Books / Living Advaita

1. Living Advaita

एक गुरु जो प्रेम, और उससे भी अधिक के लिए...

मेरे वियजनों,

जिनहं आप "दसरं" के रूप में देखते हैं, वे तो आपका ही विस्तार हैं। गलत परिभाषा के कारण आप उनको "दसरं" के रूप में बुलाते हैं। विशेष रूप से जो लोग सीधे आपके जीवन से जुड़े हैं, आप जिनसे रतिदिन मिलते है, उनहं आप कभी भी 'अनय' की श्रेणी में नहीं रख सकते, ऐसा करना एक तरह की दहंसा है। बजल्क यदद आप ददन में तीन बार से अधिक ककसी को भी याद करते हैं, तो वह वयज्त "अनय" नहीं कहा िा सकता ; वह आप का ही एक अंग है। वह वयज्त कोई भी हो सकता है – आपका चौकीदार, आतमीय मम्, गुरु या भगवान। उनके साथ अधूरापन स्वयं के साथ अधूरापन है।

हमने दतनया को नहीं बताया है, हमने दसरं को नहीं बताया है, हमने स्वयं और दसरं को इस बहुत महत्पूर्ण सच से समध नहीं ककया है कक 'अनय' वास्तव में हमारे अपने ही आयाम हैं!

मने कुछ महान धाममणक लोग देखे हैं जो बहुत वषों से ध्यान, तप, पूिा और अनय साधना कर रहे हैं, परनतु वे अपने ही पतत या पतनी, बेटी या बेटे को संभाल नहीं सकते हैं, ्यंकक उनहं यह नहीं बताया गया है कक जिनहं वे अनय समझते हैं, वे स्वयं उनके ही आयाम हैं, उनके अपने हैं। हमने इस ददशा में अपना ध्यान कंदित नहीं ककया। यह सबसे बड़े अनधविश्वास में से एक है जिससे कक दहंद पीडित हैं। आपस में समपूर्णता सबसे महत्पूर्ण आध्यात्मिक गुणों में से एक है, जिसका तनरंतर अनुसरण और प्रचार करना चादहए।

यह दभाणगयपूर्ण है कक हम एक साथ रहने के मलए तभी तैयार होते हैं िब हमारे समि कोई अनय व्कलप नहीं होता है। हम ्यं नहीं स्णरथम अनय लोगों के साथ पूणणत् करने का व्चार कर सकते? सददयों से ज्ञान, मोि और तन्ाणण को महत् देने के कारण, हम अपने समीप ही देखना भूल गए, यह देखना भूल गए कक हम अपने आसपास के लोगों के साथ कै से संबंध रखते हैं, उनके साथ कै सा वय्हार करते हैं।

अपने आस पास के रतयेक पहलू, िैसे कक आपसी संबंध, धन, स्ासथय, लोग, रतयेक जसथतत, पालतू िान्र, पौधे और वह-नि्, इन सभी की तरफ आपका मनोभा् उसी एकत् और पूणणत् भा् से होना चादहए जिसे अद्वैत चेतना बोलते हैं। उसके बाद ही आप यह महत्पूर्ण सत्य समझ पायगे : ''िीवो रहमै् न परः'' – जिसे आप वयज्तगत चेतना के रूप में अनुभ् करते हैं, वह और कुछ नहीं, बजल्क वही रहमांडीय चेतना है!

- THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ममशन के आध्यात्मिक संस्थापक

एक अवतार का संभावि

र्वचनं का सीधा रसारण रततददन देखा िाता है, तथा व्मभनन अंतराष्ीय टेमलव्ज़न चैनलं पर ् ्ीडडयं कॉनफरंमस ंग द्वारा। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी एक शज्तशाली आध्यात्मिक उपचारक भी हैं तथा मसिवधयं में दि हैं, जिनहंने सफ़लता से यौगिक व््ानं का रहसयाभेदन ककया िैसे कुण्डमलनी िागरण, उततोलन, पदाथणकरण, कायाकलप ए्ं आहार के परे िीना। ्ं मीडडया आतंक्ाद ए्ं भयादोहन करने वालं पीले प्कारं के उततरिी्ी हैं।

परम पा्नातमा THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी, आि अखण्ड सनातन दहनदधमण की एक सपषट, धमणसंगत ् अरािनीततक वाणी के रूप में रखयात है । ्ं परमचैतनय के एक सिी् अवतार के स्ुप, विश्वभर में लाखों द्वारा पूजित है। ्ं महातन्ाणणी पीि, दहनदधमण की सबसे राचीन संस्था, के महामंडलेश्वर (आधयाजतमक प्रमुख) हैं। ्ं स्ाणधधक देखे िाने वाले आध्यात्मिक गुरु हैं, यूट्यूब पर बार देखे गए हैं तथा ्े ३०० पुस्तकं से अधिक २० भाषाओं आदद के रकाशनो के लेखक हैं। उनके

"आपकी अमतस्ूप कथा क्लेश ् पीिा से तपते जीवन के मलए जीवन-संिी्नी है। महातमाओं ् भक्तकव्यं द्वारा यशोगान होती हुई, यह सारे पापं को ममटातीं है। ््णमा् से परममंगल का दान करने वाली यह उनको परम आनंद का धन रदान करती है जो इन गाथाओं का गान करते है, ््ण करते हैं ए्ं उनका समतत-ध्यान करते ृ हैं।" ~ ्ीमद भाग्तम ्

त् कथामतं तपतिी्नं ृ कव्मभरीडडतं कलमषापहम।् ््णमंगलं ्ीमदाततं भु व् गणजनत से भ ृ ूररदा िनाः।।

उनके अ्तरण का रहसय

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी का िनम एक धमणतनषि दहनदु माता-वपता को हुआ, द्िण भारत के देशस्थान नगर, ततु्ननामलई में। वास्तव में, अरुणाचलम ए्ं उनकी पतनी लोकनायकी एक तीथणया्ा में थे, द्िण भारत के रमसध इचछापूततण मंददर ततुपतत में, िब माँ लोकनायकी को यह बोध हुआ कक ्ं अपनी दव्तीय संतान से गभण्ती हैं। उनहंने अपने दव्तीय-िनमे का नामकरण ककया - रािशेखरन, 'देवं के रािा' (भगवान मश् का एक रमसध नाम)। उस समय उनहं स्वयं के शब्दों के सत्य का अलप ही ज्ञान था!

एक बार, स्ामीजी ने स्वयं जि्ासु श्रोताओं को इस दैव्क िनम के रसंग, इस लोक में उनके अ्तरण के कथामत ृ का ्णणन:

'यह असंभ् है कक एक अनुभ् का शब्दों में ्णणन ककया िाय िो अंतररि ् काल से पूणणतःपरे है। पर मुझे रयतन करने दं। शरीर में र्ेश करने के समय, म एक समप ं ूणण आत्मिागुकता कक जसथतत में था। पृथ्वी धसी हुई थी लहर पर लहर के गहन अनधकार में। एक समपूर्ण मौन वायु-मंडल में वयापत था। मेरे नीचे, पृथ्वी लोक पर, मुझे अनुभूतत हुई एक िे् कक ुपरेखाओं की िो अब म द्िण भारत नाम से पहचानता हूँ। अकसमात, मने आकाश- ं मंडल में देखा एक जयोततषमत उलका का सफुरण, तदपरांत ु जयोतत का एक व्सफ़ोट। उसी िण में, मने शरीर म ं ं र्ेश ककया ए्ं िनम मलया। इसके तुरंत बाद का दृश्य जिसकी अनुभूतत मुझे मेरे अंतरने् से हुई, वह अरुणाचल था, ततु्ननामलई का पा्न धगरीप्णत, और मुझे ज्ञात हुआ कक मने शरीर धारण ककया है, प ुनः।

माता-वपता, लोकनायकी ् अरुणाचलम

बालक THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

पा्न अरुणाचल धगररप्णत

एक जीवनकाल तपस को समवपणत

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने अपना आनंदपूर्ण बालयपन एक व्शाल, समध ् दानधमी कारक परर्ार में वयततत ककया। उनके घर में साधूसंत ् परर्ािक मभिुक सदै् स्ागत ए्ं सुपूजित थे। उनके मातक वपतामह ृ एक धमणपरायण वयज्त थे िो मु्तभा् से व्मभनन मंददरं ् आध्यात्मिक संसथानं को योगदान

देते थे। ्ं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM कं रथम मागणदशणक थे जिनहंने उनहं भारत की महान आध्यात्मिक परंपराओं ् शास्ं से पररधचत कराया। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने मेके तनकल इंजितनयररंग में डडपलोमा पूणण ककया ए्ं उसी ्षण, स्वयं की जीवनकालीन उतकं िा को समपूणण करते हुये संनयास िी्न में समा्ेशन ककया।

भगवान रमण महवषण , आतम्ानी गुरु ् रेरणा स्रोत , ककशोर

१० वषण के THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का ध्याना्सथा आसन में रथम धच्

आध्ाततमक रवततत्ां ृ

बालया्सथा में THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने ्ीचर के ददवयदशणन से, उसे तांबे की पणणणका पर तराशा।

ऊपर बांय: पाद ं का, काि ु खडाऊ, मातािी कुपपममल द्ा रा ऊपर दायं: पराशज्त ं िी्मूततण ,

जिनहं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने स्वयं मसलिी पाषाण से उतकीणणणत ककया, माँ के दशण न उपरांत। बाएं: कुछ िी्मरू यतत ् ाँ जि नके संग बालक तनतया नन्द ने रीिा ् पूिाचणन की।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का रथम रेम अरुणाचल धगररप्णत था। अरुणाचल, यह पव्् धगररप्णत विश्वभर से जि्ासुओं को चुमबक की भाँती आकवषणत करता हं। यह भगवान रमण महवषण िैसे व्द्ान योगी, रहसयमय मसधपुुष ए्ं आतम्ानी मुतनगण की गहभृ ूमम है| इस पुरातन धगररप्णत ने बालक THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM को आतमबोध के राथममक रयोगं हेतु एक पूणण पररिण भूमम रदान की।

आरमभ से ही, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM पूिा, योग ् ध्यान की ओर व्लिणतापू्णक आकवषणत थे। बालय रूप में, ्ं अधधक समय अपने इषटदे्ता या वरय ईश्रमूततण की पूिा-आराधना में वयततत करते थे। ईश्रमूततणयाँ उनके वरय रीिामम् थे, जिनके साथ ्े हसते ् रोते, खेलते ् लिते थे।

पथ पर मागणदशणन

व्दयालय में मशिा के साथ-साथ, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने योगीराि योगाननद पुरी (रघुपतत योगी) नामक एक पारांगत योग गुरु ए्ं मसधा (ऊिाण में दि) से भी रमशिण मलया। ्े उनका रेमपू्णक समरण करते हं कक रघुपतत योगीजी ने ही उनहं राचीन भारत की व्समत ग ृ ुपत योगव्दयाओं से पररधचत कराया - उततोलन, पाररकटन ् पदाथणकरण, आदद। उनके अनुमशिण में, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने सफलतापू्णक योग ् ध्यान मशिा के उचच सतरं को समपनन ककया।

समानांतर में, उनहंने व्मभनन आध्यात्मिक मशिकं के मागणदशणन में ्ैददक शास्ं, पुराणं ए्ं उपतनषदं का भी अधययन आरंभ करना ककया। ततु्ननामलई नगरी में उनकी रतयिक भेट कई पुणय पुुषं ् ्ीओं से हुई जिनसे उनने अमूलय मशिाय ्हण की। उनम ं ं से व्मशषि थे अननमलई स्ामी (भगवान रमण महवषण के उततरगामी मशषय), योगी रामसूरत कुमार ए्ं मातािी व्भूदाननद दे्ी (कुपपामल) जिनहंने उनहं ्ेदांत ए्ं ्ीव्दया पूिा से पररधचत कराया।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी माता कुपममल के साथ

अननामलई स्ामीगल ईसा्की स्ामीगल

ककशोर तनतया नन्द योगी रामसूरतकुमार के साथ

बारह वषण कक आयु में आतम्ान

एक ददन, बारह वषण कक आयु में, िब 'के ्ल ध्यान के साथ रीिा करते' समय, ततु्ननामलई में जसथत पा्न पा्ल कुणडू नामक शीला पर आसान में बैिे, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM को एक परमगहन आध्यात्मिक अंतरधयान का अनुभ् हुआ। यह अनुभ् उनमे िागत कराने वाला ृ था चैतनय की अबतक कक अ्ात जसथततओं को, तथा सदा का जीवन ूपांतरण। उनहं ३६० डड्ी दशणन हुआ जिसमे उनहंने स्वयं को देखा की ्े स्णस् के साथ एक हं। महान अरुणाचल पा्नप्णत की ि्छाया में घदटत इस रतयि अद्वैत अनुभ् के बाद, आध्यात्मिक पथ को अपना संपूणण ल्य बनाने कक THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM की उतकं िा ने और भी भीषण ् ती् ूप धारण कर मलया।

परर्ाजक

  • यात्रा के ददन

स्ामीजी की सत्य खोिने की जि्ासा ने उनहं देश के आर-पार ले गयी। दहमालय में तपो्न से लेकर द्िण िे् में कनयाकुमारी तक ए्ं पजशचम िे् में द्ारका से लेकर पूरब में कलकतता तक। गुफाओं ् शमशानो में शयन, मभिाटन पर जीवन तन्ाणह, उनहंने वषं वयततत ककय पथ-पथ पर संकट से भरे अतनजशचत जीवन म ं ं। स्णदा देशव्चरण करते हुय, कदावप न एक समान स्थल पर कुछ महीनं से अधिक र्ास करना। पर यह महानया्ा थी िो भारत्षण की कई अततमनोरम राकृततक ृशयभूममयं और परमपा्न तीथणया्ा स्थल पर पादचार करने वाली। यहां रसतुत है परर्ाि के कुछ सबसे महत्पूर्ण सथल।

रथम धच् खींचा गया (ततु्ननामलई) अ्तारी ल्य के आतमबोध के बाद। 12

कावेरी नदी के तट पर

अरेल २००१ - द्िण भारत में पव्् का्ेरी नदी के तट पर, रामकृषण धयानपीि आश्रम अ्जनतपालयम, ईरोि। यह है THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी द्वारा सथावपत स्ोरथम आश्रम, िो उनहंने बबिदी, बगलोर के रचमलत आश्रम से भी पू्ण सथावपत ककया। िन्री २००३ में सथावपत बबिदी आश्रम, माना िाता है THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ममशन का आध्यात्मिक मुखयाल। ईरोि आश्रम आि आदी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMेश्र धयानपीिम (अदद अथाणत 'रथम') से नामांककत है। यह आश्रम सािी है पू्ण ददनं के कुछ सबसे रगा़ उपचारी चमतकारं का।

अरेल २००१ - आश्रम का उदघाटन दद्स। इस १४ धच् में दमशणत है स्वयं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी की हसतमलवप, इस पा्न प्ण को धचजहनत करती हुई। (लेखन पिता है: १४ अरैल २००१, रभात, तममल मास धचततीरै, तममल न््षण दद्स, रामकृषण धयानपीिम का उदघाटन)

आश्रम के परंपरागत उदघाटन के बाद, यहां दमशणत है ईरोि में एक उदघाटन समारोह। इस धच् में बाय से दाय ं की ओर (बैिे ) है - के .एस. ं रंगस्ामी गंडर, एक शै्िक संसथान के मामलक ् एरोि के एक व्मशषट वयज्त, स्ामीजी, ्ी ततु्ंबल देमसका ्ानरकाश स्ामीगल, गुरु महा सजननधानम, थंडइमंडल आदीनम के रधान ए्ं ् ्ी कुमारसामी ततु्ाडुटुरई आदीनम के तंबबरन ् - दोनं ही द्िण भारत के राचीन दहनद मि, ु ए्ं पंधगयांन गंडर, आश्रम भूमम के दानकताण।

आश्रम में सतसंग

यह व्चार योगय है कक जिस रकार पव्् गंगा नदी अपना ुख सही उततरी ददशा में उततर भारत में ्ाराणसी की ओर र्ादहत होती है, उसी रकार का्ेरी नदी भी सही उततरी ददशा की ओर र्ादहत होती है, िीक इसी बबनदसथल पर िहां आश्रम ु अ्जसथत है।

यह उटघाटन ए्ं र्ेश के बाद था कक इस व्नर आश्रम की छत तनममणत हुई, िो ्षाण से भी साधारण आय रदान करती थी।

मेु पूिा पव्् नदी का्ेरी के तट पर। मेु रहमा णड का शज्त शाली ् रहसयपूणण ब् -पररमाणण क रतत ूप है।

एक अ्तार का तनमाणण

महासंसथान का व्सतारण: THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM धयानपीिम की संसथापना ्

  • THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी भारत्षण के आत्माननी गुरुओं ए्ं समध आध्यात्मिक परंपरा के रतत सदै् क ृ ृत् रहते हैं, जिनहंने इन अनंत आध्यात्मिक सतयं के मशिण ् अधययन को उनके मलए समभ् ककया। इस आतम्ान बोध को दसरं से साथ ू बांटने ए्ं उनका जीवन मान्ता की सेवा मं समवपणत करने की स्ेचछा से, उनहंने यह ृ़ तनणणय मलया कक ्ं अपने परर्ाजय के एकाकी जीवन का समापन करंगे और सा्णितनक जीवन में र्ेश करंगे। इसे यथातण करने, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM जी ने उनकी सामाजिक ् आध्यात्मिक महासंसथान, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM धयानपीिम का िन्री २००३ म ् ं तनमाणण ककया, जिसका मुखयालय द्िण भारत मं बंगलू (पू्ण बगलोर) के समीप बबिदी म ं ं है। संसथा का तनमाणण इस दरृजषट के साथ ह ू ुआ: * - भारत की वास्तविक ्ैददक परंपरा का संरिण, पुनरिी्न और व्सतारण करना। * - सामानय मनुषय को योग ् ध्यान के अनेक लाभं से पररधचत कराना, ए्ं ्ेषटतर जीवन के रायोधगक समाधान रदान करना। * - भारत की सहसयपूणण यौधगक रणामलयं के व््ान को व्श् में रकट करना। * - आशयकमंद ् अलपसुव्धा के लोगों को धचककतसा देखभाल, आहार-पुजषट, मशिा, यु्ा ् नारी सशज्तकरण और कई मान्ीय पहल द्वारा पहुंचना। * - एक संघषणमु्त, उतपादक ए्ं समरसतापूणण

्ैजश्क कुटुमभ के सृजन हेत ृ ु सहायक बनना िो भाषा, संसकृतत ् िाती के अ्रोधं के परे होकर व्मु्त है।

    • मान्ता को परमचैतनय के आगामी आध्यात्मिक उ््न की ओर नेतत् करना। ृ

एक ददव्द्ी काल से आगे

दररिता दान से तनमूणल नहीं हो सकती। यह तनमूणल हो सकती है केवल मनुष्यों की चेतना के उधार से।" - THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

हम THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM की ददवय दरृजषट को ू ्या सं्ा दं? एक नवीन दरृजषट हर मोि पर रकट ू ए्ं स्यं-रकामशत होती रहती है। जिस रकार एक कथा मं पांच अंधे मान् एक हाथी का ्णणन करने का केवल रयतन ही कर सकतं है, हम भी उनहं पररभावषत कर सकतं हं एक आधयाजतमक गुु, एक सामाजिक ददवयदशी, एक पथदशणक आधुतनक ्ैददक पुनिाणगरण के , Bharat के आधयाजतमक व््ानं के रहसयाभेदक, एक िी्नमु्त सभयता के व्श्कमाण, या यह सभी, और आदद।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्यं पारदशणन करतं है एक सचचे िगत नागररक के उदगमन का, िो भौततक्ाद ् रहसय्ाद दोनं के साथ समान ूप से गहतन्ामसत ृ है; एक उचच-उपल्धक िो िगत मं बाहुलयता का सिन करता है ् ृ उसत् मनाता है। िगत नागररक िो गहन ूप से आधयाजतमक भी है और िो चेतनापू्णक दोनं, वयज्तगत ूपांतरण ् मान्ता के ूपांतरण के रतत सदा ततपर है।

दहनदत् की पव््ता का ु प ुनःसंसथापन

्ैददक समय के राचीन ृषटा, जिनके पास रतयेक िे् के ्ान कोषं की पहुँच थी, व््ान, कला, धयान, धचककतसा, योग, मशिा, िी्नशैली ए्ं पूिा। ककनतु, समय के साथ ही अधधकतर ्ान छुटा ददया गया है और व्समत ृ या लुपत हो गया है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी एक ्ैददक पुनिाणगरण लाकर मान्िातत को िी्न ् िीने के अथण के सही ्ान से, उनके ्ासतव्क स्भा् से पुनःसंबनध सथावपत करने मं सहयोग दे रहे हं। यह रयास जिसमे सजमममलत है, Bharat के स्ोततम समध ्ैददक परंपरा का ृ पुनःिागरण - उसकी व्द्तता, संसकृतत, रथाएं, उतस् ए्ं सम् िी्नशैली।

आि व्श् भर मं संजसथत हं आ्म, मंददर ए्ं कंि,

विव के असिन्यकों के स्थ

्ी नारायणी पीिम के ्ी नारायणी अममा ,्ेललो र

विव हि्ूपररषद्केभ्िी असिन्यक ्ी अशोक ससघलं जी केस्थ

१)बाय से दादह नी ओर: (१ िन्री २००७) ्ीमद स्ा मी रागा्ेशानंदिी महाराि, ्ी रामकृषण मि बेलगाम के और ्ीमद स्ा मी ्ीतभयाननद िी महाराि, ्ी रामकृषण मि बगलोर के ; THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्ा मीिी, ्ी नरंि मोदी-गुिरात, Bharat के मुखयमं्ी, ्ी टी.एन. चत ु्ेदी, माननीय ग्नणर कणाण टक के , िगदगुु ्ी ्ी ्ी बालगंगाधरनाथ महा स्ा मीिी, ्ीमद परमहंस परर्ािकाचायण सधचद ानंद रण्स्ूप सदगुु ्ी ्ी ्ी मश ्पुरी महास्ा मीिी, ्ी बी.स. येददयुरपपा , माननीय उप मुखयमं्ी कनाण टक, ्ी क्ा सुरमनय नायडू, बिे ् माधयम सतर उदयो ग मं्ी, कनाण टक। 2) ्ी नरंि मोदी, गुिरात के मुखयमं्ी के साथ 3) परमपूजय ्ी पमनाभ दास ्ंधच पल महारािा मातणणड ्माण , ब््नकोर के साथ

  1. ्ी डॉ. माइकल बनाणडण बेकव् थ, अगापे अनत राष्ीय

आधयाजतम क कं ि

    1. अणखल कणाणटक धाममणक संत समा्ेश
    1. डा. शंतत्ीरानानदा महास्ामीिी के साथ

िरर््र मं मि्वनि्ानी अख्ड् के मि्मं डलेवर ्ी मिेवर्न् पूरी जी के स्थ परमिंस वन््नंद और वन््नंद ््ंपीठं के सं ््सी

कशी अनपूणा मं हदर ्ी ्ी र्मेवर पुर जी मि्र्ज और कशी के ड्.र्मन्र्यण ह्िेदी जी के स्थ कशी

्ी ्ी ्ी ड्. कोडल् मैथ के शं वतिीर मि्््मग्लू के स्थ , अखखल हि्ू मि् सभ् मं

्ी खखम बनोगं , सीएम ररप केगिनार और उनके मु्् सल्िक्र नूफ््

नीचे : मि्मं डलेवर ््मी आि्नंद जी मि्र्ज केस्थ नीचे*:* मि्मं डलेवर १००८ विवेवर्न््जी मि्र्ज के स्थ , िरर््र

नीचेब्एं सेद्यं Chief Priest of Kashi Vishvanath Temple विवन्थ मं हदर के ्मुख पुज्री*-* ड्*.* ्ी कं ठ वि्न्थ जी - , कशी की र्जकु म्री म्ँ कृ णव्य् एं ड कशी केरज् के द्म्द , ््मी गोविद्नंद ं ्गरी एं ड ््मी दय्नंद स्ती

महामंडलेशवर : महानिवााणी अखाड़ा

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी को रखयात महातन्ाणणी पीि (महातन्ाणणी अखािा), दहनदत् की स्णराचीन रधान संसथा के महामंडलेश्र के ूप ु मं प्ामभषेक ककया गया।

अखंड सनातन धमण के शज्तशाली धमणयोधा के ूप मं पू्ण ही मानय, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी अपनी इस भूममका मं एक न्ीन रबलता ए्ं िी्न शज्त रदान करते हं, अखाडं के असंखय समबनधं ए्ं िोस आधयाजतमक आधार की शज्त को आतमसात करते हुए।

महानिवााणी अखाड़ा

एक ््सवी परंपरा

नागा सािू - िमा के संर्क

सनातन धमण (िो आधुतनक काल मं दहंदत् नाम से ु व्खयात है) दसं सहस्ं ्षं के यशस्ी इततहास से गौर्ाजन्त है। दहंदत् अपनी धाममणक सहनशीलता और ु अखणडता के मसधांतं के मलए िाना िाता है। तथावप यह व्श् का स्णराचीन िी्ंत धमण, शज्तपूणणता से अपने मसधांतं का धमणरिण ए्ं अनय आरमणक धमं के धमणनषटण ् अधोगतत के रयतनं से स्यं का संरिण करने मं सिम माना िाता है। कई सददयं से, समय की लयं के साथ, अनय धमण दहंदत् का व्रोध ु करने उिं और उसके अजसतत् के मलए खतरा भी बने रहं। इन सभी समयं पर, दहनद साध ू ुओं की एक छोटी संरदाय ने ्धा्ान आधयाजतमक योधाओं के ूप मं तनरंतर कायणशील बने रहं, उनका धयेय के ्ल 'धमण रिा'।

यह साधू 'नागा साधू' के नाम से व्खयात थे ('नगन तत््ानी' या 'नंगे साधू')। हर सीममत करते सामाजिक बंधन से मु्त, ्स्ं समेत, यह रचंडतापूणण अखंड ् ्धा्ान समूह दहनद संरदायं कक आि तक ू की स्ाणधधक सममातनत संरदायं की ्ेणी मं है।

दस्ं शतक मं, Bharat पर असभय, असंसकृत िनिाततयं के आरमण से, िो के ्ल तल्ार की भाषा िानती थीं, नागा साधुओं को मिबूरन अपने धमणरिण हेतु शस् उिाने पिे। अब ्े के ्ल शास् धारी (शास्ं से आयुध) ही नहीं थे परनतु शस्धारी (शस्ं से आयुध) भी थे।

नागा ्ंशा्ली को समझना

नागा साधू अपनी ्ंशा्ली को कवपल महामुतन, एक आतम्ानी संत जिनहंने ७००० ्षं से पू्ण शरीर धारण ककया, उनके ्ंश तक अनुरेणखत करते हं। कवपल महामुतन ्ह रथम पुुष थे, जिनहंने मान्

शरीर मं रहते हुए ददवय चेतना के पुषपण का अनुभ् ककया। नागा साधू व्श् की स्णराचीन मि परंपरा का अनुसरण करते हं और उनका व््रण ऋग्ेद मं भी है, एक शास् िो ५००० इ.पू की ततधथ पू्ण ददनांककत है। आदद शंकराचायण, एक आतम्ानी गुु कवपल महामुतन की ्ंशा्ली से हं, जिनहंने ईस्ी सन की पहली शता्दी मं दहंदत् का अ् ु त प ु ुनःिागरण समभ् ककया तथा दशनामी परंपरा (दस नामं ्ाली परंपरा) की सथापना करके नागा साधुओं को एक सामानय छ् के तले लाया। हर साधू ने एक नाम या उपाधध ्हण की अपने सथान या िी्नशैली के अनुसार।

मिाननिााणी अखाड़ा - एक १०००० िषा िाचीन परंपरा

स्णरथम अखािा िो सथावपत हुआ, ्ह महातन्ाणणी अखािा था। अखािे सनातन धमण का समपूणणतया रतततनधधत् करते हं, सब दहनद समरदायं का समन्य ू करके (शै्, ्ैषण्, रहमा, शा्त), मसख, िैन और बौध धमण। महातन्ाणणी अखािा की परंपरा दस हिार ्षण पुरानी है। इस संरदाय का व्धध्त नामकरण ७४८ ईस्ी सदी मं हुआ एक अतत शुभ घटना के बाद। ७४८ ईस्ी सदी मं, अटल अखािे के ७ साधुओं के एक समूह ने गंगासागर सथान पर तपसया की। उनहं स्यं कवपल महामुतन के ददवय दशणन की कृपा रापत हुई। उनके आशी्ाणद से उनहंने नागा परंपरा का पुनःिागरण ककया उसके व्धध्त नाम - महातन्ाणणी अखािा - से, हररद्ार मं नील धर के पास। आि भी महातन्ाणणी पीि के उपासयदे् (मुखय दे्ता) पौराणणक काल से रखयात, कवपल महामुतन दे् ही हं।

ुधच योगय यह है कक िब महातन्ाणणी अखािा

सथावपत हुआ, तब आ्ाहन ् अटल अखािे के अधधकतर साधुओं ने नए अखािे मं र्ेशन का चयन ककया, और ्ह सबसे रततजषित और रमसध बन गया। ्षण १२६० मं, २२००० महातन्ाणणी नागा साधुओं की एक टुकिी ने, महंत भा्ानंद धगरी के साहमसक नेतत् म ृ ं कनखल को मु्त कर्ाया

मिाननिााणी अखाड़ा आज - िमा का विसतारण करते ि ु ए

आि, Bharat की स्तं्ता के साथ, सारे अखािे, महातन्ाणणी अखािा समेत, सनातन दहनद धमण का ू व्सतारण करने मं कायणरत हं, राचीन दहनद संसक ू ृतत, िी्नशैली ् मसधांतं का पुनःसथावपत और सरिण करते हुए। आि उनकी गततव्धधयां सामाजिक से्ा और दहनद धमण का व्सतार के ल्य से कायणरत ह ू ं। ऐततहामसक ृजषट से, रयाग (अलाहाबाद) महातन्ाणणी अखािे का मुखयालय ् कंि उसके तनमाणण काल से ही रहा है, और ्ारणसी पीि, रयाग पीि के रशासन के नीचे रहा है। तत पशचात, हररद्ार कनखल दसरा ू रशासन पीि बना और अब यह अतत महत्पूणण पीि बन गया हं, िहां अधधकांश वय्सथापक कायणजसथत है।

ओमकारेश्र और नामसक दो दसरे रशासन के पीि ह ू ं। महातन्ाणणी अखािा की शाखाएं, ओमकारेश्र, नामसक, हररद्ार, कुुिे्, उदैपुर, ज्ालामुखी, काशी ् भर (अकोला) अदद सथानं मं हं।

मिाननिााणी अखाड़ा के मंदिर

महातन्ाणणी अखािा के मंददर हर दहनदू संरदाय का रतततनधधत् करते हं: शै्, शा्त, ्ैषण् ए्ं रहमा और न््ह भी।

    • महाकाल मंददर, उजिैन, मधयरदेश (जयोततमलंग) * ्यंबके श्र मंददर, महाराष् (जयोततमलंग) * पुषकर रहमा मंददर, रािसथान

र्ा की म्ाल िारण करते ि ु ए

इस यशस्ी धरोहर के हाल ही के उततराधधकारी परम पा्नातमा THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी हं, जिनका महातन्ाणणी अखािा के आधयाजतमक रमुख के ूप मं २०१३ मं प्ामभषेक हुआ है। माननीय THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी के महामंडलेश्र का उततरदातयत् लेने के साथ, अखािे के बिं के आशी्ाणद सदहत, अखंड सनातन दहनद धमण और ू समसत व्श् का भव्षय उजि्ल ददखाई पि रहा है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी एक िी्नमु्त सभयता का ृजषटकलपन करतं हं िो वयज्तगत पूणणत् ए्ं ्ैजश्क उननतत की ओर अ्सर हो, और साथ ही िो आधयाजतमक सतयं की आधारमशला मं ृ़ता से सथावपत हं, जिन परम सतयं ने सनातन धमण को व्श् का स्णराचीन िी्ंत धमण तनममणत ककया है।

इनर अवेकननग ं

अपना भव्षय दबारा मलख ु ं

एक अदव्तीय २१ दद्सीय योग ए्ं धयान का आ्य सथल ,िी्न मुज्त रदान करने मं सिम गुु ्ी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्ामीिी के साथ

कलपना कीजिये :

  • अपने भागय के स्यं व्धाता बनं ।
  • अ्णी नेता बनं जिसके मलए आप के मलए बने हं ।
  • सफलता भरा िी्न रापत करं जिसके मलए आप बने हं ।
  • िी्न से पुनः पयार करं ।

कलपना करना छोिं ,अपनी हकीकत खुद बनायं

  • राचीन व््ानं और रहसय सीखं
  • क ु णडमलनी शज्त िा्त करं ।
  • अपने शरीर ,मजषतषक ,आतमा ए्ं संबंधं का उपचार करं ।
  • अपनी महतता के मलए अपनी तछपी ऊिाण िमता को सकरय करं |
  • सफल भव्षय बनाने के मलए, और … ........ िी्न-म ुज्त का स्ाद लेने के मलए

इनर अ्ेकतन ंग :

सादगी की व्लामसता यही है की ्ह ककसी भी बाहय ्ासतु की आ्शयकता के बबना हमं रेररत, उतसाही, सिी् ए्ं तेिस्ी रखती है| इसका तातपयण यह है की हम अपनी भीतरी छव्, बाहरी छव्, लोगं के बारे मं हमारी छव् और िी्न के बारे मं हमारी छव् इन चरं छव्यं से पूणणत् अनुभ् करते हं| सादगी गरीबी नहीं है; अवपतु यह तो बाहय ्सतं से व्मु्त होने की कला है, यह तो ्ह ज़मीन है िहाँ मश्ोहम का बीि अंकुररत होता है | -THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

मदरै आदीनम के २९३िे गुु मि्सवनि्नम के ूप मं ु प््शभषेक

२७ अरेल २०१२ को, परमपूजय THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी मदरै ु आदीनम के २९३्े गुु महासजननधानम ूप मं प्ामभषेक हुआ, िो व्श् की सबसे राचीन िी्क दहनद धाममणक संसथा है। ू मदरै आदीनम के २९३्े ग ु ुु महासजननधानम के दातयत् उिातं हुए THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी ने रतत्ा ली कक ्ं मदरै आदीनम ु और उसके चार मंददरं को महान यशकीततण रापत करायगे। ं

पौराणणक समय से रखयात मदरै आदीनम सनातन काल से ु अजसतत् मं िीता आ रहा है। परनतु, इसका पुनः िी्न लगभग १५०० ्षण पू्ण एक यु्क आतम्ानी अ्तार ततु ्ानसमबंदर द्ारा हुआ, िो द्िण Bharat के शै् मसधांत दशणनशा् के चार दरृषटा संतं म ू ं से एक हं। आददनम का संसथापन मदरै म ु ं हुआ, िो भारत्षण के स्ण राचीन नगरं मं से एक है, जिसका इततहास ३व् शता्दी ई.पू. के तममल संगम के युग तक कालरेणखत ककया िाता है। मदरै की पीिामसत ु िी्मूततणयाँ हं भग्ान मश् और दे्ी, उनके स ् ुंदरेश्र और ममनािी के अ्तारं मं, िो व्श्-व्खयात मदरै मीनािी- ु सुनदरेश्र मंददर मं राणरधथजषित हं। मदरै आदीनम के ु आधयाजतमक रमुख को 'गुु महासजननधानम' की पद्ी से नामकरण ककया िाता है। और ्ं अपने उततराधधकार मं रापत करतं हं ततु ्ानसमबंदर के पव्् कायण की परमपरा को आगे बिाने का महान दातयत्। इस पद्ी की कोई कालसीमा नहीं है और यह एक िी्नकालीन संमान है।

आ्म, बं गलोर

तनतयानंद धयानपीिम का अनतराष्ीय ् मुखयालय बबिदी, बगलोर नगर के ं तनकट जसथत है, िो एमशया का सबसे तेज़ी से ब़ता रगततशील नगर है।

पव्् ्ट ्ि - एक कलप् ृ ि, ृ इचछापूततण करने ्ाला ्ि जिसन ृ ं आि तक करोिं राथनाओं को रतयि कर उनहं परीपूणण ककया है। बबिदी

्ट्ि की छ्छाया तले शज्तशाली ृ सकारातमक सपंदनो से शरीर ् मन को परम शांजनत, व््ाम और ताज़गी की अनुभूतत होती है।

इस दैव्क ्ट्ि ृ के तले धयान करने से हज़ारं को रोगं से चमतकारी उपचार के अनुभ् होतं है। भग्ान द्िणामूततण, िो भग्ान मश् के स्ुप हं और अददगुु (व्श् के रथम गुु) है, इस पव्् ्ट्ि ृ के तले पीिामसत हं और इस ददवय िे् को अनु्दहत करते हं, सभीपर अपने आशी्ाणद को ककरणणत करते हुए।

्ैदय सरो्र मं१००८ ििीबूदटयं सेतनव्णत २१ फूट का न्पाषण मश्मल ंग

ुर्शभषेकम् एिं ुर िोमम्

ू्ामभ्ेख: उपचार एिं आयु िाव् रोकने ृ िेतु

ुिामभषेकम एक शज्तशाली ्ैददक करयापधतत है जिसमे भग्ान मश् की उिाण ए्ं आशी्ाणद का आ्ाहन ककया िाता है, स्ासथ ए्ं उपचार लाभ हेतु। ुिामभषेकम अतयधधक उपचारक शज्त का ्हन करता है ्योकक यह दो रबल तकनीको को िोिता है - अमभषेकम या पव्् सनान ए्ं मं्ो का उचचारण। हमारे मजसतषक की रचना व्मभनन श्दं की मभनन रततकरया वय्त के मलया की गयी है। िो भी श्द हम अपने अंतराकाश मं िाप करते है, हमारे मजसतषक ए्ं िै्समतत ृ मं ररकॉडण हो िाता है ए्ं मजसतषक के मसगनल के पररपथ का भी तनणणय करता है। आपके अंतराकाश मं 'नमः' श्द का िाप करने से मन का अचेत भाग खंडडत होता है िहाँ सभी स्ासथ समसयाओं का मूल कारण जसथत है। के ्ल िागूकता पू्णक ्ी ुिम के मं्ोचचारण से ही सभी मानमसक

री ु्म का वि्ान

ए्ं शारीररक स्ासथय समसयाए सीधे नषट हो सकती है।

ुिमभषेकम अनुषिान करते समय, 'चमकम' का भी मं्ोचारण होता है 'नामकम' के बाद। 'चमकम' एक ्ैददक सतो् है जिसका मं्ोचारण स्ासथ ए्ं समधी ृ हेतु ककया िाता है। चमकम एक अतत मंगलकारी मं्ोचारण माना िाता है और अ्सर शुभ अ्सर िैसे कक व््ाह, गहर्ेश समारोह आदद म ृ ं ककया िाता है।

आ्म मं ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम ् ् के अन ुषिान करने का महत्

कोई भी राथणना या अनुषिान को एक परमचेतना के ऊिाण िे् मं करने से उसके लाभफल मं हज़ारं गुणा ्वध ृ होती है। बबिदी िे् आतम्ानी गुु की उपजसथतत से ए्ं

है। यिुर्ेद मं पाया गया, ्ी ुिम अपने उपचारातमक सपंदन के मलए व्खयात है। ्ी ुिम का मं् उचचारण भग्ान मश् की ऊिाण, बुवध ् आशी्ाणद का आ्ाहन हेतु ककया िाता है। ्ी ुिम मं मश्िी का रहमाणडीय ूप का ्णणन है। ुि, आयु्णधध को रोकने या कायाकलप ृ की मूती है। ूि, मश् की पुनिाणगरण की ऊिाण का स्ूप हं िो हमे ददन-रततददन यौ्न बनाती है। ्ी ुिम को नामकम भी कहा िाता है। उसमं 'नमः' श्द का तीन सौ बार मं्ोिाप है। संसकृत मं 'नमः' का अथण 'नमन करना' है। उसका एक और सपषटीकरण है, 'नहीं म, ं न अहम'। बारंबार इस मं् 'नहीं म - नमः' के उचचारण ं से - 'नमः' - अहंकार की िि को सीधे मारता है, िो की हमारी सभी समसयाओ का एकमा् अपराधी उततरदायी है।

्ी ुिम भग्न मश् का एक शज्तशाली ्ैददक सतो्

का भेदन कर सकती है, नाडियो को ऊिाण रदान कर सकती है ए्ं नकारातमक संसकारं को (मूल्ासनाओ की समततया) बाहर तनषकावषत कर सकती है, िो हमारे ृ स्ासथय ् मानमसक जसथततयं को रभाव्त करते है।

सबसे महत्पूणण, उचच चेतना िो इस उिाण िे् के ्ायुमंडल मं वयापक है, हमं स्त: धयान जसथतत मं ले िाती है। धयान सीधे शरीर के स्-उपचार को सरीय बनाता है ए्ं रोग का दोनं, उपचारातमक ए्ं तन्ारक उपचार का कायण करता है।

अपने नाम पर ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम का अन ् ुषिान

िब आप ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम का अन ् ुषिान करते हं, एक व्शेष संकलप मं् का िाप आपकी व्शेष राथणना के साथ आपके नाम पर ककया िाता है। यह संकलप मं् आपके ए्ं ऊिाण ् मंगलत् के बीच मं सेतु का कायण करता है जिसका तनमाणण ुिामभषेकम से आपके मलए होता है। संकलप मं् से, ुिामभषेकम या ुि होमम का रभा् ए्ं ् लाभ सीधे आप तक अंतररत हो िाता है। ुिामभषेकम ए्ं ुि होमम आप म ् ं उपचार होने देता है, साथ मं आपको ए्ं आपके परर्ार को आनंद ् शांतत ए्ं अचछा स्सथ देता है।

आधयाजतमक अभयासं ् उपासनाओं द्ारा तनरंतर ऊिाणपूणण हो रहा है, िो तनयममत ूप से यहाँ ककये िा रहे है।

आ्म मं ुिामभषेकम मं व्सतारपू्णक अमभषेकम का अनुषिान सजमममलत है, ्ी ुिम के साथ एक राचीन स्यंभू मलङगम (स्ाभाव्क ूप से रकट), िो सददयं से बबिदी के सथानीय तन्ामसयं द्ारा पूिा िा रहा है। आ्म के पव्् ्ट ्ि की ििो के क ृ ुहुर मं पाया गया यह मलङगम स्यं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAMिी द्ारा तनतयानंदेश्र मंददर के परमपा्न गभणगह म ृ ं राणरततमशषट ककया गया है। सददयं से यह अ्त मलङगम ने एक इचछाप ु ूततण मलङग बने रहने की रधथषिा रापत की है िो राथणनाओ का सीधे उततर देता है। उससे भी महत्पूणण, यह पूिन करने ्ाले को िी्न मं सही चयन करने कक बुवध रदान करता है।

स्यंभू मलङगम का ुिामभषेकम हमारे िी्न ए्ं स्ासथ मं ्ासतव्क परर्तणन ए्ं असीम बदला् ला सकता है। ्ैददक परंपरा के अनुसार अमभषेकम के मलए उपयोधगत के ्ल व्श्सनीय राकृततक साम्ी का रयोग ककया िाता है, जिसमे दध, दही, चनदन लेप, ग ू ुलाब िल, नाररयल पानी, शहद, गुड ए्ं घी सजमममलत है।

िब यह ्धा ए्ं िागूकता के साथ ककया िाता है, ूि होमम की ऊिाण सीधे हमारे सबसे गहरी ऊिाण कोशं ्

ुिामभषेकम अपने नाम से अवपणत करं अब, आप भी आ्म मं ुिामभषेकम का अपणण कर सकतं है ए्ं अपने स्ासथय मं व्शाल उननतत का अनुभ् करं दान शुलक: २५००० ु /-

अनुषिान का ददन: आपकी स्ेछा का कोई भी ददन भुगतान: पूरी रामश (्ापस अयोगय) कम से कम ुिामभषेकम ततधथ के दो ददन पू्ण हमं पहुँचाय

दद्ंगत आतमाओं से पूणणत्

बबिदी आ्म मं आयोजित महेश्र पूिा मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, िो रहमाणडीय ऊिाण या पराशज्त के अ्तार हं, स्यं मभिा ्हण करते है ् भोिन करते हं और दद्ंगत आतमाओं को मु्त करते हं। चाहे ककतने ही िनम उस वयज्त ने शरीर छोिने के उपरांत ले मलए हं, और चाहं उस वयज्त ने िी्न मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM से ममला हो या नहीं, गुु हसतिेप कर सकते हं और अपनी उपजसथतत दद्ंगत आतमा के िी्न मं लाकर उसे िी्न मुज्त की ओर अ्सर कर सकते हं।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM कहते हं कक यदद एक वयज्त आतमहतया करता है, उसकी मुज्त हेतु महेश्र पूिा के अला्ा और कोई मागण नहीं। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM और कहते हं कक ्े दद्ंगत आतमा की सहायता तभी कर सकते हं, िब उस वयज्त का फोटो्ाफ ददया िाये (खासकर तब, िब दद्ंगत आतमा THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM से दी्ित मशषय न हो)। ्यंकक उनहं उस आतमा को पूरे रहमाणड मं खोिना पिता है, के ्ल एक छोटी फोटो्ाफ की िानकारी के साथ। और परंपरा यह भी कहती हं कक चा्ल का एक दाना यदद एक आतम्ानी गुु को अपणण ककया िाये, तो महेश्र पूिा के रततभागी की ऊपर और नीचे की सात पीद़यं को मुज्त रापत होती है। जितने अधधक चा्ल के दाने णखलाएंगे, उतने ही अधधक कलपं तक रततभागी को कै लाश (एक अततम्ानी गुु के सातनधय मं) मं िी्न राजपत होगी।

महेश्र पूिा ्ह रकरया है, िो ्ैददक दहनद परंपरा के ू अनुसार दद्ंगत आतमाओं से पूणणत् हेतु की िाती है। महेश्र पूिा ्ह पूिा है, िो संनयामसयं को ् संनयास पथ पर रहमचाररयं को अवपणत की िाती है। इस पूिा मं संनयामसयं को स्यं भग्ान मश् का रततूप मानकर उनहं मभिा ् भोिन से्ा का तन्ेदन ककया िाता है। महेश्र पूिा ्ैददक परंपरा की सबसे राचीन अमभमलणखत शास्व्धध है, िो आि भी रचमलत है। महेश्र पूिा मं महेश्र स्ूपी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्यं पूिा ्हण करतं हं और नै्ेदय मभिा - भोिन से्ा को स्ीकार करते हं।

महेश्र पूिा उस वयज्त कक समतत म ृ ं अवपणत की िाती है, िो अब शरीर मं नहीं है। आतमा को शांतत रापत होने हेतु यह अपणण ककया िाता है। ्ासतव्क शांतत िो एक आतमा अनुभ् कर सकती है, ्ह िी्नमुज्त की जसथतत है। महेश्र पूिा सब दद्ंगत आतमाओं के साथ पूणणत् रदान करती है, और इस रकार रततभागी मुज्त रापत करता है सब अपूणणत्ं ए्ं संसकारं से िो दद्ंगत आतमा से िुिे ् उनसे रापत हं।

संनयामसयं की और कोई इचछा या रयोिन नहीं होता िी्न मुज्त के मस्ाय, और अपनी पहचान को रहमाणड मं व्लीन करने के मस्ाय। ्े रहमाणड का एक शुध र्ाह बन िाते हं। इसमलए उनहं णखलाने ए्ं पूिा अपणण करने से ्ही पररणाम दद्ंगत आतमा मं भी लाया िाता है, िो उन आतमाओं को िी्न मुज्त रापत करने मं और रहमाणड मं व्लीन होने मं सहायक होता है।

रहमोतसव मं सात रमुख पीठासीि जीवमूनता्ं के उतसव मािािे के अलावा, दो महतवपूणा पवा जो भगवाि श्व और आध्ाततमक गुु को सुपूतजत करते हं, ्ह भी नित्ािंद ध्ािपीठम मं मिा्े जाते हं। अन् पवा जो इस वैददक जीवि्ैली मं रंग भरते हं, वे हं कृ्ण जनमा्टमी (भगवि िी कृ्ण ज्ंती), पंगल (फसल उपज का पवा), वैददक िव वरा, होली (रंगं का त्ंहार) और दीपावली, रका् का पवा, आदद।

धचनततरै रहमोतसिम - अिैल ्

रहम ऊिाण ने मान् ूप धारण ककया और लगभग २००० ्षण पू्ण पथ्ी लोक पर दो ूपं म ृ ं अ्तररत हुए, एक पुुष ् दसरी स्ी। भग्ान मश् प ू थ्ी पर ृ अ्तररत हुए भग्ान सोमसुंदरेश्र के ूप मं, और दे्ी अ्तररत हुं मीनािी के ूप मं, द्िण भारत मं तममलनाडु राजय के मदरै, दे्सथान नगरी म ु ं।

का्ेरी सभयता के सांगा युग मं, दे्ी मीनािी, पंडया रािा मलयध्ि की तपसया के फलस्ूप उनकी तीन ्षीया पु्ी के ूप मं अजगन से रकट हुं। मीनािी हर िे् मं स्ण्ेषि होतं हुए बिी हुं। एक उ् योधा ् युधकला मं पारंगत, उनहंने आिं ददगपालकं को िीता, िो रतयेक आि ददशाओं के अंशदे्ता हं, और उनहंने भग्ान दे्ेनि, अंशदे्तं के रािा को भी िीत मलया।

अनततः मीनािी कै लाश प्णत की ओर अ्सर हुं, भग्ान मश् पर व्िय राजपत हेतु। कै लाश मं उनहंने नंदददे् से युध कर उनहं पराजित ककया, िो भग्ान मश् के ददवय ्ाहन हं। ततपशचात भग्ान मश् स्यं नीचे आये उनका सामना करने हेतु। जिस िण उनके ने् भग्ान मश् पर पिे, मीनािी को बोध हुआ कक ्ं उनके भव्षय पतत हं। ्ं मश् से रेम करने लगीं और उनसे सभी दे्ताओं की उपजसथतत मं व््ाह ककया। भग्ान व्षणु ने स्यं मीनािी ् सोमसुंदरेश्र का व््ाह संपनन ककया। मश् ने इस अ्तार मं सोमसुंदरेश्र नाम ्हण ककया।

हर ्षण, धचजततरै के तममल मॉस मं रहमाणड पुनः पुनः उतस् मनाता है, मीनािी और सुंदरेश्र के भवय ददवय व््ाह या ततुकलयाणम का। यह अ्धध धचजततरै रहमोतस् के ूप मं मनायी िाती है। हर ददन मीनािी और सुंदरेश्र मभनन ददवय ्ाहनं पर रकट होते हं तथा भग्ान मश् की ददवय लीलाएं ् अलंकार दशाणय िाते ह ं ं। इसे ही लीलाधयान कहते हं।

गणे् रहमोतसिम ् अगसत / मसतंबर

गणेश हाथी-मसतक ्ाले दे्ता हं िो भग्ान मश् और दे्ी पा्णती के पु् हं। ्े स्ण् सब दहंदओं ु द्ारा पूिे िाते हं। गणेश के िनम की ् उनके हाथी-मसतक स्ुप की कथा अतत असाधारण है। एकदा, िब दे्ी पा्णती नदी मं सनान ले रही थीं, उनहंने सनान मं उपयोग के ए चनदन के लेप को गूंधकर, उस लेप को एक मान् आकृतत देकर, उसमं राण फूक़े । उसी िण चनदन की मूती एक िी्ंत बालक बन गया। उनहंने सनान पूणण करने के समय तक इस बालक को अपना द्ाररिक बनाने का तनणणय मलया। िब मश् नदी पर आय, बाल- ं रिक ने उनहं भीतर िाने से ्जिणत ककया। रोधधत होकर, मश् ने इस बालक का मसतक काट ददया। िब पार्ती को ्ात हुआ कक उनका पु् तनषराण हो गया है, उनहंने उसे पुनःिीव्त करने हेतु मश्िी को ने्ेदन ककया। तनकट कहीं उपयु्त मान् ूप न ममलने के कारण, मश्िी ने एक श्ेत हाथी को मु्त कर, उस हाथी का सर काटा और बालक के शरीर से िोि ददया। मश्िी ने उसे 'गणेश' नाम ददया अथाणत गणं के ईश्र, 'गण' अथाणत मश्िी की भि गणं ् रेतं की सेना। यह शुभ-मंगल दद्स िो 'गणेश' के िनम का रतीक है, गणेश चतुथी नाम से मनाया िाता है। गणेश को व्नायक ् गणपतत भी कहते हं। गणेश संकट मोचक हं िो हमारी कलपनाओं से िनमी अंतर ् बाहरी िगत की बाधाय हरते ह ं ं। गणेश रहमोतस् एक १०-ददन का उतस् है, िो भग्ान गणेश के अ्तरण प्ण को मनाता है।

िंकटे् रहमोतसिम ्

्संत रहमोतस्म ददवय उतस् है, िो भग्ान ् ् ंकटेश्र के अ्तरण (समभा्न) का उतस् है, िो ्संत ऋतु मं मनाया िाता है। (्संत अथाणत ्संत ऋतु ए्ं रहमोतस्म ् अथाणत दैव्क रहमाणडीय उतस्)। रकृतत मनुषय की हर भा्ना के रतत रकरया वय्त करती है। ्संत का आगमन हमारे भीतर ् बाहर एक अनोखा परर्तणन आता है। कोमल ह्ाएं और रफुजललत पुषपं की सुगंध हर राणी को भाव्त करती हं। हर वयज्त को अपने भीतर रेम ् कोमलता को पुजषपत होने का आभास होता है। ्ह रेम्श अपने भीतर व्सतारण अनुभ् कर पाता है। यही ्ह िाद है िो रक ू ृतत हम सबके भीतर ्यं करती है।

्ी आनंद ्ंकटेश्र रहम रेम का रतीक ् रततूप हं।

्ं ्ैभ् और धन्नता के भी ईश्र हं। उनकी ऊिाण से समबध होने से िो आशी्ाणद और ्रदान हर वयज्त को रापत होते हं, ्ह भग्ान ्ंकटेश्र की उदारता का रमाण हं। उनकी पतनी ल्मीिी धन की दे्ी हं। इसी कारण भग्ान ्ंकटेश्र एक अतत लोक-वरय दैव्क ऊिाण हं।

सकनि षनषट - अ्टोबर / निंबर

सकनद, भग्न मश् के पु्, एक रचंड योधा ए्ं दे्ताओं की सेना के रधान सेनापतत िाने िाते है। सकनद ने मस ंहमुख, सुरपमा ् तारकासुर दान्ं के व्ुध युध छेिा िो छ: (षषट) ददनं तक चला तथा उनका दीपा्ली प्ण के अगले ददन संहार ककया और फलस्ूप पथ्ी लोक पर अपना ल्य ृ परीपूणण ककया। इस प्ण को सकनद षजषट दद्स कहा िाता है। दे्तओं की सहायता ् संरिण करने के पुरसकार स्ुप, दे्ं के रािा इनि ने अपनी पु्ी दे्सेना (दे्यानी) को सकनद को व््ाह मं ददया। सकनद ्ीरता, साहस ् सुरिा के रतीक है। उनके हसत मं '्ेल' अस्, िागूकता का रतीक है, जिससे भय का सामना ककया िाना चादहए। यह सकनद षजषट रहमोतस् बहुत धूमधाम ् आनंदोतस् के साथ हर साल छ: ददनं तक मनाया िाता है, जिसका समापन सात्े ददन सकनद ् दे्सेना के ददवय व््ाह से होता है। भ्त अपनी इचछापूततण हेतु ए्ं भग्ान सकनद की कृपा पाने हेतु सभी छ: ददनं तपसया करते हं।

ननतयानंिेशिर - रहमोतसिम ् निंबर / दिसंबर

्ी तनतयानानदेश्र और तनतयाननदेश्ारी दे्ी तनतयानंद धयांपीि के रमुख दे्ी दे्ता हं| यह मश् और पार्ती के स्ुप हं |्ैददक परंपरा मं, भग्ान मश् पुनःिागरण के महादे् ए्ं मंगलत् के मूततणस्ूप है। भग्ान मश् इस पथ्ी ग ृ ह के रथम आतम्ानी ग ृ ुु है। हज़ारं ्षं पू्ण, भग्ान मश् ने आतम्ान के गोपनीय सू्ं का सारे िगत कलयाण हेतु अभेदन ककया िो बाद मं 'व््ान भैर्' नामक शास् मं संगदहत ककये गए, जिसम ृ ं आतम्ान के ११२ सू् (तकनीक) हं। तनतयाननदेश्र ने दे्ी को उसी सथलबब ंद पर इन स ु ू्ं को रतयि ककया था िहाँ पर

तनतयाननदेश्र मंददर जसथत है, तनतयानंद धयानपीिम के बबिदी आ्म मं। ्यंकक दे्ी तनतयानंदेश्री ने हमारे कलयाण हेतु कुणापू्णक आतम्ान की तकनीकं को ्हण ककया और उनहंने तनतयानंदेश्र की शज्त का अपनी अंतरातमा मं संपूणणतः िागत ् संजसथत ककया, ृ इस अनंदोदय ्ततानत के प्ण को तनतयानंद धयानपीिम ृ मं तनतयानंदेश्र के रहमोतस् ूप मं मनाया िाता है।

निरा्र रहमोतसिम - सपतंबर / अ्टोबर ्

न्राब् रहमोतस् या दशहरा दे्ी का तयोहार है - िगत िननी, आददशज्त का। दे्ी पव्् स्ी पराशज्त की मुततणस्ूप हं। न्राब् का अथण है नौ रातं (रा्ी) का समूह। माकण णडेय पुराण व्सतत ूप से ्णणन करता ह ृ ं कक ककस रकार दे्ीमाता ने नकारातमताओं से पथ्ी लोक ृ का रिण ककया, िो नकारातमताऐ कई असुरं के ूप मं रकट हुई, व्शेषत: मदहशासुर नमक असुर मं। इन दषकु ृत नकारातमक शज्तओं से युध करने हेतु दगाण, सरस्ती ् ु ल्मी की शज्तयं ने एकव्लीन होकर एक ूप धारण ककया िो मदहशासुर मधधणतन या चंडी कहलाता है। सभी नौ राब्ओं मं दे्ी ने नकारातमकताओं से युध ककया और दस्े ददन उनहं ददगव्िय राजपत हुई। यह दस्ा ददन िो नकारातमकता के व्नाश और सकारातमक शज्त - पव्् नारी शज्त के व्िय का रतीक है, इसे व्िय दशमी प्ण के ूप मं मनाया िता है। व्िय दशमी कोई भी ्षण के दो अतत शुभ दद्सं मं से एक है, दसरा दद्स है अिय ब्तीय। ू

मि् शशिर््ि - मि्न परम मं गलव की र््ि

महा मश्राब् ्ह राब् है िब हमारे लोक मं अधधचैतनय ऊिाण का सफोटन होता है। ्ैददक रहमाणडव््ान इस सफोटन का सुरा़ बबग बेनग के साथ िोिता हं, ्ह िण िब हमारे रहमाणड का सिन ह ृ ुआ था। पव्् ्ैददक ्नथ अुणाचल पुराण मं, इस महान उततपजतत घटना को इस रकार दशाणया है - भग्ान मश्, िो आददरहम ऊिाण के रतीक ् पररहमन स्ुप हं, एक असीममत रकाश के सतंभ या जयोततसतंभ का ूप धारण करते हं, िो पथ्ी से आकाश तक ् अखंडमंडल ृ के परे मलङगोतभ् होकर वयावपत होते हं।

हर ्षण, रहम शज्तयं के एक भागययोग के पंज्तयोिन से, इसी महान मलङगोतभ्म के सफोटन का छोटा रततबबमब इस राब् को हमारे पत्ी लोक म ृ ं व्ककरण होता है। हर ्षण, उसी काल रहर मं, िब यह पौराणणक अददजयोतत का मलङगोतभ् सफोटन हुआ था, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM भ्तं को अततती् 'मश् कुणडमलनी धयान' मं दीिा देतं हं। हज़ारं लोग इस कुणडमलनी धयान मं व्श् भर से एन.टीव् ् टू-्े कां्ंस द्ारा भाग लेते हं। यह धयान सकारातमक ऊिाण की व्शाल लहरं का सिन करता है, जिसका ृ रभा् समपूणण व्श् मं अनुभ् होता है।

धयान पशचात, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्ारा महामश्राब् र्चन का सीधा रसारण होता है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM महा ुिामभषेकम का भी अनुषिान करते हं िो स्ण रोगं का नाश और स्ासथय ् कलयाण की बाधाओं का हरण हेतु एक शज्तशाली ्ैददक रकरया है। महा ुिामभषेकम मं रततभागी होने हेतु भ्तं का स्ागत होता है। महामश्राब् उतस् पर 'कलपतु', एक पूरे-ददन का धयान कायणरम भी भेटा िाता है, जिसमे हमारी सचची इचछापूततण हेतु स्ामीिी द्ारा रहम ऊिाण का संचारण ककया िाता है - चाहे ्ह स्ासथय, संपजतत या मनोशांतत ् आतम्ान की इचछा हो। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के सभी के मलए वयज्तगत दशणन, दीिा ् आशी्ाणद के साथ महामश्राब् कायणरम का समापन होता हं।

कृत्ता रकट करने के इस सरल कृतय से कई िनमं के आगामय कमण िलकर भसम हो िातं हं। जिस राकर सूयणककरणं एक आ्धणक कांच द्ारा अपने नीचे रखे कागज़ को िला देती है, उसी रकार हमारे कमण भी एक आतम्ानी गुु की समिता मं िल िातं हं। आतम्ानी गुु हमारे ए्ं रहम चेतना, जिनहं ईश्र कहतं है, के बीच एक सेतु हं। यह कहा गया है कक िो भी पुणय कायण हम ईश्र को अवपणत करते हं, हमारे मलए ्ह हिारगुणा बनकर ्ापस आता है। गुु को अपणण की गयीं इस रहुती को 'मभिा' कहतं है। ्ह कुछ भी हो सकती है, कोई से्ा, पैसे या कायण। मशषय िो भौततक भंट अवपणत करतं हं, ्ह उनके अहंकार (अहम) का रतीक है। के ्ल अहंकार ही एक ऐसी ्सतु है, जिसकी गुु मांग करते हं - मशषयं की सीममत पहचान, जिसे ततयागकर ्े असीम अनंत परमरहम मं उददत हो सकं। इस बाहरी कृतय से जिसमे स्यं के मलए िो महत्पूणण रतीत होता है, उसे ्ीगुु के चरणं मं अवपणत करना, भ्त स्यं की ही आतमा का एक अंश उचच ्ोत को अपणण करता है।

गुु एक वयज्त के िी्न मं भाव्त होती हुई एक न् संभा्ना हं। गुु तनरंतर वयज्त मं रेरणा को िागत ृ करते रहते हं, उसकी संभा्नाओं को पुनः िगाकर उनहं और भी सश्त बनाते हं। चाहे ्ह वयज्त स्यं पर व्श्र छोि दे, गुु उसपर से व्श्ास कभी नहीं छोितं।

यही ्ह ददन है, िब भ्तिन 'सदगुु' का समरण, पूिन ् आदर करतं हं और अपना अजसतत् गुु को पुनः समवपणत करते हं और कृत्ता रकट करते हं उस रहम ूपी गुु की समिता को िो उनके िी्न मं हं। गुु पूणणणमा का अथण है, 'गुु का पूणण चनि'। यह एक अनमोल अ्सर है स्यं की आतमा को पुनः गुु के मागणदशणन हेतु फुजललत करना। यही ्ह परम मंगल ददन है, िब भ्त्तसल ्ीगुु अपनी अनंत कुणा से अपने भ्तं को ्हण करते हं और अपनी अरततबध गुु कृपा से भ्तं के िनम-िनमांतरं के अतत भयानक कमं को भी ममटा देतं हं। इस ददन भ्त अपने भय, शंकाएं, पीिाएं या इचछाएं ्ीगुु के कमल चरणं मं अवपणत कर देते हं, और गुु रसाद स्ुप उनहं अभय (भय से मुज्त) और ्रद (गुु कृपा) के ्रदान की राजपत होती है।

द्हरा

दशहरा एक शज्तशाली ९-दद्मसय उतस् है, िो सामूदहक नकारातमकता का दे्ी माँ के हाथं व्नाश होने का उतस् है, िो रहमांडीय स्ी ऊिाण हं। इन रतयेक नौ ददनं मं िी्नमुज्त का रफुजललत होने का उतस् मनाया िाता है, राथणना, पूिा, मन् उचचारण, संगीत ् नतय द्ारा। आ्म म ृ ं, शज्तशाली 'चंडी होम' का रततददन अनुषिान होता है। दे्ी माँ को रततददन उनके मभ ंन-मभ ंन दे्ी स्ूपं मं अलंकार करते हुए मातरेम भा् से प ृ ूिा िाता है। सुरमसध कलाकार इन रतयेक नौ-रातं मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM की ददवय उपजसथतत मं कला रदशणन करते हं।

अित्र र्ोसिम् और जयंती

यह मानयता है कक ईश्र पाँच कमण करते हं - ध्जषट (रचना), जसथतत (पालन), संहार (व्नाश-कायाकलप), ततरोभा् (माया के आ्रण से ढकना) ए्ं अनु्ह, आतम्ान द्ारा कृपा करना। पहले चार कायण करने हेतु उनहं हमारी अनुमतत की आ्शयकता नहीं होती, ककनतु आतम्ान का आशी्ाणद देते समय उनहं हमारे सहयोग की आ्शयकता होती है। इसी कारण, ्े मनुषय शरीर धारण करते हं और पथ्ी लोक पर अ्तररत होते ृ हं। स्यं के उदहारण से रेररत करते हुए कक मनुषय शरीर मं भी आतम्ान रापत करना समभ् है। ्े हमं रेरणा देते हं, िी्नमुज्त के मलए छलांग लगाने की। ्े एक अ्तार हं, 'िो ददवयता के सतर से मान्ी सतर पर अ्तररत हुए हं'। एक आतम्ानी गुु लोगं को भ्सागर के एक छोर से दसरे छोर पार ु करने हेतु ना् की भांतत कायण करते हं, अ्तार एक महान व्शाल सेतु हं जिसके द्ारा करोिं अपनी पीिा से आनंद की या्ा तय करते हं।

भग्न ्ी कृषण कहते हं, 'िब भी पथ्ी ृ लोक पर सकारातमक चेतना मं असंतुलन होता है, म प ं ुनः पुनः रकट होता हूँ -'संभ्ामम युगे युगे', सजिन की रिा हेतु और दषट के व्नाश हेत ु ु।' हमारे युग मं, ईश्र पुनः पथ्ी लोक पर अ्तररत ह ृ ुए हं, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के ूप मं, मान् चेतना को अगले सतर पर ले िाने हेतु।

धनु मॉस के धच्ा नि् मं सूयण ्ैददक पंचांग के अनुसार रहम ऊिाण पथ्ी ृ लोक पर THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के ूप मं अ्तररत हुई। यह शुभमंगल ददन तनतयानंद धयानपीिम मं अ्तार रहमोतस् के ूप मं मनाया िाता है - िो दस ददन का प्ण है, जिसका समापन अ्तार दद्स पर होता है। इस उचच ऊिाणपूणण दद्स पर, भ्त राथणना करते हं और आधयाजतमक साधनाए करते हं, आतम्ान और िी्नमुज्त राजपत हेतु, अ्तार की असीम कृपा द्ारा।

अ् उसि

दीपा्ली ्ैददक परमपरा के अनुसार उस ददन के ूप मं मनाया िाता है िब हम अपनी अ्ानता को सचचे ्ान या आतम्ान के अंततनणदहत दीपक को िला कर नषट कर देते है। दीपा्ली तनतयानंद धयानपीिम मं आशी्ाणद दद्स भी है। यह उस ददन ्षण २००० मं था, िब THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM को उनके अ्ताररक ममशन का बोध हुआ था िब उनके पहले आशी्ाणद के अमत श्द, 'अनंदामागा इुं गल' अथाणत ृ 'आनंदमय रहो' उनके ्ी मुख से तनकले, नौ महीने की समाधध उपरानत, अपने शरीर ् मन से व्योजित होने के अनुभ् उपरानत, आतम्ान की रतयि अनुभूतत के बाद।

कृषणाषिमी भग्ान ्ी क ् ृषण का िनमदद्स है, िो इस पथ्ी लोक ृ पर संभाव्त सबसे महानतम अ्तारं मं से एक हं। होली रंगं का तयौहार है। होली मं रंग के गुलाल को एक दसरे पर लेपा िाता है, ु बहुत आनंद ए्ं उललास के बीच, िातत, ्गण, उर ए्ं मल ंग के अंतर को तोिते हुए। होली उतस् भग्ान क् ृषण को मनाता है, िो पथ्ी ग ृ ह ृ पर सदा से सबसे चंचल, लीलाधारी, रेममय ए्ं स्ाणधधक वरय अ्तार है।

काततणगई दीपम, भग्ान मश् का रहमा ए्ं व्षणु के अपूणणत् को पूणणत् रदान करने के मलए, एक 'जयोततसतंभ' - अनंत रकाश के सतंभ के 'मलङगोतभ्' ूप मं महा रकटन को धचजहनत करने हेतु मनाया िाता है। काततणगई दीपम मं एक दीप को दसरे की लौ से िलाकर हिारं घी के दीप िलाये िाते है, परम रहमांडीय सतय ु को दशाणतं हुए कक एक बन िाते है अनेक और अनेक बन िाते है एक।

काततणगई दीपम ् ह ददन भी है िब एक किोर तपसया के लमबे अनतराल बाद, िो दे्ी पा्णती ने उनके ददवय पतत भग्ान मश् के मलए पराभज्त के साथ ककया, भग्ान मश् ने उनहं उनका आधाशरीर रदान ककया जिससे ्े दोनं पूणणूप से संयोधगत होकर एकाकार हो िाये, रभु अधणनारेश्र (िी्मूती जिसका शरीर आधा नर ् आधा नारी) के िनम का अंकन करते हुए। शारीररक ूप से यह मश् ए्ं पा्णती के ददवय संयोग को दशाणता है। आधयाजतमक ूप से, यह अद्ैत के पुणण ममलाप को दशाणता है। दो नहीं पर एक। मश् ए्ं पा्णती दो नहीं, पर एक है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ैददक मंददरं मं 'महा सपतयागम', एक भवय सामूदहक अजगन अनुषिान का आयोिन ककया िाता है। व्श् शांतत हेतु यह अनुषिान, १०१ समिणणक होम कं डं म ु ं परंपरागत आहुततयं के साथ व्धध्त ककया िाता है। यह पारंपररक धमणकरया सनातन दहनद धमण के ७ म ू ुखय दे्ताओं को आहुतत देकर की िाती है, उनकी ऊिाणओं का अजगन मं आ्ाहन करके और ततपशचात ििीबूदटयं से अंततम आहुतत दी िाती है।

मनुषय रणाली मं सात मुखय ऊिाण कंि होते हं, जिनहं चर कहते हं। हर दे्ता एक चर के स्ामी होते हं। और हर चर एक भा्ना के साथ िुिा होता है, िो मन को आकुल करती है, जिसका रभा् शरीर पर भी पिता है। िब हम उस दे्ता की पूिा करते हं, ्ह हमं इन भा्नाओं की पकि के परे ले िाकर मुज्त रदान करते हं।

िब ्धा से करी िाये तो यह करया एक गहन धयान बन िाती है, िो सामूदहक नकारातमकता को स्चछ करती है और ओिोन सतर को भी शुध करती है। सारे मन्, अंतदणशणन ् आहुतत सकारातमकता की लहरं को ब़ाते हं और इस रकार रहमांडीय सकारातमकता और व्श् शांतत मं सहयोग देते हं।

The Supreme Pontiff Of Hinduism Bhagawan Sri Nithyananda Paramashivam पविर कला विशिविदयालय

*8-*फीट ऊँ ची ्मन्षी की ्वतम्

म ूनतायाँ: अधयानतमक उजाा की िाूप

'आतम्ानी गुु, िब ्ं पथ्ी लोक छोिते है, िब ्े ृ अपना शरीर छोिते है, उनहं अनुभूतत होती है कक एक ऐसा िे् संजसथत हो िो तनरंतर लोगो को रेररत करे, िो तनरंतर आरोगयता रदान करे, िो रेरणा दे सके , िो उनहं आधयातम का अनुभ् दे सके , और िो उनहं पव्् भा्नाबोध दे सके । इसी कारण उनहंने तनमाणण ककया यह सथापतयं का - मंददर। मंददर उपगह रसारण क ृ ंि है िहाँ उचच ती् आधयाजतमक ऊिाण का सिन होता है ए्ं यह ृ समसत भूमंडल (पत्ी) म ृ ं संचाररत की िाती है, मनुषयं की सहायता हेतु जिससे ्े अपनी शारीररक, मानमसक, भा्नाजतमक तथा स्ोपरी आधयाजतमक ूप से स्यं का उपचार कर सके । धयान एक रमुख चाबी है इस ऊिाण से समबंधधत होने की, िो िी्मूती के स्ुप मं है'

  • परमहंस ्ी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी

हिंदू मंददर रचुर मूततणकला ए्ं भवय अनुपातं या बिे आकृततयं के मलए रमसध है। रमुख मशलपकारं ने संतुलन की उतकृषट भा्ना ए्ं मशलप कौशल से करीब हिारं ्षं से भवय मंददरं का पेचीदा मशलपकला से तनमाणण ककया है।हिंदू मंददर ् मशलप कला का इततहास ५००० इ. पू. तक के अनुरेणखत है। राचीन भारत की ्ैददक परंपरा के अनुसार, हिंदू मंददर कला (मशलपशास्) ने, हमं अनुभ् करने के मलए अजसतत् की अमभवय्त मुखाकृततयं को िीव्त ककया है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM पव्् कला राचीन मंददर कला का रचार ए्ं संरिण रदान करने हेतु सथावपत की गयी है; व्समयेपूणण रेरणारद मंददर कलाकृतत कक रचना करने के मलए। यह दैव्क मूततणयं, ्ाहनं (दे्ताओं के चालक), मंददर तनमाणण, ध्ि सतंभ, मंददर आभूषण, पूिा साम्ी आदद रदान करती है। समवपणत ए्ं रमश्ित मशलपकार अनुभ्ी सथपततयं के नेतत् म ृ ं मंददर ् मशलप कला मं नौ पीडियो तक कायणरत रहते हं। यह सभी आडणर संसाधन ए्ं नौ-परर्हन के साथ-साथ सीधे संसथान द्ारा तनयंब्त है। अतयधधक आकवषणत उतकृषटता से रततयोधगता-मुलक कीमतं से उतपाददत, यह उतपाद आधुतनक पुुष को राचीन ्ैददक धरोहर का ्ाता्रण रदान करते है। संपूणण कायण 'अगम शास्' पर आधाररत है - मंददरं ए्ं दैव्क मूततणयं का राचीन व््ान। कायणरणाली के संचालन मं मशलपकला के मलए रेखाधच् बनाना, पतथर उततखनन, पाषाण,

धातु, धातु की पततर ए्ं लकिी का काम, मंददर के आभूषण की रचना, मूती दे्ताओं के ्स् और आदद सजमममलत है।

पविर कला विशिविदयालय की वि्षटता

एक दशक से भी अधधक समय से, पव्् कला व्श्व्दयालय पारंपररक ्ैददक कलाओं और मशलप को रोतसाहन रदान कर रहा है और उनकी भवयता का रचार ए्ं रसार कर रहा है । •यहां बनायी गयी हर ्सतु को िीव्त अ्तार THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने स्यं अपने आशी्ाणद और अपनी आतंररक ददवय शज्त से ऊिाणमान ककया है, िो कक आधुतनक समय मं बहुत ही दलणभ है । ु •THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी सथापततयं के मशलप कौशल और उनकी संसकृतत को पुनिीव्त कर रहे हं । यह सथापतत व्श्कमाण ्ंश से हं और मंददर तनमाणण, ्ासतुकला ए्ं मशलप मं तनपुण हं। •सब कुछ राचीन पारमपररक शैली से ककया िाता है, चाहे माप लेना हो, मोम का सांचा बनाना, उसमे वपघली धातु को डालना, उसको सू्मता से सही आकार मं ढालना या तघस कर उसको चमकाना और मूततण को अंततम ूप मं रसतुत करना। • दै्ी रततमाओं मं लय और योधगक जसथरता का अ्त समा्ेश है, उनकी आक ु ृतत और अमभवयज्त मं मधुरता और संदयण का उतकृषट सजमम्ण है। • यहां की कायणशाला 13 ्ीं सदी से उपयोग की िा

रही राचीन पधततयं, व्धधयं और आसथाओं का अनुसरण करती हं िो कक समय बीतने से अछूती हं । • यहाँ तनममणत दे्ताओं की रततमाएं हमं 2,000 साल से भी पहले बनाई गं पहली मान्ूपी दै्ी छव्यं से िोिती हं। दे्ताओं की सभी छव्यं को, ्ैददक ्ंथ जिनको मशलपशास् कहते हं, मं ददए गए सपषट व््रण और तनदेशं के अनुसार बनाया गया है। इन तनदेशं के माधयम से हम दे्ता की छव् मं उधचत मुिाओं, भा्-भंधगमाओं, और अनय सू्म गुणं को धचब्त करने मं सिम हं। •मूततण के मापतोल के मलए पारंपररक मशलप शास्ं पर आधाररत िदटल तालमान रणाली का यहाँ पालन ककया िाता है। ताल का अथण है हथेली, और यह माप लेने की एक रणाली है।

अनय बनाई िाने ्ाली ्सतु हं

•रथ – इसका रयोग दे्ताओ की मूततण को सथावपत करने के मलए ककया िाता है, िैसे कक शोभाया्ा मं । •पंचलोह धातु की मूततण – पांच धातु पांच तत्ं का रतीक हं: ्ायु, िल, अजगन, पथ्ी और आकाश। यह ृ पंचलोह रततमाएं तांबा, पीतल, िसता, दटन और सोने (के ्ल ससथम के मलए) के मम्ण से तनममणत हं। •्ाहन (दे्ताओं के मलए ्ाहन) - गुि, मयूर, गि, मस ंह, ऋषभ, हंस (पौराणणक) ्ाहन और सुनहरी पालकी, यह सब पव्् कला व्श्व्दयालय

मं व्शेष् कलाकारं द्ारा बनाये िाते हं। •रभा्ली या ततु्ाची- यह धातु ्तत संरचना, िो ृ रततमा के शीषण के ऊपर मंडलाकार मं होती है, एक अनूिे तरीके से छेनी और हथौिे से बनाई िाती है, । • क्चम - क्चम ् अथाणत "क्च", यह रततमा के शरीर ् के ऊपर एक व्शेष सिा्टी आ्रण के ूप मं रयु्त होता है। रतयेक क्च हाथं द्ारा पीतल, तांबे या चांदी और कभी कभी सोने की चादर से बनाया िाता है। •पूिा की ्सतु – इनका तनमाणण पीतल और तनककल से अनुभ्ी कलाकारं द्ारा ककया िाता है। •दे्ताओं के मलए व्शेष आभूषण कुशल िोहररयं द्ारा रधचत ककए िाते हं।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM पव्् कला व्श्व्दयालय दतनया भर के ु सभी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ैददक मंददरं की आपूततण करता है!

मंदिर जीवन की एक मू लभूत आवशयकता हं

"मंददर उप्ह रसार के निं की तरह हं, िहां अतत ती् आधयाजतमक ऊिाण उतपनन करके समपूणण व्श् मं रसाररत की िाती है िो कक मनुषयं को शारीररक, भा्नातमक, मानमसक और स्ोपरर आधयाजतमक ूप से सहायता करती है, उनका उधार करती है। धयान ्ह कं िी है िो कक म ु ूततण या दे्ता मं समादहत ऊिाण से िोिती है। "

  • परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

मंददर राचीन दहंद िी्नशैली के क ू ंि रहे हं, िहाँ ्ैददक परंपराओं को संरिण रापत है, और आतमबोध की संभा्ना अभी भी िीव्त है । िनम से मतयृ ु तक, िी्न की हर महतत्पूणण घटना को मंददर मं अनुषिान करके मनाया िाता है। मं्, अनुषिान, धयान और पूिा की सू्म शज्त उस सथान की ऊिाण को पोवषत करती है।

मंददर का तनमाणण रहमाणडीय ऊिाण को भारी मा्ा मं धारण करने के मलए ककया िाता है, िीक एक बैटरी की तरह, िो कक रबुध स्ाममयं द्ारा उनमं सथावपत की िाती है । मंददरं का तनमाणण राचीन ऋवषयं ने आरमभ ककया, जिनको उनका महत् ्ात था, िो िानते कक मंददर एक भौततक संरचना से कहीं अधधक हं। मंददर के हर पि मं आगंतुक को ऐ्य, अद्ैत भा् और आतम्ान का अनुभ् कराने की िमता है।

राचीन समय से,रहम्ानी स्ामी िो कॉजसमक ऊिाण के अ्तार हं और दे्ताओं मं ऊिाण का संचार ककया है और लगातार ददवय ऊिाण व्कीणण करने के मलए सथान और समय की बाधाओं को पार लगाने के मलये ककया है। जिनको राण रततषिा का ्ैददक व््ान पता है (एक

Part 2: Living Advaita_Hindi_part_2.md

दे्ता मं िी्न सांस की सथापना), िहॉ मूततण एक दे्ता बन िाता है, िो स्तन्। के ्ल एक रहम्ानी स्ामी ही राण रततषिा की रहसयमय रकरया को पूरा करने के मलए योगय है। ्ह मूततण को एक दे्ता मे बदल देता है; ्ह सीधे ददवय ऊिाण के साथ यह रहता। अब, दे्ता को एक स्तं् बुवध के ूप मं अनुभ् ककया िा सकता है। राथणना का ि्ाब बूनस अनुदान और उपचार रदान कर सकते हं, िो शुध अद्ैततक अंतररि, एक स्तं् बुवध के ूप मं अनुभ् ककया िा सकता है।

दे्ता की पूिा भग्ान और वयज्त के बीच एक पुल का तनमाणण है। अद्ैत - स्ामी महान दया से मनुशय की सुपर चेतना और अदव्ता की सचचाई का अनुभ् करने के मलए ,परमातमा से कने्ट करने मं मदद करने के मलए, उनहं िीक करने के मलए, मनुषय रहमांड के साथ पूरा करने के ल्य को हामसल करने मं मदद करने के मलए पथ्ी ्ह पर िनम लेते है। ृ

सियमभु ननतयननिेशिरा सिणा मंदिर

दतनया के सबसे बिे मश् मंददर का तनमाणण बबदादी ु मं आ्म मं मौिूदा तनतयननदेश्रा मंददर ्षण २०१४ मं शुू हुआ, और यह आधुतनक युग मं मश् के मलए बनाया गया पहला स्णण मंददर हो िाएगा। एक दलणभ रहने ु ्ाले अ्तार, परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM की रतयि तनगरानी मं सुंदरता से बनाया गया एक भवय व्शाल मंददर होने िा रहा है।

"यह महादे्, मश् के मलए पहला स्णण मंददर है। तंिौर ददर (बहदेश्रा मंददर) एक स्णण मंददर था। द ृ भाणगय से, ु हमलं के दौरान, सोने से छीन मलया गया था। महादे् का स्णण मंददर पहले बहुत थे लेककन अब आधुतनक युग मं, महादे् का मलए पहला स्णण मंददर हो िाएगा।

मंददर के मुखय भागं को सोने से लेवपत ककया िाएगा - गभाण गह (म ृ ुखय दे्ता के भीतर गुहा), मुख मंडप (गभणगह के सामने खंबं का हॉल), अधण मंडप (वपछले दो ृ िे्ं को िोिने), महा मंडप (सबसे बिा मंडप ), ्संत मंडप (तयोहार हॉल)। यह पतथर और सोने मं लेवपत ककया िाएगा; यह मंददर की व्मशषटता हो िाएगा। गोलड सीधे लाह कोदटंग के साथ पतथर पर लेवपत है। "

स्णण मंददर को तनमनमलणखत मं शाममल ककया िाएगा:

• 5 राकरम (बाहरी परररमा गमलयारं) से अधधक 24 एकि िमीन को क्र ककया िाएगा कक (बाहरी परररमा

गमलयारं)। पहले 3 राकरम पतथर मं बनाया िाएगा और 13 गोपुरम (टा्रं) रािसी रािा गोपुरम लंबा 108 फुट खिा के साथ बनाया िाएगा।

• १००० साल पुराने पव्् बरगद के पेि की सजननधध (मंददरं), स्ाभाव्क ूप से गदित स्यमभु मल ंग, तनतयननदेश्रा- तनतयाननदेश्री, मीनािी, व्नायका, मुुगन, कालभैर्, ्ंकटेश्र और परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के धाममणक सथल

• रतयेक पि पर 182 फीट का व्सतार होगा िो पव्् बरगद के पेि के चारं ओर, एक डबल मंजिल, पतथर मंडपम है िो ब्मालूगै प्ी मंडपम होगा। इस मंडपम कलपतु मंडपम कहलाया िाएगा।

• ्संत मंडपम,िो पूरी तरह से पतथर और घर परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के सजननधध और मीनािी मंददर / सजननधधमं बनाया िाएगा। यह कलाकृततयां भी स्ामीिी के वयज्तगत दलणभ सं्ह शाममल हंगे। ु

• पाँच्ा राकरम सा्णितनक सुव्धाओं से भरा होगा - जिसमं एक व्श्व्दयालय टॉ्र और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM सभा (धयान हॉल) होगा।

• पांच मंजिला व्श्व्दयालय मं स्ागत कंि, रेसटोरंट, अनना मंददर (रसोई घर लोगं को से्ारत), गैलेररया, ्ंथ समाधध (दतनया के सबसे बिे आधयाजतमक ु पुसतकालय के मलए एक लाख ककताबं हंगी), टी्ी सटूडडयो (24 घंटे दतनया भर म ु ं रसारण हंगा), THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ममशन सधच्ालय कायाणलयं और 300 रतततनधधयं के मलए एक भवय सममेलन हॉल हंगा।

• THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM सभा जिनमं से अधधक से अधधक १५,००० लोगं को समायोजित करने के मलएबनाया िाएगा, िबकक १०,००० रतयि दशणन रापत कर करने के मलए और शेष ५००० लोगं को बस के बाहर अखािा और गैलरी मं बबिाने के मलय बनाया िाएगा। ं

• मंददर की संरचना एक सुंदर 10 फुट चौिी ख़ंदक़ से तघरा, एक शांत, राकृततक ्ाता्रण के साथ िल प्ियं और कमल से यु्त ककया िाएगा।

्ा्ा : व्तकतगत ्ांनत के शलए आध्ाततमक सफ़र

गोमुख , २००४ की च्र ि्म य्ि के दौर्न

मान्ता के मलये एक शांततदत के ूप म ू ं, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी सारे व्श् से लोगं को उचच उिाण तीथण के निं की आधयाजतमक या्ाओं पर ले िातं है, िैसे कक दहमालय प्णत, भारत के पव्् तीथण िे्ं ए्ं भारत के बाहर अनय पव्् सथलं मं। इन या्ाओं के समय कई र्चन देते हुए, ्े रहमाणड का सतय को तीथणयाब्ओं मं भीतर गहराई से आतमसात करा देते है ए्ं एक शांततपूणण मन हेतु अंतराकाश की उतपजतत करते हं। िब वयज्तओं के भीतर शांतत लाई िाती है, स्तः ही व्श्वयापी शांतत का आरमभ होने लगता है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM रतत्षण याब्कं के समूह को उचच उिाण के तीथणिे्ं मं ददवयगमन कराते है, जिसमं दहमालय या्ा हर साल की व्शेषता है। ददवयगमन करने के रमुख सथलं मं 'चारधाम', िो चार पव्् महािे् है - बिीनाथ, के दारनाथ, गंगो्ी ए्ं यमुनो्ी, िो गह्ाणल पंज्त ्ंखला मं है तथा अनय िे् िैसे की गोमुख, ऋषीके श, हररद्ार, उततरकाशी, ्ीनगर, सीतापुर, िोशीमि ए्ं पीपलकोदट भी सजमममलत है। दहमालय या्ा एक अतत रमसध व्शेषता है िो रतत्षण सारे व्श् से लोगो को आकवषणत करती हं सिी् आतम्ानी गुु THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की ददवय उपजसथतत मं दहमालय का ्ैभ् ् रहसयमय संदयण को अनुभ् दहमालय या्ा एक अतत रमसध व्शेषता है िो रतत्षण सारे व्श् से लोगो को आकवषणत करती हं सिी् आतम्ानी गुु THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की ददवय उपजसथतत मं दहमालय का ्ैभ् ् रहसयमय संदयण को अनुभ् करने हेतु। रतत्षण व्श्भर से सहयाब्कं की धगनती तेिी से बढती िा रही है। आि, परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी के ददवय नेतत् म ृ ं दहमालय ए्ं कै लाश या्ाएं करीब २०० याब्कं के साथ सबसे बिा या्ा रही है तथा चारधाम ् अनय पूनय िे्ं की महानया्ाओं को हमेशा सफलतापू्णक पूणण ककया है।

वबरल् मं हदर , ि्र्णसी य्ि् के दौर्न

ऊपर : गंग् के पविि तट केहकन्रे , २००६

नीचे*:* अंगकोर ि्ट कं बोहडय्

क ु मभ मेला

क ुमभ मेला मेला एक आधयाजतमक सङगम है िो पव्् नददयं के तट पर संयोजित ककया िाता है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM धयानपीिम ने तनरंतर से ही संपूणण व्श् मं कं भ मेले को रचाररत ए्ं आयोजित ककया है। ु

इलाहबाद मं कं भ मेला, २०१३ ु

क ु मभ मेले का आयोजन य ूनाइटेड सटेटस ऑफ़ अमेररका मं

मसतमबर २००६ मं ममशन ने पहली व्श् शांतत हेतु रथम संगम का आयोिन ककया। यह सममलेन मसतमबर ११, २००१ मं ्लडण ्ेड सेनटर पर हुए आतंक्ादी हमले मं िान ग्ाने ्ाले लोगं को ्धांिमल अवपणत करने हेतु आयोजित ककया गया था। इस सममलेन का आयोिन यूतन्मसणटी ऑफ़ कै मलफ़ोतनणया, इव्णन, USA मं २० से अधधक आधयाजतमक संसथाओं के सातनधय मं ककया गया था। इसमं ५००० से अधधक लोगं ने भाग मलया था। दव्तीय व्श् शांतत संगम का आयोिन लोस अनिेलेस मं ९ मसतमबर २००७ मं ्ेदांत सोसाइटी के साथ हुआ। कई साउथ कै मलफ़ोतनणया की सँसथाओं िैसे BAPS, ISKCON, माता अमतानंदमई, मसध ृ योग, मसध समाधी योग, सनातना धमं मंददर, मसनधी सेनटर, हंस योग, गुिरती असोमशयेशन आदद ने इसमं भाग मलया।

क ु मभ मेला ि्िण भारत मं आयोजन आयोजजत

धथुमाकं दाल ु ू टी नामसणमहापुर, मैसोर िहाँ तीन पव्् नदीयं - का्ेरी, कवपल और सपटीक सरो्र का समागम होता है, ्हां २ फ़र्री २००७ ् िन्री २०१० मं परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने अपनी उपजसतधथ रकट की। यहाँ १९८९ से कुमभ मेले का आयोिन हो रहा है। यह िे् कई संतं का तन्ासलोक ् आ्म हं। २०१० मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM धयानपीिम ने शोभाया्ा के आयोिन का उततदणतयत्ा उिाया था।

At Kumbh Puri

परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने एक आनंदमय, रबुध मान्ता और व्श् शांतत के आदशण को सुृ़ करने के मलए पव्् गंगा नदी के तट पर ्षण २००७ िन्री मं भ्तं के एक समूह का नेतत् ककया| ृ अधण कं भ मेले के आयोिन सथल इलाहाबाद म ु ं मान्ता की सबसे बिी सभा एकब्त हुई|

सा्णभौम सतयं का रकटीकरण

लाखं लोगं के िी्न के एक रेरणा शज्त ्ोत, परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्ामीिी मं अपने श्दं मं तनदहत अनुभ्ं को ्ोताओं तक पहुँचाने की अ्त ु िमता है। स्ामीिी के ्ान रदान करने की व्लिणतनय शैली सभी ्गण, धमण ए्ं समाि मं रशंसकं द्ारा बहुचधचणत है। उनमं आधयातम को लोगं के तनकट लाने की और लोगं को आधयातम के तनकट लाने की अ्त कला है। उनके सतसंग, ु सा्णितनक र्चन ए्ं धयान मशव्र मं भाग लेने ्ाले हज़ारं लोगं का मानना है कक उनहं िी्न दशणन, शारीररक ् मानमसक धचककतसा और रमाणणक आधयाजतमक अनुभ् रापत हुए हं, जिसके कारण ्े अपने ददनचयाण को अधधक आनंद ए्ं उतपादकता से वयतीत कर सकते हं।

परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी समपूणण व्श् का व्चरण करते हुए बहुव्शय िैसे धयान, मान् चैतनय, स्ासथय ए्ं कलयाण, योग, उततरदातयत् ए्ं ईश्रत्, व्श् के धमण तथा राचीन दहनद शास् ू पर र्चन ् अनुभ्ी उपतनषद रदान करते हं।

परमहंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने ्ैददक संरदाय के कई बिे ए्ं छोटे ्ंथं मं तनदहत गूहय रहसयं को उिागर ककया है। इनमे सजमममलत है क्ीसंतं द्ारा रधचत भज्त शलोक तथा मश् सू्, िैन सू्, योग सू्, भग्दगीता, रमनाररन आतम व्िाई, व्नायगर अग्ाल, तं् शास् और उपतनषद िैसे की ईशा्ासय उपतनषद, किोपतनषद और के नोपतनषद।

उनहंने हिंदू इततहास पुराण िैसे रमायण ए्ं महाभारत, समुि मंथन, सनातन धमण और मंददरं ए्ं कमणकांडं की महतता के बारे मं ््तवय ददए हं। उनके आधयाजतमक र्चनं को सुनने ्ाले ्ोतागण सदै् ही स्णभोमय रहे हं। उनमे कॉपोरेट अधधकारी, कफजिमशयन, शोधकताण, यु्ा, बचचे, छा्, आधयाजतमक साधक और आमआदमी शाममल हं।

जीिन की च्र मि्श्िओं

परमहंस The Supreme Pontiff Of Hinduism Bhagawan Sri Nithyananda Paramashivam जी ने शज्तशाली सतयं को उजागर कर मानवता को चार महाशज्तयं की ओर जागत ककया: ृ

श्दं की शज्त या संसकृत मं '्ाक् शज्त'। समपूततण या अखंडता, इस ्ाक-शज्त को िागत ृ करने का मूल तत् है।

विचारं की शज्त या 'मनोशज्त'। ्धा या एक संरेखखत पहचान (बाहरी ् आतंररक पहचान का एकाकार) के साथ उचच संभा्ना मं िीना, इस मनोशज्त को िागत करने का मूल तत् है।

भा्ना की शज्त या 'रेम शज्त'। उपायनम या उततरदातयत्, इस रेम शज्त को िाग ् त करने का मूल तत् है।

िीने की शज्त या 'आतमशज्त', अपयायनम या अनय ् स्यं को लाभाजन्त करना, इस ् आतमशज्त को िागत करने का मूल तत् है।

स्ासथय, सफलता और तनतय आनंद को अनुभ् करने का मूल सहसय इन चार महाशज्तयं को िी्न के चतुरतत्ं (चार तत्ं) द्ारा िागत करने मं है। यह शज्तयां स्णदा हमारे भीतर व्दयमान रापय है।

््ण और पूणणत् – हमारी चार शज्तयं को अना्त करने के अस्

स्यं से बात करना हमारे अंतःकरण मं आरामकता के समान है । हम हमेशा इस बात की अ्धारणा करते हं की हमं चीिं की रिा करने की ज़ूरत है, इसमलए हम स्यं से बात करते हं| स्यं को ््ण करना ही अंतःकरण की ्ाहकता है| स्यं से बात करना अपूणणत् है| स्यं को ््ण करना ही पूणणत् है|

िब भी आप स्यं को आपके ््ण अंश के साथ संयु्त कर लेते हं तब आप पूणणत् की जसथतत मं आ िाते हं| िब भी आप पूणणत् की अ्सथा मं होते हं , तब आपके अंदर की चेतना आपके अंदर के शोर को चुप करा कर आप के साथ संबंधधत हो िाती है। िब भी आप स्यं को ््ण से संबंधधत करते हं तब इस भय मं ना रहे की आपके आरामक दहससा आप से बात करता रहेगा और आप उसे सुनने के मलए बाधधत हंगे|

प ूणणत् ्या है?

अतीत की घटनाओं , श्दं, कायं या समतत के ककसी भी अ्ेशष के बबना रहना ही पूणणत् है। अ्शेष न रहने का मतलब यह नहीं की आप को अपने अतीत का बबलकुल ही समरण नहीं रहेगा| िब आप पूणणत् की जसथतत मं रहंगे तब आपको आपके अतीत का समरण तो रहेगा लेककन ्े अब आपको रोध, ददण, पीिा नहीं दंगी|

सतसंग गहन सकारातमक उिाण को बांटने और रसाररत करने का एक संगम है। यह आतम्ानी पुुषं के ्चनं ुपी शास् शस्ं (्ान के शस्) को एकब्त ए्ं रयोग करने का सथल है जिसके माधयम से हम तनतयानंद को रापत होते हं। सतसंग एक एसा सथल भी है िहाँ रततददन मान्ता की और उततम ूप से से्ा करने के उपाय ककये िाते हं। िब हम एक ऐसे संघ का तनमाणण करते हं िो आपस मं तथा अजसतत् के साथ रेम और भज्त को सश्त ए्ं रोतसादहत करता है, तब हम एक ऐसी शज्तशाली उिाण बन िाते हं िो की स्यं ् दसरं को आनंदमय वयज्तत् मं परर्ततणत कर सकती हं।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने एक ्ैजश्क ्ैददक पुनःिागरण को अपने तनतय सतसंग के आधयाजतमक संगम के माधयम से रेररत ककया है जिसका धयय है सकारातमक ए्ं शांततपूणण तरंगं का सिन ् संचारण करना, वयज्तगत ् व्श् सतर पर। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM परर्ार के सदसय अपने िी्न मं ब़ रहे आनंद को बांटने हेतु रततददन अपने शहरं मं एकब्त होते हं। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी स्यं इस शज्तशाली तनतय सतसंग का हर सुबह नेतत् करते ह ं। इस सतसंग का सारे व्श् मं सीधा रसारण होता है और ४० देशं से भी अधधक इसे दो तरफा व्डडयो कॉन्ंमस ंग ए्ं तनतयानंद टी्ी के माधयम से देखा िाता है।

इसके अला्ा, २० से अधधक व्मभनन रकार के धयान कायणरम अनेक सतरं पर ममशन द्ारा आयोजित ककये िाते हं, िो कॉपोरेट, व्दयालयं, िेलं आदद मं रदान ककये िातं हं।

तनतय धयान योग (लाइफ ज्लस कायणरम)

तनतय धयान योग/लाइफ ज्लस कायणरम एक अदव्तीय ध यान ् की व्धध हं जिसे की THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ामीिी ने बनाया ह ् ं | यह कायणरम हमे आश चयण रदान करता है जिसके द्ारा ् हम दख, धच ंता और तना् का सामना कर सकते है साथ ु ही साथ यह हमे अपने अतंरमन की ओर ले िाता है |

यह आसान ककन त् ु शज्तशाली िी्न ररर्ततणत करने मे सिम ध यान कायणरम को बनाया गया है ताकक हम ् अपने आतंररक ूपातंरण को गहरायी मे कर सके साथ ही साथ यह हमारी बबमाररयं को भी िीक कर देता है | यह ध यान की व्धध स ् ्यमं िी्न म ् ुज्त रदान करने मे सिम गुू THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ् ्ामी द्ारा तनिेमशत ् है | इस ध यान को करने से हम अपने द ् व्धा और ु उलझन के मूल कारण को आसानी से समझ पाते है साथ ही साथ उन नकारात मक व्चार की धारा को नष ् ट ् कर पाते हे और अपने िी्न मे उलझन और दव्धा ु को त यागते ह ् ुये इस पथ की ओर आगे ब़ िाते हं

इिर अवेकनिंग

'इनर अ्ेकतन ंग एक कायणरम नहीं, यह एक अतयुततम दलणभ संभा्ना है। यह अंततः है ु आपके अपने परर्तणन का स्यं अनुभ्, आपका घतनषि संपकण आप ही की अपनी उचचतम संभा्नाओं से। इनर अ्ेकतन ंग हर िण एक तािा पररचय है, ्यंकक िी्न आपको अपना पररचय दे रहा है हर िण रततिण। कोई भी पू्णसूधचत नहीं कर सकता कक इस कायणरम मं आपका अदव्तीय अनुभ् ्या होगा! लेककन म यह बता सकता ह ं ूं ्यंकक यह मने बार बार होत ं ं देखा है। इनर अ्ेकतन ंग से कोई भी नहीं - कोई भी नहीं कभी ्ापस गया है, बबना 'िी्नमुज्त' के कम से कम एक पहलु के रतयि अनुभ् के ।"

  • THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ~

्या आप अपने '्ासतव्क' स्ुप से ममलने के मलए तैयार हं ्या आप सामाजजक रततबंधं के वयज्तत् से मु्त अपने 'वयज्तगत आतम' से पररधचत होने के मलए तैयार हं, िो पूणणतः अदव्तीय 'आप' है ? ्या आप अपनी अ्धा से पररधचत होने और अपनी ्ासतव्कता को खोिने के मलए तैयार हं ?

्या आप अपनी उचचतम िमता तक पहुँचाने के मलए तैयार हं और अपनी मनचाही ्ासतव्कता को िी्न देने हेतु तैयार हं? यदद आपका उततर 'हाँ' है तो 'इनर अ्ेकतन ंग' आपके मलए ही है! इनर अ्ेकतन ंग एक अदव्तीय िी्न परर्तणनीय कायणरम है िो आपको, आपके 'स्यं' से पररधचत कराता है!

एक दलणभ सिी् अ्तार द्ारा रधचत ए्ं संचामलत इनर ु अ्ेकतन ंग कायणरम आपको शज्तशाली िी्न परर्तणनं की एक इसी या्ा पर ले िाता है िो आपको स्यं की उचचतम संभा्ना से पररधचत करायगी। ं

यह कायणरम 'कुणडमलनी शज्त' के िागरण पर के जनित है। िैसे ही आपकी कुणडमलनी शज्त दीिा के माधयम से िागत होती है, आप रतयाघात चैतनय िाग ृ तत का ृ अनुभ् करंगे िो की आपको सकारातमकता, स्ोचच संभा्ना, अ्त नेत ु त्, ओर व्लिण आतम्ान की और ृ अ्सर करेगी।

इनर अ्ेकतन ंग अदव्तीय ्यं है ?

इनर अ्ेकतन ंग आपको िी्न के उपयु्त ्ान से सश्त करता है। इनर अ्ेकतन ंग मं आप सािात िी्ंत अ्तार THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की शारीररक उपजसथतत मं रहते हं। ऐसे रबुध चेतना के संपकण मं २१ ददन रहने मा् से आपमं कई संभा्नाएं िागत हो िाती ह ृ ं। िब आप ५०००० ्षं से भी पुराने चार तत्ं पर अपने िी्न को आधाररत करंगे तो आप िी्न की समझ के रतत स्यं की धारणा परर्तणन का अनुभ् करंगे। इन ततत्ं मं आपके स्यं ए्ं िी्न से संबंधं को परर्ततणत करने की िमता है और यह ्ान आपको मुज्त और अपनी मनचाही ्ासतव्कता के तनमाणण के मलए सश्त करता है। एक बहुआयामी िी्न का अनुभ् कीजिये जिसमे योग, साजतत्क भोिन, पुरातन ्ैददक उतस् सजमममलत हं। िब आप एक पव्् ऊिाण िे् मं होते हं तो ये तत् (मसधांत) सहि ही आपके मलए सतय (अनुभ्) बन िाते हं। गहरे शारीररक, मानमसक ए्ं भा्नातमक धचककतसा का अनुभ् कीजिय। अपनी मूल ्ासनाओं के बारे मं िातनये िो की आपकी िी्न को ददशा रदान करती हं। आप िैसे ही इन मूल ्ासनाओं से पूणणत् लाते हं, आप चेतना के साथ िी्न को िीने ए्ं धरनाबोध करने हेतु सश्त हो िाते हं। स्यं ् अनयं को लाभाजन्त करने

के व््ान मं दी्ित हो िाईये ओर एक अधयाजतमक कायणकताण बनने के मागण पर अ्सर हो िाईये जिससे की आप व्श् चेतना को नयी उनचातययो तक पहुँचाने मं सहयोग कर सकंगे। इतना ही नहीं आप स्यं ् अनयं का उपचार करने की दीिा ए्ं ्ान भी रापत करंगे।

ईनर अिेकनन ंग िनतभाधगयं के अनु भि

मस ंधथया नामसणसी - योग मशिक, स्ासथय िागूकता और उचचतम नेतत् का व्सतार कर सके | ृ

तनतय सतयस्ूपन - बबलडर - लॉस एंजिलस, संयु्त राजय अमरीका

यह मेरा दसरा इनर अ्ेकतन ंग है और िैसे की THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी कहते ू हं कोई दो इनर अ्ेकतन ंग एक सामान नहीं होते|मेरा पहले इनर अ्ेकतन ंग का अनुभ् बहुत ही रभा्शाली था और मने ं कुछ अचछे परर्तणन भी महसूस ककये| परनतु दसरे आई.ए. ु म मनो अंतरातमा म ं ं एक परमाणु व्सफोट सा हो गया हो| यहाँ आने से पहले िी्न के रतत मेरा रबल रततरोध था| िी्न मं जज़ममेदारी लेना के रतत मेरी अिमता को म समझ नहीं पा रहा था|म ं अपने आपको एक ही से ं हालातं मं फसा हुआ पाता था|म व्िमता अन ं ुभ् कर रहा था और मेरा पूणणत् के रतत किा रततरोध था|म यहाँ ं सब कुछ बदलने के उ्ेशय से आया था, और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी के सातनधय मं यह काफी आसान साबबत हुआ| िब हम संसकारं के साथ पूणणत् करया कर रहे थे मुझे ्ह घटना याद आई जिससे मुझे मेरे अजसतत् का ्ात हुआ| म सपषट ूप से देख सकता ह ं ूँ की कै से इसने मेरे पूरे िी्न को रभाव्त ककया| और िब म अपने संसकारं को ्ात ं कर पाया, म उनह ं ं पूरी तरह छोिने के मलए सिम था, ऐसा महसूस हुआ कई ्षं के रततरोध, संदेह, आतमोतसगण और आतम घणा वपघल गए। यह मेरे मलए एक बिी राहत की ृ बात है|िब मने अपने परर्ार से संपकण ककया और उनके ं साथ पूणणत् ककया, तब उनहंने काफी सराहा, और ्े काफी ्हणशील और खुश थे| पहली बार मुझे ऐसा महसूस हुआ

रमशिक, लेखक - मशकागो, संयु्त राजय अमरीका पहले दस ददनं मे हमं कई भा्नातमक उपचार का अनुभ् हुआ: स्यं से, दसरं से, अपने स्ासथय ू से ए्ं अपने पू्ण िनम की असमपूततण को ममटाने पर कायण ककया| THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने हमं एक ल्य के मुताबबक इन रकरयाओं का अनुसरण करने के मलए कहा: ्ह अ्सथा खोिना िहाँ शज्तहीनता और आतमशंका उतपनन न हो, और अगर उतपनन हो भी तो हम मं इतनी िमता होनी चादहए की हम उसे तुरंत िान पाएँ| कै से मने इस तरह से मेरे सारे िी्न को नहीं जिया? म ं ं सपषट ूप से ्े संसकार देख सकती हूँ, जिसने मुझे हताशा और पीिा से िकि मलया था और ककस तरह इन संसकारं की ्िह से म काफी छोटा महस ं ूस करती थी, ऐसा रतीत हो रहा था की म अपने िी्न म ं ं स्ोततम चीिं की हकदार नहीं हूँ|

बेशक म खं ुद के मलए यह चाहती थी, लेककन म अपने ं संसकारं से इतनी धूममल थी की मेरे मलए आगे ब़ पाना मुजशकल था| यह एक सशज्तकरण की रकरया है| और म अव्श्सनीय ूप से स्ाददषट भोिन के साथ ं शांततपूणण योग, आयु्ेद, ्ैददक अनुषिानं का उललेख करना तो भूल गयी| इनर अ्ेकतन ंग अदभुत है| मं ्ासतव्क ूप से चाहूंगी की सभी इस करया का अनुभ् करं, और THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी का भी| THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी और कुछ नहीं बस इतना चाहते हं की समपूणण व्श् अपनी उचचतम संभा्ना, उचचतम

की एक खूबसूरत ररशते की शुुआत के मलए सारे दर्ािे खुल गए हं| यह ्ासत् मं अ्त है!म ु ुझे पता हं की अपसे पूणणत् ही मेरी िी्न शैली है| यह के ्ल मेरी ही िी्न शैली नहीं होने िा रही है;अवपतु म यह स ं ुतनजशचत कूँगा म भी यह कई अनय लोगं की भी िी्न शैली हो| ं

सोतनका गंभीर - फै शन उदयमी और छव् पाषणद - मुंबई, भारत

इनर अ्ेकतन ंग की बात करं तो इतने कम समय मं मेरे पास बहुत सारे अनुभ् और बातं हं साझा करने के मलए| रारंभ मं, इ्कीस ददन का समय काफी लंबा समय लग रहा था। मने सोचा "हे भग्ान! म ं इतने ं ददनं के मलए ्या करने िा रही हूँ और म ्या िानने ं के मलए िा रही हूँ? "लेककन अब बीस्े ददन मुझे ऐसा महसूस हो रहा है की यह इ्कीस ददनं का समय बहुत कम है। इनर अ्ेकतन ंग मं मसखने और अ्शोवषत करने को इतना कुछ है की शायद तीन महीने या चार महीने की िूरत है। समय बस इतनी िलदी से चला गया| रतयेक वयज्त का आई.ए. करने का अपना एक कारण है| मेरे मलए िब मने सोचा की म ं यहाँ ्यं आ रही ं हूँ, मेरे पास कोई व्शेष कारण नहीं था; िी्न अचचा था सब कुछ सही चल रहा था| यह बस यहाँ आने का एक बुला्ा था| मेरे पहले स् के दौरान िब म यहाँ ं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी के साथ बैिी थी और कफर मने िब आ्म, ं बरगद के पेि और मंददर का दौरा ककया तब ऐसा रतीत हुआ मानो म सही िगह पे ह ं ूँ और सही समय पे सही चीज़ कर रही हूँ| म इस अहसास को जज़नदगी भर संिो ं के रखूंगी| जितनी भी मशिा मने यहाँ ्हण की ्ह ं इतनी रयोगातमक है की म घर िाकर उनह ं ं रयोग मं लाने के मलए बहुत उतसुक हूँ|

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने मुझे मेरे िी्न की चाबी दे दी हं, बहुत ख़ूबसूरती से उनहंने मुझे खुद से ममलाया है|THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की मशिाओं को एक तरफ रख दं तो के ्ल THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की उपजसथतत ही अ्णणनीय है| इनर अ्ेकतन ंग THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी को अनुभ् करने की रकरया है, और यह अपने आप मं ही एक शज्तशाली रकरया है| रथम ददन िब म यहाँ ं बैिी थी तब मने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी को एक रमशिक की तरह ं देखा, पर आई. ए. के आणखरी ददन अब म ग्ण के साथ ं कह सकती हूँ की म एक ग ं ुु घर ्ापस ले िा रही हूँ| और यह एक महानतम अहसास है|

्ै्ातनक सबूत का रहसयोदघाटन ~ ड्.कृ ण्

सभी िी् िंतु िनम, मरण, रिनन, पररप््ता ए्ं मतयृ ु से होकर गुज़रते हं|

ककसी भी वयज्त की आयु कई कारकं से तनधाणररत होती है| एक समय पर बु़ापा एक अटल अ्सथा माना िाता था और उसे पू्णतनधाणररत ए्ं अपरर्तणनीय कहा गया है |हाल ही मं कई िंतुओं पर ककये गए ्ै्ातनक रयोगं मं पता चला है की बू़े होने की रकरया को मधम ककया िा सकता है, साथ ही साथ स्ाथय ए्ं िी्न की गुण्तता मं भी सुधार लाया िा सकता है|

२०१० और २०१४ के बीच २१ ददन के इनर अ्ेकतन ंग (आई.ए.) कायणरम के रततभाधगयं पर चार व्मभनन परनतु आपस मं िुिे हुए रयोग ककये गए|

माइटोकॉजनियल अधययन:

पहला रयोग ५० ्षण से जयादा आयु के २० आई.ए. रततभाधगयं ए्ं २० बबना आई.ए. ककये हुए रततभाधगयं पर ककया गया | माइटोकॉजनियल गततव्धध के मा्ातमक परख को मापने के मलए एम.टी.टी. परख तकनीक का उपयोग ककया गया था। सभी स्यंसे्कं के र्त के नमूने पहले ददन और २०्ं ददन पर मलए गए | पररणामं के अधययन समूह मं

सांजखयकीय महत्पूणण म ा इ ट ो क ॉ ज न ि य ल गततव्धध और कोमशकाओं की वय्हायणता मं 1000 से अधधक रततशत ्वध का रदशणन ृ ककया। माइटोकॉजनिया वयज्त की कोमशकाओं

के मलए बैटरी या ऊिाण उतपादकं की तरह हं। ्े हर कोमशकाओं की िीव्त गततव्धधयं को बनाए रखने के मलए ऊिाण के उतपादन के मलए जिममेदार हं।

वयायाम और एलोपैधथक द्ाएं मानक तरीकं से लगभग 30% तक माइटोकॉजनियल गततव्धध मं सुधार कर सकते हं। माइटोकॉजनिया ितत के मलए अततसं्ेदनशील है, और एक ितत्सत माइटोकॉजनिया कोमशकाओं के नुकसान, उर ब़ने ए्ं अंततः रतयु का कारण बनता है| माइटोकॉजनिया को सीधे इंसान की उर ब़ने की रकरया से िोिा गया है।

िीन ए्सरेशन अधययन:

मनुषय मं 25,000 िीन हं, जिनमं से लगभग 10,000 ककसी भी एक समय मं वय्त होते हं| िीन कोमशकाओं मं रोटीन के उतपादन से लेकर रिनन तक लगभग सभी कायणरमं को तनयंब्त करते हं। िीन का वय्त या अवय्त होना पयाण्रण या epigenetic कारकं पर तनभणर करता है| धचककतसा की भाषा मं इसे उप-रेगुलेशन और डाउन-रेगुलेशन कहा िाता है| ्तणमान मं, रतयेक िीन की भूममका ए्म गततव्धध करयाओं के तरीके (िो उनके द्ारा ब़ाये या अ्रोधधत ककये िा सकते हं) के बारे मं बहुतकुछ िाना गया है| ्े इस बात पर तनभणर करते हं की वय्त कर रहे िीन उस समय ककस समूह पर आधाररत या डाउन -रेगुलेटेड हं।

इस अधययन मं, 40 नमूने पररधीय र्त से मलए गए और चार समूहं मं िमा ककये गए । इनर अ्ेकतन ंग रो्ाम के दौरान , 0 ददन और 21 ददन पर उनके िीन की अमभवयज्त का अकफ़मेद््स माइरोधचप, पररधीय लयूकोसाइट द्ारा अधययन ककया गया ।

पररणाम से पता चला की अधययन के अंत मं 420 िीन उप - रेगुलेटेड और 165 िीन डाउन -रेगुलेटेड थे । िीन आंटलिी अधययन ,्तणमान मं उपल्ध डेटाबेस का उपयोग करके बताता है कक नयूरो्ांसमीटर, कंसर और सटेम कोमशकाओं मं स्रोगिमता के संबंध मं महत्पूणण दो गुना परर्तणन हुआ है ।

मारातमक सटेम सेल विशलेषण:

मूल कोमशकाएँ आला कोमशकाएँ हं,िो सैधांततक ूप से अमर हं| हालांकक व्भाजित होने के बाद उनका एक सीममत िी्नकाल होता है िो कक उन कोमशकाएँ की व्भािन की संखया पर तनभणर करता है|

एक ्ूण के ूप मं,हमारे पास सटेम सेल का एक बिा बक है िोकक रभाव्क ूप से बह ं ु शज्तशाली सटेम कोमशकाओं मं ्यसकता की संखया को कम करती है । आइ ए रततभाधगयं से मलए गए 100 र्त के नमूनं का पररधीय र्त मं सटेम कोमशकाओं के मा्ातमक उपजसथतत के मलए परर्ततणत ककया गया।

रथम ददन और २१्े ददन के सैमपल-डाटा की तुलना की गयी| सांजखयकीय ूप से इनर अ्ेकतन ंग के बाद कोमशकाओं की गणना मं रभाव्क ूप से ्वध ह ृ ुई, पी मूलय के साथ , पी 0.001 से कम। यह 21 ददनं मं मूल कोमशकाओं की आबादी मं उललेखनीय ्वध दशाणता है| ृ

मूल कोमशकाओं की िनसंखया सीधे उर ब़ने से िुिी

टेलोममरेि अधययन:

टेलेमोरेस एलोमेसण, डी.एन.ए. यु्त रोमोसोम के मलए सुरिा क्च की तरह हं | उर के साथ वयज्त मं टेलोमेरेस की कमी और उनकी अंततः उनकी अनुपजसथतत बु़ापे और रतयु का कारण बनती है।

टेलोमेर की लंबाई को बनाए रखने के मलए जिममेदार एंिाइम को टेलोममरेि कहा िाता है। सामानय ्यसकं मं नगणय टेलोममरेि गततव्धध होती है, और इसमलए उनका िी्न काल बहुत ही सीममत होता है।

रथम ् २१्े ददन १०० इनर अ्ेकतन ंग रततभाधगयं की पररधीय र्त कोमशकाओं मं ,TDA परीिण ककया गया|

कायणरम के अंत मं काफी परर्तणन पाया गया। सभी रततभाधगयो मं कम से कम 0.5 गुना परर्तणन देखा गया, इनमे से 47 रततभाधगयं ने 0 .5 से 2 गुना परर्तणन

देखा गया (3 से 4 गुना परर्तणन )। पूरे समूह का औसत परर्तणन 0.68-1.3 था। ्तणमान धचककतसा सा्य सलाह देता है , एक टेलोममरेि गततव्धध या टेलोमेर की लंबाई मं महत्पूणण परर्तणन का पता

लगाने के मलए मं कम से कम 4-5 महीने की िूरत होती है ।

बोसटन अनुसंधान समूह की एक अधययन के अनुसार िो की PLoS मं रकामशत की गयी थी, धच ंता, भय और अनय इसी तरह की भा्नाएँ (अपूरणता ) िी्नकाल को छोटा करती है।इनर अ्ेकतन ंग कायणरम से स्ासथय सुधार पर संधचत रशना्ली अधाररत स्ेिण|

सारांश:

्तणमान धचककतसा रमाण से यह साबबत होता है की माइटोकॉजनिया , सटेम कोमशकाएं, भा्नाएं, और टेलोममरेि गततव्धध सीधे उर ब़ने की रकरया से िुिे होते हं कोमशकाओं है| ्तणमान धचककतसा उपचार का उ्ेशय उसी का औषधीय सुधार है ।

इस एकल 21 दद्सीय कायणरम मं माइटोकॉजनिया, सटेम सेल ए्ं िीन अमभवयज्त के रासते बदलकर , गैर-औषधीय ्वध का पहला रतयि रमाण , 4 साल से अधधक संरधचत ृ अधययन के माधयम से रदमशणत ककया गया है| पूणणत् की रकरया के माधयम से अपूणणता के रततकूल रभा् को सही कर इस रमाण को रापत ककया गया।

तनषकषण:

शरीर की अमरता रहमांड की योिना मं नहीं है । हालांकक हमारे राचीन शास्ं के आधार पर , उधचत रकरयाओं के माधयम से , अचछे स्ासथय और कफटनेस के साथ एक वयज्त के िी्न मं ्वध करन अ्शय ही ृ संभ् है।

"इनर अ्ेकतन ंग" के बाद का िी्न

रततभागी अपने आधयाजतमक अभयास को कै से आगे ब़ाकर एक दसरे को अद्ैत िी्न िीने के मलए मदद कर सकते ह ू ं।

रततभागी अपने आधयाजतमक अभयास को कै से आगे ब़ा सकते हं और एक दसरे को ू अद्ैत िी्न िीने के मलए मदद कर सकते हं।

अब THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संघ इनर अ्ेकतन ंग कायणकमण के सनातकं को तनरंतर मशिा कायणकमण देता हं, जिसक नाम "मलव् ंग अद्ैता रकरया" हं। यह एक ३ महीने का ऑनलाइन कायणरम हं िो सपताह के अंत मं आणखरी २ ददन होता हं। इसमं किाएं स्यं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी द्ारा ली िाती हं। होम्कण के ूप मं कायण सौपा ददया िाता ताकक मसधांतं को और भी गहरायीं से मनन ककया िा सकं। पहला बैच १६ अगसत २०१४ को शुू हुआ और न्ंबर के मधय तक चला। अभी तक य सारे इनर अ्ेकतन ंग ं सनातकं के मलए शुलकमु्त चला हं। इसको भारी मा् मं रततकरया ममली हं जिनहंने देशं से इसमं दहससा मलया हं। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संघ का दहससा बने !

हरेक ्ीमहंत, महंत, कोिारी, थानेदार THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संग का अमूलय दहससा हं। और संगदित समुदाय हं, जिसमे हर कोई एक उसरे को अद्ैत सतय (आतम्ान) को िीने के मागण मं आगं ब़ने मं मदद करते हं। ्ीमहंत, महंत, कोिारी, थानेदार की उपाधध महातन्ाणणी अखाडा के द्ारा संघ मं व्मभनन सतर की जिममेदारी तनयु्त करनेके मलए रयोग होती हं। अपने आधयाजतमक व्सतार और पूणणत् के मलए संघ की जिममेदारी लेना एक रबल तरीका हं। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संग एकमा् ऐसा व्श्ीय आधयाजतमक परर्ार हं िहाँ पर दसरं को सम ू ध करना ही ृ िी्न है और दसरं के मलए िीना ही एकमा् ू आधयाजतमक मसधांत ! हमहे SMKT संरचना अद्ैत सतय के अनतराकाश को िीने और रकामशत करने के मलए सभी संभा्नाओं को रदान करती हं। हमारा संग देशं , िगहं मं फै ला हुआ हं। अमेररका मं हमारा संघ राजयं मं हं।

अ्ैतिक र्िया

आप िब ११ लोगं से साथ प ूणणत् का अनुभ् कर लंगे, तब आपकी मूल ्ासना िो आपको आपके तनधाणररत मागण से भटकाती है, ्ह आप पर अपनी पकि छोि देगी | तब आप सही मायनं मं अद्ैत सतय का अन ुभ् करंगे

इनर अिेकवनगं : कं बोहडय्

शशिोिम क् अनुभि

for at least eight-hundred to thousand years.

— THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM I wanted all of you to know that just the knowledge of architecture and construction is not enough to build a temple; it needs tremendous inspiration, excitement, enthusiasm! — THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

मश्ोहम का अनुभ्, यह अनु भ् की आप रहमाणड हं, संभ् है | - THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

2014 closed with the most explosive, transformative event of the year - Inner Awakening, Cambodia.

In this all new Shivoham program, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM lead around 450 Beings to experience the space of Shivoham - enlightenment!

Participants toured the major

Hindu temples, such as Angkor Wat, Bayon Temple and Beng Mealea. THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM shared his enlightened insights about who built those amazing temples and why.

This whole Cambodia infrastructure was created for mass enlightenment, and it was consistently used for mass enlightenment

निराहार सं्म -उपवास एवं उपभोग के परे

्यं म भोिन के बबना िीते ं

वनरोगी तन कोई इ्ानिीं अनंत्िीन उज्ा

तनराहार ने मुझे मस खाया की अपने अनदर ् बाहर होने ्ाली हर चीि के मलए म ही उततरदायी ह ं ूँ | इससे मेरे अनदर हमेशा ि ी्न के मल ए एक

उतसाह बना रहता है।

भोजन माया िै!

'सुतनए। म दो महत्प ं ूणण पव्् रहसय आपको बता रहा हूँ। पहला, आपके शरीर को उतने भोिन की आ्शयकता नहीं है जितना की आप लेते हं। उतना भोिन करना एक शारीररक आ्शयकता नहीं है। यह पहला तथय है। दसरा यह है ू कक आपके शरीर को िीव्त रहने हेतु भोिन की आ्शयकता ही नहीं है।

मेरे पहले कथन को समणझये - आपके शरीर को उतने भोिन की आ्शयकता नहीं है जितना आप लेते हं, ्यूंकक भोिन आपके मलए महि एक शारीररक आ्शयकता

नहीं है। भोिन के साथ अनेक ्ासना ए्ं संसकार भी िुिे हुए हं। िब आप तनराहारी बन कर जियगे, तब आपको पता चलेगा ं कक भोिन एक रबल सामूदहक ्ांतत है जिससे आप पीडित हं। इसी को म माया कह ं ूँगा, 'माया' श्द की यही सबसे सटीक पररभाषा है।'

- THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

दतनया भर के हिारं ु रततभाधगयं ने अनु भ् ककया:

  • भोिन की तषणा म ृ ं घटा्
  • भोिन समबनधी व्कारं से
  • मुज्त
  • असाधारण ऊिाण सतर
  • उर से १० साल कम होने की अनुभूतत
  • यदद अधधक ्िन है तो ५-१० ककलो तक ्िन घटा्
  • आसज्त से उबरना

आतमव्श्ास और िी्न के रतत उतसाह

रहस्पू णा ्ौ्गक वव्ािं का रहस्ाभेदि

दीष् ््र् कु डललनी ज्गरण

एक बार िागत होने पर, क ृ ुणडमलनी वयज्त के शरीर ् मन रणाली मं अतत असाधारण परर्तणन लाती है, िैसे ऊिाण के सतर मं भारी उछाल, पुरानी बीमाररयं की धचककतसा और मानमसक िमताओं मं ्वध। क ृ ुणडमलनी िब सुषुमना नािी (रमुख सू्म ऊिाण मागण) के माधयम से री़ द्ारा ऊध्णधगत होती है, यह मजसतषक मं एक व्शाल ऊिाण के अनत्ाणह का पररणाम लाती है।

वपछले दशक काल से, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी तनकटता से सहकायणरत रहं हं ्ै्ातनकं और शोधकताणओं के साथ, ्ैददक परंपरा मं िडित रहसयमय व््ानं को अधधक रकाशमान करने हेतु, तथा इन व््ानं से िनमे सुलाभं को व्श्भर के लोगं मं रसाररत करने हेतु।

हाल ही के अधययनं का धयान कंदित रहा है कुणडमलनी शज्त की 'िागतत' या सकरयण, िो हर वयज्त म ृ ं व्दयमान आतंररक संभाव्त उिाण है। िबकक कुणडमलनी पू्ी योधगक व््ान मं सुरमसध ् रचमलत है, यह के ्ल एक आरमभ है पजशचमी धचककतसक समूहं के समि इस ्ै्ातनक ्ासतव्कता को मानयता रापत कराने हेतु।

कुणडमलनी ऊिाण व्मभनन माधयमं से िागत की िा ृ सकती है िैसे की योग, राणायाम (श्ास तकनीके ), कुछ औषददक साम्ी, मं्ोचचारण द्ारा शरीर मं व्शेष सपंदन उतपनन करना तथा एक योग मं मसध पुुष की 'दीिा' (ऊिाण संचारण) से, जिनकी कुणडमलनी पू्ण ही िागत है। इनमे से दीिा सबसे गततशील, सबसे सरल ृ ् सबसे सुर्ित पधतत है, कुणडमलनी िागरण हेतु।

्या ् ुनयता से भी क ु छ सजन ्कया जा सकता िै? ृ

हाँ, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के अनुयातययं कहतं है, िो सािी है रततददन असंभ्ता को संभ् होते देखने के , THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM धयानपीिम के व्श्वयापी ्ैददक मंददरं मं। अनधगनत भ्तिन सािी रहे है असंखय पव्् ्सतुओं के चमतकारी रकटन के , व्भूतत (पा्न भसम) से लेकर मधु, मणण से छोटी मूततणयाँ तक का पदाधथणकरण, ्ैददक मंददरं या उनके घरं मं - यह सब संभ् होता है THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी के ददवय्चन से रकट मा्के ्ल एक आशी्ाणद के श्द से। भली भांती रलेणखत और बहुत बार ्ीडडयो्ाफ करी हुई, यह सपषट रतीत होता है कक इन असाधारण ् अ्द ु रहसयमय घटनाओं की न तो एक ओर उपेिा की िा सकती है और न उनकी सपषटीकरण ककया िा सकता है।

ऐसे सैकिं चमतकारं मं से िो भ्तिन अनुभ् कर रहं है, के ्ल कुछ यहां उजललणखत है - उन सभी पदाथं का THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी के घोषणा करते ही कक ्े सब पदाथण रकट होएंगे, ममनटं या घंटं मं रकटन।

पदाधथणकरण और ्ैददक व््ान

्या पदाधथणकरण के ्ल ्धा ् ्धा्ानं की एक अमभवयज्त से अधधक और कुछ नहीं? ्या यह धोखा, िाद या व््ान है?्या यह ्ासतव्क सतय है? ू आि भी व्श् मं ्ै्ातनक समुदाय के अततउततम ददमाग भी इन घटनाओं की वयाखया करने मं असमथण है िो ९००००-्षण की पुरातन कालीन ्ैददक परंपरा मं ददन-रततददन की अतत साधारण घटनाएं है, ्ह सनातन परंपरा जिसका रतततनधधत् THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी करते हं।

्ैददक रहमाणडीय व््ान के अनुसार, हमारे रहमांड का सिन स्यं ह ृ ुआ था भग्ान रहम की मनोशज्त से। ् पव्् शास् ्नथ 'योग ्ामशषि' ्णणन करता है कक कै से अतयधधक उननत योगी अपने मनोशज्त से ्सतुओं का सिन कर सकते ह ृ ं, मसध अंतदणशणन ए्ं यौधगक सिनातमक ृ शज्त के एक दलणभ संयोग से, जिसे 'राकामय' की सं्ा ु दी िाती हं। 'राकामय' अषि महाँ मसवधयं (८ महान ददवय यौधगक शज्तयां) मं से एक मसवध है, िो कई िनमं के यौधगक साधनाओं से ए्ं ईश्र कृपा से ही मसध होती है।

दभाणगय ्श, यह असाधारण व््ान आि मान्ता के ु मलए पूणणतः लुपत हो गय हं ं। अब तक, कुछ ही दलणभ ु वयज्त रहे हं िो ्सतुओं के पदाधथणकरण मं समथण है िैसे पव्् व्भूतत को स्यं के शरीर से रकट करना या उन ्सतुओं मं रकट कराना िो उनकी ऊिाण छव् का ्रन करती है। पर THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ्ादरतत्ाद से परे आि धरती पर एक ही सा्णितनक ूप से िाने वयज्तत् हं िो ऊिाण से पदाथण का रकटीकरण, के ्ल कुछ ही ममनटं मं, करने की मसवध धारण करते है। यह पदाधथणकरण हिारं मील दर बैिे लोगं के शरीर म ू ं रकट

होता है, िहां स्ामीिी और कुछ रयोग नहीं करते के ्ल स्यं की अकलपनीय योग शज्तयं के अला्ा। ऊिाण ए्ं पदाथण के पररमाणं के बीच सरलता से व्चलन करते हुए, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ्ायु मं अणुओं को वपजणडत (सङघद्त) और अवपजणडत (अङघद्त) कर, सिन ् व्लीन कर और ृ व्व्ध ्सतुओं के पदाथं का पुनः सिन करते ह ृ ं िैसे की पतथर, करसटल और िैव्क रसायान। यह मानय है कक उनहंने १०३ कीमती ्सतुओं का पदाधथणकरण ककया है के ्ल एक ददवयशरीरर (ऊिाण का माधयम वयज्त) द्ारा, कुछ ही धंटं के अनतराल मं। इनमे से एक भी धातु का तनमाणण करने हेतु रकृतत माँ को हिारं ्षण लगे हंगे। परनतु THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्यं यह सपषट करते हं कक चमतकार नाम की कोई भी ्सतु नहीं है। सभी तथाकधथत चमतकार संपूणणत: ्ै्ातनक घटनाएं हं िो राकृततक तनयमं पर आधाररत है , जिनहं हमं अब तक पूणण ूप से समझने मं समय है।

आ्््िक उपच्र

उचतम आलोहकक ऊज्ा क् ििन करन्

दसरे रकार की उिाण आधयाजतमक ऊिाण है। यहाँ हम ु रहमांडीय ऊिाण की उचचतम तरंगो से ऊिाण रापत करते हं। यह ऊिाण बुवधमान होती है और िानती है की ्या करना है। और चँकक यह ब ू ुवधमान है, इसे हमारे द्ारा परर्ततणत नहीं ककया िा सकता। पर यह ऊिाण हमेशा ही स्ोततम पररणाम देती है। तनतय अधयाजतमक उपचार मं दसरे रकार की ऊिाण ू का रयोग होता है। इसमं उपचारक और ्हणकताण दोनं को ही के ्ल शांतभा् से ऊिाण के संचरण को र्ादहत होने देना है। िी्ऊिाण द्ारा उपचार करना सरल होता है, लेककन आधयाजतमक ऊिाण द्ारा उपचार के ्ल उचचा कोदट के साधकं द्ारा ही संभ् है। इसमलए एक आतम्ानी पुुष द्ारा दीिा रापत करना आधयाजतमक उपचार के मागण मं आ्शयक हो िाता है।

ऊिाण उपचार कई ऊिाण तरंगं को उपयोग मं लता है। इसे मुखयतः दो भागं मं व्भाजित ककया िा सकता है - राणणक ओर आधयाजतमक। राणणक ऊिाण द्ारा उपचार मं रहमाणडीय िी्ऊिाण के अनंत सो् से ऊिाण को रोगी शरीर मं र्ादहत ककया िाता है। पर यह धयान करना सुलभ होगा की यह िी्ऊिाण शुध चैतनय की ऊिाण नहीं है। बबिली की तरह ही यह भी एक अंधी ऊिाण है। बबिली की अपनी स्यं की बुधीमतता नहीं होती। यदद आप बलब को सॉके ट मं लगायगे तो ्ह िल उिेगा। बबिली को यह नहीं ं पता की कै से बहना है और कै से कायण करना है।

िी्ऊिाण भी कुछ इसी रकार है। बबिली की तरह ही यह भी यदद सही हाथं मं हो तो अधधक लाभकारी है। पर यदद दोनं उपचारक और ्हणकताण सही ूप से सुर्ित न हं या कफर उिाण का सञचालन सही न हो तो, यही ऊिाण हातनकारक भी हो सकती है। यह अनुभ् दलणभ नहीं है की उपचारक को ु ्हणकताण की बीमारी पकि लेती है या ऐसे ्हणकताण भी होते हं िो की उपचार रकरया अंत होने के बाद भी उपचारक की ऊिाण को िय करते रहते हं।

डॉ्टर को अनसुना कर बबना कोई उपचार मलए बस अपनी री़ पर हाथ रखा और मेरी चोट िीक हो गयी। बस यही!

तब मुझे हम सबके के शरीर मं तनमसत धचककतसक शज्त मं बारे मं ्ान हुआ।

लोगो के अनुभि … ं (अं्ेजी मं)

ननतय आधयानतमक उपचार एक म ूल उिगमन

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने १७ ्षण की आयु मं अपना घर तयागकर ९ ्षण तक परर्ािक िी्न द्ारा परम सतय की खोि की। उनके परर्ािक िी्न मं उनहंने कई ्षण दहमालय मं ए्ं ९ महीनो से अधधक समय तपो्न मं वयतीत ककया। तपो्न को रहसयमयी ऊिाण िे् 'शमबाला' तक पहुँचाने का ददवय 'ह्ाई मागण' माना िाता है। ्ह पहािं के बीच तछपा है और उस तक पहुँचाने का कोई सुगम मागण नहीं है। तपो्न तक पहुँचाने के मलए अतत कदिन या्ा करनी पिती है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी का अंतरतनदहत धचककतसक शज्त का रथम पररचय तपो्न से लौटते समाय हुआ। ्ं इस घटना का वयाखयान करते हुए कहते हं की:

"म तपो्न से पैदल लौट रहा था। िैसे ही हम ं तनचले इलाकं मं पहुंचाते हं ्हां हमे सेना के ्क ममलते हं।म ऐसे ही एक ्क म ं ं बैिा था। रायः इन ्कं मं मा् लकिी के प्े लगे होते हं। एकाएक ्क एक बिे कूबि पर से िाकर उछल गया और म एक लकिी के प्े पर िा धगरा। मेरी ं री़ एक बोलट से िा टकराई और ्ै ्चर हो गयी।

िब हम अगले आमी कंप मं पहुंचे तो डॉ्टर ने X-ray मलया और कहा की मुझे एक महीने आराम की आ्शयकता है। ३० ददन मेरे मलए बहुत लमबा समय था कोई भी एक सथान पर के ्ल आराम करते हुए। मने ं

Vanchinathan L - Singapore

Disc prolapse healed by a touch! his is Vanchinathan from the Singapore Satsang Center. I am a patient having back pain (disc prolapse) at L3, L4 and L5. During my Bali Inner Awakening (IA) retreat, the back pain problem reoccurred and I was unable to walk. During the Darshan, other participants doing IA had to support me by carrying me on both sides. I was literally carried to the stage for getting the Darshan. I asked Swamiji for healing me from this back problem. Swamiji just touched my back for a few seconds during that time I could

Name: Dinesh Gupta Spiritual Name: Sri Nithya Sadhanananda Place: Singapore

"He said that a month after the healing, a small plastic piece came out of his eye!"

I am an initiated healer by Swamiji. Almost a year ago, we had set up a

booth at the Heart, Mind and Body Festival. An elderly English gentleman came by our booth for free healing. I inquired if anything was bothering him and he mentioned his eye was bothering him a bit. I gave him spot-healing on his eye. A few hours later I saw him again and asked how his eye was doing - he said it had been bothering him for six months and that had almost gone now!

A month ago, we had the same festival and I bumped into him again - I asked about his eye. Ater he got over his surprise over my memory, he said that a month ater the healing, a small plastic piece came out of his eye! He was very grateful for the healing.

Name: Kelsey Roenau Place: California, United States

"I feel bliss and peace in my own body while healing others."

As a Nithya Spiritual Healer, I have experienced the transmission of THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM's energy and had many positive healing sessions with people I know and strangers. hey feel warm energy illing their bodies, go into deep relaxation and restfulness, and also have visions and feel Swamiji's presence. Some of them I have seen start experiencing slight kundalini movements from the energy also. When I'm doing the Nithya Healing Prayer I too feel bliss

and peace in my own body and it is a wonderful feeling to be healing and being healed at the same time!

totally."

Name: Ma Archanaa Ananda Place: Philadelphia, United States

"I was wondering, 'How will I sit down all day cross legged?' I remember my knee pain for the irst day when I sat in front of Swamiji, where I just forgot about it

For the past six months, both my knees were hurting badly. Stair climbing up and down was painful. I went to my doctor but he could not ind anything wrong, so I just continued my exercise. When I went to Inner Awakening in Varanasi, I was wondering, 'How will I sit down all day cross legged?' I remember my knee pain for the irst day when I sat in front of Swamiji where I just forgot about it totally. I did yoga and sat all day on the loor, climbed the bus, boat, rickshaw etc., but just did not remember about it.

Ater returning from Bharat, I remembered that I totally forgot to tell Swamiji about it. I still don't have any knee pain. I am now back to jogging and walking a couple of miles daily. Ater Inner Awakening I

went to give a one-hour Completion/ Meditation session in Jaipur IIS University. Ater the session I gave healing to the Staf from 10:00 a.m. to 4:00 pm and even, then I had no fatigue or any pain

Anywhere In The Body.

"आफटर अटे ं ्ें्Inner Awakening दवथ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, व्हेअर आई वेंट थू अ रसीरीज आफ पेन मेडिटशेनस, माई नी पेन िस्ट डडसअपीअड! नाउ आई एम पेन फ्री!"

आई हेड सफर्ड फ्रोम क्रोननक नी पेन ऑन बोथ माई नीस ड्यू टू सर्जरी. ओफटन आई फाउंड इट डडफफकल्‍ट टू क्‍लाइंब स्टे यरस, एंड फ्रिक्वेंटली टूक पेनककलरस. आफटर अटे ं ्ें्Inner Awakening दवथ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM, व्हेअर आई वेंट थू अ रसीरीज आफ पेन मेडिटशेनस, माई नी पेन िस्ट डडसअपीअड! नाउ आई एम पेन फ्री!

इन एडडशन, आई यूज्ड टू सफर फ्रोम लैक्टोज इनटॉलरेंस. आफटर आई अटे ं ्ेड अ मेडिटशेन ररट्ीट दवथ स्वामिि द लैक्टोज इनटॉलरेंस िस्ट वेंट अवे! आई स्पोक टू मेनी डॉक्ट र्स, एंड दे वेर ब्लोन अवे दैट थथस कुड हैपन. एज फार एज दे आर कंसर्ड, लैक्टोज

इनटॉलरेंस हैज नो नोन क्योर.

"आई कंटीन्यू टू डू द डायबीटटस क्रिया. नाउ माई डायबीटटस मेडडकेशन हैज बीन ररड्यूसड टू हाफ द अमाउंट इट वाज बबफोर"

आई हेव बीन हेवििंग डायबीटटस फॉर मोर देन 20 िअ र्स. आई वाज वरीड अबाउट माई डायबीटटक प्रॉब्लम सो आई अटे ं ्ेड द डायबीटटस क्रिया प्रोग्राम कं ्क्टेड इन स्वामी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM टेंपल इन टोरंटो. आई वाज अमेज्ड टू सी माई शुगर लेवल कममििंग डाउन व्हाइल आई वाज अटे ं ्ें् द प्रोग्राम एंड डोइंग द डायबीटटस क्रिया. आई कंटीन्यू टू डू द डायबीटटस क्रिया. नाउ माई डायबीटटस मेडडकेशन हैज बीन ररड्यूसड टू हाफ द अमाउंट इट वाज बबफोर. आल्सो आई सॉ अ लॉट ऑफ इम्प्रूव्मेंट इन माई ओवरऑल हेल्थ कंडीशेंन एंड नाउ आई एम मोर एक्टटव एंड हैप्पर. ईवन अदर्स आर कमेंटटिग दैट आई लुक िंगर एंड बेटर नाउ. नाउअडेज आई एम सीइंग

दैट आई हेव टू ररड्यूस द करेंट (हाफ ऑफ द ओररजिनल डोजेज) डायबीटटस मेडडकेशन ईवन फर्दर सम डेज. थैंक्ि यू सो मच स्वामी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM फॉर गि्ें्उस धथस वंडरफुल क्रिया .

"थ्रू स्वामीजि'स कम्प्लिशन टेक्‍नीक्स, क्रियास, लेकचर्स, दवथन टू वीक्स, आई वाज एबल टू कम आउट ऑफ माई हर्ट प्रॉब्लम्स."

इन िेन्यूअरी 2014, माई मदर वाज एडडमोटेड टू हॉजपिटल फॉर हर्ट प्रॉब्लम्स एंड अ पेसमेकर वाज इंसर्टेड. िस्ट अ िअर बबफोर दैट, डेड हेड अ वाल्व ररप्लेसमेंट सर्जरी एट द सेम हॉजपिटल. हाउएवर, धथस टाइम, आफटर आई ररटर्न्ड बैक फ्रॉम माई मदर्स सर्जरी, आई माईसेल्फ स्टॉटड फीलिंग ऑल काइंडस ऑफ हर्ट प्रॉब्लम्स. माई हर्ट रेट वाज कांस्‍टेंटली ओवर 120 बीपीएम फॉर नो ररीजन. एट नाइट, आई वुड नॉट बी एबल टू स्लीप एट ऑल बबिकॉज माई हर्ट वुड स्टार्ट पलसे र्टिग एट ओवर 120. धथस कंटीन्यूड फॉर ओवर टू वीक्स. आई वाज स्लीप डडप्राइव्ड, रेस्ट डडप्राइव्ड एंड वाज गेटटिग वेरी डडप्रेस्ड. आई वाज इजमेजिनिग दैट आई माईट हेव इनहेररटेड धथस फ्रॉम माई पेरेंट्स एंड वाज एक्सप्रेससिंग देम िस्ट एट द एज ऑफ 30. आई वाज गेटटिग एंज़ायटी अटैक्स, डडप्रेस्ड, एंड वेंट इनटू सम काइंड ऑफ गि्ेंग अप मोड. थैंक्ि टू द हेल्प ऑफ द सैन होजे संघा एंड स्वामीजि'स कम्प्लिशन टेक्‍नीक्स, क्रियास, लेकचर्स, दवथन टू वीक्स, आई वाज एबल टू कम आउट ऑफ इट. आई डडड नॉट वांट टू आस्क स्वामीजि टू हील मी ससंस आई थॉट इट वाज टू मसली टू आस्क हिम एज ही इज बिजसी दवथ मोर इम्पोर्टटेंट इशूज. हाउएवर, ही शावरड हिज लव थ्रू द संघा. एव्री डे, समवन वुड कॉल एंड चेक्अप टू सी हाउ आई वाज डूइंग. द लव फॉर स्वामीजि इज सो ओबववअस इन देयर हर्टस. आई थैंक्ि हिम फॉर ऑल दैट ही हैज बेस्‍टोवड अपॉन अस.

दशन - ददव्ता की एक झलक

'दशन' को रथानुकूल उस िण का ्णणन करने मं उपयोग ककया िाता हं िब हम ककसी िी्मूततण, संत या आतमा्ानी पुुष का अ्लोकन करते हं। ्ैददक परंपरा मं दशन का अतत महत् है, ्यंकक ककसी ददवय अतमा्ानी पुुष के दशन मा् से ही कई िनमं के कमण धुल िाते हं और िी्न मं गहरा ूपांतरण होता है। परंतु दशन के ्ल देखने मा् से कई अधधक ब़कर है। दशन को ददवयृजषट के ूप मं भी देखा िाता है, परंतु कई संसकृत श्दं की तरह ही दशन को अनु्ाददत नहीं ककया िा सकता पर के ्ल महसूस ककया िा सकता है। तो ्िर िम ि्ान की वयाखया कै से कर सकते िं ? िैसे ककसी मंददर मं ददनचयाण के रारंभ होने से पू्ण िब रातः गभणगह के म ृ ुखय पट खुलते हं और िब हम दीयं की रौशनी से चमतकृत आभूवषत िी्मूती को देखते हं तो हमे कुछ िणं के मलए एक ऐसा अनुभ् होता है िो श्दं, व्चारं ए्ं मन के परे होता है। उसे हम दशन कहते हं।

दीषा

दीिा, गुु द्ारा मशषय तक सतय को रतयि ूप से संचाररत करने का सीधा माधयम है। दीिा द्ारा गुु अपने मशषय को लमबे काल तक सतय ्हण, धारण ए्ं रकामशत करने के मलए तैयार करते हं।

िी्ा पर The Supreme Pontiff Of Hinduism Bhagawan Sri Nithyananda Paramashivam जी का ि्तवय

िब एक आतम्ानी गुु आपको सपशण कर दी्ित करते हं, तब आपके शरीर मं भी आतम्ान शरीररणाली का सॉफट्ेर डाउनलोड हो िाता है, िो आपके शरीररणाली को भी परर्ततणत कर देता है। यदद आप

समपूणण ूप से ्हण करने हं तो आपमं आतम्ान की शरीररणाली का सॉफट्ेर डाउनलोड हो िाएगा। आपका शरीर यह िान िाएगा की ्ह एक उततम अ्सथा मं पहुँच सकता है। आपकी िै्-समतत को ृ यह ्ान हो िाता है की एक उततम िी्न की समभा्ना है। िब आपपर गुु कृपा होती है तब आपका हाडण्ेयर और सॉफट्ेर पूरी तरह परर्ततणत हो सकता है।

आपके चैतनय मन को सही उपदेशं द्ारा गलत धारणाओं को तनकाल कर और सही धारणाओं से पररपूणण कर पव्् ककया िा सकता है। आपके

अचेतन मन को धयान व्धधयं द्ारा पव्् ककया िा सकता है। परंतु सॉफट्ेर के बदला् को सथाई करने के मलए हाडण्ेयर को परर्ततणत करना होता है। आपके मजषतषक की रेखाओं को िी्नमुज्त के अनुभ् को ्हण करने ए्ं रकामशत करने के मलए बदलना होता है। यह के ्ल दीिा द्ारा ही संभ् है। दीिा के माधयम से आपके व्मभनन आयाम िागत हो ृ िायगे। ग ं ुु कृपा ए्ं दशन मा् से आपका मजषतषक इस नए सॉफट्ेर के मलए तैयार हो िाएगा।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी, िो योग ए्ं करया मं मसध हं, मान् स्भा् ए्ं संभ्ताओं मं उनकी रबुध अंतृणजषट द्ारा एक सचचे रामाणणक यौधगक व््ान को पुनिीव्त कर रहे हं।

'योग का रथम पद है पूणणत् ' - THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

तनतय योग के अभयास मं, सबसे पहले स्यं को कंदित कर अपने अंदर यह तनणणय लेना होता है कक "म समप ं ूततण, ्धा, उपायनम ए्ं आपयायनम ् के साथ यह धोषणा करता ् हूँ की म संप ं ूणण हूँ।" िब आप चेतनापू्णक यह घोषणा करते हं की आप संपूणण है और अपने अंतमणन से सभी अपूणणताओं ए्ं उलझनं को ममटाते हं तब आप शरीर को ऐसे ूपढाल कर सकते हं की ्ह आपको सभी सतरं पर व्कामसत होने मदद करेगा - शारीररक, मानमसक ए्ं चैतनय। तनतय योग सिन (तनमाणण) का भी योग है। िब आप प ृ ूणणत् के साथ अपनी सांस और अपने शरीर को एक साथ संचामलत करते हं, और मन मं रबल इचछा रखते हं की आप अपने िी्न को उचचतम तरीके से जियगे, अपनी उचचतम ं संभा्नाओं को वय्त करंगे, तब आप परम आनंद, शांतत, और स्ासथय का अनुभ् करते हं - यही तनतय योग है। अपने िी्न का स्यं तनमाणण करना, यही सचची ्धा का रमाण है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने योधगक शरीर की पररभाषा दी है, कक यौधगक शरीर ्ह है जिसमे यह पांच गुण हं:

  • शज्त
  • आंतररक बल
  • लचीलापन
  • शारीररक गिन
  • ऊिाण

उनका कथन है कक 'िब आप शरीर के स्ामम होने का सचचा उततरदातयत् उिाते है और उसे योग ् राणायाम द्ारा ूपढाल देतं हुए, एक स्सथ ए्ं आनंदमय शरीर का तनमाणण करते हं, तब ्ह यौधगक शरीर है'।

तनतय करया

सददयं से भारत मं करोिं लोग रोगं से मुज्त पाने हेतु व्व्ध करयाओं का अभयास करते आये हं, परनतु इनकी रभा्शाली उपचारी शज्त पर पजशचमी देशं मं कोई धयान नहीं ददया है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने शारीररक ए्ं मानमसक व्कारं के मलए १०८ रभा्शाली उपचारी तकनीकं अथाणत तनतय करया रदान की हं। तनतय करया मं एक व्मशषट रम मं योग, धयान तथा राणायाम की पधतत होती हं िो ककसी व्शेष बीमारी का उपचार करती हं और उससे बचने मं मदद करती हं। यह सारी व्श्सनीय योधगक करयाएं हमारी पर तनःशुलक उपल्ध हं।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी का कथन है की उनकी यह देन स्ासथय ए्ं धचकतसा रणाली मं रांततकारी परर्तणन लाने की संभा्ना रखती है। यही नहीं, इससे पहले करयाओं को अलग अलग रोगं के मलए व्शेष ूप से इस तरह सू्बध नहीं ककया गया था। हर करया मं संपूणण अनुदेश हं, यह िीक से मसखाया गया है की उसको कै से करना है, हर रम को दशाणने के मलए धच् और चलधच् (videos) हं, जिससे कक हर वयज्त आरोगय और स्ासथय पाने मं सिम हो िाये।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने बालपन से मसध योधगयं से रमशिण रापत ककया है, और ्े िन साधारण से गुपत रखे गए राचीन योधगक व््ान मं पारंगत हं और उसे पुनिीव्त कर रहे हं। योग के पव्् शास् िैसे "पतांिमल योग सू्" और योग के मूलभूत आधार समझे िाने ्ाले तीन ्ंथं से ही तनतय करया की संरचना की गयी है। राचीन ्ैददक मशिा को आधार बना कर, हर रोग के मलए कुछ व्मशषट आसनं और राणायाम को संयोजित कर हर करया की सरंचना हुई है।

हर करया को इस रकार बनाया गया है की ्ो न के ्ल शरीर को रोग से मुज्त ददलाती है, बजलक रोग के मूल कारण को ही ममटा देती है, जिससे की ्ह रोग कभी दबारा ु न हो पाए। उदाहरण के मलए, मधुमेह (Diabetes) से ्मसत होने के तीन कारण होते हं:

बबना भोिन पर धयान ददए खाना

  • ऐसा भोिन खाना िो स्ासथय के मलए हातनकारक है
  • भोिन ्हण करते समय की मनोजसथतत, और भोिन करने का तरीका

तनतय करया इन कारणं पर भी रभा् करती है।

साझा करण :

"यह अ्त है! पहले कभी ककसी चीज़ से मेरा र्त शकण रा ु (blood sugar) इतनी िलदी कम नहीं हुआ!" कहते हं, हूसटन, ते्सस, USA से ररकाडो बोरेइकक। ररकाडो ६३ ्षण के हं और ३३ ्षण से मधुमेह से पीडित हं। तनतय करया करने के बाद उनका चमतकाररक उपचार हुआ। ररकाडो बताते हं की पहले उनका blood sugar ३००-४०० के बीच रहता था और ्ह रततददन ४५ की मा्ा मं इनसुमलन लेते थे, लेककन िबसे ्ह तनतय करया का अभयास कर रहे हं, ्ह सुबह के ्ल ५ की मा्ा मं इनसुमलन ले रहे हं, और उनका blood sugar बहुत धगर कर अब ८५ पर सथायी है। आप इनका चमतकाररक अनुभ् इस ्ीडडयं मं स्यं देख सकते हं:

तनतय करया ऑनलाइन इंटरनेट पर तनःशुलक उपल्ध हं, आप उनहं यहाँ से डाउनलोड कर सकते हं:

एक तेजसवी भवव्् की दरृत्ट ू

न्ीन पी़ी मं सनातन धमण की उततमताओं का अंतसथाणवपत करने के इचछुक, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने सफलतापू्णक लुपत हुई परमपराओं का पुनः धमणसंसथापन कर गुुकुल मशिण ् संनयास रणाली को पुनिी्न ददया है।

गुुकुल (अथाणत 'गुु का कुल या परर्ार') बचचं के मलए एक अदव्तीय मशिा कंि है िहां मशिा सम् है और िूरत पर आधाररत है। गुुकुल बचचं का मागणदशणन करता है उनको समपूततण या एका्ता से पररपूणण वयज्त के ूप मं रफुजललत होने मं, िो आधयाजतमक आधार पर खडं उचच-उपल्धक और उततरदायी ्ैजश्क नागररक बने।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी यु्कं मं उतरांतत का भी सिन कर रह ृ ं है, संनयास का पुनःिी्न करके न के ्ल एक ्ैकजलपक िी्न के ूप मं, पर एक परम िी्न के ूप मं, स्यं और अनयं को लाभाजन्त करने हेतु।

तनतयाननद व्दयापीिम , ्षण 2006 मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM स्ामी िी द्ारा शुू ककया गया एक पररयोिना है िो कक बचचं को मशिा रदान करने का तनतयानंद संघा का एक मशिा व् ंग है ,उनके मागणदशणन मं व्मभनन कायणरमं को दतनया भर म ु ं सभी बचचं, अमभभा्कं, मशिकं और चाइलडकै अर ्ालं के मलए उपल्ध कराया िा रहा है। इन कायणरमं का अंततम ल्य बचचं और उन लोगं के साथ काम करने ्ाले हर ककसी को

आनंदमय िी्न िीने के मलए अ्सर तथा कल का नेता बनने के मलए पूरा अ्सर रदान करना है।

धरती को अधधक से अधधक िागत ृ और रबुध लोगं की िूरत है। ऐसा संभ् करने के मलए, हमं स्णरथम अपने बचचं के मलए " एनलाइटनमंट -मशिा रदान करने की आ्शयकता है जिसमं सीख मजसतषक के गैर यांब्क भागं को उततेजित करने,सही मजसतषक गततव्धध आधाररत अनुभ्ातमक आतमसात करने ,कई बुवध रणाली को सकरय करने और सबसे महतत्पूणण िी्न के समाधान को समझने पर आधाररत है ।

"यह बालक एक पुषप कक भांतत सुबह उिं, रेमपू्णक धयानी पुुषं के साथ जियं ए्ं स्यं को संतुमलत रख सकं ऐसा मेरा दशणन है। ये बालक बाहरी िगत की नकारातमकता को ्हण न करं और अपनी आतंररक िगत की पव््ता को संतुमलत रखं और 'तनतयानंद' मं जिए और रकामशत करं - ऐसी मेरी इचछा है| " ~ THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी

गुुकुल एक संसकृत श्द है जिसका शाज्दक अथण है गुु का व्सतत परर्ार। तनतयानंद ग ृ ुुकुल की सथापना का उ्ेशय अतयधधक बुवधमान रिातत की रचना करना है िो की समपूततण, ्धा, उपायनं ए्ं आपयायनं पर आधाररत, व्श् के सभी बालकं को लाभाजन्त करना।

गुुकुल का ममशन है:

  • बचचं को उनके सहि स्ाभा् संर्ित करने मं सहायता करना और उनकी ्ानेजनियं को व्कमसत करना।

  • ऊिणस्ी शरीर का व्कास करना िो की बचचं को अपनी ऊिाणओं को संतुमलत ए्ं संचाररत करने मं

सहायक हो।

  • समपूततण यु्त अखंड मशिा रदान करना, िो की बचचं को अंतर ए्ं बहार व्कमसत होने मं पोवषत करेगी।

  • एक अतमा्ानी समरदाय का तनमाणण ए्ं संरिण करना िो की चेतना पर आधाररत हो न की अंतःकरण पर। िी्नमुज्त िी्न के तत्ं को हम अपने बचचं को जितना िलदी मसखा दं उतना ही उततम है।

एक आनंिमय जीिन के मलए उपकरण

सभी पारंपररक व्दयालयं मं बचचं

को बोदव्क स तर पर रमश्ित ् ककया िाता है और अब कुछ व्धालयं मं भा्नात मक स ् तर पर ् रमश्ित करना शुू कर ददया गया है | हालंकक बच चं म ् ं अघ यात् ममक ् स तर को बढने की संभा्ना को ् समझने मं असफल रहे है और अन ततह म ् ं उनको आत म्ान की ् और रेररत कर रहे हं |

्ैददक गणणत जिसने हिारं सालं से साफट्ेयर राजनत को पू्ाणभामसत ककया िो बच चो को बबना ् कै लक् ुलेटर के उपयोग के आसानी से आंकिो की गणना मसखाता है | पररसत जततक िागूकता और ्ह ् के साथ सम बन् ध िो हम ् ं िीव्त रखते है उन पर बल (िोर) ददया | िागूकता सुन दरता की एक सभ ् य ् रदणशन कला और सुधच् कला को

व्कमसत करता हं

बच चो को ख ् ुद की और उनके आस पास के लोगो और दतनया की प ु ूरी समझ देने के मलए गततव्धधयं और खेल के माध यम से िी्न ् का समाधान मसखाया िाता है िब यु्ा बच चो के िी्न मे िल ् दी ् से मसखने के मलए एक अनुकूल समद माहौल होता है उन ृ हे अक ् ् सर उच च सामाजिक भा् ् ुकता और अघ याजतमकता का बोध होता है | ्

  1. ये बचचो मे भारी तछपी िमताओं की मसफण कुछ अमभ् यज्तया है िो ् सनातन दहन द् धमण और अघयाजतमक ू मशिा रदान करता है | िोकक आम तौर पर मौिूदा पमशचमी मशिा रणाली मे अरयुक् त हो िाता हं |

अद्ैत गु ूक ु ल मशिा रणाली का आधार है

तनयममत व्षयं के साथ साथ बच चो ् द्ारा देखे िाने ्ाले मुखय िी्न शैली के मुददो िैसे की भय, रोध, हताशा, व्कृतत अपमानिनक भाषा और इस रकार से| िो कक बच चो ् को समझाते है कक "प यार एक ् टुकडे िैसे है और अहम एक चटटान िैसे" बच चे त ् ुरन त (झट) से अपनी ् अतंररय(आजतमक) गुण को समझ िाते है | यह उन हे ददन रततददन ् भा्ना पाने मे मदद करता हं |

नित्ािंद बाल ववद्ाल्: (एिबीवी)

तनतयानंद बाल व्दयालय का मुखय उ्ेशय बचचो के िी्न का तनमाणण समपूततण , ्धा , ि्ाबदेही औरसमवध ृ के चार शज्तयं के आधार पर करना है । िी्न मुज्त के मसधांत और समपूततण का अभयास करके ्ो ऊिाण्ान तरीके से त्ररत ए्ं रचनातमक तनणणय लेने मं सिम बन सकते हं।

तनतयानंद बाल व्दयालय कायणरम पांच रमुख ममण तत्ं से बना है:संसकृत उचचारण,योग , िी्न समाधान और ्ैददक संसकृतत और िी्न शैली से संबंधधत गततव्धधयं के माधयम से परर्तणन को रभाव्त करने ्ाले कायणशालाओं,िो कक ्ैददक संसकृतत और िी्न शैली से संबंधधत गततव्धधयं के माधयम से ूपांतरण करता है ।व्दयालय का

मतलब "भीतर के स्" या "आंतररक पलल्न से है । यह कायणरम रतयेक बचचे के साथ ही संरिक की भी दयाभा् काअधधकता मं व्कास करने मं मदद करता है।

अमभभा्क रशंशाप् : डॉ्टर सु मम्ा

मेरी पु्ी ्ैण्ी जिसकी आयु नौ ्षण से अधधक है वपछले एक साल से तनतयानंद बाल व्दयालय कायणरम मं िा रही है । मै बहुत खुश हुँ ,तनतयानंद बाल व्दयालय मेरी पु्ी को उसकी

समसयाओं ए्ं अपूणणत् को सामने लाने का एक सुर्ित और व्श्सनीय ्ाता्रण रदान करता है तथा उनके समाधान करने मं मदद करता है । यह मेरे मलए एक ्रदान है की मने ऐसा एक सम ं ूह पाया है ,िो मेरी बेटी के सम् कलयाण के मलए ईमानदारी से रयास करता है।

तनतयानंद बाल व्दयालय मसखाता है की भले ही ्े ककसी भी कदिन जसथतत का सामना कर रहे हं ,उससे कै से पूणणत् करे ,तनभाये, खुश रहं और हलके -फुलके महसुस करं ।्े एक बचचेको िी्न के बारे मं उस भाषा मं समझाते हं जिसे ्े समझ सकं। सारांश यह है की तनतयानंद बाल व्दयालय ने बचचो का सही लालन-पालन आसान बना ददया है ।

यह माता-वपता और बचचं दोनं के मलए एक िीत है।

एनबीपी मशिक रशंशाप् : माँ तनतय रमणी

म वपछले दो साल से तनतयानंद बाल व्दयालय मं मशिक हूँ । इस कायणरम मं बचचं को भय, लालच, ईषयाण, तना् और परीिा की धच ंता िैसे घुटन से मु्त होना मसखाया िाता है । उनहं मसखाया िाता है कक ककस तरह आनंद और पूततण के जसतधथ मं रहते हुए िी्न को संचामलत ककया िाये ,समपूततण ,्धा ,जिममेदारी ए्ं समवध के चार ृ शज्तयं का उपयोग ककया िाये तथा पूणणत् की जसतधथ मं रहा िाये । यह सबसे अचछा उपहार और व्रासत है िो आसानी से हम अपने बचचं को दे सकते हं ।माता वपता बचचं को तना्मु्त, खुश तथा अधधक धयान से सुनने ्ाले पाते हं िब एक बार िब बचचे कायणरम मं भाग लेने लगते हं । दतनया के बचचं को प ु ूणणत् और मु्त सोच के व््ान प़ाने के मलए इस अ्त अ्सर देने के मलए स्ामीिी को हमारी गहरी कृत्ता है ।िब हम मसखाते हं ,हमं भी उसका अभयास करना चादहए िो हमने मसखाया है । एनबीपी मं प़ाना अपने एनलाइटनमंट (रभोधन) को पाने का सुतनशचयन करना ही है ।

यह कायणरम ककसी सपताह या सपताह के अंत (शतन्ार ,रव््ार ) मं एक से दो घंटे के मलए चार से चौदह ्षण की आयु के बचचो के मलए आयोजित ककया िाता है । आपके इलाके मं तनतयानंद बाल व्दयालय के कंि की िानकारी के मलए कृपया हमं संपकण करे

एन-िीतनयस

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के मागणदशणन मं अपने बचचे की िमता को रज्मलत करं| एन-िीतनयस अपने आप मं एक खास तरह का कायणरम है और यह एक मासटर के चारं ओर ती् ऊिाण िे् मं अपने बचचे को देने के मलया अनमोल उपहार है |

एन िीतनयस कायणरम बचचे के मजसतषक के गैर यांब्क दहससे को िागत कर उसके मजसतषक की ृ रासायतनक रकरयाओं को बदल कर गैर यांब्क दहससे को िागत करने की ृ िजषट से ूपांककत ककया गया है| | इस से बहुआयामी िे्ं मं बालक व्लिण रततभा दशाणता है और और सही मायने मं ्ैददक मशिा के तत् को ्हण करता है|

यह ्तणमान मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM गुुकुल मं रचमलत है और आतम्ान पर आधाररत मशिा रा्रण करने पर बनाया गया है| यह कायणरम संपूणण मजसतषक के अधययन को रज्मलत करता है िो की दाय मजसतषक की असाधरण कलपना ं और ृशय शज्त को बायीं मजसतषक के शज्तशाली और सपषट ताककण क सोच से िोिता है,इस से ्ह मजसतषक को साधारण से असाधारण बनाता है| अपने बचचे के रदशणन मं एक औसतन दिे की ्वध की स ृ ूचना- तायदाद चेतना की ओर उछाल, उचच आतमसममान िी्न की खोि यौधगक शरीर का व्कास शज्तशाली धयान का ्ान रापत करना, राचीन ्ैददक कला को आतमसात, पूरे मजसतषक व्कास को ब़ा्ा देने आंखं पर प्ी बांध के प़ने का रहसयमय अनुभ्|

एन-िीतनयस रततभागी रशंसाप् - आनंददथा रततभा

"मुझे यह बताते हुई बहुत ख़ुशी हो रही है की अब म ्ो सभी चीि ं ं खा सकती हूँ िो म वपछले दस साल से खाने ं के मलए इंतज़ार कर रही था। मेरे डर के कारण एन-िीतनयस से पहले ऐसा करने मं म असमथण थी| अब ं मुझे लगता है कक म ्े सभी चीिं ं को खाने के मलए काफी आश्सत हूँ जिनका म व्रोध ककया करती थी। ं अब मेरा मेरी भा्नाओं पर तनयं्ण है और म बह ं ुत िलद ही ्ापस अपने आनंद की अ्सथा रापत करने मं सिम हूँ।म धं ूरपान या धूल से खुद की रिा करने के मलए एक मुखौटा का उपयोग नहीं करती, इसके बिाय मं भीतर से काफी शज्तशाली बन गयी हूँ की अब कुछ भी पहले की तरह मुझे रभाव्त नहीं करता | स्ामीिी को मेरा आभार, तनतयानंदोहम!"

एन-िीतनयस िनक रशंसाप् – माँ आनंद रततभा

म एन-िीतनयस कायणरम म ं ं दहससा लेने ्ाली बामलका आनंधधता की माँ हूँ। म बह ं ुत राहत महसूस कर रही हूँ और मेरे सीने से एक बिा बोझ हट गया है। मेरी बामलका को उसके सांस लेने की घरघराहट समसया से मुज्त ममल गयी है| ्ह चार शज्तयं से पररधचत है और इसमलए ्ह उन का उपयोग काफी आसानी से कर सकती है| ्ह शारीररक ूप से भी काफी सकरय हो गयी है| म उसके रदय म ं ं स्ामीिी के रतत गहरी भज्त देख सकती हूँ| स्ामीिी से रापत ककये आशी्ाणद को ्ह लोगं मं समध करने के मलए ृ उतसुक है। मश्ोहम"

एि-रेगिंसी के ्र जीविम ुकत-गभािारण पररपालि

एन-रेगनंसी के यर कायणरम एक रस्पू्ण कायणरम है| यह कायणरम गभाण्सथा के दौरान मां की शारीररक, मानमसक और भा्नातमक स्ासथय को अनुकूल करने के मलए बनाया गया है। यह एक गमण, पयार के माहौल मं बचचे को रापत करने के मलए तैयार ककया गया है और माँ के ररशते को उसके पतत और परर्ार के साथ मिबूत करने के मलया बनाया गया है| सारा परर्ार अद्ैत की अ्था का अनुभ् कर रबुध िी् के गभणधारण के मलए तैयार हो िाता है|

यह कायणरम गभाण्सथा के दौरान मां की शारीररक, मानमसक और भा्नातमक स्ासथय को अनुकूल करने के मलए बनाया गया है। यह एक गमण, पयार के माहौल मं बचचे को रापत करने के मलए तैयार ककया गया है और माँ के ररशते को उसके पतत और परर्ार के साथ मिबूत करने के मलया बनाया गया है| सारा परर्ार अद्ैत की अ्था का अनुभ् कर रबुध िी् के गभणधारण के मलए तैयार हो िाता है| THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्ारा ूपांककत ककया गया पूरा कायणरम दहनद तरीके से बचचे के िनम पर रकाश ू डालता है और सपषट ूप से योग, धयान, मं् िप, संगीत धचककतसा सदहत कायणरम मं रदान ककए गए सभी रथाओं के पीछे ्ै्ातनक आधार को समझाता है|

एन रेगनंसी कायणरम गहरा भा्नातमक समथणन और गभाण्सथा के दौरान हर बाधा को दर करने के ू मलए एक दाई के मलए एक बहुत शज्तशाली पूरक समथणन के ूप मं कदम रखा है| मुफत पररचयातमक स् के मलए संपकण कररए:

नित्ािंद ववशवववद्ाल्

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM व्श्व्दयालय एक व्श्वयापी व्दयालय है जिसकी शाखाय अब तक यू ंनाइटेड सटेटस ऑफ़ अमेररका और ्ांस मं हं, और व्सताररत हो रही हं मस ंगापुर, मलेमशया, मेज्सको, और आदद सथानं मं। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM व्श्व्दयालय यू.एस.ए कै मलफोतनणया मं पंिीकृत (रजिसटडण) एक स्ायतत व्श्व्दयालय है िो धाममणक डड्ी रदान कर सकता हं ए्ं सीईसी के तहत इसे िी्नकालीन छूट रापत है (सीईसी यानी कै मलफोतनणया मशिा कोड) 94874 (ई) (1), कै मलफोतनणया राजय के मलए एक ्यूरो ऑफ़ राइ्ेट ् पोसट सेकंडरी मशिा। यह व्श्भर से लोगं को धयान, योग और ्ैददक परंपरा से संबंधधत व्दया िे्ं मं अनेक डड्ी पाठयरमं को रदान करता है, िो THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी से रेररत और उनके द्ारा रततपाददत है। 4 अ्टूबर 2013 को, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM व्श्व्दयालय ने अपने पंख फै लाएं ्ांस मं। उसका पैररस मं पंिीकृत ककया गया यह शीषणकं के साथ - ्ंच मं (उतन्मसणते दहनदए ु THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM) और अं्ेिी मं (THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM दहंद यू ूतन्मसणटी).

"अद्ैत िी्न का परम सतय मं से एक है। अद्ैत का अथण है गैर-दोहरी: एकता। भग्ान एक नहीं है अवपतु भग्न 'एकता' है। भग्ान अनंत है –एकता है, एक नहीं! एकता और एक मं फकण है| एकता को एक के बराबर नहीं मानना चादहए| एकता अनुभ् की िाती है| ककनतु एक संखया मा् है| सब िी्ं और सब ्सतुओं के साथ गैर-दोहरी चेतना का अनुभ् ही िी्न का उ्ेशय है। िब आप मनन कर इस सतय को समझ िाते हं की िी्न मं सब लोग स्यं आपका ही व्सतार हं, तब आप अद्ैत की ्ासतव्क अनुभूतत कर पाते हं| अद्ैत की अ्सथा मं रहना आपको आपके ्ासतव्क स्भा् मं रहना मसखाता है और खुद का स्यं से पररचय करता है|

िब कोई सतय सामने आता है, कुछ लोग उसे सतय समझते हं और ्े ऐसा तब तक समझते हं िब तक ्ह सतय गलत ना साबबत हो िाये| और कुछ लोग ऐसे भी होते हं िो उसे गलत समझते हं, िब तक ्ह सतय साबबत नहीं हो िाये| म यह नहीं कह ं ूँगा की पहली ्ेणी सही है और दसरी गलत | म ू तो मसफण इतना कहना चाहता ह ं ूँ की रथम ्ेणी को मानने ्ाले लोग एक अ्तार की उपजसथतत और उनकी लीला का ददवय आनंद ले सकते हं, ए्ं दसरी ू ्ेणी ्ाले लोग दे्ताओं,मूततणयं और गुु के धच्ं के साथ िी सकते हं|

्ी कृषण भग्ान ने बिी खूबसूरती से भग्त गीता मं कहा है, 'िो कोई भी मेरे कायं के संदभण को समझता है ्ह मेरे अंतःकरण को समझ सकता है'| यदद आप मेरे कायं को करने का कारण खोिने की कोमशश कर रहे हं, तो यह आपको के ्ल असमथणता की ओर ले िायेगा, और असमथणता के ्ल शज्तहीनता की ओर ले िाती है| यदद कुछ भी आपको शज्तहीन बना देता है , तो आप उसके रतत रोधधत हंगे| मेरे कायं के पीछे तछपे संदभण को समझने की कोमशश करं ना की करणं को|

मेरा संदभण हमेशा अद्ैत की अ्सथा से होता है| िब आप धैयणता के साथ मेरे कायं के संदभण को समझ पाएंगे तब ना ही मसफण आपकी मेरे रतत पयार मं ्वध होगी, अवपत ृ ु आप मेरे साथ आतमसात भी हो िायगे | ं

अदिैत के संिभा को समरझये -

यदि आप मेरे सभी कायं को अदिैत के संिभा से िेखंगे, तब आप "ननथयानंिोहम"- ्ाशित आनंि को मिसूस कर पाएंगे! नजस रण आप मेरे काया करने के संिभा को समझ जायगे उस िी पल यि आपका िो जाता िै| अदिैत के ं ननदित को समझं, जो मेरे अंिर नछपी िुई िै, यि अनंत िन िै जो मेरे भीतर िै|

संिभा िापत करना बिुत आसान िै। इस पर आलोचना ्ुू करने की जगि आप सपषटता के सा् इस सचचाई को ्िण करं की यि सतय िै| आप सूरज के पूरब से उगने के कारण को जानने के पीछे न भागे अवपतु इसके पीछे नछपे संिभा को िेखने की कोम्् करं| जो वयन्त मेरे कायं के संिभा को पाने की कोम्् करता िै िि एक भ्त िै| जो वयन्त मेरे कायं के संिभा को समझ जाये िि म सियं ि ं ूँ|"

-परमिंस THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM

हमं आवश्कता है दस लाख संन्ासी्ं की!

एक दशक के अलप काल मं, सा्णितनक िी्न मं अपने आगमन सचचा सामाजिक उततरदातयत्।

के बाद, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM आि रखयात है अखणड सनातन दहनदधमण की एक सपषट, धमणसंगत ू ् अरािनीततक ्ाणी के ूप मं। महातन्ाणणी पीि (दहंदत् के सबसे ु राचीन अङग की संसथा चोटी) के महामंडलेश्र, आधयाजतमक रमुख के ूप मं तथा मदरै आददनम ु (व्श् की सबसे राचीन िी्क दहनद धाममणक संसथा) के २९३्े ू गुु महासजननधानम के ूप मं, ्ह ती्गतत से भव्त हो रहे हं भारतीय दाशणतनक व्चार को रभाव्त करती शज्तशाली ्ाणीयं मं से एक। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM का भारत के मलये ्ैददक दहनदू पुनःिागरण के ददवयृषटी मं सजमममलत है भारत्षण की संनयास रणाली का पुनिी्न। स्यं एक संनयासी, ्े सफल हुए है यु्ाओं को इस असाधारण पथ पर मोिने मं, िो साथ लाता है गततशील आतम्ान और ्धापूणण

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्ारा तनममणत संनयास (्ैरागी) समरदाय, व्श् के सभी भागं से यु्ाओं को आकवषणत कर रही है। रमश्ित पुुष ् मदहला यु्क जिनका कॉपोरेट िगत मं उजि्ल भव्षय तनजशचत है, ्े सब कुछ तयाग कर इस काल-सममातनत आतम्ान के पथ पर अ्सर हो रहं हं। उनकी िपमाला ए्ं उनके लैपटॉप दोनं से साथ समान ूप से आरामपूणण, यह अ्त य ु ु्ाओं की िातत एक ऐसे िी्न का सपषट ृषटांत दे रही है िो दोनं दतनया की उततमताओं ु को अखंड ूप से सजमम्ण करता है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM के रयासं को नमन है, जिससे ्ैददक संनयास की अ्धारणा अब पुनः एक वय्हायण व्कलप बनता िा रहा है उन आधुतनक मश्ित यु्ाओं के मलए, िो स्यं के आधयाजतमक व्कास को आगे ब़ाने की इचछा रखते हुए साथ ही िगत उननतत

के परर्तणन लाने मं ततपर भी है।

एक ऐसे सथान का तनमाणण करना, उन लोगं हेतु िो आधयातम मं बिने के इचछुक है और साथ मं परर्ारी कतणवयं को पूणण भी करं, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने आ्म मं 'ऋवष संरदाय' सथावपत की है, िहां परर्ार िी्न तन्ाणह के साथ आ्म भूमम पर से्ा भी कर सकते हं। ्ैदक भारत्षण के ऋवष व््ादहत थे, िहां पतत ् पतनी आधयाजतमक पथ पर एक दसरे के सहायक थे, अपनी ू संतानं को सही आधयातम मशिाण ् चेतनापूणण िीने के साधन रदान करते हुए। 'ऋवष संरदाय' एक स्ागत परर्तणन है पारंपररक आ्मं की रथाओं से, िहां व््ादहत िोिं को आधयातम िी्न र्ेश पू्ण िब तक रतीिा करनी पिती थी तब तक कक ्ं अपनी पारर्ाररक कतणवयं से व्मुज्त न हो िाये।

समपूणण भारत्षण का तनमाणण संनयामसयं द्ारा हुआ है। ्ैददक परंपरा को सबसी उततम ्सतुएं संनयामसयं ने ही योगदान की हं, या ्ह हमारा सथापतयशास् हो, कला हो, संसकृतत या भाषा हो; सभी, सभी, सभी। हमारे पास सभी उततम ्सतुय हम ं ं संनयामसयं से ही रापत हं। कृपया समझे, दस लाख़ साधु शास् धारी संनयासी होते थे, अथाणत ्े आधयाजतमक ्ान, आतम्ान के

व््ान - 'िी्नमुज्त व््ान' मं मसध होते थे तथा इस व््ान का व्श्भर मं मशिण रदान करते थे।

हाल ही के रातः सतसंगं मं, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ने संनयास के मलए उनकी दरृषटी को अभीवय्त ककया ू और यु्कं को आ्ाहन ददया कक ्ं िागूक हो िाएं और इस असाधारण ् परम िी्नशैली को ्हण करं।

"आदद शंकर, दहंद दाशणतनक के ू बाद, कभी भी नहीं था एक खुला, सा्णितनक ्ाद-व््ाद या तनमं्ण दहंद परंपरा म ू ं एक सनयासी बनने के मलए। अब, २५०० ्षं मं रथम बार, म योिनाबध ूप से व्सतार ं करने िा रहा हूँ संनयास के सभी व्मभनन पहलुओं और आयामं पर। सुतनए, म आप सभी के मलए ं संनयास के द्ार खोल रहा हूँ।

हमं आ्शयकता है शास् धारीयं, ्ैददक मशिकं और रचारकं की, िो पूणणत् के व््ान की मशिा देनं व्श् भर मं िायगे, िो ं िी्नमुज्त के व््ान की मशिा दंगं। के ्ेल म ककतना योगदान कर ं सकता हूँ, दतनया के एक कोने म ु ं बैिे हुए? हमं कम से कम दस लाख संनयामसयं की आ्शयकता है।

संनयास है पूणणत् मं िीने की िी्नशैली। संनयास है एक पूणणत्

के आकाश (अंतर मनो जसथतत) मं िीने की िी्नशैली तथा सभी को इस पूणणत् के आकाश मं िीने हेतु लाभाजन्त करना। संनयास एक पथ है जिससे एक वयज्त के िी्न मं आधयाजतमक ्ान का आतमानुभ् होता है। िब म संनयास के व्षय ं पर बात करता हूँ, लोग तुरंत रशन करते है, 'िगत का ्या होगा िब सभी संनयासी बन िायगे?' ं

कृपया सपषट समझे, सबसे पहली बात, सभी इस िगत म इतने ं बुवधमान नहीं! दसरी बात, ईश्र ू ने आपको यह उततरदातयत् नहीं ददया हं। ्े िानते हं की कै से िगत को व्सताररत करना। मान् िी्न का उ्ेशय (रार्ध) है संपूणण पररपूणणता या 'पूणणत्' का अनुभ् करना। ्ही पूणणत् के आकाश (भीतर की मनोजसथतत) के साथ कमण करना, उसे व्कीणणणत करना और उसे दसरं पर ्षाण ू करना। यह िी्न का रथम और स्ोपरी उ्ेशय है। पूणणत् के आकाश मं सथावपत हो िाएं, और आपके आसपास हर ककसी की सहायता करे की ्ं भी इस पूणणत् के आकाश को रापत करं। और कोई अनय िी्नशैली मं आप न तो पूणणत् मं िी सकते है और न तो दसरं को ू पूणणत् मं िीने की रेरणा दे सकते हं।

्या आपका जीवन के वल उततरजीववता के ललए है ?

देणखय, एक साधारण मधयम-्गण ं के पुुष अपन लगभग ९०% िी्न को खचण करता है, मसफण रोटी, कपिे और घर पर। लगभग एक ततहाई बचा हुआ उसका िी्न सोने मं चला िाता है, शेष दो ततहाई िी्न रोटी, कपिे और घर को रापत करने हेतु मशिा मं वयततत हो िाता है। िब तक आप यह सब अजिणत करने लगते है , आप पचास ्षण के हो िाते है और मतयं के मलए ततपर ृ रहते है! तो, आपके िी्न का एक

शज्तयं को िागत करना। संनयास ृ है आपमं अंतरतनदहत सभी व्व्ध शज्तयं को िागत करना, आपम ृ ं व्दयमान सभी व्व्ध शज्तयं को िागत करना, आपकी सभी व्व्ध ृ बुवधमतताओं को िागत करना, ृ आपके समसत व्व्ध आतमबोधं को िागत करना, आपके सभी व्व्ध ृ उ्ेशं को िागत करना। क ृ ृपया समझे, आपके स्यं को स्यं मं िागत करना संनयास है। स्यं को ृ स्यं मं िागत करना संनयास है! ृ

बिा भाग के ्ल रयतन मं गायब हो िाता है, रोटी, कपिे और घर को रापत करने मं! अब चलं! चलना शुू करं अगले सतर की ओर! आधारभूत अजसतत् की आ्शयकताओं की झंझट से बाहर आतयय। ं चमलय हम मान्-िी् को ं चेतानापू्णक अगले सतर पर उजततषि कराये। मान्-िी् को उनकी अगली संभ्ता के बारे मं बताना अतत आ्शयक हं!

समय आ िाया है कक मान्- िी् पूणणत् के व््ान की मशिा रापत करं। समय आ िाया है कक मान्-िी् िी्नमुज्त के व््ान को ्हण करं। संनयास है आपकी व्चार-शज्त को आपकी परम संभा्ना मं संरेणखत करना, आपकी व्चार-शज्त को आपकी परम ्ासतव्कता मं संरेणखत करना।

संनयास है आपकी सभी व्व्ध

Part 3: Living Advaita_Hindi_part_3.md

सनयास के गु णं का ्णणप् ! ्ी तनतय भ्तानंद स्ामी

मने संनयास ्यं मलया ? ं िब म स्ामीिी से साल २००४ म ं ं ममला था। उनहंने मुझे एकदम से ही व्मुज्तकरण और िी्न -पूती , और मुझे आंतररक और सांसाररक दतनयाँ ु मं सपषट व्सतार का समेककत ूप से अनुभ् ददया। इन लाभं को अपने आसपास सभी लोगं को पहुँचाने की मेरी ती् भा्ना ने मुझे संनयास के मागण के मलए रेररत ककया। स्ामीिी के आशी्ाणद से मेरा संनयास का अनुभ् बेहद आनंददायक रहा हं।

यह मेरे मलय ्यं िुरी हं ?

एक सनयासी के मलए अलग अलग भूममकाओं को तनभाना ही आतमा की भूममका को तनभाना हं। िब म अपने सनयासी होने के स्धमण ं को तनभाता हूँ तो मं संसार के िी्न

के सभी अजसतत् और सामंिसय के मलए योगदान करता हूँ िो मेरे मलए महत्पूणण हं। इसीमलए संनयास कमण योग के सभी ूपं मं से सबसे व्मुज्तकरण मागण हं। आतमा अनेकं

शरीरं मं लगभग एक िैसे िी्न का अनुभ् करती हं लेककन मने सनयासी ं मशषय बनके अनेक िनम एक ही शरीर मं अनुभ् ककय ह ं ं। हर पल ऐसे महान आधयाजतमक अनुभ्ं से, िो पहले मेरे मलए अकलपनीय थे, मुझे पता हं की यह मेरे मलए परमातमा तक पहुचने के मलए सबसे तेज़ मागण हं।

्ी तेिोमयानंद स्ामी

मेरे संनयास के साथ वयज्तगत अनुभ् कया हं ?

म एक महीने पहले टोरंटो मंददर गया ं था। ्हाँ के िनसंपकण अधधकारी, जिनहंने मुझे ्हां आमंब्त ककया था और पूरा मंददर ददखाया, के साथ मेरा सामानय ्ाताणलाप हो रहा था। उनहंने पूछा की मने संनयास की दीिा कबसे ं ली हं। मने उनह ं ं ि्ाब ददया - तीन महीने, िैसे ही मने यह बोला म ं ुझे झटका लगा। तीन महीने ! मने तो ं पूरी जिंदगी ही यही अनतराकाश जिया हं। तब मने िाना यह दीिा की ं शज्त थी।

्ह पव्् िी्न, परमातमा का अंश अपने अंदर और बाहर लेकर चलना, स्णकामलक हं। इसके मलए समय नहीं

होता।

संनयास मेरे मलए ्या हं? संनयास पव्् हं। संनयास सुनदर हं। संनयास अथक होकर दसरो की उिाना ु हं। संनयास िागूकता हं। संनयास के मलए सारे ररशतं सा्णलौककक हं। संनयास संभा्ना हं। संनयास यह अहसास हं की दसरे भी त ू ुम ही हो। संनयास इस समभा्ना को िानना हं की तुम मे कोई भी हो सकता हं। संनयास पूणणत् हं। संनयास अपने आप मं ही शुआत और अंत हं। संनयास ख़ुशी हं। संनयास मुज्त हं। संनयास इस तरह से िी्न को िीना हं िैसे की उसे िीना चादहए।

संनयास की िुरत ्यं हं?

संनयास पूणण इंसानी िी्न को यथाथण करने के मलए एक सही आंतररक माहौल देता हं। संनयास का छोटा सा अनुभ् एक वयज्त को अपने िी्न के ल्य से िोि सकता हं। यह समेककत तरीकं से अपने बारे मं और िी्न के बारे मं सही बोध करता हं। संनयास का पालन हमको सांसाररक अ्ानता के बंधनं से मु्त होने मं मदद करता हं।

मध ुकरी मभिा - आधयाजतमक समवध की पराकाषिा ृ

मभिानंद महादे् ने धरती पर आकर मभिाटन के द्ारा लोगो को कमो के बंधन से मु्त करने और उनहं अद्ैत का ्ान देने का तनशचय ककया ,्ह लोगो को अद्ैत ए्ं पूणणत् का व््ानं मसखाने ,सामानय दोषो से मु्त करने के मलए अ्तररत हुए, यह एक स्ोततम मागो मं से एक था । जिसको स्यं भग्ांन महादे् ने संसार को पररपूणण करने के मलए रयोग ककया । इस रकार मभिानंद के ूप मं ्ह के ्ल मभिा ्हण करके ही कमो के बंधन को नषट कर देते है।

मभिा के मलए िाना कोई सामानय ्सतु नहीं है यह आपके मलए बहुत कुछ करता है। स्णरथम आप लोगो के रेम को समझ पायेगे और िब लोग मना करंगे ,आपका आतमामभमान बहुत बिी मा् मं नषट हो िायेगा। िब आप मभिा के मलए िाते है तब आप एक तनजशचत सतय को तनूवपत करते है। लोग आप से पूछंगे की तुम कौन हो और आप नैसधगणक ूप से उततर दंगे। और यह एक सुनदर अ्सर होगा उनको पूणणत् के व््ानं द्ारा समध ृ करने का।

पुरे व्श् मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संघ के ्ी महंत ,महंत ,कोिारी और थानेदार और भ्त इस सश्त समवधकारक व्दया ृ के अभयासरत है। यह मभिा माँगना नहीं है मभिा के मलए िाना कोई साधारण कायण नहीं है यह एक सश्त आधयाजतमक रकरया है जिसमे हम आधयाजतमक आरोगयता ,पव्् भसम ,योग पुजसतकाए और अपनी अनय आधयाजतमक करयाओ गततव्धधयं के व्षय मं मागणदशणन रदान करते है।

सभी लोग सुखी हो, आशी्ाणद ।

्ैददक िी्न शैली के मलए आि कदम

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी दहंद धमण के ू सभी मुखय पहलुओं और ्ैददक परंपरा को THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संघ को उपल्ध करा रहे हं और उनहं दतनया के ु साथ साझा कर रहे हं ।THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संघा अपने सभी आयाम मं ्ैददक परंपरा का पालन करता है।दतनया को सम ु ध ृ और आनंददत करने ्ाली सभी ्ेषि

चीिे उपल्ध हं । तनतय -करया तनतय-योग तनतय-पुिा तनतय-कीतणन तनतय-सतसंग तनतय-होम तनतय-पूणणत् करया तनतय-समाधध

तनतय-पु िा

्ैददक परंपरा मं, गुू पूिा सबसे पुरानी अनुषिान है।

पा्णती, आदद शज्त, पहले मशषय है जिनहंने मश् का असाधारण अनुभ् ककया ,पहले गुु ,जिनका असाधारण आभार मं उनके पैरं पर धगर कर िो भी उनके पास है अपणण कर सकती हं ।

िब हमं अपने गुु से उनका ्ान, अनुभ्, पयार और आशी्ाणद बहुत रापत होता है तो हम आभार के साथ िो कुछ भी हमारे पास है हम ्ो सारी चीिं के ्ल हम गुु के चरणं मं अवपणत करना चाहते हं ।

कोई भी भा्ना िो आपके ृदय मं ममिास पैदा करता है ,्ो पव्् भा्ना

कारण नहीं है,्यं लोगं को गुु के पैर छूते हं ; यह एक भा्नातमक 'भा्ना कने्शन' है।

म हमेशा लोगं को बताता ह ं ुँ कक ,भज्त या मासटर से िुिा् महसुस करना एक बहुत ही पा्न परम बात है। अगर कभी यह आपको ममल गया है तो इसे कभी भी अपने िी्न मं

नहीं खोएं ,ककसी भी चीि से से िुिा् महसुस करना िो की आप की तुलना मं अधधक है , आप अपने शरीर और मन के माधयम से िो भी उतपीिन महसुस करते हं उसे तनषरभा्ी कर देता है ।िुिा् महसुस करना एक अ्त तकनीक है ु । आपको ककसी भी समसया से बाहर तनकलने के मलए ककसी अनय हल या व्धध की िूरत नहीं है।

समपणण है ।िब अधधक से अधधक लोग पव्् भा्ना मं गोता लगाते हं , अधधक िी्न पथ्ी ्ह पर रहने ृ योगय हो िाता है। ऐसा ही एक पव््

भा्ना गुु पूिा है।'्यं गुु पूिा ककया िाता है' के मलए कोई ताककण क

तनतय-कीतणन

कीतणन - भज्त संगीत - कं डमलनी ु िागरण के मलए महत्पूणण आधयाजतमक रथाओं मं से एक है। िब हम आधयाजतमक सतय गाते हं, तब हमारे ्ा्य (हमारी कथनी) कीतणन के उधरण के साथ शुध होता है,कीतणन गीत का अथण हमारे कं डमलनी ऊिाण ु को िगाने के मलए अंतर-व्शलेवषत होता है ।िब कीतणन गायक अपने श्दं मं ,हा्-भा् ए्ं संपूणण वयज्तत् मं पूणणत् ए्ं आनंद रसाररत करते हं तो समपूणण िगह िहां पर कीतणन गाया िाता है अद्ैततक एकाकार ए्ं कुणडमलनी िागरण अनुभ् करता है !इसीमलए कीतणन हमारे राचीन िी्न-शैली तथा रथा का एक महत्पूणण अंग था ।

तनतय-सतसंग

तनतय -सतसंग लोगो का सकारातमक और लयबध कं पन के उ्ेशय से आधयाजतमक एक्ीकरण है ।

तनतय-होम

होम एक शज्तशाली आधयाजतमक अनुषिान हं जिसके द्ारा कक धचककतसा के मलए , ्रदान देने ,राथणना स्ीकार करने और और एक व्शेष दे्ता के साथ समबनध सथावपत करने के मलए ददवय ऊिाण का आह्ान ककया िाता है ।इस ूपांतरण करने ्ाले व््ान के बारे मं और अधधक िानकारी रापत करने के मलए पषि रमांक ३५ देख ृ ं।

तनतय-पूणणत् करया

स्पूणणत् करया - लगातार पूणणत् की तकनीक "रतयेक राब् सोने िाने से पहले अपने आप के साथ बैिो, आईना मं देखो और सारे कषट देने ्ाले यादं को कफर से याद करो जिसे तुम अपने अंतमणन मं रखे हुए हो ,जिसके कारण तुमहे लगता है की िी्न कदिन और असंभ् है -इन सारे अपूणणत् को कफर से जियो कफर कफर उससे अपने आपको मु्त कर दो । दबारा उनको याद करना ु उनसे मु्त होना ही है । "

परमहंस तनतयाननद

१) आईने के सामने आराम से बैि िाओ । २) आईना इतना बिा होना चादहए की आप अपना रततबबमब अचछे से देख सकं । ३) अपने रततबबमब के आँखं मं अपनी आँखं से देणखये । ४) िैसे ही आँखं से आँखं का गहरा सजममलन होगा िो सबसे पहली चीि आप महसूस करंगे ्ो होगा आपकी आँखं मं आँशु ।

५) इसे आने दं ।

६) आईने के सामने बैिं और अपने आप से बातं करं ,िो भी आप अपने आप को बोलना चाहते हं साथ ही साथ अपने आपकी बातं सुने भी । हम सारा ददन दसरो की ु बातं सुनने मं लगा देते हं पर अपनी । यह आपका समय है आपके खुद के साथ मलए है ,अपने आपको सचचाई के साथ सुनं ।

७) अपने साथ समय बबताये सुनं और सुनाय । ं ८) अब अपने पहले की ककसी याद को याद करने की कोमशश करं जिसकी ्िह से आपने अपूणण समझ व्कमसत ककया और अपने पीिा के मूल स्ुप का तनमाणण ककया । ९ )िब आप अपने िी्न मं पहली बार की कुछ जसथततयं मं ्ापस िाओ िब आपने पहली बार संघषण अनुभ् ककया । आम तौर पर यह जसथतत आपके िी्न के तीसरे और पांच्ं साल के बीच हुआ होता है। उस जसथतत को दबारा जिय ु । ं

१०) अगर आँसु या गुससा आये तो आने दं।

११)अपने अतीत के साथ आमने सामने खिे होने पर , ददण गायब हो िाता है, रोध गायब हो िाता है! िब रोध गायब हो िाता है, िब ्ह पयार मं बदल िाता है। कृपया समझं िब ऊिाण रोध के ूप मं वय्त होता है िब रोध ऊिाण से हटा ददया िाता है, तो यह पूरी तरह से पयार मं बदल िाता है।

१२) पूणणत् पूरी तरीके से नहीं होगा यदद आप के ्ल मूल पैटनण पर ही काम करंगे,हर उस घटना को भी पूरा ककया िाना चादहए िो मूल पैटनण की ्िह से उपिी है। कृपया समझं,आपको अपने बचपन की सबसे पहले की समतत म ृ ं िाना है और इस समतत से प ृ ूणणत् करने की िुरत है । और इसके बाद अपनी आि तक के रतयेक पैटनण से पूणणत् करने की िुरत है ।

तनतय-समाधध

"तनतयाननदोहम -म् शास्त आनंद ह ं ुँ", इस अ्सथा मं

डूब िाएँ !

नित्ािंद ्ाम सेवा ्ोजिा और नित्ािंद ल्मी

परमपूजय THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ाम से्ा योिना रारमभ की िो की एक बहुउ्ेशीय ्ामीण सशज्तकरण योिना है जिसका उ्ेशय कणाणटक के तीन सौ से अधधक गां्ो को सामाजिक ए्ं आधथणक व्कास द्ारा समध ए्ं सश्त बनाना है िो की ्ामीण आधथणक ृ पुनतनणमाणण मं एक महत्पूणण भूममका का तन्ाणह करता है। रथम चरण मं THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ाम से्ा योिना का मुखय उ्ेशय ३३ गा्ो मं कपास ए्ं ्ामीण उदयोगो की सथापना होगा िो की ्ामीण आधथणक पुनतनणमाणण मं महत्पूणण भूममका तनभाते है। THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ाम से्ा योिना, THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ल्मी के समान राूप है िो की ्ामीण मदहला उ्ममयो ए्ं गहणणयं के मलए आधथणक सहयोग रदान ृ करती है। यह योिना व्गत पांच ्षो से सफलता पू्णक संचामलत हो रही है और ्तणमान समय मं इसमे सथानीय मदहला स्यं सहायता समूहं के १४०० से अधधक संतुषट सदसय है।

गुु के स्थ अ्ैत की अनुभूवत

िून और िुलाई 2014: 19 ददनं मं 104 से अधधक सथानं पर भंट!

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी ने भारत के कई सथानं पर दशणन ददए, िहाँ उनहंने अपने भ्तं तक पहुँच कर उनहं अद्ैततक अनुभ् रदान ककया |

योग, धयान, आधयाजतमक मागणदशणन कंि तथा मशव्र जिनसे १०० से भी अधधक देशं मं करोिं लोग लाभाजन्त हुए हं।

९००० से अधधक दी्ित आधयाजतमक उपचारक, जिनहंने व्श् भर मं हिारं लोगं का उपचार ककया है।

१००० से अधधक दी्ित आचायण िो हिारं का मागणदशणन करते है योग, धयान, आधयाजतमक व््ान ् िी्न समाधान से।

लाइ् ऑनलाइन रातः तनतय सतसंग THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी द्ारा लाइ् स्ीमम ंग ् व्डडयो कॉन्ंमस ंग के माधयम से, जिसे रततददन हिारं सथानं पर 30 से भी अधधक देशो मं देखा िाता है।

अननदान - हर ददन १०००० लोगं को तनःशुलक भोिन कराया िाता है आ्म, व्दयालय, धचककतसा मशव्र मं और ज़ूरतमंद लोगं को भी।

सापतादहक धचककतसा मशव्र िो रदान करता है परंपरागत और ्ैकजलपक धचककतसा देखभाल रणामलयं द्ारा उपचार - दनत धचककतसा, ने्ं की शलय धचककतसा, कृब्म अंग लगाना इतयादद - इसमं तनःशुलक परामशण, द्ाई ् आगे की िांच अथ्ा धचककतसा सजमममलत है।

व्श् भर मं १२ से भी अधधक ्ैददक मंददर और आ्म िहाँ हिारं राण-रततजषित दैव्क िी्मूततण हं, जिनमे से कुछ व्श् की सबसे ऊं ची मूततणयं मं से भी हं।

व्दयालय तथा कारागारं मं तनःशुलक करया और धयान कायणरम।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ल्मी, एक लाभहीन लघु व्तत-वय्सथा योिना है ्ामीण उदयममयं के मलए THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ्ाम से्ा योिना | THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM व्दयालय िहाँ है ्ैददक मशिा रणाली और आधुतनक व्दया का सजमम्ण ्ामीण िे्ं के व्दयालयं के मलए सहायता - व्दयालय ्स्, पुसतकं, लेखन-साम्ी ए्ं भूममकाूप वय्सथा।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की ्ान व्दयाओं की ३००से अधधक पुसतकं 20 भाषाओं से अधधक मं रकामशत है।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM िी की 2000 से अधधक र्चनं की तन:शुलक उपलज्ध www.YouTube.com/lifeblissfoundation पर िो 160 लाख ृशयं को पार कर चुका है।

२५० ई-पुसतकं ए्ं धयान तकनीकं और समाधान िो ऑनलाइन तन:शुलक उपल्ध है

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM व्श्व्दयालय रदान करता है धयान, आधयाजतमक व््ानं ् िी्न कौशल मं मशिा कायणरम िो सथावपत हो रहा है व्श्भर मं।

रहसयमय योग व््ान पर अ्द उननतत के अन ु ुसंधान िैसे कुणडमलनी िागरण, उततोलन, पाररकटन ए्ं यौधगक कायाकलप।

THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM संरदाय - सैकिं आकांिी व्मभनन धमं और िी्नशैलीयं के सघन आधयाजतमक रमशिण ए्ं संनयास रापत करते है।

आनंद योगम - तन:शुलक एक-्षी तन्ासीय कायणरम 18- 35 आयु के यु्ाओं हेतु, िो वया्सातयक और आधयाजतमक रमशिण रदान करता है उतकृषटता और वयज्तगत व्कास के मलए।

एक गततशील स्यंसे्क बल, सैकिं से अधधक पूणणकामलक तन्ासी स्यंसे्क के सदहत, िो से्ाय रदान करते ं है िैसे की आपदा राहत, सलाहसे्ा, यु्ाओं ् मदहलाओं के सशज्तकरण के पहल। ्

तनतय करया ् समयम - 108 रामाणणक यौधगक समाधान, शारीररक ए्ं मानमसक व्कारं हेतु।

सम् िी्नशैली सहायक - भज्त संगीत, ऊिाणपूणण आभूषण, पव्् कला ् ददवय मूततणकला, और राकृततक मसध औषधधयां इतयादद।

अननदान : सभी के मलए तन: शु लक भोिन

  • दतनया भर के THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM आ्मं और के निं म ु ं रतयेक ददन 10000 से अधधक मुफत भोिन परोसा िाता है|

  • शुध शाकाहारी भोिन एक स्ासथयकारी ्ाता्रण मं रामाणणक साजत्क तरीकं का उपयोग कर पकाया िाता

है|

  • भोिन मं उचच ऊिाण के मलए खाना पकाते समय ्ैददक मं्ो अथ्ा कीतणन का उचचारण ककया िाता है|

  • सकूलं, िेलं और मंददरं मं मुफत भोिन ददया िाता है|

आपदा राहत :उपचार करने के मलए मदद

• सुनामी, भूकं प , बा़ आदद के ूप मं राकृततक आपदाओं के पीडितं को आपातकालीन राहत • कपिा, भोिन, पानी और सबसे महत्पूणण बात, मनो्ै्ातनक समथणन और आघात का मुफत परामशण

म ुफत धचककतसा कंि: स्ासथय के साथ

देखभाल • सभी से्ाओं की पेशकश के मलए पा्िक और मामसक धचककतसा मशव्र

• सापतादहक मोबाइल धचककतसा से्ा साथ ही ्ामीण िे् मं मुफत परामशण और द्ाई से्ा

• १००% मुफत डायमलमसस ज्लतनक , ४७ डायमलमसस मशीन के साथ िहाँ रोज़ २५० मरीिं का उपचार ककया िाता है

• िूरतमंदं के मलए सभी सुव्धाओं के साथ तन: शुलक 100 बबसतरं ्ाले असपताल

वन् ससं ग क् सीि् ्स्रण

"मेरे शद मेरी दीष् िै" -परमिंस वन््नंद

एक ्बुि गुु से मि्न स्ो को सुवनए ! ं वन् ससं ग क् सीि् ्स्रण परमिंस वन््नंद जी ््र् स्िन् टीिी और वन््नंद टीिी पर िर रोज ्स्रण

समय : ््तःक्ल 7 बजे (भ्रतीय समय)

अपयायनम मंददर ् THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM ममशन - अपयायनम मंददर का स्ूचना के नि-

अपयायनम मंददर स्ामीिी THE SUPREME PONTIFF OF HINDUISM BHAGAWAN SRI NITHYANANDA PARAMASHIVAM द्ारा ् ददए गए सतय पर आधाररत आधयाजतमक परामशण देने के मलए दतनया भर से रशन लेता है| साथ ही , सभी ु कायणरमं के बारे मं स्ालं के ि्ाब, घटनाओं के कै लंडर, मंददरं, आ्मं और के निं को संभालता है|