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Prem Ki Samajh
Hindi

Prem Ki Samajh

SPH Nithyananda Paramashivam

KAILASA's Nithyananda Hindu University

1 Chapter38 SectionsISBN 979-8-88572-095-3

जब आत्मन की रोशनी बुद्धि को भर देती है, बुद्धि पर ऊर्जा की बरसात होती है-और प्रज्ञा में बदल जाती है। **Page Number:** 5 जब आत्मन भावना के द्वारा कार्य करता है, भावना शुद्ध होती है और विश्वास के रूप में व्यक्त होता है । और जब आत्मन स्व का स्पर्श करता है, तो अन्तरात्मा प्रेम के रूप में खिलती है । अंततः चेतना के चरम रूप में खिलने को प्रेम कहते हैं । यहाँ हमारे पास मौजूद अंतिम संभावना है । प्र. क्या हम सभी एक ही तरह से प्रेम करते हैं, या प्रेम के अलग प्रकार हैं? प्रेम केवल एक ही होता है, परंतु उसके

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