25. माइटोकॉजनियल अधययन:
# माइटोकॉजनियल अधययन
पहला रयोग ५० ्षण से जयादा आयु के २० आई.ए. रततभाधगयं ए्ं २० बबना आई.ए. ककये हुए रततभाधगयं पर ककया गया | माइटोकॉजनियल गततव्धध के मा्ातमक परख को मापने के मलए एम.टी.टी. परख तकनीक का उपयोग ककया गया था। सभी स्यंसे्कं के र्त के नमूने पहले ददन और २०्ं ददन पर मलए गए | पररणामं के अधययन समूह मं

सांजखयकीय महत्पूणण म ा इ ट ो क ॉ ज न ि य ल गततव्धध और कोमशकाओं की वय्हायणता मं 1000 से अधधक रततशत ्वध का रदशणन ृ ककया। माइटोकॉजनिया वयज्त की कोमशकाओं

के मलए बैटरी या ऊिाण उतपादकं की तरह हं। ्े हर कोमशकाओं की िीव्त गततव्धधयं को बनाए रखने के मलए ऊिाण के उतपादन के मलए जिममेदार हं।
वयायाम और एलोपैधथक द्ाएं मानक तरीकं से लगभग 30% तक माइटोकॉजनियल गततव्धध मं सुधार कर सकते हं। माइटोकॉजनिया ितत के मलए अततसं्ेदनशील है, और एक ितत्सत माइटोकॉजनिया कोमशकाओं के नुकसान, उर ब़ने ए्ं अंततः रतयु का कारण बनता है| माइटोकॉजनिया को सीधे इंसान की उर ब़ने की रकरया से िोिा गया है।