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Bhagavad Gita
SPH Nithyananda Paramashivam
KAILASA's Nithyananda Hindu University
1 Chapter64 SectionsISBN 979-8-88572-019-9
भगवत गीता का प्रारंभ ही इस 'महान क्यों?' के प्रश्न से होता है जो प्रतिबिम्बित करता है उस व्यक्तिगत संकट काल को जिसका हम सब भी जीवन के किसी न किसी बिन्दु पर सामना करते हैं। हम सब भी इसके प्रमुख पात्र अर्जुन के जीवन के एक बेहद संकट की घड़ी की ओर खिंचते हैं जब निमित्त रूप में यह प्रसिद्ध राजकुमार एक खूनी संघर्ष के लिए तैयार होता है और पाता है कि उसके अपने परिवारजन, निकट-संबंधी एवम गुरुजन शत्रु की सेना में उसके विरुद्ध युद्ध के लिए तैयार हैं तब अपने मन के भावों, कर्तव्य बोध की गलत समझ तथा एक जागृत च