहन हेतु तकनीक की स्थापना। यह सं तति में रोगो एं वं अन्य व्यावहारिक अवगुणो के स्ं थानांतरण को समाप्त कर देता है।
Research findings based on information polled from program participants.Findings are subjective in nature .
इस खंड में वर्णित गतिविधियो को स ं र्वज्ञपीठ की गम्भीरता एवं विस्तार को स्पष्ट करने हेतु बताया गया है। किंतु, कृ पया ध्यान में रखें कि इस खंड में वर्णित गतिविधियो का सं चालन लाभ ं हेतु निजी लिमिटेड कं पनी द्वारा सं चालित किया जाता है, जो दान ग्रहण नही करते ं है।
- ® नित्य योग S M, नित्य क्रिया S M पूर्णत्व का विज्ञान, ध्यान, कल्पना को दृश्यांकन, मं त्र-जप, एवं गर्भ संवाद (अजन्मे शिशु से संवाद) जैसी तकनीक का समावेश। प्रसव काल में शिशु के पिण्ड को सकारात्मक जैव स्मृतियो (bio-memory) के ल ं िये तैयार करना जिससे कि उच्च विकसित एवं प्रबुद्ध आत्मा आकर्षित हो सके ।
- ® नित्य योग S M, नित्य क्रिया S M पूर्णत्व का विज्ञान, ध्यान, कल्पना को दृश्यांकन, मं त्र-जप, एवं गर्भ संवाद (अजन्मे शिशु से संवाद) जैसी तकनीक का समावेश। प्रसव काल में शिशु के पिण्ड को सकारात्मक जैव स्मृतियो (bio-memory) के ल ं िये तैयार करना जिससे कि उच्च विकसित एवं प्रबुद्ध आत्मा आकर्षित हो सके ।
- ® 100 से अधिक विश्व भर के दंपतियो ने कार्यक्रम किये।
- ® डॉक्टरो का ं मार्गदर्शन व आसान एंटिनेटल के यर द्वारा प्रसव तकनीक दी जाती है।
eN Pregnancy Care classes held reg ularly in comm unities
डॉ श्रीलेखा कार्तिक ऍम डी, डी एन बी (Pediatrics) परामर्शक बाल चिकिस्तक और नियोनेटोलौजिस्ट, बं गलुरू , भारत
एन प्रेग्नेन्सी कै यर (एन गर्भ धारण सं रक्षण), प्राचीन वैदिक परंपरा और आधुनिक वज्ञानि ै क प्रमाणीकरण का ऐसा मिश्रण है जिसमे स्वस्थ बाल जन्म का परिणाम सुनिश्चित रूप से सम्मिलित
है।
एक बाल चिकित्सक होने के नाते मैं पुष्टि कर सकती हूँ कि यह एक बार में उपलब्ध, सम्पूर्ण समाधान है, जो नवजात शिशु की देख भाल सम्बंधित रोग जैसे समयपूर्व जन्म, अंतर्गर्भाशयी विकास, मानसिक मंदता, जन्म श्वासावरोध, रक्तविशणता आदि में सहायक और समस्याओ का स ं माधान है।
ध्यान अभ्यास, योग एवं शक्तिशाली तकनीक जैसे पूर्णत्व, एक तनाव मुक्त गर्भाधान अवधि सुनिश्चित करते है, जिसके परिणाम स्वरुप अधिकांश माँएं ४० सप्ताह की पूर्ण अवधि तक गर्भ धारण करती हैं, तथा अच्छे ३-४ किलो के वजन वाली सं तान को जन्म देती हैं।
हम यहाँ आत्मप्रशं सा करना चाहेंगे, कि हमने जो प्राथमिक अभ्यास किया, उसमें आज तक जन्म समय पर दम घुटना, या रक्तविषणता का एक भी प्रकरण नही हुआ ं है। माताएं , जन्म के तुरंत बाद अपनी सं तान से सम्बन्ध जोड लेती है व स्तन पान कराना आरम्भ कर देती हैं और सं तान को केवल स्तनपान ही कराने के हेतु प्रेरित की जाती हैं। स्तनपान की दर सामान्य जनता से उल्लेखनीय रूप में ऊपर है जिससे नवजात शिशु को उत्तम परिणाम मिलते हैं।
माता पिता के सूचनाओ के आधार पर ब ं च्चे, शांत, उत्तेजनहीन, सतर्क और अपने आसपास सबसे एकत्व में रहते है।वे अच्छी रोग प्रतिरोधक शक्ति के होते हुए , स्वास्थ्य में विकास तथा वद्धिृ के चरण प्रदर्शित करते हैं । वे उदर पीड़ा से मक्तु , सं गीत प्रिय और अच्छी नीदं सोने वाले होते हैं। अधिकांश बच्चे, चिन मुद्रा में ध्यान मग्न दिखते हैं , जो जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।
वे अद्भुत विशि द्भु ष्टताएं जैसे प्रेम, दया, दूसरो का ध् ं यान रखना, उनके साथ बाँटना और अहिसा प्र ं दर्शित करते हैं । मेरी भूमिका अब अस्वस्थ नवजात शिशुओ के च ं िकित्सक की नहींकिन्तु इन आनंदमय शिशुओ के पालन ं में साझदेार बनने की हो गई है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM को मेरा हार्दिक आभार है कि वैदिक विज्ञानं को उन्होंने इतने सरल और उपयो न्हों क्ता मैत्रीपूर्ण ढंगसे सम्पूर्णमानवता कल्याण हेतु उपलब्ध किया है।
यह निस्संदेह प्रथम चरण है एक स्वस्थ, बुद्धिमान, प्रेममय सभ्यता का निर्माण करने के लिए, जो पृथ्वी लोक की सामहूिक चेतना का उत्थान करेगी।
eN Pregnancy Care, the ancient Vedic science validated by modern medical science
डॉक्टर्स ने हमारे बच्चे को जांचा और कहा था कि शिशु का ह्रदय का बनयान भाग "हयपोप्लास्टिक" रोग ग्रस्त है । उन्होंने सु न्हों झाव दिए कि हम गर्भपात करवा दें, क्योंकि उसके बचने की सम्भावना और आगामी शल्यचिकित्सा की आवश्यकता एक कड़ा संघर्ष हो सकते है। स्वामीजी ने हमें आशीर्वाद दिया था और कहा था सब ठीक होगा वो सब सम्हाल लेंगे ।
महीनो पं हले श्री कालभैरव दर्शन के समय भगवान कालभैरव ने मुझे आशीर्वाद दिया और कहा था, "तुम दिव्य सं तान को जन्म दोगी , कालभैरव शिव तुम्हारे गर्भ से जन्म लेंगे।"
कितना उत्तम आशीर्वाद! हमारी सं तान अजय जन्म के बाद उष्मा नियांत्रक मशीन (इनक्यूबेटर) में रखा गया, तथा नसों द्वारा दवाई चढ़ाई गई, रह सके , जिससे ह्रदय कक्षों के बीच का क्षों छेद खुला रह सके । पिता जगप्रीत अजय के साथ थे और मंद स्वर में गुरु मं त्र उसको सुना रहे थे। ह्रदय निसं कु चन के सुधार के लिए शल्य चिकित्सा की गयी और वह सफल रही । चिकित्सक आश्चर्यमें थे, ह्रदय पूर्व जाँच के निरूपण द्वारा प्राप्त निष्कर्ष की अपेक्षा बहुत अच्छा लग रहा था।
अगले परिक्षण में जिस चिकित्सक ने कहा था की वाम पक्ष कभी दक्षिण पक्ष के बराबर वद्धिृ प्राप्त नही करेगा, एक अ ं द्भुत सद्भु माचार लेकर आया कि न केवल वह हर स्तर पर आश्चर्यजनक रूप से स्वस्थ हो रहा था, अपितु वाम पक्ष अब दक्षिण पक्ष के बराबर आकार में आ गया था।
ईश्वर और प्रिय गुरु की कृ पा से हमने यह चमत्कार अनुभव किया ।अब हम एक अद्भुत रूप से सुन्दर, द्भु शांत एवं सक्रिय बच्चे के चमत्कार के साक्षी हैं । यदि हमें जीवन में विश्वास ने होता, "एन गर्भ धारण सं रक्षण " का सहयोग प्राप्त न होता, और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी की कृ पा न होती, तो परिणाम कु छ और ही होता।
- सैम, जगप्रीति
- (अजय शिव के माता पिता), सिडनी ऑस्रेलट्िया
गुरु के आशीर्वाद से चमत्कारी ह्रदय वाला शिशु
- ® एन प्रेग्नेन्सी SM कार्यक्रम द्वारा सं चालित कु ल ४९ सचेत प्रसूतियों में से २१ प्रतिभागियो ने प ं हले प्रयत्न में शिशु जन्म दिया, जिसे 'प्रिमि' कहते है।
- ® एक असामान्य महत्वपूर्ण खोज प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण से सम्बंधित है जो ली प्रसूति पीड़ा और शिशु जन्म का महत्वपूर्ण अंग है।
- ® प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण की माध्यमिक अवधि 38.62 मिनट थी जिसका अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानदंड 50 मिनट से 2 घं टे तक का है।
- ® वस्तुतः प्रसूति पीड़ा के द्वितीय चरण की अवधि में अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम मानदंड की अपेक्षा 24 प्रतिशत कम था।
यह सांख्यकीय रूप से बहुत महत्वपूर्णहै और सिद्ध करता है कि एन प्रेग्नेन्सी SM (एन गर्भ धारण) की प्रक्रिया, सं तान के हित के अतिरिक्त माँ के लिए और माता -पिता के सम्बन्धों के ल म्बन्धों िए अद्भुत लाभ दयाक है।
एन प्रेग्नेन्सीSm पर वैज्ञानिक परीक्षण
Research findings based on information polled from program participants.Findings are subjective in nature.
भावी योजनायें…
t पृथ्वी पर प्रत्येक गर्भवती महिला तक कार्यक्रम को पहुंचाना।
t एन प्रेग्नेन्सी SM देखभाल एवं एन अभिभावकीय मार्गदर्शन हेतु एक सर्व सुविधायुक्त चिकित्सालय की स्थापना।
t सरकारी अस्पतालोंमें कार्यक्रमो का का ं र्यान्वयन करना।
t कार्यक्रम को वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिये वैज्ञानिको के सा ं थ मिलकर कार्य करना जिससे कि चिकित्सा, वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक समुदाय में स्वीकार्य हो।
अपने बच्चे को आत्मज्ञानी बनाना चाहती थी। मैं चाहती थी की वह स्वयं को अभिव्यक्त कर सके , वह स्वयं प्रकाशित हो और हमारी असं गतियो भय ए ं वं अपूर्णताओ के प्रभा ं व के बिना सारे कार्य कर सके 'एन प्रेग्नेन्सी कै यर' पाठ्यक्रम एक यात्रा जैसा है जो आप कौन है इस बात की पुष्टि करता है । आपको अपने कार्यो के लिए उत्तरदायी बनाने में, सच्चाई और प्रमाणिकता से कार्य करने में सहायता करता है और गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही अपने बच्चे को यह शिक्षा देने योग्य बनाता है।
"एन गर्भ धारण सं रक्षण" पाठ्यक्रम अपने आप में सम्पूर्णहै। आपको अपना ह्रदय खोलने की आवश्यकता है और आप देखेंगे किस प्रकार छोटे बच्चे गर्भ के अंदर से ही प्रतिक्रिया देते हैं। अब 11 महीने बीत चुके हैं और मेरे बेटी 2 महीने की है । वह सुंदर परी समान है, चतुर एवं सतर्क ।वह नेत्रों से बोलती त्रों है और इतना प्यार और आनंद प्रसारित करती है कि उसके साथ रहना पूर्णप्रेम की अवस्था में रहना है । मैं प्रत्क ग ये र्भवती महिला को प्रोत्साहित करती हूँ कि यह अनमोल जीवन उपहार अपनी सं तान को अवश्य दें।
प्रेमपूर्ण और जीवन मुक्त नई पीढ़ी के लये हम अपना योगदान करें।
- मैनुएला, वॉयलेटा मैयामी फ्लोरिडा यू ऐस ए
माता-पिता अपने शिशु के जन्म चमत्कारो बखान करते ं है
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की कृ पा से और एन प्रेग्नेन्सी कै यर कार्यक्रम से सम्पूर्ण गर्भावस्था व प्रसूति एक आनंदमय अनुभव था। गर्भावस्था में बहुधा होने वाली असुविधाएं सुबह उलटी, थकान, भय अनुभव नही हुए। इस का ं र्यक्रम की एक बात बहुत रोचक लगी - मेरे सोने के पहले वैदिक कहानिया सुनाकर , पिता इसमें जल्द जुड़ सके । इससे मुझे उन गहन सत्यों का त्यों मानस दर्शन करके दैवीय आत्मा को आकर्षित करने में सहायता मिली । प्रसव के समय और उसके बाद भी, महामं त्र ध्यान का सं गीत बजाया गया।
उपचारिकाओ को भी ं क्रिया की सहजता पर आश्चर्यथा। बेटी का जन्मप्राकृतिक क्रिया से, कम प्रसूति पीड़ा में हुआ। प्रसूति के दोनो चरण स ं क्रिय एवं अव्यक्त केवल 2-3 घं टे ही रहे। प्रसव के समय मैंने, न तो "ऐपीड्रल" न यू दर्द काम करने की औषधि ली। वह बहुत शांत और सं तुष्ट ह.ै प्रथम दिवस से ही उसके दोनों हाथ चिन मुद्रा में रहते हैं। उसके नेत्र तीव्र और अवलोकनीय हैं। कोई भी वस्तुजीवन में गुरु के होने के सम कक्ष नहींहै। गुरु सब कु छ सं भव कर सकते हैं
- अनुराधा राजशेखरन, रमन विश्वनाथन के साथ सन प्रेयरी विस्कॉन्सिन
यह छोटा बच्चा अधिकतर शांत रहता है। ये सदैव मुस्कुराता रहता है और सबको को अच्छी मनोदशा में रखता है। यह सारा दिन प्रसन्न रहता है इस तरह से खेलते हुए और बात-चीत करते हुए । हमने देखा है कि यह ध्यान से सुनता और समझता है, सम्भवतः अपनीआयु के अनुसारअधिक ही समझता है । एन प्रेग्नेन्सी कै यर ने हमको सम्बन्धों और सं तान पालन का सकारात्मक पक्ष म्बन्धों दिखलाया । इसने हमें अधिक उत्तरदायी दम्पति और माता-पिता बनाया। स्वामी जी को धन्यवाद, इस अद्भुत का द्भु र्यक्रम के द्वारा हमें आशीर्वाद देने के लिए ।
- नंदिनी विश्वनाथ, श्रीनाथ अवधनाम, बैंगलोर भारत
महत्तम मानवीय क्षमताओं का जागरण
वैदिक Bharat की धर्म भूमि पर अगणित सर्वोत्तम योगदान दिया है।
शक्तिशाली पवित्र एवं क्षमाशील हृदययुक्त मानवता को समृद्ध करने की महान इच्छाशक्ति वाले के सरिया वस्त्रधारी सं त अवतरित हुये हैं। इन सं न्यासियो ने विश्व को अपना ं घर माना और द्वार-द्वार घूमकर लोगो पर कृ पादृ ं ष्टि डालकर, उनका उपचार करके सत्य के प्रति जागृत किया। सम्पूर्ण Bharat सं न्यासियो द्ं वारा निर्मित किया गया। चाहे शिल्प हो, कला हो, विज्ञान हो, सं स्कृति अथवा भाषा हो, सन्यासियो ने ं वैदिक परम्परा में अपना
- ® THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की Bharat के लिये वैदिक हिं दू पुनर्जागरण हेतु जो दिव्यदृष्टि है, उसमें सं न्यास परम्परा का पुनरोत्थान समावेशित है। वह आज के युवाओ को पू ं र्णत्व के परम पथ पर आनन्दमय त्याग का जीवन जीने को प्रेरित कर रहें हैं।
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान् निबोधत । क्षुरक्षुस्य धारा निशिता दरुत्यया दर्गमु पथस् तत् कवयो वदन्ति ॥
उठो ! स्वयं जागो और अन्य को जागृत करो। महान जागृत प्रबुद्ध जीवो के सानिध्य मे जाओ तब तक ं कि तुम स्वयं जाग्रत न हो जाओ और अपनी पूर्णत्वता को प्रकट न कर लो। छुरी की धार जैसा तीक्ष्ण रास्ता है (अद्वैत जीवन का), एसा कवि ज्ञानियो ने घोषित किया है - मार्गदीर्घ एवं दर्ु गंहै और इसे पार करना कठिन है।
~ कठोपनिषद १.३.१४
पृथ्वी पर संन्यसियो का योग ं दान
"आपको अपनी सर्वोच्च सम्भावनाओ के स्तर पर ं जागृत करना ही सं न्यास है। आदि शं कर के बाद कभी भी हिदं ू परम्परा में सं न्यासी होने हेतु खुला और सार्वजनिक आमं त्रण नही दिया गया। विगत 2500 ं वर्षों में पहली बार अब मैं व्यवस्थित रूप से सन्यास के समस्त पक्षों एक्षों वं आयामो का ं प्रसार करने जा रहा हूं। मै आप सबके लिये सं न्यास के प्रवेशद्वार खोल रहा हूं।
हमें कम से कम दस लाख सं न्यासियो की आ ं वश्यकता है, जो विश्व के कोने-कोने में जाकर लोगो को ं वैदिक हिदं ू जीवनशैली जीने के लिये प्रेरित करेंगे।''
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
- ® 300 शिष्यों ने, ्यों जो विभिन्न राष्ट्रों , ष्ट्रों वर्णों एवं व्यवसायो से ं जुड़ेहैं, नित्यानंद सं न्यास प्रशिक्षण सं स्थान के माध्यम से प्रत्यक्ष THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM से सं न्यास की दीक्षा ग्रहण की है।
- ® नित्यानंद परम्परा के सं न्यासी आदि शं कराचार्य द्वारा सृजित 'पुरी सं न्यास परम्परा' से जुड़े हुये हैं। वे 'महानिर्वाणी पीठ' परम्परा का भी एक अंग हैं।
उपलब्धियां
अटल अखाड़ा, आचार्यमहामंडलेश्वर श्री सुखदेवानंद जी
In my pre-sannyas life I have been an Electronics, Research and Design Engineer working at Intel Corporation in U.S.A and in Bharat.I am a Sannyasi because Sannyas is a declaration of true freedom transcending the boundaries of race, nationality, colour, culture, religion and all kinds of barriers that has been created by man. Sannyas is the power to enrich every being with the highest responsibility and enables me to make a beautiful difference to the whole world.
- Ma Nithya Achalananda Swami
लाभांवित करने का एक अनूठा तरीका
वैदिक सं प्रदाय में सन्यासी घर-घर जाकर लोगो से सं प ं र्क बनाते हैं और उन्हें आशीर्वाद देते हैं| दीक्षा के लिए जाना कोई साधारण घटना या भीख मांगना नहींहै | यह एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुष्ठान है जिसमें आध्यात्मिक चिकित्सा, पवित्र विभूति का वितरण, ध्यान पर पुस्तिकाएं और आध्यात्मिक समाधान लोगो के सा ं थ बांटे जाते हैं।
यह परंपरा स्वयं महादेव के समय से चली आ रही है जब महादेव भिक्षाटन के रूप में भिक्षा मांगने के लिए जाया करते थे और मनुष्यों को पर ्यों म ज्ञान प्रदान कर उनके कर्म से मुक्ति दिलाया करते थे |
सं युक्त राज्य अमेरिका में सरकारी अधिकारियो के सा ं थ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM सं प्रदाय के सन्यासी
दीक्षित गृहस्थ
परमहंस नित्यानंद जी साधको को ऋ ं षि परंपरा में भी दीक्षित करते हैं। ये ऐसे साधक हैं जो पारिवारिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हुए आत्मज्ञान की प्राप्ति के मार्ग का अनुसरण करते हैं, पति एवं पत्नी आध्यात्मिक पथ पर एक दूसरे का समर्थन करते हुए, अपने बच्चों को च्चों आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करते हैं।
किसी भी विवाहित युगल के लिए एक प्रबुद्ध गुरु के साथ निवास करना सर्वोत्तम सं योग है। हमें जो स्पष्टता प्राप्त होती है वो हमें जीवन को समग्रता में समझते हुए, अपूर्णताओ से पी ं ड़ित हुए बिना सरलता से अग्रसर होने में सहायता प्रदान करती है। असहमतियो की पुनरा ं वृत्ति काफी कम हो गई है, हम पर उनके प्रभाव की तीव्रता भी काफी कम हो गई है और हम शीघ्रता से सं भल जाते हैं। ऐसा स्वामीजी द्वारा वैदिक जीवन शैली से हमारे साथ साझा की गई अद्भुत तकनीको एं वं समाधानो के कारण ं है। स्वामीजी के मार्गदर्शन में हमारे दोनो बं च्चे, तत्त्व एवं परमेश, अदभुत युवाओ के रूप ं में खिल रहे हैं, बिना उस तनाव के जिसके साथ आम तौर पर उच्च प्रदर्शन वाले व्यक्ति रहते हैं।
- श्री ऋषि नित्य अद्वैतानंद, नित्यानंद ऋषि परंपरा प्रशासनिक प्रमुख, नित्यानंद विद्यापीठ
शिक्षा के माध्यम से जीवन को आभूषित करने की जीवन शैली से पहले, ऋषि अद्वैत फार्च्यून २०० कम्पनी में कार्यरत एक निपुण आईटी व्यवसायी थे।
ऋषि विश्व को आभूषित करने का उच्चतम उत्तरदायित्व लेते हैं। वे ध्यान एवं योग कार्यक्रमो के सञ् ं चालन द्वारा मानवता को चरम जीवन जीने की ओर अग्रसर करते हैं। वे टेलीविज़न कार्यक्रमो के सञ् ं चालन एवं ऑनलाइन साधनो के उपयोग से पर ं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के द्वारा व्यक्त किये गए पवित्र सत्यों की ओर विश्व का त्यों मार्गदर्शन करते हैं।
सं सार के आरोग्य हेतु
अध्यात्मिक उपचार में दक्ष सं न्यासी विश्वभर में पीड़ितो को अध् ं यात्मिक आरोग्य प्रदान करते हैं
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी डॉ.श्री प्राणनंदा स्वामी को चिकित्सा मे दीक्षा देकर अपने सकिर्य छड़ी दिया और आशीवाद देते हुए कहा "यह एक वैडयशवरा (एक महान आरोग्यकार) हो जाएगा। जो व्यक्ति कोई भी बीमारी की चिकित्सा के लिए आए,इस सक्रिया छड़ी से स्पर्श करते ही वे टीक हो जाएँगे"I तब से वे ईमेल और फोन के माध्यम से, दूर से भी, चिकित्सा देने लगे| श्री प्राणनंदा स्वामी कहते हैं "मुझे बेजे गये चित्र लेकर, अपने आप को आनंद गन्ध स्थिति मे लाकर, चित्र पर चिकित्सा छड़ी से स्पर्श करते चिकित्सा देता हूँ| लोग तत्काल उपचार यानी २ से ३ मिनट के भीतर रिपोर्ट कर रहे हैं। में सिर्फ़ उनसे स्वामीजं ी को प्रार्थना करने को कहता हूँ और वे कहते हैं की वे तुंरांत अपने शरीर के मध्यम से उर्जा अनुभूति करते है"|
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी श्री ज्ञाणस्वरूपनंदा स्वामी को आशीर्वाद देकर, स्वामीजी की स्वर्ण
भाला दिया और कहा, ' जो कोई भी तुम स्पर्श करोगे वे ठीक हो जाएँगे| आप उस व्यक्ति का चित्र स्पर्श कर सकते हैं या फोन के द्वारा या आप दूरी से चिकित्सा दे सकते हैं । श्री ज्ञाणस्वरूपनंदा स्वामी कहते हैं "जिस क्ष्ण मैं भाला से कोई भी व्यक्ति को स्पर्श करता हूँ, और स्वामीजं ी के चहेरा मेरे मन में लाता हूँ, और शरीर में उर्जा प्रवाह अनुभूति कर सकता हूँ तब मुझे पता है कि व्यक्ति ठीक हो गये| मैंने स्वामीजी से यह दीक्षा प्राप्त करके बहुत भाग्यशाली मानता हूँ और मैं अब किसी को भी, जो भी तरह की उपचार की जरूरत है, मैं उनके लिए के लिए उपलब्ध है।
व्यक्तिगत रूप में, फ़ेसबुक पर या फ़ोन चैट आदि के माध्यम से उपचार कर रहे हैं। वे कहते हैं, जिस क्षण इस त्रिशूल के साथ किसी को स्पर्श करती हूँ और अंतर में शिओहां कि अनुभूति करती हूँ, बस स्वामीजी और त्रिशूल के माध्यम से बहता ऊर्जा से अन्य व्यक्ति उपचार अनुभूति करते हैं|
माँ नित्या प्रेमतमानंदा स्वामी एक विशेषज्ञ और दूरी आरोग्यकार के रूप में परम पावन श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी द्वारा दीक्षा दिए गये हैं । वे कहती हैं, "स्वामीजी एक चिकित्सा विशेषज्ञ और एक लं बी दूरी आरोग्यकार का दीक्षा देकर, किसी को भी, दोनो, ं व्यक्ति में या यहां तक कि उनकी चित्र के साथ एक सक्रिय चिकित्सा भाला का उपयोग से लोगो के ं स्वासत ठीक करने के लिए मुझे आशीर्वाद दिया। यह स्वामीजी से एक असाधारण उपहार है और मैं अपने आप को धन्य मानति हूँ और दनिु या के साथ साझा करती हूँ"I
tव्यक्गित, तीव्र विकास और उच्च उपलब्धि प्राप्त करके वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षा वाले सभी पृष्ठभमिू के युवाओ ंके लिये सं न्यास को एक लाभप्रद विकल्प के रूप में बनाना।
t10 लाख सं न्यासियो ं को दीक्षित करना, जो जीवन मुक्ति मे निर्वाह करे एवं अन्य लोगो ं में सं चारित कर सकें
tभारत में सं न्यास प्रशिक्षण केंद्रों की स् द्रों थापना द्वारा उचित वैदिक अध्ययन एवं जीवनशैली की शिक्षा प्रदान करना।
भावी योजनायें……
डॉ माँ आतमप्रियनंदा स्वामी एक आध्यात्मिक आरोग्यकार और सं न्यास शिष्य परमहंस नित्यानंदा की है। वह यात्रा करते आ रहे है और प्रति दिन तमिलनाडु के विभिन्न भागों में सैकड़ों हीलिं ग कॉल्स में भाग लेते और एक विशेषज्ञ दूरी आरोग्यकार भी है। लोग उपचार के लिए सिर्फ एक ही टेलीफोन अनुरोध में स्वस्त ठीक होने का अनुभूति करते हैं। स्वामीजी ने दीक्षा देकर उन्हे एक चिकित्सा छड़ी दिया और आशीर्वाद दिया की वे जो भी व्यक्ति को उपचार करते हैं, उनके स्वास्थ ठीक कर सकते हैंI
डॉ माँ आतमप्रियनंदा अपने चेतना में 'आनंद 'गन्ध (ब्रह्मांडीय ऊर्जा केंद्र जागृत द्वारा अवतार) लाते है और स्वामीजी को स्मरण करते हुए व्यक्ति को छड़ी के साथ स्पर्श करते चिकित्सा देते हैं I जब फोन पर चिकित्सा देते है, व्यक्ति की छवि लाते है और अगर चित्र प्रस्तुत करते हैं तो वह चित्रा को छड़ी से स्पर्श करते हुए चमत्कारी रूप से पीड़ित को राहत मिलने दी रिपोर्ट और लंबी बीमारियो को ं दीनो मे ही ठीक करते हैं I
माँनित्या ज्योतिकनंदा स्वामी, स्वामीजी परमहंस नित्यानंद से आशीर्वाद प्राप्ती के पश्चात, एक आध्यात्मिक आरोग्यकार के रूप में काम शुरू किया I स्वामीजी से आशीर्वाद लेते हुए समय को याद करते हुए, उनके कहे गया शब्दों को शब्दों दोहरातें हैं "जो भी व्यक्ति इस छड़ी से स्पर्शकिया जाता हैं, वे कोई भी रोग से मुक्ति पा सकते हैं", और फिर धीरे से चिकित्सा छड़ी व्यक्ति या व्यक्ति की छवि पर रखते है। चमत्कारिक ढंग से कई तुरन्त दर्द से बाहर निकलना और यहां तक कि
उन गंभीर चिकित्सा शर्तों के साथ एक चमत्कारी इलाज के कई नियमित रूप से मेडिकल सिस्टम के द्वारा दिए गए कु छ ही घं टो के भीतर अनुभ ं व करते हैं I 'उपचार तुरन्त, होता है स्वामीजी के आशीर्वाद के साथ' माँज्योतिकनंदा स्वामी कहते हैं। घुटने के दर्द से आपातकालीन चिकित्सा शर्तों के लिए, लोगो की ं मांग की है और चमत्कारी वसूली का अनुभव किया।
परिकल्पना है कि जो लोग वैदिक सत्य को जीने के इच्छुक है, उन्हेप्रेरणा देना, शिक्षा व शक्ति प्रदान करना जिससे कि वे वेद माता की रक्षा कर सके । इन निम्नलिखित प्रकारो से विश्वभर मे वैदिक धर्म क प्रचार-प्रसार होगा:
- ® नवआकाक्षिं यो ंको हिदं त्वु से परिचत कराना समरस, स्वस्थ एवं सुखमय जीवन जीने के लिये ।
- ® पहले से अभ्यास करने वालो ंको अभ्यास में अधिक प्रमाणिक होने के लिये प्रेरित करना।
- ® अनुष्ठानो,ं प्रभावशाली प्रवचनो ं एवं तकनीको ं के माध्यम से वैदिक जीवन पद्धति के प्रचार-प्रसार के लिये पुजारियो ं एवं आचार्यों को प्रशिक्षित करना।
- ® प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों एत्वों वं अध्यात्मिक नेताओ ं को सनातन हिं दू धर्मजीने के लिये शिक्षित और शक्तिसम्पन्न बनाकर वैश्विक विश्वविद्यालयो ं एवं शिक्षण सं स्थानो ं में हिं दू पीठ पर स्थापित करना।
इस प्रकार, प्रबुद्ध वैदिक सभ्यता को पुनर्स्थापि त किया जायेगा और इसे मौलिक अवतारो ंतथा ऋषियो ंकी परिकल्पना के अनुरूप एक नवीन एवं उच्चतर चेतनायुक्त सम्भावना पर ले जाया जायेगा।
शक्तिशाली मनुष्य का न ों िर्माण धर्मेव हतो हंता धर्मो रक्षति रक्षितः।
तस्माद्धर्मो न हंतभ्यो मा नो धर्मो हतोवधित।। जो लोग धर्म, दैवी नियम को नष्ट करने का प्रयास करते हैं, वे इसके द्वारा नष्ट करदिये जाते हैं। धर्म उन लोगो की र ं क्षा एवं पालन-पोषण करता है जो लोग धर्म के रक्षक हैं। इसलिये, कभी धर्म को नष्ट करने का प्रयास मत करो। ~ मनुस्मृति , ८.१५
भारत की विशिष्ट पहचान है, समस्त सं सार की मानवता को, सनातन हिं दू धर्म के माध्यम से, जीवन मुक्ति विज्ञान का उपहार देना। सनातन हिदं ू धर्म के प्रतिनिधि एवं अवतार के रूप में परमह ंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM हिं दु त्व को समस्त आयामो ं में सबसे अधिक रहने लायक, मानवतापूर्ण एवं विकृ ति-अभेद्य बना रहे हैं।
मानवता तो धार्मिक जीवन जीनेकेलिए प्रेरित करना
विश्व हिदं ू परिषद के पूर्व अध्यक्ष श्री अशोक सिघं ल जी के साथ
वैदिक धर्म के प्रसार करते हुए आध्यात्मिक और लोक अधिनायकों के साथ
श्री नरेंद्र मोदी जी , प्रधानमंत्री, भारत (गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री) के साथ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
विभिन्न आध्यात्मिक नेताओ, रा ं जनीतिक नेताओ और गण ं मान्य व्यक्ति मानवता के लिए एक शक्तिशाली सचेत भविष्य की दिशा के साथ
डॉ ए. पी. अब्ल कला
दु म, भारत के पूर्व राष्ट्रपति के साथ एच एच श्री पद्मनाभ दासा वांची पाला महाराजा मार्तंड वर्मा के साथ
(ऊपर दाईं ओर): महामंडलेश्वर श्री १००८ विश्वेशवारानंद जी महाराज, हरिद्वार के साथ
श्री प्रमुख स्वामी महाराज, स्वामीनारायण आश्रम के प्रमुख के साथ कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख, श्री जयेंद्र सरस्वती स्वामीगल के
मुख्य पुजारी काशी विश्वनाथ डॉ. श्रीकांत विश्वनाथ जी, काशी की राजकुमारी की ज्येष्ठ पुत्री, मा कृष्णा प्रिया, और राजा काशी के दामाद, स्वामी गोविं द आनंदा गिरि और स्वामी दयानंद शास्त्री (बाएं से दाएं ) मं दिर - गोविं दा मठ वाराणसी, भारत
श्री १००८ महामंडलेश्वर दाति महाराज जी, निरवाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी श्री अर्जुन पुरीजी जुना आखाडा, हरिद्वार के
श्री शुकदेवानंद जी महाराज, महा आचार्य, अटल आखाडा के साथ
मुख्य पुजारी के साथ काशी विश्वनाथ मं दिर - डा.श्री कांत विश्वनाथ जी
अन्नपूर्णामं दिर से महंत श्री श्री रामेश्वर पुरीजी महाराज और वाराणसी से आचार्य पंडित श्री रामनारायण द्विवेदी के साथ
मलाई कोडी वेल्लोर में श्री नारायणी लूर पीठम् के श्री
बाएँ: डॉ माइकल बर्नार्ड बेकविथ, अमेरिकी नई सोचा मंत्री, के साथ, ९००० से अधिक सदस्यों के साथ अपेज इंटरनेशनल आध्यात्मिक केंद्र सं युक्त राज्य अमेरिका के सं स्थापक
महानिरवाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर के साथ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM - श्री स्वामी महेश्वरानंदापुरी, हरिद्वार और नित्यानंद सम्प्रदाय के सन्यासी
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, श्री शुकदेवानंदजी महाराज, अटल अखाड़े के महा आचार्य के साथ
हिं दू धर्म के रिश्तों को ्तों मज़बूत करते हुए
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM विभिन्न आध्यात्मिक नेताओ, साधू सं त, ं हिं दू एवं सामाजिक सं गठन के प्रमुखो के साथ काम करने, साझा करने और गहराई से हिं दू धर्म को मजबूत बनाने एवं वैदिक परंपरा एकीकृ त दृष्टिकोण से लेने के लिए और मानवता को समृद्ध में उनके योगदान का सम्मान करते है
दीक्षा: धार्मिक बौद्धिक क्षत्रिय अकादमी
"बौद्धिक क्षत्रिय" धार्मिक प्रणाली का उपयोग करके समाज का नेतृत्व करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। वे विभिन्न व्यवसायोंमें सेवारत हो सकते हैं: राजनीति, सरकार, कानून, उद्योग, शिक्षा, जन सं पर्क माध्यम, सेना, इत्यादि।
दर्भा ु ग्य से, सदियो से इ ं स्लामी और ब्रिटिश शासन के अधीन रहने के कारण, हम अपनी सोचने की शक्ति और अपने नेतृत्व के गुणो को खो बैठे। धीरे-धीरे ं हमें ये भ्रम हो गया कि दूसरो का अनुसरण करने से ं हम श्रेष्ठ बनेंगे। हिन्दू धार्मिक तंत्र जो कि अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र, नीति-शास्त्र और अन्य सं बंधित शास्त्रों पर स्त्रों आधारित थे, उनकी मान्यता समाज में कम होती गयी। अंततः, हम में से बहुतों ने पाश्चात्य विचारधारा के दृष्टिकोण को ही अपना लिया, जिसके अनुसार वैदिक परम्पराएं तो एक दम पिछड़ी और उत्पीड़क हैं।
वैदिक ज्ञान सिखाने के कई प्रयास हुए हैं, परन्तु आज के कु रुक्षेत्र में जहाँ सभ्यताओं के बीच प्रतिस्पर्धा चल रही है, वहां केवल इतना करना पर्याप्त नहींहै। हमें हिन्दू नेताओ को स ं िखाना होगा कि विभिन्न परिस्थितियोंमें कै से दूसरी सभ्यताओ के ं साथ व्यवहार करना है, और इसके लिए इन सभ्यताओ को स ं मझना आवश्यक है। हमारी पारम्परिक पूर्व-पक्ष करने की पद्धति दसरे पक्ष को स ु मझने का एक उत्तम तरीका है। पूर्व-पक्ष करने के पश्चात, उत्तर-पक्ष (हमें कै से प्रतिक्रिया करनी है) अपने आप समझ में आ जाता है। आज कल की भाषा में कहें तो, इस पद्धति में हम अपनी दृष्टि को पलट देते हैं, जिससे कि हम दूसरे पक्ष को अपने ढांचे के अनुसार समझ पाएं ।
इस समय हम दोहरा संकट झेल रहे हैं। एक तरफ हम हिन्दू फोबीया (हिंदुओं के प्रति भय और द्वेष) से जूझ रहे हैं, जो कि हम पर लगातार घृणित वार करती रहती है। दूसरी तरफ हमारी संपत्ति को, हमारी संस्कृति को अन्य धर्म अपना बता कर हड़प रहे हैं - उदाहरणतः "ईसाई योग" आंदोलन में योग को ईसाई धर्म से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि हमें प्रमुख अवैदिक धर्मों का पूर्व-पक्ष ज्ञात है, तो हम अपनी भिन्नता और अपनी विशेषताओ को विश्व मंच पर स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं, विपक्ष के साथ कई विषयो पर तर्क-वितर्क कर सकते हैं, और वैदिक ज्ञान के द्वारा मानवता के समक्ष प्रस्तुत आधुनिक चुनौतियों को सुलझा सकते हैं।
"दीक्षा" की प्रशिक्षण अकादमी, शिक्षको को अन्य विद्यापीठो और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए भेजेगी, जहां के छात्र विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी बन रहे हैं । उदाहरण के लिए, हम "दीक्षा" पाठ्यक्रम को ऐसे संस्थानों में पढ़ा सकते हैं, जैसे कि एक प्रबंधन महाविद्यालय में, या हिन्दू विदेश सेवा के नव चयनित अधिकारियो को, अथवा संचार से सम्भंधित विश्वविद्यालयों में जहां नए पत्रकार बन रहे हैं। दूसरे शब्दों में हम अपने शिक्षको और पाठ्यक्रम को इन संस्थानों को भेंट स्वरुप देंगे, इस आशा के साथ कि वह इसे अपने शिक्षण में सम्मिलित कर लेंगे।
नित्यानंद ध्यानपीठम में हिन्दू इंटरनेट थिक टैंक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जे ने पूरे भारत से १०० से अधिक व्यक्तियो को हिन्दू धर्म की रक्षा करने और इसके पवित्र सिद्धांतो को इंटरनेट के माध्यम से बढ़ावा देने में उनके सक्रिय योगदान के लिए 'हिन्दू क्षत्रिय पुरस्कार" से सम्मानित किया। केवल आध्यात्मिक शक्ति के आधार पर एक शक्तिशाली और प्रगतिशील भारतवर्ष का निर्माण किया जा सकता है, जो कि अपनी आध्यात्मिकता की पूँजी को पूरे संसार के साथ बाँट सकता है।
परमपूज्य श्री डा.शांतावीरा महास्वामी जी, श्री कोलाडा मठ महासंस्थान एवं अन्य महाजनो के साथ
With पेरः महा वेमाल्धाम्मा : संघ, थेरवाद बौद्ध धर्म, कं बोडिया
परमपूज्य श्री डा.शांतावीरा महास्वामी जी, श्री कोलाडा मठ महासंस्थान एवं अन्य महाजनो के साथ
कम्बोडिया के गणमान्य अतिथि : हिज एक्सेलेंसी खिम भोसोन , सीए रीप के और गवर्नर के सलाहकार , नू फल्ला के
साथ
कुंभ मेला 2015 में कई हिन्दू आध्यात्मिक संस्थाओ के अधिनायको के साथ सनातन हिन्दू धर्म की महिमा का प्रसार करते हुए
नासिक कुंभ मेले सन 2015 में महामंडलेश्वर श्री 1008 विश्वेश्वर आनंद जी महाराज के साथ
मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिहं चौहान द्वारा कुंभ मेला उज्जैन के लिए आमंत्रण ग्रहण करते हुए
कुंभ मेला 2015 में कई हिन्दू आध्यात्मिक संस्थाओ के अधिनायको के साथ
(बाएं से दाएं ) कुंभ मेला 2013 में विश्व गुरु महामंडलेश्वर परमहंस स्वामी महेश्वरानंद जी, आचार्य महामंडलेश्वर श्री विश्वदेवानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री आत्मानंद जी महाराज
कुंभ मेला 2015 में कई हिन्दू आध्यात्मिक संस्थाओ के अधिनायको के साथ भंडारे का आयोजन करते हुए
कंभ मेला: धर्म के संरक्षकों का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संगम
कुंभ मेला हजारों वर्षों से प्रथ्वी पर समर्पित विश्वास के साथ करोड़ो आध्यात्मिक प्राणियो का सबसे बड़ा जमावड़ा है । इस दिव्य संगम में सनातन हिन्दू धर्म के सिद्धांतो से पूरी मानवता की उच्चतम चेतना का विकास होता है |
परमपूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामंडलेश्वर होने के नाते वैदिक सनातन धर्म की उच्चतम जिम्मेदारी उठा रहे हैं एवम उसे पतन से बचाते हुए नई ऊं चाइयो तक ले जा रहे हैं |
नासिक, महाराष्ट्र में आयोजित सितंबर 2015 के कुंभ मेले में श्री जयकांत शिखरे, त्र्यंबकेश्वर मंदिर के टस््र टी द्वारा सम्मानित किए जाते हुए
गत वर्ष सितंबर 2015 में नासिक महाराष्ट्र में आयोजित कंभ मेले में हिंदुत्व के विभिन्न आयामों का अनुभव हुआ| कई समारोह एवं आध्यात्मिक अभिभाषण का आयोजन नित्यानंद ध्यानपीठ के शिविर में हुआ जहां पर विभिन्न अखाड़ों के संत शिरोमणियों ने हिंदुत्व के अलग-अलग आयामों का प्रतिनिधित्व किया |
श्री स्वामी नारेंद्रगिरी जी द्वारा THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी को प्रेषित पत्र
कामिक अगमा में भगवान शिव ने शिव दीक्षा या समय दीक्षा को आध्यात्मिक जीवन की तरफ पहला कदम बताया है। यह दीक्षा उन सभी साधको को दी जाती है जो भगवान शिव की सेवा में लीन हैं, जो भगवान शिव के भक्त हैं और जो हिन्दू धर्म को अपनी जीवन शैली बनाना चाहते हैं।
~ परमपूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
समय दीक्षा - स्वयं भगवान शिव द्वारा दी गई दीक्षा
"आगम" स्वयं भगवान शिव द्वारा कहे गए शब्द हैं जो मानवता को एक सशक्त, आनंदमय जीवन जीने, शिवोहम भाव में रहने तथा हिंदुत्व जीवन शैली का अभ्यास करने की ओर प्रेरित करते हैं।
कामिका आगम में भगवान शिव ने सदाशिव स्वरूप जीवंत गुरु द्वारा दी जाने वाली शिव दीक्षा के विषय में विस्तारपूर्वक वर्णन किया है। विशिष्ट दीक्षाओ के माध्यम से भगवान शिव ने मानवता को जाति, लिंग एवं जीवन शैली के परे एक प्रतिबद्ध जीवन जीने की दिशा दी है जिससे मानव अपनी चेतना को जागृत कर सकता है।
~ समय दीक्षा ऐसी प्रथम दीक्षा है जो हमें मंदिर पर आधारित हिन्दू जीवन शैली से लाभान्वित करती है।
~ विशेष दीक्षा, अगली विशिष्ट दीक्षा है जो भगवान शिव की गहन कृपा बरसाती है। दीक्षा में गुरु, दीक्षित साधको को जीवनमुक्ति की जीवनशैली की ओर प्रेरित करते हैं।
माननीय श्री 108 महंत स्वामी नरेंद्रगिरि जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद
(13 अखाड़ों के अध्यक्ष)
"संयम का अर्थ है अपने ममकार को परिवर्तित करना| अपने अहम को शिवोहम् में रूपांतरित करना| मनुष्य को परिवर्तित करने के विज्ञान को ही संयम कहते हैं|"
~ परमपूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने हजारो साधको को शिव दीक्षा से दीक्षित किया है जिससे वह हिंदुत्व के वैदिक पथ पर अग्रसर हो सकें ।
स्वामी जी के आशीर्वाद से लाखो लोग लाभान्वित होगे एवं स्वयं तथा पृथ्वी की चेतना को जागृत करने में सक्षम होगे। सत्यनिष्ठ, शिवत्व और हिंदुत्व की जीवनशैली जीने हेतु यह विशाल स्तर की दीक्षाए साधको के लिए एक अनूठी भेंट है। यह दीक्षा अनुष्ठान एक दिव्य घटना है जहां पर परम पूज्य स्वामीजी सदाशिव के भाव में रहकर स्वयं प्रत्येक व्यक्ति को अग्नि के समक्ष मंत्रों के उच्चारण द्वारा दीक्षित करते हैं।
वैदिक परंपरा के अनुसार सभी प्रतिभागियो को पवित्र वैदिक वस्तु जैसे भस्म या विभूति की थैली, रुद्राक्ष इत्यादि उपलब्ध कराए जाते हैं जो स्वयं सदाशिव की ऊर्जा हैं ।
हिन्दू धर्म के वैदिक पंथ को जीने हेतु विशाल स्तर पर दीक्षा
1000रों श्रद्धालु भगवान शिव द्वारा बताई गई समय दीक्षा में स्वयं परम पूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा बैंगलुरू आदीनम में दीक्षित किए जाते हैं
दीक्षित होने के उपरांत प्रतिभागी कंठ में रुद्राक्ष बांधते हुए एवं हिन्दू जीवन जीने की प्रतिज्ञा लेते हुए
शिव रूपी गुरु द्वारा दीक्षित होने के उपरांत आनंदमय श्रद्धालु
स न इन्द्रः शिवः सखश्ववद गो मद्ववम उरुधारेव् दोहते । विद्युत शक्ति हमारी शांतिपूर्ण मित्र रहे, हमारे यंत्रों को चलाने के लिए अश्व-शक्ति दे, घरोंमें उजाले के लिये हमें प्रकाश दे और खेतोंमें अन्न उपजानें के लिये शक्ति दे। यह विभिन्न धाराओंमें प्रवाहित होकर हमें समृद्धि दे एवं हमारा कल्याण करे। ~ अथर्ववेद (१. ७. ३ )
अत्याधुनिक वैदिक तकनीकों का पुनःआविष्कार
धातु विज्ञान (लौहतंत्र), वैदिक विमानों का निर्माण, बैटरी भंडारगृह, पनडुब्बी आदि
प्राचीन मनीषी एवं ऋषि गण सर्वाधिक अग्रणी एवं विलक्षण लोग थे। अपने प्रबुद्ध मस्तिष्कों एवं करुणामय हृदय से उन्होंने उत्तम, अत्याधुनिक वैदिक तकनीक और आविष्कारों से असामान्य जीवन सुविधाओ ं को सामान्य जीवन पद्धति के रूप में बना दिया। उदाहरण के लिये, वैदिक काल में ये सभी सामान्य जीवनचर्यामें सम्मिलित थे:
विमानों, कई तल्लों वाले उड़न यंत्रों एवं रथों में उड़ना, वायुगामी रथ, मंत्र, वायु, विद्युत एवं प्रकाश शक्ति चालित रथ। अन्य परिवहन यंत्र पनडुब्बी की तरह गहरे जल के भीतर और धरती पर अति तीव्र गति से चलाये जाते थे।
प्रकृति की शक्ति के दोहन से ऊर्जा एवं प्रकाश उत्पन्न करने के विज्ञान और अत्याधुनिक विद्युत बैटरियो ं के विकास में दक्ष।
'हमारे गुरुओ ं ने आंतरिक शक्तियो ं एवं बाह्य तकनीको ंका प्रयोग किया और मानवता के लिये प्रचुर आराम एवं सुख साधन प्राप्त किया। मैं एक प्रयोगशाला का निर्माण करना चाहता हूं, जहां हम हजारों वर्ष पूर्व अगस्त्य ऋषि द्वारा निर्मित उड़न यंत्रों एवं आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियो से बनी बैटरियों के विज्ञान को वापस लायेंगे। हम एक विशाल प्रयोगशाला का निर्माण करेंगे जहां ज्ञान का प्रयोग एवं निर्माण करके विश्व के समक्ष वैदिक तकनीक का प्रदर्शन किया जा सके गा।''
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
वैदिक शास्त्र घोषणा करते हैं कि सभी उपस्थित वस्तुओ ं के साथ ब्रह्माण्ड एकाकार में मूलबद्ध बुद्धिमत्ता, प्रचुरता एवं परमानंद के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब इन शक्तियो ं का पुर्नआविष्कार होता है तब अनंत प्राकृतिक संसाधनो ं जैसे ध्वनि, वायु, अग्नि एवं प्रकाश इत्यादि शक्तियो ंका उपयोग दैनिक जीवन में किया जाता है।
भूदेवी अर्थात धरती माता के प्राकृतिक संसाधनो ं जैसे जल, इंधन, वन, धातुओ ंऔर जीवो ंको नष्ट करके अत्यधिक क्षति पहुंचाई गयी है। वैदिक तकनीक इस समस्या का पूर्ण समाधान कर देगी। पृथ्वी, प्रकृति और जीवो ंके साथ ब्रह्माण्ड के संवेदनशील दैवी संतुलन को फिर से उसी तरह स्थापित किया जायेगा, जैसा कि यह समृद्ध, प्रबुद्ध एवं शांतिपूर्ण वैदिक युग में था।
भावी योजनायें...
वैदिक अविष्कारो ंके पुनर्शोधन के लिये अनुसंधान संस्थानों एवं प्रयोगशालाओ ं (धातु विज्ञान एवं अन्य वैदिक विज्ञान) का निर्माण किया जायेगा। इनमें प्रयोग, वैदिक साहित्य के बीज-लेखो ंका अर्थज्ञात करना, वैदिक तकनीक के परीक्षण एवं प्रदर्शन एवं इन्हें विश्व के साथ बांटना।
वैदिक तकनीक का पुनर्शोध क्यों आवश्यक है?
रहस्यात्मक यौगिक शक्तियों का निर्भेदन एवं संचारण
जीवन समस्त शक्तियो ंके साथ जीना चाहिये। असाधारण शक्तियो ंकी अनुभूति करना, जिसके साथ आप जन्मेहै, यह ईश्वर को अनुभव करना हैं। यह ईश्वर को अपने दैनिक जीवन में अनुभव करने का स्पष्ट विज्ञान है । अष्टमहासिद्धियां संभव हैं। आपके मस्तिष्क का निर्माण इन सभी उच्चतर संभावनाओ ंके साथ हुआ है। मात्र इसलिये कि साधारण मनुष्य की इन सभी असाधारण शक्तियो ं एवं विज्ञान तक पहुंच नही ं है, इसका अर्थ यह नही ंकी इनका अस्तित्व है ही नही।ं
मैं वैदिक शास्त्रों एवं विज्ञानो ं के गोपनीय ज्ञान का निर्भेदन करके उन्हेंमनुष्यो में आध्यत्मिक शक्तियो के रूप ं में अवमुक्त कर रहा हूं जिससे की वें दीक्षा द्वारा अपनी परम क्षमता को जी सकें । ''
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
यौगिक शक्तियो ं का संचारण उन्नययन, मूर्तकरण, टेलीपोर्टेशन, कंु डलिनी एवं त्रिनेत्र जागरण
अथ परम् प्रवक्क्ष्यामि शिवदीक्षा विधिक्तमम। मराणाम मोक्षसिद्धर्य सर्वपापहरम् परम।।
अब मैं महान शिवदीक्षा की प्रक्रिया का वर्णन करूंगा, जिससे नश्वर लोगो को मोक्ष एवं सिद्धियां प्राप्त होती है और जो समस्त पापो एवं अपूर्णताओ को समाप्त कर देता है। ~ पूर्व कारण आगम, १४५,।
कंुडलिनी जागरण
कंडलिनी शक्ति या आंतरिक संभव जैव-ऊर्जा का जागरण - जो मानव में स्थित सबसे विशाल अछूते प्राकृतिक संसाधन है। यह दीक्षा प्रत्यक्ष अवतार द्वारा प्रदान की जाती है।.
अनुसंधान के परिणाम प्रतिभागियो द्वारा दिये गये मत सर्वेक्षण पर आधारित हैं।
उपलब्धियां
- w 80 % लोगो ने शारीरिक उन्नययन व 15 % अन्य लोगो ने सक्रियता स्तर में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव किया। इनमें उन लोगो का भी समावेश था, जिन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दीक्षा ग्रहण की थी।
उन्नययन (लघिमा सिद्धि)
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM has proven the science of materializing objects proving the Vedic cosmology that – Universe or Nature has manifested from the power of thought-force and vizualization-energy.He has materialized objects in few minutes or hours, not only from his own body, but from the bodies of initiated channels (divyashariri) and from the living Deities.Objects have often materialized from energy, from one part of the globe to another part. Scientific studies undertaken have validated materialization linking it to Quantum Entanglement*.
पदार्थिकरण के वैज्ञानिक प्रमाण
पदार्थिकरण पर प्रयोगशाला में विस्तार से किए गए शोध और उनके निष्कर्ष
*Quantum Entanglement is a term in quantum theory for the way particles of energy-matter can become coorelated to precditably interact with each other.
श्री नरेंद्रगिरी जी महाराज, अध्यक्ष अखिल अखाड़ा परिषद और (स्वर्गीय) श्री अशोक सिंघल जी, पूर्व अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद, के समक्ष त्रिनेत्र की शक्तियो द्वारा पढ़ने का प्रदर्शन।
बेंगलुरु, भारत में स्थित निमहंस नेशनल इंस्टीट्ट यू ऑफ मेंटल हल्थे एंड न्यूरोसाइंस, एवं कई अन्य सामाजिक अधिनायको के समक्ष त्रिनेत्र की शक्तियो द्वारा पढ़ने का प्रदर्शन।
त्रिनेत्र जागरण Sm
वेद और अगम में मनुष्य के भीतर 400 शक्तियो की संभावना का वर्णन किया है. अपनी प्रबुद्ध चेतना से परम पूज्य परमहंस श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामी जी ने 60 ऐसी शक्तियो को उजागर किया है | इनमें शामिल है पदार्थिकरण, आध्यात्मिक उपचार, त्रिनेत्र जागृति, एंटी-एजिंग, पौधो से एकत्व इत्यादि |
नित्यानन्द गुरुकु ल एवं नित्यानन्द संघ के त्रिनेत्र जागृत बालको द्वारा अध्ययन
बाह्य नेत्रों के स त्रों हायता के बिना पढ़ना
त्रिनेत्र जागरण की सबसे प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति, नेत्रों का प्रयोग त्रों किये बिना, आज्ञा चक्र की सहायता से पढ़ने की योग्यता है। विश्वभर में ऐसे हजारो सफल प्र ं दर्शन हुए हैं जिनसे पता चलता है कि पढ़ने, चित्रकला बनाने, रंग, आकार और वस्तुएं पहचानने आदि कार्यों को दोनो नेत्र बं ं द करके कर पाना सं भव है।
ये प्रदर्शन हमारी इस समझ में क्रांतिकारी बदलाव लाते हैं कि दोनो नेत्र ही हमारे शरीर में एकमात्र दृश्य संवेदी अंग हैं। यह प्रदर्शन तृतीय नेत्र से पढ़ने और शारीरिक नेत्रों से प त्रों ढ़ना, इन दोनो की सं ं ज्ञानात्मक प्रक्रियाओंमें भिन्नता के बारे में भी कई सवाल खड़े करते हैं।
नेत्र बंद करके पढ़ने के दौरान क्या होता है? साधारण पठन (भौतिक नेत्रों सेपढ़ना) एक त्रि- चरण प्रक्रिया है:
- भौतिक नेत्र लिखेहुए शब्दों को देखतेहैं
- शब्दों की सुचना दृश्य तंत्रिका केमाध्यम सेमस्तिष्क को भेजी जाती है
- मस्तिष्क शब्द को समझता और बोध कराता है
त्रिनेत्र सेपठन (भौतिक नेत्रों को बंद करके) केदौरान केवल दो चरण होतेहैं:
- त्रिनेत्र शब्द को समझता और उनका बोध करता है
- यह बोध सीधेमस्तिष्क को भेजा जाता है
अतः मस्तिष्क, अंतर्ज्ञान से, बिना भौतिक नेत्रों की स त्रों हायता के , सीधे शब्दों को शब्दों देखता और पढ़ता है।
कैपिटल हिल, वॉशिं गटन डीसी में व्यापार रक्षा शिखर सम्मेलन में जो त्रिनेत्र जागरण पर एक सक्षिप्त सूचना सत्र के जैसे शुरू हुआ था, वह 3 घं टे तक चला। एक अद्भुत प्रदर्शन में एक 9 साल की बच्ची ने सफलतापूर्वक मनुष्य में त्रिनेत्र के अस्तित्व का प्रमाण दिया, स्वयं अपने त्रिनेत्र से एक किताब पढ़ कर, वह भी अपनी आंखो पर पट् ं टी बाँधकर!
चकित दर्शको, ं डॉक्टरो, सर ं ्जन, मेडिकल शोधकर्ताओ, बैंकरो ं , उं द्योग जगत और सरकार के अधिकारियो के स ं मक्ष इस लड़की ने अच्छी गति से पुस्तको, ं समाचार पत्र, और अन्य पाठन सामग्री के पूरे अनुच्छेदो को प ं ढ़कर सुनाया। सभी पठनो की विश्वसनीयता ए ं वं प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए दो पट्टियाँ और आंख के पैड का उपयोग किया गया था।
विधान सभा सदस्य हैरी सिद्धू के निवास अनाहिम, कै लिफोर्निया, यू.एस.ए.में एक विशेष एवं व्यक्तिगत कार्यक्रम में लगभग १०० लोगो की उपस् ं थिति में त्रिनेत्र का प्रदर्शन किया गया। हिन्दू राजदूत, अरुण के. सिहं के साथ यू.एस. कांग्रेस के सीनेटर एडवर्ड रानडाल 'एड' रोयसी एवं उनकी पत्नी एवं स्टे सीनेटर बॉब हफ, कांग्रेसी मिमी वाल्टर एवं एन.आर.आई. व्यापारी, डाक्टर एवं समुदाय के नेता उपस्थित थे।
कांग्रेसी एड रोयस ने बंद नेत्रों से प त्रों ढ़ने को समझने के लिए स्वयं भाग लिया। बहुत से लोग कौतुहल से भर गए और त्रिनेत्र जागरण के लिए और भी जानकारी ली।
प्राचीन वैदिक विज्ञान ने अमेरिका में खलबली मच दी
- ®भोजन की चाह से मुक्ति , ये सिद्धि THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा दी जाने वाली कई सिद्धियो में से एक है, जो वे अपने इच्छुक भक्तो को प्रदान करते हैं। वैदिक परिपाटी ये बताती है कि एक अवतार पृथ्वी पर जन मानस में नयी सं भावनाओ को ं जागृत कर कई सिद्धियो को प्रदान करता है, उसका जीवन अलौकिक घटनाओ से पर ं िपूर्ण होता हैं। सैकड़ो वर्षो पहले , वैदिक सं स्कृति के मनुष्य इस तरह से भोजन के चंगुल में फं से नही हुए ं थे जिस तरह वे आज के युग में हैं। आज भोजन एक लत की तरह मनुष्य जीवन को बर्बाद कर रहा है, जिसके कु परिणामस्वरुप रोगी- काया, अवसाद ग्रस्त उदास व विकृ त मन त था आध्यात्मिक दरिद्रता चारो ओर फै ली हुयी ं है। निराहार सं यम जैसी सिद्धि मनुष्य को इस चक्र से मुक्त कराती है।
- ®- श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMजी महाराज के लगभग २००० शिष्य क्षुधा क्षु मुक्त जीवन अपनी प्राण - शक्ति के बल पर जी रहे है, जिससे उनके स्वास्थ्य , ऊर्जा स्तर , सृजनशीलता , प्रांजलिता और शरीर सौष्ठव में कई गुना वद्धिृ हुयी है।
- ®- श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMजी महाराज द्वारा निराहार सं यम में दीक्षा प्राप्त कई शिष्य अल्पाहार पर व कई केवल तरल पदार्थो पर अपना जीवन जी कर भोजन-मुक्ति प थ पर अग्रसर हैं।
निराहार सं यम भोजन के चंगुल से मुक्ति
"योगी सैकड़ो वर्षो तक आहार मुक्त जीवन जीकर स्वस्थ , दीर्धायु ,उच्च ऊर्जा युक्त , और पूर्ण जागरूक जीवन जीते रहे हैं ......अब तुम्हारी बारी है ! जब तुम्हें गुरु से निराहार सं यम की दीक्षा प्राप्त होगी तो वो तुम्हारे भीतर बसी जैव ऊर्जा की उस स्मृति को जाग्रत करेगा जिसे सूर्य की किरणो, आका ं श ,और वायु से ऊर्जा प्राप्त करने की विद्या ज्ञात है, उसे किसी ढोस खाद्य सामग्री की आवशयकता नही ।" ं -THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
"म भो ैं जन मुक्त क्यों ...?" मने अपने ैं लिए रोगमुक्त शरीर का निर्माण किया। मेरी रोगप्रतिरोधक शक्ति इतनी बढ़ गयी है कि झे अब छोटा सा सिरदर्द भी कभी नहीं होता! डॉक्टरों द्वारा गहन मेडिकल टेस्ट करवाने के बाद ही मैं ये कह रही हूँ। मेरे डॉक्टर अचंभित हैं कि बिना ठोस आहार के मेरे अंग कै से काम कर रहे हैं , जबकि सच ये है कि मेरे अंग दिन प्रतिदिन स्वस्थ हो रहे हैं। चिकित्सक इस बात पर भी आश्चर्यचकित है कि रक्त में मेरा आयरन व कैल्शियम स्तर श्रेष्ठ है जबकि अधिकतर लोगो को आयरन और कैल्शियम की गोली खानी पड़ती है। मु झे अपनी तु लना किसी और से करने की आवश्यकता नहीं है क्यूंकि मेरे गु रुदेव THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMजी कहते हैं कि तु लना करना सभी रोगों की जड़ है, तु लना करने से मनुष्य स्वयं और शरीर में एक दरी उ ू त्पन्न कर लेता है
जिससे व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। निराहारी बनकर मने इस द ैं री को पाट ू दिया है , अब म बैं ड़े स्पष्ट रूप से जानती हूँ कि मने ैं ये शरीर स्वयं के लिए ही रचा है ,वैसा जैसा कि मेरे लिए सर्वोत्तम है !पिछले ६ महीनो से भोजन का विचार , मीठा खाने की इच्छा , सब लुप्त हो गए हैं , अब तो भोजन देखकर या सूंघकर लार भी नहीं बनती !
माँ महयोगानन्दा , BSBA, MBA
व्यवसायी , सिंगापुर
"मेरे भीतर का योगी उजागर हो रहा है। ..."
म हमे ैं शा सोचती थी कि एक योगी वो है जो सब कु छ छोड़कर हिमालय जाकर एक पाँव पे खड़ा होकर तपस्या करता है ,तब उसे बिना भोजन के के वल प्राणशक्ति पर जीने की तथा प्रगटीकरण की अलौकिक शक्ति प्राप्त होती हैं जो कि हम जैसे साधारण गहस्थ अभी हा ृ सिल नहीं कर सकते ......
म नहीं ैं जानती थी कि हम सभी के भीतर एक असाधारण योगी छुपा हु आ है जो इस गहस्थ ृ जीवन या इसी तरह के साधारण जीवन को जीते हु ए भी अनु भव किया जा सकता है, उजागर किया जा सकता है। सबसे उत्तम भाग तो ये है कि के वल एक अवतार की सहायता से , हमारी ओर से किसी भी तरह के कठोर तप किये बिना ही , इस सिद्धि को प्राप्त किया जा सकता है .... ये तो यू ह ँ ु आ न जैसे किसी और के व्यायाम करने से तुम्हारा मोटापा घट गया !
जब मने न ैं िराहार संयम शु रू किया तो मैं स्वयं ये देखकर अचंभित हो गयी कि मेरा शरीर सचमु च बिना ठोस खाद्य पदार्थ के जीवित रह सकता है। ये तो बस एक आरम ्भ है आगे आने वाली दीर्ध रोमांचक
"उच्च कोटि का स्वास्थ्य, रचनात्मकता और समद्धि " ृ बिना किसी दवा के मेरी चर्बी कम हो गयी ,मेरा ट्राई-ग्लिसराइड जो कि १३०० मिलीग्राम था वो जितना होना चाहिए उसके निम्न अंक तक पहु ंच गया। इ सी ज़ी और उदर स्कैन बताते हैं कि मेरे सभी आंतरिक अंग बहु त स्वस्थ हैं। श्रेष्ठ स्वास्थ के सभी पैमानों पर मेरा स्वास्थ खरा उतर रहा है। अल्प निद्रा , उच्च ऊर्जा....न पेट की बीमारी और न कोई आलस्य , न मोटापे की समस्या ! जीवन में असाधारण परिवर्तन और प्रगति हो रही है। आध्यात्मिक सत्य को अनु भव कर रहा हूँ। भोजन से सम्बंधित सभी बन्धनों से मुक्ति हो रही है। भू ख और प्यास से मुक्ति के सा थ ही भोजन जन्य सभी आदतों से मुक्ति , जीवन बहु त ही सत्य निष्ठ और कर्मठ बन गया है। रचनात्मक ऊर्जा नित्य बढ़ती जा रही है जिससे नए नए समाधान मिलते है व्यवसाय की समस्याओं के । सभी के सा थ मेरे सम्बन्ध अब मधु र होते जा रहे हैं। समाज श्रद्धा और सम्मान की दृष्टि से देखने लगा है। कई लोग जो इस निराहार संयम के बारे में अनभिज्ञ हैं, वे जब आपको निराहारी देखते हैं तो वे आपको ईश ्वरीय सम्मान देने लगते हैं।
श्री नित्य श्री प्रियं (डॉ टी गणे श )
प शु चिकित्सक , बिज़नेस चेयरमैन ,
निराहार सं यम में दीक्षित निरहारियो के ं अद्भुद अनुभव
नित्य आध्यात्मिक आरोग्य - मानवता और सम्पूर्ण पृथ्वी के आरोग्य के लिए अलौकिक ऊर्जा की निरन्तर वर्षा
शुद्ध-अद्वैत में स्थापित THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMजी महाराज भौतिक, मानसिक व आध्यात्मिक स्तर पर आरोग्य प्रदान करते हैं। उनका इस प्रकार का आरोग्य प्रदान करना उपनिषद ऋषियो की ं वाणी को सत्य सिद्ध करता है कि "जो है सब एक ही ऊर्जाहै जो अत्यन्त मेधावी और करुणामय है "
नित्य आध्यात्मिक आरोग्य क्वांटम विज्ञान पर आधारित चिकित्सा है जो कि कुंडलिनी शक्ति और हमारे अंतर में स्थित ब्रह्माण्ड केंद्र(जिसे आनंद गंधा भी कहते है) के जागरण से की जाती है
- ® लोग जो जीर्ण और गम्भीर रोगो से पी ं ड़ित थे, श्री THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के द्वारा आरोग्य प्राप्त कर चुके हैं
- ® -लोग स्वामीजी द्वारा आरोग्य कर्त्ता बनने की दीक्षा ले चुके हैं और सं सार में पीड़ित जीवो को आरोग्य प्र ं दान कर सकारात्मक ऊर्जा के सं तुलन को बनाने के प्रयास में जुटे हुए हैं
- ® दीक्षा प्राप्त आरोग्य कर्त्ता वैदिक नियमो का पालन करते हुए ं शुद्ध , सात्विक आहार ग्रहण करते हैं तथा समस्त जीवो के प्र ं ति करुणा व अहिसा ं
नित्य आध्यात्मिक आरोग्य Sm
"उसने कहा कि नित्य आरोग्य लेने के एक माह बाद उसकी आँखों से एक प्लास्टिक का कड़ा निकला "
म सैं ्वमीजी से दीक्षा लिया ह ु आ एक नित्य आरोग्य कर्ता हूँ। एक वर पहले म ्ष ने हा ैं र्ट, माइंड एंड बॉडी फेस्टिवल पर एक बू थ लगाया था। एक अंग्रेज सज्जन हमारे बू थ पर ु ल्क आरोग्य लेने आये। मने उनसे ैं छा उन्हें क्या कष्ट है ? उन्होंने कहा कि उनके नेत्रो में कष्ट है। मने इन ैं ्हे उसी समय नित्य आध्यात्मिक आरोग्य प्रदान किया। क ुछ घंटो बाद मने उनसे प ैं ू छा कि अब उनके नेत्र कै से हैं ? उन्होंने कहा कि पिछले ६ माह से होने वाला कष्ट चला गया
एक माह पहले मु झे उनसे फिर मिलना हु आ, उसी पर्व पर. मने उनसे प ैं ू छा अब वे कै से हैं ? तब उन्होंने कहा कि आपसे नित्य आरोग्य प्राप्त करने के लगभग एक माह बाद उनके नेत्रो से एक प्लास्टिक का टु कड़ा अपने आप बहार आ निकला। उन्होंने बह ु त आभार व्यक्त किया।
दिनेश ग ु प्ता (श्री नित्य साधनानन्द )
"मेरी पु रानी घु टनो की पीड़ा चली गयी , अब म पैं ू री तरह पीड़ा म ु क्त हूँ. " घ ु टनो की सर्जरी की वजह से मेरे दोनों घु टनो में सदा पीड़ा बानी रहती थी। अक्सर सीढ़ियाँ चढ़ना कष्टदायी होता था और मु झे दर्द निवारक दवाइयां कहानी पड़ती थी। मने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी के साथ अंतः जाग्रति कार्यक्रम किया। कार्यक्रम में कई पीड़ा निवारक ध्यान करवाए गए , जिनसे मेरे घु टनो की पीड़ा सदा के लिए चली गयी !
इसके अलावा मु झे दध भी नहीं पचता ू था. म दैं ध म ू ें उपस्थित लैक्टोस पचा नहीं पाता था। जबसे मने स ैं ्वामीजी के ध्यान कार्यक्रमों में भाग लिया है, मेरी लैक्टोस की अपचन दर हो ग ू यी है। अब म दैं ध ू आसानी से पचा लेता हूँ.
मने कई डॉक ैं ्टरों से बात की और वे सं इस बात से अचंभित हैं कि ये चमत्कार कै से ह ु आ क्यूंकि उनके अन ु सार बिना दवा के लैक्टोस अपचन का कोई उपचार नहीं।
म ु क्तानंद सीएटल , अमेरिका
"डॉक्टरों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उन्होंने देखा कि मेरे अंडशयो के चारो और अब एक भी गाँठ नहीं। .." २०१२ में जब मेरे शरीर की जांच की गयी तो डॉक्टरों ने बताया कि मेरे अंडाशयों के चारो ओर कई गांठे हैं, जिनका होना मेरे लिए ठीक नहीं। जब म २०१२ ैं दिसंबर के अंतः जाग्रति (इनर अवेकनिंग ) कार्यक्रम में गयी, मने स ैं ्वामीजी से अपनी व्याधि का वर्णन किया। उन्होंने म ु झे देखा , अपने हाथो को तलवार की तरह काटने जैसे घु माया और कहा, " इसकी चिंता तु म म ु झपे छोड़ दो। .."
उसके पश्चात मु झे कु छ विचित्र सा तेज दर्द होने लगा पेट में, तब मु झे ये अन ु भूति ह ु यी कि स्वामीजी म ु झे आरोग्य दे रहे हैं। फिर लगभग २० दिन पश्चात जब में मलेशिया लौटी तो मने ैं फिर से अपने डॉक्टरों से अपनी जांच करवाई और पेट का स्कैन भी करवाया। डॉक्टरों को ये जान कर बड़ा अचम्भा ह ु आ कि मेरे अंडाशय के आस पास अब एक भी गाँठ नहीं थी। अहा , कितना सु खद चमत्कार था
देवा प्रियानंद सेरेमबन , मलेशिया
नित्य आध्यात्मिक आरोग्य के अनुभव
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी महाराज करुणावतार, आरोग्य ऊर्जा के प्रदाता , नित्य आध्यात्मिक आरोग्य प्रदान करते हुए, कल्पतरु कार्यक्रम के अन्तर्गत । नित्य आरोग्य बैंगलोर ध्यानपीठ एवं अन्य ध्यान कार्यक्रमोंमें स्वयं स्वामीजी के द्वारा प्रदान किया जाता है।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा दीक्षा प्राप्त नित्य आध्यात्मिक आरोग्य कर्त्ता , आरोग्य ऊर्जा प्रवाहित करते हुए
रमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी महाराज नित्य आध्यात्मिक आरोग्य कि दीक्षा देते हुए, एक ऐसी दीक्षा जो केवल एक अवतार ही दे सकता है जिसमे ऊर्जा का प्रवाह सीधा स्वामीजी से आरोग्य कर्त्ता को जाता है !
तस्माच् छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्य-व्यवस्थितौ । ज्ञात्वा शास्त्र-विधानोक्तं कर्म कर्तुम ् इहार्हसि ॥
इसलिये जो कर्म करने है और जो कर्म नही करने है उनका निर्देश न शास्त्रों के स्त्रों शासन एवं शास्त्र प्रमाण को ही मानो, ं शास्त्र-विधान की घोषणाओ को ं जानने के बाद ही इस सं सार में आपको कार्य करना चाहिये। ~ श्रीमद भाग ् वत गीता, १६.२४
उपलब्धियाँ
- ® 8 भाषाओ ं में 50 देशो ं के जिज्ञा सुओ ंके प्रश्नों के उत्तर लगातार दिये ्नों जाते हैं, प्रशिक्षित सन्यासियो ं व साधको ं द्वारा
- ® प्रति माह लगभग 30,000 फोन काल से ॅ 3.4 लाख जीवन को समृद्ध किया जा रहा है।
- ® स्वास्थ्य, सं बधो,ं धन, लत, व्यवसाय, शिक्षा एवं स्वयं जीवन को समझने के लिये चार-स्तरीय समाधान प्रस्तुत है, जो इस प्रकार हैः
- ® ज्ञान समाधान (ज्ञान पद), यौगिक समाधान (योग पद), अनुष्ठान व विधिआधारित समाधान (क्रिया पद) एवं जीवन पद्धति और
व्यावहारिक समाधान (चर्य पद)।
- ® फोन पर अध्यात्मिक एवं प्रार्थना सेवा दी जाती है।
- ® फोनकौल करने वालो ं या अभियाचको ं एवं उनके परिज नो ं हेतु मं दिर अनुष्ठनो ं जैसे पूजा, अर्चना, होम, अभिष ेक सेवा प्रदानकी जाती है।
- ® कौलो ंको ग्रहण करने के लि ये अत्याधनिु कक्लाउड आधारित सं चार
एनरिचिन्ग मन्दिर
व्यक्तिनिष्ठ जीवन-समाधान एवं अध्यात्मिक परामर्श
" यह विश्व का सबसे बड़ा वैदिक कालॅ सेंटर होगा जो किसी भी व्यक्ति द्वारा विश्व के किसी भी स्थान से फोन पर बतायी गई किसी भी समस्या का मौलिक हिदं ूशास्त्रों के विधान से स्त्रों ही उपचारात्मक जीवन समाधान उपलब्ध करायेगा।'' ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
सहयोगी बनें कालॅ सेन्टरो ंके निर्माण मे मूल्य अनुमान INR 250 करोड़
tमात्र फोन कालॅ /दूरघ्वनि सं देश, ई-मेल या इंटरनेट सं पर्क केंद्रों के द्रों माध्यम से वैदिक जीवन समाधान के लिये विश्व का सबसे बड़ा स्रोत बनना। प्रश्न चाहे कब व्यापार आरंभ करें या फि र अवसाद से कै से उबरें या जीवन-मृत्यु से सं बंधित हो,ं सबका समाधान उपलब्ध कराना।
tप्रतिदिन 100,000 प्रश्नों का उत्तर दिया ्नों जायेगा।
भावी योजनायें...
ग्रं थ समाधि वैदिक ज्ञानालय: हिंद ु त्व में सबसे बड़ा ज्ञान
संग्रह कें द्र
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकम् प्रच्छन्नगुप्तम् धनम् विद्या भोगकरी यशस्खकरी वि सु द्या गुरूणाम् गुरूः। विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्याम् परम् दैवतम्।
पवित्र विद्या नर का परम सौदर्गं और गुप्त निधि ह।ै विद्या से विभिन्न सुखो ंएवं सफलताओ ं का आनंद लिया जा सकता है और यह सभी गुरुओ की ं स्वामी है। विदेश यात्राओ से ं समय, विद्या हमारी बन्धुहै। विद्या परम देवता है। ~ नीति शतकम, २०
"सभी ज्ञानालयो को 'ग्रन्थ समाधि' से सं भोदित किया जाना चाहिये, जिसका अर्थ है आध्यात्मिक पुस्तको का ऊर ं ्जाक्षेत्र। ग्रन्थ सजीव देवता स्वरुप हैं।" ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
भावी योजनायें...
tविश्व के विशालतम पुस्तकालय एवं अनुसं धान केंद्र में 2 करोड़ पुस्तको ंका एकत्रीकरण एवं सं ग्रह। इनमें वेद, उपनिषद, आगम, दर्श न शास्त्र, पुराण, इतिहास एवं स्मृतियो ं का समावेश रहेगा और इसे ज्ञान के देवता के रूप में पूजा जायेगा।
tविशाल वैदिक ज्ञान के लिये निःशुल्क इंटरनेट उपलब्ध कराना।
tताड़पत्र के साहित्यों का सं ग्र त्यों ह,
सं रक्षण एवं डिजिटीकरण।
tताड़ पत्रों पर त्रों वैदिक ज्ञान की छपाई, वैदिक काल के गर्न्थो के भाति।
उपलब्धियां
- ® अब तक 48,520 हिदं त्वु की पुस्तको ं का विश्व भर मे सं ग्रह, अनेक हिन्दू व विदेशी भाषाओ ं में। इनमें वैदिक ग्रथो,ं जीवन विज्ञान, दर्शन शास्त्र, योग, महान अवतारो ं एवं गुरुओ,ं समकालीन शिक्षा के क्षेत्रों जैसे कम्प्यूटर विज्ञान एवं इन्जि नीयरिन्ग जैसे क्षेत्रों की पुस्तको ं का स क्षेत्रों मावेश है।
वैदिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार
Mass Satsangs by H.H.THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM
वैदिक ज्ञान का मानवता के लिये सबसे महान योगदान है कि यह आपको स्वयं से परिचित कराता है - अमृतस्य पुत्राः - आप अमृत्व अनश्वरता के पुत्र है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM सनातन हिं दू धर्म की स्पष्ट, नितिसं गत एवं अराजनीतिक वाणी हैं। वें विश्व भर की मानवता के लिये वैदिक ज्ञान के रहस्य को आत्म अनुभवपूर्वक भेदन कर रहे हैं। स्वयं की प्रबुद्ध चेतना से, परमसत्य के द्रष्टा होकर, उन्होंने वैदिक शास्त्रों को प्रकाशित किया है।
शास्त्र प्रमाणो को उन्होंने अपने प्रत्यक्ष अनुभव या आत्म प्रमाण द्वारा सर्वजन कल्यण एवं धर्म स्थापना हेतु प्रकट किया है।
असतो मा सदगमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
हमें असत्य से सत्य की दिशा मे ले चलो। हमें अंधकार से पवित्र ज्ञान के प्रकाश की ओर ले चलो। हमें मृत्यु से अमृत्व की ओर ले चलो। ॐ शांति शांति शांति। ~ बृहदारण्यक उपनिषद (१.३.२८)
The Supreme Pontiff Of Hinduism Bhagawan Sri Nithyananda Paramashivam के आत्मज्ञानी प्रवचन
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, सर्वज्ञपीठ पर अवस्थित होकर अपने प्रबुद्ध प्रवचनोंजैसे नित्य सत्संग एवं विशेष कार्यशालाओ के माध्यम से प्रवचन देते हैं, जो लोगो के अंदर शक्तिशाली ऊर्जा के रूप में प्रविष्ट होकर स्थायी आत्म एवं सामूहिक परिवर्तन करता है। नये युग के स्रोता अब वैदिक ज्ञान की शक्ति की नवीन अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। प्रवचनोंमें निम्नलिखित का समावेश रहता हैः
- श्रीमद भगवद्गीता, शिव सूत्र, ब्रह्म सूत्र, पतंजलि योग सूत्र और उपनिषदोंजैसे शास्त्रो का वैश्विक स्तर पर अत्यंत सजीव, सरल एवं शक्तिशाली रहस्य भेदन व शास्त्र दर्शन।
- प्रत्येक व्यक्ति के लिये शास्त्रो के निष्कर्षों को यथार्थ रूप में निर्मित करना।
- वैदिक विज्ञान, जीवन पद्धति एवं सत्यों को त्यों जैसे पूर्णत्व, अद्वैत, शिवत्व, जीवन तत्व, कुण्डलिनी जागरण, विभिन्न प्रकार की दीक्षाओ, वैदिक मं दिरो, हिं दत्व, वैदिक शिक्षा प्रणाली आदि पर प्रवचन।
- जीवन समाधान हेतु काल एवं देश सीमा से परे, अति दुर्लभ आकाश मण्डल मे स्थित 'आकाशिक रिकौर्द' का पठन।
आकाशीय अभिलेख
समय और स्थान के परे ब्रह्मांडीय ज्ञान तक पहुंचना
इस संसार में हो चुकी, होने वाली, या हो रही, हर घटना का लेखा- जोखा है, जो कि रहस्यमयी ब्रह्मांडीय ऊर्जा से आकाशीय अभिलेख के रूप में उपलब्ध है। पर इनको सही से पढ़ने और समझने की कुंजी आज बहुत कम आत्मज्ञानी पुरुषो और अवतार पुरुषो के पास ही उपलब्ध है। परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM मानवता के कल्याण के लिए इस अ थाह ब्रह्मांडीय संग्रह का ताला खोल रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें इस ज्ञान का रचयिता ना समझा जाए, वे तो केवल इस ब्रह्म ज्ञान को समझ कर हम तक पहुंचा रहे हैं। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का कहना है:
" मैं केवल इन आकाशीय अभिलेखो को यथा स्वरूप पढ़ रहा हूँ। इसमें किसी की कोई भागीदारी नहीं है। जगत की ज्ञान शक्ति, जो कि इस पूरी सृष्टि की स्रोत है, स्वयं आपसे आपके जीवन में क्या अपेक्षा रखती है, यह बता रही है। विधाता को मानव जीवन के बारे में क्या लगता है, इसको कै से जीना चाहिए, किस उद्देश्य से इस सृष्टि की संरचना की गयी, क्यों इसकी क्यों देखरेख की जा रही है, और क्यों इसका पुनरुद् क्यों धार किया जाता है, इस सब का क्या उद्देश्य है, यह बताया जा रहा है। इसमें परमात्मा - सृष्टि के रचयिता - के आलावा किसी और की कोई भूमिका नहीं है। और यह अभिलेख बदले नहीं जा सकते, इनका संशोधन नहींकिया जा सकता। इनको किसी भी रूप में बदला नहीं जा सकता, इनमें हेरफे र नही की जा सकती। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संघ और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM मिशन के लिए यह मेरा आदेश है, सदा सदा के लिए। "
ब्रह्माण्ड वह स्थान है जिसमें सभी प्रकार के मनुश्य विभिन्न स्तरो पर अनुभवों, जटिलताओ एं वं आकांक्षा ओं का अनुभव करते हैं। जगद्गु रू वह व्यक्तित्व होता है जो सभी प्रकार के लोगो को उनकी महत्तम क्षमता के स्तर जाग्रत करता है। अवतार वह होता है जो अपने प्रबुद्ध स्थिति एवं शक्तियो को बिना किसी तकनीक या सूत्र के सहारे, सीधे किसी भी व्यक्ति में प्रवेश करा सकता है ! मानवता के जागरण एवं प्रबुद्ध अनुभत शक्तियो के स्थानांतरण का यह विज्ञान जीवन मुक्ति या अद्वैत विज्ञान है।
THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, मानवता के जगद्गु रू एवं अवतार, विश्व भर में विगत वर्षों से जीवन रूपांतरित करने वाले अगणित ध्यान, योग आध्यात्मिक कार्यक्रमो द्वारा जीवन मुक्ति विज्ञान का विश्व भर मे सं चाराण करते आ रहे हैं।
- कल्पतरू कार्यक्रम, व्यक्तियो के सशक्तिकरण हेतु एक दिवसीय कार्यक्रम, जिसमें जीवन की इच्छाओ को य थार्थ रूप में प्राप्त करने की विद्या दी जाती है
- अत्याधुनिक उच्चगति वाली तकनीको का प्रयोग करके वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से 47 देशों मेंनित्य योग एवं नित्य क्रिया योग जैसे सप्ताहांत वैश्विक कार्यक्रमो का प्रसारण।
- इनर अवेकनिन्ग , 21 दिन का प्रमुख ध्यान योग शिविर जो 21 शक्तिशाली दीक्षाओ द्वारा ईश्वरी चेतना को जागृत कराता है ।
जीवन रूपांतरित करते ध्यान कार्यक्रम
ऊपर: श्री चक्र मंडल क्रिया- एक ऐसी ध्यान प्रक्रिया है जहां प्रतिभागी पवित्र आकारोंमें बैठते हैं जिसके माध्यम से परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM शिवोहम ऊर्जा का सं चार करते हैं। यह ब्रम््हांड की ध्वनि एवं प्रकाश को उपयोग करने का एक वैज्ञानिक तरीका है ।
साक्षात्गुरु सेअपनेप्रश्न के उत्तर प्राप्त कर प्रतिभागी अपने जीवन में
त्रिनेत्र जाग्रति की प्रक्रिया उहित दिशा प्राप्त करते हैं शिव तत्व केजागरण सेप्रतिभागियोंद्वारा अप्रतिम अनंदा का अनुभव
इन्नर अवेकनिं ग THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा आयोजित 21 दिवसीय ध्यान शिविर है जो मनुष्य में ईश्वरीय तत्व को शरीर, मस्तिष्क एवं चेतना के स्तर पर जागृत करता है।
कोई भी दो इन्नर अवेकनिं ग कार्यक्रम एक से नहींहोते| हर कार्यक्रम प्रतिभागियोंमें नई चेतना एवं आध्यात्मिक शक्तियो का सं चार करता है। यह सिर्फ कार्यक्रम मात्र नहींहै अपितु यह कई जमि्मों के बा ्मों द पूर्णत्व के विज्ञान और अद्वैत को अनुभव करने का एक मौका है ।
इस कार्यक्रम में उपनिषद, शिव आगम, पतंजलि योगसूत्र, हठयोग, घेरंड संहिता इत्यादि से कुंडलिनी शक्ति जागृत करने वाली, एवं जीव- उर्जा का सं चार करने वाली कई क्रियाएं एवं ध्यान प्रक्रियाएं सिखाई जाती हैं ।
बार आयोजित किए जा चुके इस कार्यक्रम की विशेषताएं हैं :
w जीवन मुक्त जीने हेतु THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्वारा प्रत्यक्ष 21 शक्तिशाली
दीक्षाये।
- w सामूहिक कुंडलिनी जागरण, ऊर्जा चक्र-शोधन और कर्मो से निवृत्ति जो डीएनए स्तर पर बायो मेमोरी मसल मेमोरी में प्रवृद्धि लाता है।
- w वयस्कों एस्कों वं बच्चों में रहस्मय तीसरे नेत्र के जागरण की क्रिया।
- w आंतरिक दिव्यता की अनुभूति के लिये शक्तिशाली 'शिवोहम' क्रिया।
- w पूर्व जन्म से पूर्णत्व प्राप्ति हेतु पूर्व जन्म प्रतिगमन।
- w जीवन की घटनाओ से पूर्णत्व प्राप्ति एवं भविष्य का पुनर्लेखन।
- w अभूतपूर्व स्वास्थ्य लाभ शारीरिक एवं मानसिक स्तर पर ।
21 शक्तिशाली दीक्षायें जो हमारी जैव-उर्जा और जैव-स्मृति को सुनियोजित करती हैं।
वैदिक सं प्रदाय में गुरु के समक्ष बैठने को सं पूर्ण ब्रह्मांड में सर्वाधिक अद्भुत घटना बताया गया है। इसे सं स्कृत में उपनिषद भी कहा गया है। इस धरती पर एक आत्मज्ञानी गुरु की महत्ता को कभी कम नहींकिया जा सकता। इन्नर अवेकनिं ग एक ऐसी अद्भुत घटना है जहां गुरुरुपी ब्रह्मांडीय उर्जादीक्षा के माध्यम से शक्ति का अद्वितीय खेल खेलती है।
परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ब्रह्मांडीय उर्जा का एक ऐसा सविस्फोट करते हैं जिसके माध्यम से प्रतिभागियो की जैव-उर्जा और जैव-स्मृति विकार मुक्त होकर शुद्ध हो जाती है। फलस्वरुप स्वास्थ्य, आनंद, उच्च चैतन्य, और सिद्धियो की जागृति जैसे लाभ व्यक्त होते हैं।
इनर अवेकनिगं कार्यक्रम के दौरान वैदिक अनुष्ठान
बाली*,* इंडोनेशिया मेंप्रतिभागियोंकेसाथ कं बोडिया मेंप्रतिभागियोंकेसाथ
बनारस के पास सारनाथ मेंमेंप्रतिभागियोंकेसाथ ऋषिकेश मेंप्रतिभागियोंकेसाथ
नित्य ध्यान योग और नित्य क्रिया योग वैदिक शास्त्रों पर निर्धारित ध्यान शिविर
ध्यान शिविर के माध्यम से परमपूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM लाखोंश्रद्धालुओ के हृदय में आत्मज्ञान का बीज बो रहे हैं जिससे प्रतिभागी अपनी उच्चतम क्षमता तक पहुंच सके और जीवन में स्वास्थ्य, उन्नति एवं आनंद का अनुभव कर सकें ।
गत वर्षों में हजारो ऐसे ध्यान कार्यक्रम २-वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के माध्यम से Bharat एवं विदेशों में आयोजित किए गए हैं। यह चेतना जागृत करने वाले कार्यक्रम प्रत्येक व्यक्ति की स्वयं के प्रति, जीवन के प्रति, अपने रिश्तो के प्रति, एवं जगत के प्रति धारणा को परिवर्तित करने में सक्षम है। इन कार्यक्रमोंमें बताए जाने वाले सत्य वैदिक शास्त्रों द्वारा प्रमाणित है। यह कार्यक्रम स्वयं एक अवतार द्वारा दीक्षा की भेंट प्रदान करते हैं। दूर करता है। इसके अतिरिक्त आगमो पर आधार ित, विभिन्न विषयो पर कई दूसरे ध्यान शिविर जैसे - धन की चेतना, परिपूर्ण रिश्ते, समय पर विजय प्राप्त करना इत्यादि आयोजित किए जाते हैं।
नित्य ध्यान योग कार्यक्रम उपनिषद, शिव सूत्र
आदि वैदिक शास्त्रों द्वारा प्रमाणित पूर्णत्व प्रक्रिया तथा चक्र जागृत करने के विज्ञान को ध्यान क्रियाओ के माध्यम से सिखाता है।
नित्य क्रिया योग पं चकोश का शुद्धिकरण कर सूक्ष्म शरीर से गहरे शारीरिक एवं भावनात्मक दुखो को
पहले दस दिनों मे हमें भावनात्मक उपचार का अनुभव हुआ । स्वयं से, दूसरो से, अपने स्वास्थ्य से एवं अपने पूर्वजन्म की असम्पूर्तियो को मिटाने पर कार्य किया । THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने हमें एक ल क्ष्य के अनुसार इन प्रक्रियाओ का अनुसरण करने के लिए कहा। वह अवस्था खोजना जहाँ शक्तिहीनता और आत्मशं का उत्पन्न न हो, और यदि उत्पन्न हो भी तो हममें इतनी क्षमता होनी चाहिए की हम उसे तुरंत जान पाएँ ।
अब सोचती हूँ कै से मैंने इस तरह से मेरे सारे जीवन को नही जं िया? मैं स्पष्ट रूप से वे सं स्कार देख सकती हूँ, जिसने मुझे हताशा और पीड़ा ने जकड़ लिया था और किस तरह इन सं स्कारो के कारण स्वयं को मैं बहुत छोटा अनुभव करती थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मैं अपने जीवन में सर्वोत्तम चीजो की स्वामी नही हं ूँ। अवश्य मैं स्वयं के लिए यह चाहती थी, लेकिन मैं अपने सं स्कारो से इतनी धूमिल थी की मेरे लिए आगे बढ़ पाना कठिन था । यह एक सशक्तिकरण की प्रक्रिया है। और मैं अविश्वसनीय रूप से स्वादिष्ट भोजन के सा थ शांतिपूर्ण योग, आयुर्वेद, वैदिक अनुष्ठानो का उल्लेख करना तो भूल गयी ।
इनर अवेकनिग अद्भुत है । मैं वास्तविक रूप से चाहूंगी की सभी इस क्रिया का अनुभव करें, और स्वामीजी का भी । स्वामीजी केवल यह चाहते हैं की सम्पूर्ण विश्व अपनी उच्चतम सं भावना, जागरूकता और ईश्वरत्व चेतना मे वद्धिृ कर सके ।
- सिं थिया नार्सिसी
योग शिक्षक, स्वास्थ्य प्रशिक्षक, लेखक लेखक - शिकागो, यु एस ए
इनर अवेकनिग ® प्रतिभागी
ह मेरा दूसरा इनर अवेकनिगं कार्यक्रम है और जैसा कि स्वामीजी कहते हैं कोई दो इनर अवेकनिग एक सा मान नहीं होती । मेरा पहले इनर अवेकनिग का अनुभ व बहुत ही प्रभावशाली था और मैंने कु छ अच्छे परिवर्तन भी अनुभव किये । परन्तु दसरे आई . ए . मैं मानो अंतरात्मा में एक परमाणु विस्फोट सा हो गया हो ।
यहाँ आने से पहले जीवन के प्रति मेरा प्रबल प्रतिरोध था। जीवन में उत्तरदायित्व लेने के प्रति मेरी असम रता कोमैं समझ नही पा र ं हा था। मैं अपने आपको एक ही सी परिस्थितियों में जकड़ा हुआ पाता था । मैं विक्षमता अनुभव कर रहा था और मेरा पूर्णत्व के प्रति कड़ा प्रतिरोध था। मैं यहाँ सब कु छ बदलने के उद्देश्य से आया था, और स्वामीजी के सानिध्य में यह बहुतसरल साबित हुआ । जब हम आत्मघाती सं स्कारो के सा थ पूर्णत्व क्रिया कर रहे थे, मुझे वह घटना याद आयी जिससे मुझे मेरे अस्तित्व का ज्ञान हुआ । मैं स्पष्ट रूप से देख सकता हूँ की कै से इसने मेरे पूरे जीवन को प्रभावित किया। और जब मैं अपने सं स्कारो को ज्ञात कर पाया, मैं उन्हें पूरी तरह छोड़ने के लिए सक्षम था, ऐसा महसूस हुआ कई वर्षों के प्रतिरोध, संदेह, आत्मोत्सर्ग और आत्म घृणा पिघ ल गई है । यह मेरे लिए एक बड़ी सं तोष की बात है ।
जब मैंने अपने परिवार के सा थ पूर्णत्व किया, तब उन्होंने बहुत सराहा, और वे अत्यन्त ग्रहणशील व खुश थे। पहली बार मुझे ऐसा अनुभव हुआ कि एक सुन्दर सम्बन्ध के आरम्भ के लिए सारे द्वार खुल गए हैं । यह वास्तव में अद्भुत है !
- नित्यसत्यस्वरूपन,
Thaigarajan,
IT Director, H o uston, USA
सभी जीव जं तु जन्म, मरण, प्रजनन, परिपक्वता एवंमृत्यु के अनुभवो से निकलते हैं। किसी भी व्यक्ति की आयु कई कारको से निर्धारित होती है। एक समय पर बुढ़ापा एक अटल अवस्था माना जाता था और उसे पूर्वनिर्धारित एवं अपरिवर्तनीय कहा गया है।
हाल ही में कई जं तुओ पर किये
गए वैज्ञानिक प्रयोगोंमें पता चला
है कि बूढ़ेहोने की प्रक्रिया को
मद्धम किया जा सकता है, साथ
ही साथ स्वाथ्य एवं जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार लाया जा
सकता है।
२०१० और २०१४ के बीच २१
दिन के इनर अवेकनिं
ग (आई.ए.)
कार्यक्रम के प्रतिभागियो पर चार
विभिन्न परन्तु आपस में जुड़े हुए प्रयोग किये गए ।
माइटोकॉन्ड्रियल अध्ययन
पहला प्रयोग ५० वर्ष से अधिक आयु के २० आई.ए. प्रतिभागियो एं वं २० बिना आई.ए. किये हुए प्रतिभागियो पर किया गया। माइटोकॉन्ड्रियल गतिविधि के मात्रात्मक परख को
मापने के लिए एम.टी.टी. परख तकनीक का उपयोग किया गया था। सभी स्वयं सेवको के रक्त के नमूने पहले दिन और २०वें दिन पर लिए गए।
परिणामो के अध्ययन समूह में सांख्यिकीय महत्वपूर्ण माइटोकॉन्ड्रिय गतिविधि और कोशिकाओ की व्यवहारिकता में वृद्धि का प्रदर्शन किया।
माइटोकॉन्ड्रिया व्यक्ति की कोशिकाओ के लिए बैटरी या ऊर्जा उत्पादको की तरह हैं।
वे सब कोशिकाओ की जीवित गतिविधियो को बनाए रखने के लिए एवं ऊर्जा के उत्पादन के लिए जिम्मेदार हैं।
व्यायाम और एलोपैथिक दवाएं मानक तरीको से लगभग 30% तक माइटोकॉन्ड्रियल गतिविधि में सुधार कर सकते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया क्षति के लिए अतिसंवेदनशील है, और एक क्षतिग्रस्त
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओ के नुकसान, उम्र बढ़ने एवं अंततः मृत्यु का कारण बनता है। माइटोकॉन्ड्रिया को सीधे मनुष्य की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
जीन अभिव्यक्ति अध्ययन
मनुष्य में 25,000 जीन हैं, जिनमें से लगभग 10,000 किसी भी एक समय में व्यक्त होते हैं। जीन कोशिकाओंमें प्रोटीन के उत्पादन से लेकर प्रजनन तक लगभग सभी कार्यक्रमो को नियंत्रित करते हैं। जीन का व्यक्त या अव्यक्त होना पर्यावरण या एपिजेनेटिक कारको पर निर्भर करता है।
चिकित्सा की भाषा में इसे "अप-रेगुलेशन" और "डाउन-रेगुलेशन" कहा जाता है । वर्तमान में, प्रत्येक जीन की भूमिका एवं गतिविधि क्रियाओ के तरीके ( जो उनके द्वारा बढ़ाये या अवरोधित किये जा सकते हैं) के बारे में बहुत कु छ जाना गया है । वे इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यक्त कर रहे जीन उस समय किस समूह पर आधारित हैं ।
इस अध्ययन में, 40 नमूने परिधीय रक्त से लिए गए और चार समूहोंमें जमा किये गए। इनर अवेकनिं ग प्रोग्राम के समय, 0 दिन और 21 दिन पर उनके जीन की अभिव्यक्ति का "अफ़िमेट्रिक्स माइक्रोचिप", परिधीय "ल्यूकोसाइट" द्वारा अध्ययन किया गया ।
परिणाम से पता चला की अध्ययन के अंत में 420 जीन उप - रेगुलेटेड और 165 जीन डाउन -रेगुलेटेड थे । जीन आंटलजी अध्ययन, वर्तमान में उपलब्ध डेटाबेस का उपयोग करके बताता है कि न्यूरोट्रांसमीटर, कैं सर और स्टेम कोशि काओंमें स्वरोग क्षमता के सं बं ध में महत्वपूर्णदो गुना परिवर्तन हुआ है ।
मात्रात्मक स्टेम सेल विश्लेषण
मूल कोशिकाएँ विशिष्ट कोशिकाएँ हैं,जो सैद्धांतिक रूप से अमर हैं। हालांकि विभाजित होने के बाद उनका एक सीमित जीवनकाल होता है जो कि उन कोशिकाओ के विभा ं जन
की सं ख्या पर निर्भर करता है।
एक भ्रूण के रूप में, हमारे पास स्टेम सेल का एक बड़ा बैंक है जो कि प्रभाविक रूप से बहुशक्तिशाली स्टेमकोशिकाओं में वयस्कता की सं ख्या को कम करती है। आइ.ए. प्रतिभागियो से ल ं िए गए 100 रक्त के नमूनो कापर ं िधीय रक्त में स्टेम कोशिकाओ के ं मात्रात्मक उपस्थिति के लिए परिवर्तित किया गया । प्रथम दिन और २१वे दिन के सैम्पल-डाटा की तुलना की गयी।
सांख्यिकीय रूप से इनर अवेकनिं ग के बाद कोशिकाओ की गणना ं में प्रभाविक रूप से वृद्धि हुई, पी मूल्य के साथ, पी 0.001 से कम । यह 21 दिनोंमें मूल कोशिकाओ की ं सं ख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। मूल कोशिकाओ की ं जनसं ख्या सीधे उम्र बढ़ने से जुड़ी हुई है, और साथ ही यह जनवरी 2014 क्लीनिकल मेडिसिन के जर्नल में प्रकाशित किया गया था।
टेलोमोरेज अध्ययन
टेलेमोरेस एलोमेर्स, डी.एन.ए. युक्त क्रोमोसोम के लिए सुरक्षा कवच की तरह है। उम्र
के साथ व्यक्ति में टेलोमेरेस की कमी और उनकी अंततः उनकी अनुपस्थिति बुढ़ापे और म्रत्यु का कारण बनती है। जीन की लंबाई को बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार एंजाइम को टेलोमिरेज कहा जाता है। सामान्य वयस्कों में नगण्य टेलोमिरेज गतिविधि होती है, और इसलिए उनका जीवन काल बहुत ही सीमित होता है।
प्रथम ०वे से २१वे दिन १०० इनर अवेकनिं ग® प्रतिभागियो की पर ं िधीय रक्त कोशिकाओंमें,
TDA परीक्षण किया गया। कार्यक्रम के अंत में अत्यधिक परिवर्तन पाया गया । सभी प्रतिभागियोंमें कम से कम 0.5 गुना परिवर्तन देखा गया, इनमे से 47 प्रतिभागियो ने 0 ं.5 से 2 गुना परिवर्तन देखा गया (3 से 4 गुना परिवर्तन)। पूरे समूह का औसत परिवर्तन 0.68-1.3 था। वर्तमान चिकित्सा साक्ष्य सलाह देता है, एक टेलोमिरेज गतिविधि या टेलोमेर की लंबाई में महत्वपूर्ण परिवर्तन का पता लगाने के लिए में कम से कम 4-5 महीने की जरूरत होती है। बोस्टन अनुसं धान समूह की एक अध्ययन के अनुसार जो PLoS में प्रकाशित की गयी थी, चिं ता, भय और अन्य इसी तरह की भावनाएँ (अपूर्णता) जीवनकाल को छोटा करती है। इनर अवेकनिं ग कार्यक्रम® से स्वास्थ्य सुधार पर सं चित प्रश्नावली आधारित सर्वेक्षण ।
सारांश
वर्तमान चिकित्सा प्रमाण से यह साबित होता है कि माइटोकॉन्ड्रिया, स्टेम कोशिकाएं , भावनाएं , और टेलोमिरेज गतिविधि सीधे उम्र बढ़ाने की प्रक्रिया से जुड़ी कोशिकायें हैं। वर्तमान चिकित्सा उपचार का उद्देश्य उसी का औषधीय सुधार है। इस 21 दिवसीय कार्यक्रम में माइटोकॉन्ड्रिया, स्टेमसेल एवं जीन अभिव्यक्ति के रास्ते बदलकर, गैर-औषधीय वृद्धि का पहला प्रत्यक्ष प्रमाण, 4 साल से अधिक सं रचित अध्ययन के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। पूर्णत्व की प्रक्रिया के माध्यम से अपूर्णता के प्रतिकू ल प्रभाव को सही कर इस प्रमाण को प्राप्त किया गया।
निष्कर्ष
शरीर का अमरत्व ब्रह्मांड की योजना में नहींहै। हालांकि हमारे प्राचीन शास्त्रों के स्त्रों आधार पर, उचित प्रक्रियाओ के ं माध्यम से, अच्छेस्वास्थ्य और योगिक शरीर के साथ एक व्यक्ति के जीवन में वृद्धि करना अवश्य ही सं भव है ।
एक दिवसीय कार्यक्रम, कल्पतरु प्रतिभागियो को अपनी ं किसी भी सच्ची मनोकामना को पूर्ण करने के प्रति सशक्त करता है| वैदिक सं प्रदाय में आत्मज्ञानी गुरु कल्पतरु वृक्ष की भांति सीभी मनुश्यों की स श्यों च्ची महत्वकांक्षा को सत्य में फलीभूत कर सकते हैं |
एक जीवं त गुरु के साथ कल्पतरु दर्शन प्रतिभागियो को ं अपने भविष्य को नए रुप में लिखने के लिए सशक्त करता है |THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM न सिर्फ लोगो की इ ं च्छाओ को पूरा करने ं का आशीर्वाद देते हैं अपितु उन्हें सही महत्वाकांक्षाओ की ं समझ भी प्रदान करते हैं|
वैश्विक वेबिनार्स और ध्यान शिविर
- w परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी के लिए, जो की मानवता की उच्चतम आध्यात्मिक क्षमता के लिए समर्पित है, लोगो तक प ं हुँचाने हेतु समय, स्थान इत्यादि बाधा नहींहै | २ वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिं ग के माध्यम से ध्यान शिविर और वैश्विक वेबिनर के माध्यम से हजारोंमील दूर बैठे साधक भी गुरु के सामिप्य का अनुभव कर सकते हैं|
- w विश्व भर में 47 से अधिक वैश्विक ध्यान केंद्रों में हजारो लोगो ं ंवेबिनार और कार्यशालाओंमें नित्यानंदेश्वर हिं दूमं दिर से सीधे प्रसारण द्वारा भाग लेते हैं |
- w वैश्विक सप्ताहांत वेबिनर कई विषयोंजैसे कर्म, त्रिनेत्र की शक्ति, 2012 कोन्शिअस शिफ्ट, शिवोहम जैसे जीवन समाधानो और ध् ं यान प्रक्रियाओ पर आधार ं ित होते हैं|
- w इनर अवेकनिग का ं र्यक्रम के हजारोंस्नातको के ल ं िए परम पूज्य स्वामी जी द्वारा लिविं ग शुद्धाद्वैत कार्यक्रम, दीक्षा प्रक्रिया इत्यादि लगातार आयोजित किये जाते हैं, जिससे साधको का ं निरंतर अध्यात्मिक विकास होता है |
भावी योजनायें...
वैदिक ज्ञान को विश्व पटल पर लाना
t वर्ष 2018 के अंत तक अंग्रेजी में 500 नये शीर्षको का ं प्रकाशन।
t 10 शीर्षस्थ पुस्तको का सबसे अ ं धिक बोली जाने वाली विश्व की 54 भाषाओंमें प्रकाशन।
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t उपनिषद प्र् वचनो को 30 हिन्दू ए ं वं विदेशी भाषाओ अनु ं वाद। t शैव आगम एवं अन्य वैदिक शास्त्रो को उपयोग-अनुकू ल जीवन समाधान पुस्तको के रूप ं में प्रस्तुत करना, जिससे कि हिदं ू धर्मनिर्वाह करते हिन्दुओ को प्रमाणिक हिदं त्वु के ज्ञान से समृद्ध किया जा सके ।
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t विश्व के 50 प्रकाशको के सा ं थ प्रकाशन।
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t एक स्वतंत्र प्रकाशन सं स्थान एवं मुद्रण यं त्र की स्थापना करना।
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® विश्व भर में हिं दूशास्त्रों, स्त्रों दर्शन शास्त्र एवं साहित्य के माध्यम से वैदिक पुनर्जागरण में अग्रणी भूमिका निभाना।
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® विश्व का सबसे बड़ा प्रकाशन सं स्थान बनकर विश्व के प्रत्येक देश में हिं दत्वु निधि को पहुंचाना।
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® हिं दत्वु पर 10,000 तत्त्वो व सत्यों को दृश्यरूप त्यों में प्रस्तुत करना, लोगो को ं समझाने एवं जीने के लिये।
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® 300 प्रकाशन 20 हिन्दू व विदेशी भाषाओंमें विभिन्न प्रारूपोंजैसे पुस्तको, ई-पुस्तको ं , ध्वं नि पुस्तको, ं ब्रेल पुस्तको, पुस्तक उपकरण स ं मूहो, ं वीडियो एवं अध्यात्मिक सं गीत के रूप में है।
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® समाज के सभी जीवन चर्याओ के लोगो के ल ं िये व्यापक विषयोंजैसे जीवन समाधान, ध्यान एवं ग्रंथो की पुस्तको का वितरण। ं
'' ज्ञान मुक्त है। हम सनातन हिन्दू धर्म के ज्ञान से विश्व को लाभान्वित व समृद्ध करने का उत्तरदायित्व लेते हैं।" ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
उपलब्धियां
भावी योजनायें…
t वैदिक पुस्तकालय ग्रंथ समाधि में 2 करोड़ पुस्तकें इं टरनेट पर उपलब्ध कराई जायेंगी। यह विद्यार्थियो को एक ं वैदिक विश्वविद्यालय से दूरस्थ अध्ययन का अवसर उपलब्ध करायेगी। दूरस्थ शिक्षा से 10 गुना अधिक विद्यार्थी हिदं त्वु के बारे में सीख सकें गे।
- t विश्वस्तर पर करोड़ों हिं दू सं गठनोंको एक साथ लाना - मं दिरो, आं श्रमो, का ं र्यकर्ता समूह, सांसकृतिक केंद्रों, विश्ववि द्रों द्यालयो इत्ं यादि को एक वेबसाइट के रूप में लाकर वैदिक ज्ञान का प्रसार करना।
- t विद्वानो के ल ं िये एक अनुवाद मं च का निर्माण करना जिससे कि वे आपसी सं पर्क बनाकर मौलिक सं स्कृत ग्रंथो का विश्व की अनेक भाषाओ ं ं में अनुवाद कर सकें ।
अंतर्जालआम्नाय पीठ अर्थात इंटरनेट पर ज्ञान का आसन, सर्वज्ञपीठ के ज्ञान प्रसारण को नये स्तर पर लाकर, ज्ञान को विश्वभर के करोड़ों लोगो ड़ों तक सुविधा पू ं र्वक पहुंचायेगा।
- ® www.nithyananda.org इं टरनेट पर अध्यात्मिक विषयो का सबसे ब ं ड़ा भंडार है। योग, ध्यान, नित्य क्रियाये (रोगो उपचार ं हेतु 108 यौगिक तकनीकें ) और निश्चित जीवन समाधान सहित कई अन्य विषयो के स ं मर्पित वेबसाइटो के सा ं थ।
- ® अत्याधुनिक दूर-सं चार वीडियो व वार्तालाप यंत्रों का त्रों प्रयोग करके घ्यान कार्यक्रमो एं वं प्रवचनो के स ं हारे इंटरनेट/वीडियो कांफ्रेंसिग के ं माध्यम से 'नयन दीक्षा' प्रदान करना।
- ® हिं दु त्व पर 250 से अधिक पुस्तकें आनलाइन ॅ निःशुल्क उपलब्ध।
- ® youtube.com पर THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के 3000 घं टे से अधिक प्रवचन निःशुल्क उपलब्ध हैं।
- ® www.nithyananda.tv THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के हिं दु त्व पर उपदेशो का एक 24- ं घं टे चलित वेब स्ट्रीमिं ग चैनल है, जो 40 देशो के ं 200 शहरोंमें प्रतिदिन देखा जा रहा है।
सबसे अधिक देखे जाने वाले आध्यात्मिक गुरू - 190 लाख यूट्यू ब दर्शको के सा ं थ
वैदिक ज्ञान इंटरनेट के माध्यम से
हरिद्वार में
कम्बोडिया में
कै लास पर्वत के परम दिव्य स्थल पर
क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट् रीय टेलीविजन कार्यक्रम
- ® 1 टेलीविजन चैनल के प्रमाणपत्रधारी को चैनल द्वारा अध्यात्मिक ज्ञान का विश्व मे प्रसाराण करने हेतु प्रेरित किया। 10 और चैनल प्रमाणपत्र धारको को प्रर ं ित करने मे कार्यरत।
- ® नित्यानंद टीवी (www.nithyananda .tv) - यह इंटरनेट और मोबाइल फोन पर उपलब्ध एक वैश्विक वेब चैनल है। दिनोदिन इसके ं दर्शको की सं ख् ं या में वृद्धि हो रही
- ® श्रद्धालु दर्शको के ल ं िये द्विपथवर्तीय (2-way) वीडियो फोन कालो, 3 रा ं ष्ट्रीय चैनलो, 1 राज्य स्तरीय चैनल, ं 3 उपग्रहीय टीवी चैनलो, और 40 के बल चैनलो ं द्ं वारा तमिल, कन्नड़ एवं हिदं ी में अनवरत शिक्षण, अध्यात्मिक परामर्श एवं मार्गदर्शन।
- ® यूएसए, कनाडा और आस्रेट्लिया में अंर्राष्ट्रीय टेलीविजनों पर कार्यक्रम ।
- ® यूएसए और कनाडा में अंतर्राष्ट्रीय रेडियो चैनलो पर ं कार्यक्रम ।
मानवता के शांतिदूत एवं जागृतकर्ता THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी विश्व भर से लोगों का अध्यात्मिक नेतृत्व करके उन्हें दिव्य आदिकालीन उच्च ऊर्जा केन्द्रों की द्रों जीवन यात्राएं कराते हैं।
वें यात्रियो को उस ऊर ं ्जाक्षेत्र की अध्यात्मिक अनुभूतियों में दीक्षा प्रदान करते हैं स्थल के पुराण, उत्सवो और स ं मृद्ध सांस्कृतिक सं पत्ति का रहस्योद्घाटन करते है। मे पर्वत राज, तीर्थ ( जल कुंड, नदियां) एवं वैदिक मं दिर सम्मिलित है।
और पवित्र क्षेत्रों
® कै लास पर्वत यात्रा - भगवान शिव और देवी का शिव लोक - हिमालय पर्वत।
® भारत के चार धाम यात्रा (बद्रीना थ, केदारना थ, गंगोत्री और यमुनोत्री) और अन्य शक्ति केंद्र जैसे – उत्तर में गोमुख, ऋषिकेश, हरिद्वार, उत्तर काशी से लेकर दक्षिण में तिरूवन्नमलाई, मदरै ु व अन्य मं दिर।
अवतार के दिव्य सानिध्य में दर्लभु यात्राएं
कुम्भ मेला 2015 में
कुम्भ महापर्व इस धरा पर मानवता के इतिहास के विशालतम, प्राचीनतम आध्यात्मिक समारोह हैं जो हिं दत्वु की पूर्णता के प्रतीक हैं।
जब करोड़ों की सं ख् ड़ों या में साधु सं त ,दिव्य अवतार, महान योगी, तथा भक्तजन वहां एकत्र होते है तो उनकी श्रद्धा से वहां की अमृतमयी नदियो का ं जल अमरत्व प्रदान करने वाला हो जाता है। इस जल में केवल एक डुबकी , वस्तुतः जन्मजमि्मांतरो के कर्मो का परिमार्जन कर देती है ।
सितंबर २०१५ नासिक के कुम्भ महापर्व पर भव्य शोभा यात्रा। एक अवतार की महत्तम ऊर्जा के सं ग सभी भक्तजनो और साधको ने पवित्र गो ं दावरी नदी में गोता लगाया। विश्व्भर के कोने कोने से आये साधको व कई आध्यात्मिक सं स्थाओ के प्र ं मुखो ने पर ं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वामीजी के साथ कुम्भ महापर्व में भाग लिया।
- ® अंतर्राष्ट्रीय यात्राओंमें अंगकोरवाट, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैनड आदि का समावेश है।
- ® कुम्भ मेला, धरती पर मनुष्यों का सबसे वि ्यों शाल व महान्तं धर्म सम्मेलन, जो 3, 6 और 12 वर्षें के अंतराल में होता है - यहां THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी श्री महानिर्वाणी पीठ के महामंडलेश्वर (आध्यात्मिक प्रमुख) के रूप में पीठासीन होते हैं। इस दिव्य सभा में श्रद्धालुगण को परम् पूज्य स्वामीजी
- के सानिध्य में रहकर सर्वोच्च ऊर्जा ग्रहण करने का परम आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- ® वाराणसी, भगवान शिव जी, श्री काशी विश्वनाथ महादेव की नगरी हैं जहां THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी शिवत्व की स्थिति में – शिवोऽहम - 'शिव मैं हूं' के दैविक अनुभव की कृ पा वर्षा करते हैं।
नित्यानंद गलेरिया (www.Nithyananda Galleria .com) हिंदत्वु के एक सर्वसुलभ विक्रय स्थल रूप में दिनोदिन आगे ब ं ढ़ रहा है। वर्तमान मे यह निम्नलिखित वस्तुएं उपलब्ध करा रहा हैः
- ® वीडियो, आडॅियो टेपो सी ं डी और पुस्तको के रूप ं में नित्यानंद के ज्ञानवर्धक प्रवचन।
- ® ध्यान एवं गहरे आन्तरिक उपचार हेतु मनमोहक सं गीत व मन्त्र।
- ® जीवन पद्धति को प्रेरित करने के लिये ऊर्जायुक्त मालायें, कड़े, चित्र, उपहार एवं वस्त्र।
- ® पुरुषो एं वं महिलाओ को ं शांति एवं सतत उच्च ऊर्जा के लिये पारम्परिक ऊर्जायुक्त मणि आभूषण।
- ® व्यक्तिगत जन्म-कुंडली, जन्म नक्षत्रों, त्रों मानसिक गठन आदि के आधार पर जीवन में स्वास्थ्य, धन, सफलता या किसी भी मनोकामना की पूर्ति हेतु सही रुद्राक्ष के बारे मे मार्गदर्शन।
इस खंड में वर्णित गतिविधियो को स ं र्वज्ञपीठ के विस्तार एवं इसकी गम्भीरता को बताने के लिये किया गया है। फिर भी, कृ पया ध्यान दें कि इस खंड में वर्णित गतिविधियां निजी लिमिटेड कं पनी द्वारा लाभ हेतु सं चालित की जाती हैं, जो दान ग्रहण नही करेगी। ं
वैदिक जीवन पद्धति की पुनर्प्रतिष्ठा
नित्यानंद पीठ में नित्य कीर्तन, गायन और नृत्य के आनंद में दिव्य भावनाओ से पर ं मात्मा को याद करते हैं
ब्रह्मोत्सवम, सभी हिदं ू त्योहारों के दौरान दिव्य समारोह पूजा , प्रा रना, ्थ मं त्र और भक्ति सं गीत के सा थ आयोजित किए जाते हैं
जीवनमुक्ति की उत्सवमय हिन्दू जीवनशैली
'' वैदिक जीवन पद्धति एक करोड़ से भी अधिक आन्तरिक जगत के वैज्ञानिको द्ं वारा करोड़ों वर्षों के अनुसं धान एवं विकास पर आधारित है। इसमें वैदिक सं स्कृति की शक्तियो एं वं तकनीको का पालन ं किया जाता है। ''
~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी
परम पूज्य THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी वैदिक जीवन पद्धति के समस्त सत्यों जैसे शाश्वत उत्सवो, परम्पराओ ं , अनुष् ं ठानो, भो ं जन एवं कला में नवीन प्राण का सं चार करके लोगो तक प ं हुंचाकर वैदिक जीवन पद्धति की पुनर्स्थापना कर रहे हैं। यह एक चेतनायुक्त जीवन पद्धति है और अभ्यास से इसमें लगातार वृद्धि हो रही है। पुरातन दु कानो से ं वैदिक कलाकृतियो का सं ग्र ं ह किया जाता है, पुनः परिमार्जित करके दैनिक जीवन में इनका उपयोग किया जाता है।
आज, सभी सं स्कृतियो के लोग लगातार ं वैदिक जीवन पद्धति को आत्मसात करते आ रहे हैं।
परम पावन स्वामीजी वैदिक समय के, रंगीन, संपन्न जीवन शैली, त्योहारोत्सव मनाती संस्कृति एवं अनुष्ठानों को पु नःप्रतिष्ठित कर रहे हैं| निराकार के हर स्वरुप को भक्तगण, जिस भी रूप मेंउसका अवलोकन करना चाहतेहैं, देखना चाहतेहैं, उसेसम्पूर्ण हर्ष के साथ स्वीकार करते हैं| ब्रह्महोत्सव ऐसा ही एक लम्बा त्यौहार हैंजिसमे उस दिव्य ऊर्जा की हर अभिव्यक्ति का स्वागत कर, लम्बेसमय तक उत्सव मनायेजातेहैं |
भगवान् के साथ रहना और देवी देवताओं की भव्य मूर्तियो के सा ं थ पूजा, कीर्तन और पवित्र हिन्दू अनुष्ठानओ द् ं वारा उत्सव मनाना
Part 3: Sarvajnapeetha - Think Tank of Hinduism_Hindi_part_3.md
अपने पूर्वजो के सा ं थ पूर्णत्व की स्तिथि मैं आने के लिए वेदो द्ं वारा महेश्वर पूजा की प्रक्रिया निर्धारित की गयी है| यह पूजा सन्यास के पथ की ओर अग्रसर सन्यासियों व ब्रह्मचारियो को अर् ं पित की जाती है, इसमें सन्यासियो को भग ं वान् शिव की पदवी प्रदान की जाती है और उन्हेंभिक्षा व भोजन अर्पित किया जाता है | वैदिक
पद्यति के अनुसार महेश्वर पूजा सबसे प्राचीन अभिलिखित अनुष्ठान है जो आज भी प्रचिलित है | महेश्वर पूजा में पवन पावन परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्वयं ही इस पूजा को और नैवेद्य भिक्षा को स्वीकार करते हैं |
वैदिक जीवन पद्धति में मानव चेतना के विकास हेतु आहार महत्वपूर्णहै। नित्यानंद अन्नालय अपने सभी आदिनमोंव कार्यक्रमोंमें हिदं ू पाकशास्त्र पर आधारित ऊर्जायुक्त सात्विक आयुर्वेदिक मोजन पकाता है। भोजन को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ऊर्जायुक्त करके महाप्रसाद के रूप में सर्वप्रथम ईश्वर को अर्पित किया जाता है।
- ® एक वर्षमे निःशुल्क भोजन वितरित। इसका प्रबं धन भक्तगण एवं स्वयं सेवक कार्यकर्ता करते हैं।
- ® सभी आदिनमो, आप ं दा राहत क्षेत्रों, क्षेत्रों निःशुल्क चिकित्सा शिविरो, कुं भ ं मेला आदि में निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
- ® और्गैनिक (प्राकृतिक) भोजन जो रसायन व कीटनाशक मुक्त है, उपलब्ध कराने की दिशा।
महेश्वर पूजा दिवंगत आत्माओ को नै ं वेद्य अर्पण
अन्नं बहु कुर्वीत ।अन्नं न निन्द्यात् । तद्व्रतम् || हम भोजन का सृजन एवं वितरण करें, सभी व्यक्तियो की भूख ं का निवारण हो , हम कभी अन्न व्यर ना ग ्थ वाएं , जहां अन्न की आवश्यकता न हो वहां हम कदापि अन्य बर्बाद ना करें यह अन्य के प्रति सच्ची श्रद्धा है|
~ तैत्तरीय उपनिषद
ईश्वर की उपस्थिति के साथ जीना, जब आपके जीवन का भाग हो, ईश्वर को नैवेद्यम के रूप में प्रतिदिन एवं त्योहारों के दिन, भोजन अर्पण करना एक पूजा की पवित्र विधि है । एक बार ईश्वर को अर्पण करने के बाद, यह शुद्ध, अमृत आहार भक्तों द्वारा, महाप्रसाद के रूप में स्वयं ग्रहण कर विश्व भर के मंदिरों द्वारा सबमें बांटा जाता है ।
हज़ारो लोगों में निशल्क पौष्टिक आहार का वितरण
हिन्दू त्योहारो के समय हज़ारो लोगों को नियमित रूप से, शुद्ध, सात्विक, पौष्टिक शाकाहारी भोजन भगवान् को अर्पण जाता है | कुछ महत्वपूर्ण महोत्सवों में प्रतिदिन लोगों में प्रसाद बाँटा जाता है |
आपातकालीन सहायता : उपचार द्वारा लाभान्वित करना
- प्राकृतिक आपदाओं जैसे सुनामी, भूचाल व बाढ़ आदि की स्तिथि में मदद पहुंचाई जाती है |
- निशुल्क भोजन, कपड़े व अन्न दान द्वारा राहत व मनोवैज्ञानिक व मानसिक आघात से बाहर निकलने के बारे में परामर्श प्रदान किया जाता है |
वैदिक परम्परा में 'गौ' अथवा 'धेनु' सबकी प्रीय माँता है। गाय को भूदेवी अर्थात धरती मां का अवतार माना गया है। हिंदू ग्रंथो ने सभी मनोरथ पूर्ण करने वाली 'कामधेनु' गाय का गुणगान किया है और धरती पर समस्त गायो को इसी कामधेनु का भौतिक अवतार माना जाता है। एक गाय के शरीर में सभी 33 करोड़ देवी-देवता वास करते हैं और वे समस्त मङ्गल, शुद्धताओ, शक्तियो का आश्रय-स्थल रही हैं।
वे सभी प्रकार की शुभता, पोषण, समृद्धि प्रदान करती हैं और सदैव पूजित है।
वैदिक काल में प्रत्येक घर, आश्रम और कुटिया में गौ माँता की प्रेममय उपस्थिति रहाती थी और ब्राह्मणो, द्विजों को धन के महादान के रूप में गौ दान में दी जाती थी, जिससे दानदाता को विशाल पुण्य लाभ मिलता था।
धेनवः धनः ऊर्जम अस् विमे श्वः दहु ना ततु।। गायें सदैव अपने पोषणयुक्त एवं ऊर्जा प्रदान करने वाले स्राव से आप पर समृद्धि प्रदान करती रहें। ~ अथर्व वेद (१८.४.३४)
- नित्यानंद पीठम के आदिनमो की गौशालाओ में 121 श्वेत, भूरी और काली गायो की सेवा की जाती है।
- गायो को दिन में दो बार दु हा जाता है। मंदिर और गुरुकुल को अमृत तुल्य दूध मिलता है और गोमय का उपयोग कम्पोस्ट खाद बनाने में किया जाता है।
उपलब्धियां
गौ माँता, प्रेम व दया रुपी माँता
गौशाला से दिव्य सुगंध एक शुद्ध वैदिक अनुभव है और वैदिक पुनर्जागरण को पुनर्पुष्ट करती है। गाय को कुछ भी दिया जाय सदैव सर्वोच्च ऐश्वर्य प्रदान करता है। दिव्य गायों के उपहार और प्रेमाभाव के साथ उसकी सेवा से बढ़कर कोई दूसरा बड़ा उपहार हो नही सकता है। हम प्रतिबद्ध हैं किः
t 1000 गायो की एक विशाल गौशाला का निर्माण। विशसं रचना का निर्माण करके 'कामिका' आगम में वर्णित वैदिक निर्देशो के अनुसार गायो को आनन्दमय वातावरण उपलब्ध कराना।
t अमानवीय वध से गायो को सुरक्षित करना। गायो की सुरक्षा परम धर्महै, क्योंकि गाय सनातन धर्म का शाश्वत मूल हैं।
t दग्धु , गौतीर्थ, गोमय, घी और दही से पंचगव्य उत्पादों का प्रचार-प्रसार करना। इनमें अनंत सात्विक लाभ होते हैं। वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि गायो के उत्पाद अन्य औषधियों से ठीक न होने वाले अनेक मानसिक-शारीरिक विकारो को ठीक करते हैं।
t मानवता के बीच गौशालाओ के निर्माण हेतु जागरुकता का प्रसार करना।