37. हदय ्कटीकरण की सस्ि
# हदय ्कटीकरण की सस्ि




्या ् ुनयता से भी क ु छ सजन ्कया जा सकता िै? ृ
हाँ, परमहंस तनतयानंद के अनुयातययं कहतं है, िो सािी है रततददन असंभ्ता को संभ् होते देखने के , तनतयानंद धयानपीिम के व्श्वयापी ्ैददक मंददरं मं। अनधगनत भ्तिन सािी रहे है असंखय पव्् ्सतुओं के चमतकारी रकटन के , व्भूतत (पा्न भसम) से लेकर मधु, मणण से छोटी मूततणयाँ तक का पदाधथणकरण, ्ैददक मंददरं या उनके घरं मं - यह सब संभ् होता है परमहंस तनतयानंदिी के ददवय्चन से रकट मा्के ्ल एक आशी्ाणद के श्द से। भली भांती रलेणखत और बहुत बार ्ीडडयो्ाफ करी हुई, यह सपषट रतीत होता है कक इन असाधारण ् अ्द ु रहसयमय घटनाओं की न तो एक ओर उपेिा की िा सकती है और न उनकी सपषटीकरण ककया िा सकता है।
ऐसे सैकिं चमतकारं मं से िो भ्तिन अनुभ् कर रहं है, के ्ल कुछ यहां उजललणखत है - उन सभी पदाथं का तनतयाननदिी के घोषणा करते ही कक ्े सब पदाथण रकट होएंगे, ममनटं या घंटं मं रकटन।
पदाधथणकरण और ्ैददक व््ान
्या पदाधथणकरण के ्ल ्धा ् ्धा्ानं की एक अमभवयज्त से अधधक और कुछ नहीं? ्या यह धोखा, िाद या व््ान है?्या यह ्ासतव्क सतय है? ू आि भी व्श् मं ्ै्ातनक समुदाय के अततउततम ददमाग भी इन घटनाओं की वयाखया करने मं असमथण है िो ९००००-्षं की पुरातन कालीन ्ैददक परंपरा मं ददन-रततददन की अतत साधारण घटनाएं है, ्ह सनातन परंपरा जिसका रतततनधधत् परमहंस तनतयानंदिी करते हं।
्ैददक रहमाणडीय व््ान के अनुसार, हमारे रहमांड का सिन स्यं ह ृ ुआ था भग्ान रहम की मनोशज्त से। ् पव्् शास् ्नथ 'योग ्ामशषि' ्णणन करता है कक कै से अतयधधक उननत योगी अपने मनोशज्त से ्सतुओं का सिन कर सकते ह ृ ं, मसध अंतदणशणन ए्ं यौधगक सिनातमक ृ शज्त के एक दलणभ संयोग से, जिसे 'राकामय' की सं्ा ु दी िाती हं। 'राकामय' अषि महाँ मसवधयं (८ महान ददवय यौधगक शज्तयां) मं से एक मसवध है, िो कई िनमं के यौधगक साधनाओं से ए्ं ईश्र कृपा से ही मसध होती है।
दभाणगय ्श, यह असाधारण व््ान आि मान्ता के ु मलए पूणणतः लुपत हो गय हं ं। अब तक, कुछ ही दलणभ ु वयज्त रहे हं िो ्सतुओं के पदाधथणकरण मं समथण है िैसे पव्् व्भूतत को स्यं के शरीर से रकट करना या उन ्सतुओं मं रकट कराना िो उनकी ऊिाण छव् का ्रन करती है। पर परमहंस तनतयानंद िी ्ादरतत्ाद से परे आि धरती पर एक ही सा्णितनक ूप से िाने वयज्तत् हं िो ऊिाण से पदाथण का रकटीकरण, के ्ल कुछ ही ममनटं मं, करने की मसवध धारण करते है। यह पदाधथणकरण हिारं मील दर बैिे लोगं के शरीर म ू ं रकट
होता है, िहां स्ामीिी और कुछ रयोग नहीं करते के ्ल स्यं की अकलपनीय योग शज्तयं के अला्ा। ऊिाण ए्ं पदाथण के पररमाणं के बीच सरलता से व्चलन करते हुए, तनतयानंदिी ्ायु मं अणुओं को वपजणडत (सङघद्त) और अवपजणडत (अङघद्त) कर, सिन ् व्लीन कर और ृ व्व्ध ्सतुओं के पदाथं का पुनः सिन करते ह ृ ं िैसे की पतथर, करसटल और िैव्क रसायान। यह मानय है कक उनहंने १०३ कीमती ्सतुओं का पदाधथणकरण ककया है के ्ल एक ददवयशरीरर (ऊिाण का माधयम वयज्त) द्ारा, कुछ ही धंटं के अनतराल मं। इनमे से एक भी धातु का तनमाणण करने हेतु रकृतत माँ को हिारं ्षण लगे हंगे। परनतु तनतयानंद स्यं यह सपषट करते हं कक चमतकार नाम की कोई भी ्सतु नहीं है। सभी तथाकधथत चमतकार संपूणणत: ्ै्ातनक घटनाएं हं िो राकृततक तनयमं पर आधाररत है , जिनहं हमं अब तक पूणण ूप से समझने मं समय है।





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