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19. सा्णभौम सतयं का रकटीकरण

# सा्णभौम सतयं का रकटीकरण

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लाखं लोगं के िी्न के एक रेरणा शज्त ्ोत, परमहंस तनतयानंद स्ामीिी मं अपने श्दं मं तनदहत अनुभ्ं को ्ोताओं तक पहुँचाने की अ्त ु िमता है। स्ामीिी के ्ान रदान करने की व्लिणतनय शैली सभी ्गण, धमण ए्ं समाि मं रशंसकं द्ारा बहुचधचणत है। उनमं आधयातम को लोगं के तनकट लाने की और लोगं को आधयातम के तनकट लाने की अ्त कला है। उनके सतसंग, ु सा्णितनक र्चन ए्ं धयान मशव्र मं भाग लेने ्ाले हज़ारं लोगं का मानना है कक उनहं िी्न दशणन, शारीररक ् मानमसक धचककतसा और रमाणणक आधयाजतमक अनुभ् रापत हुए हं, जिसके कारण ्े अपने ददनचयाण को अधधक आनंद ए्ं उतपादकता से वयतीत कर सकते हं।

परमहंस तनतयानंद िी समपूणण व्श् का व्चरण करते हुए बहुव्शय िैसे धयान, मान् चैतनय, स्ासथय ए्ं कलयाण, योग, उततरदातयत् ए्ं ईश्रत्, व्श् के धमण तथा राचीन दहनद शास् ू पर र्चन ् अनुभ्ी उपतनषद रदान करते हं।

परमहंस तनतयानंद िी ने ्ैददक संरदाय के कई बिे ए्ं छोटे ्ंथं मं तनदहत गूहय रहसयं को उिागर ककया है। इनमे सजमममलत है क्ीसंतं द्ारा रधचत भज्त शलोक तथा मश् सू्, िैन सू्, योग सू्, भग्दगीता, रमनाररन आतम व्िाई, व्नायगर अग्ाल, तं् शास् और उपतनषद िैसे की ईशा्ासय उपतनषद, किोपतनषद और के नोपतनषद।

उनहंने भारतीय इततहास पुराण िैसे रमायण ए्ं महाभारत, समुि मंथन, सनातन धमण और मंददरं ए्ं कमणकांडं की महतता के बारे मं ््तवय ददए हं। उनके आधयाजतमक र्चनं को सुनने ्ाले ्ोतागण सदै् ही स्णभोमय रहे हं। उनमे कॉपोरेट अधधकारी, कफजिमशयन, शोधकताण, यु्ा, बचचे, छा्, आधयाजतमक साधक और आमआदमी शाममल हं।